(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

बुधवार, 28 मार्च 2012

कहू कि फूसि बजय छी?

गप्पे टा हम नीक करय छी, सबटा उनटा काज।
एहि कारण सँ टूटि रहल अछि मैथिल सकल समाज।
कहू कि फूसि बजय छी?

टाका देलहुँ, बेटी देलहुँ, केलहुँ कन्यादान।
ओहि टाका सँ फुटल फटाका खेलहुँ पान मखान।
दाता बनल भिखारी देखियो केहेन बनल अछि रीति,
कोना अयाची के बेटा सब माँगि देखाबथि शान।
कहू कि फूसि बजय छी?

माछ-मांस केर मैथिल प्रेमी मचल जगत मे शोर।
घर मे सम्हरि सम्हरि केँ खेता सानि सानि केँ झोर।
बरियाती मे झोर किनारा खाली माउसक बुट्टी,
मिथिला केर व्यवहार कोनाकय बनल एहेन कमजोर।
कहू कि फूसि बजय छी?

नहि सम्हरब तऽ सच मानू जे भेटत कष्ट अथाह।
जाति-पाति केँ छोड़िकय बेटी करती कतहु विवाह।
तखन सुमन के गोत्र-मूल केर करब कोना पहचान,
बचा सकी तऽ बचाबू मिथिला बनिकय अपन गवाह।
कहू कि फूसि बजय छी?

2 टिप्‍पणियां:

  1. अति सुन्दर बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति...
    सार्थक
    दिनेश पारीक
    मेरी नई रचना
    कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: माँ की वजह से ही है आपका वजूद:
    http://vangaydinesh.blogspot.com/2012/03/blog-post_15.html?spref=bl

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  2. dahej mukt mithila lel bahut upyukt achhi , jai maithil , bahut nik

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