लेखक - मुकेश मिश्रा
9990379449
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कहिया होयत हमर बिबाह .....
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बाप बताहे, कका किकयाते,चचा चिचया ते,
सब य अपना मोने बताह ......
हम लागल छि जोगार में जे कहिया
होयत हमर बिबाह ......
उमरक सीमा पर केलक, देहो आब देय य जबाब
आधा केस सेहो पाकल,दात खेलक तम्बाकू आ चाय
बाप पाये,कका कनिये,चचा बजिते,
चाही हमरा पाय अथाह ........
हम लागल छि जोगारमें जे कहिया
होयत हमर बिबाह .....
इसकुल कोलेज सब केलौ,तौयो नही कीछ पलौ
परीते लिखते सब कीछ बुझु हम गमेलौ
बाप पिटते,कका कुथिते,चचा चीकरैते,
जो ने परहै ले नबाब ..........
हम लागल छि ज़ोगार में जे कहिया
होयत हमर बिबाह ......
मेला ठेला सौसे गेलाउ,कतौ नै हम इस्क लरेलउ
कतेक तकै छल हमरा दिश,ककरो दिश नै नजेरघुमेलउ
बाप पिबते,कका लरीते,चचा चीखते ,
करैत छात सौसे हहाकार ...... हम लागल छि ज़ोगार में जे कहिया
होयत हमर बिबाह .....
मदन मामा के हमहू कहलव,अहि लगाबू आब ज़ोगार
गोरकि करिकी केहनो से , अहि करबू हमरा उधार
मामा ड़रीते ,धू धू करीते,हमरा दिश सटीते,
की बजैय छ बताह .......... हम लागल छि ज़ोगार में जे कहिया
होयत हमर बिबाह ..... email-mukesh.mishra@rediffmail.com
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