(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 20 अप्रैल 2015

चारि-पांति, अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि


चारि-पांति

चैत मास नवमी रामजी जनम लेल
बधैया बाजल अवध नगरीया
वैशाखक नवमी सीता के जनम भेल
धन्य भेलइ मिथिला नगरीया

चारि-पांति

मि सँ मिठगर मैथिली भाषा
थि सँ थिकाह मैथिल मोर
सँ लागथि प्रियगर मानव
मिथिला में मौध चुवय ठोर

चारि-पांति

माँगल वरदान रघुवर सँ जानकी
वैकुंठ पावथि मैथिल मृत्युपरांत
राखल मान विहुँसि रघुकुल नायक
तुलसीचौड़ा तेजथि अपन प्राण

चारि-पांति

चिक्कन चकेट्ठा धिम्मर पिच्छर
कोढ़िया मचाने बैसल रहैयै
गोल-गोल गुलछर्रा गलथोथर
गजधिम्मर खिल्ली बस चिबबैयै

चारि-पांति

बात के छाँटथि पौलीस मारथि
खाली टिपगर टिपथि बात
नीक निकुत सभ हिनके चाही
बस बबुआनी छन्हि काज

चारि-पांति

वैदेही सन धीया एहि जगमें
परतर करत के आन
राखल मर्यादा नैहर-सासुर
पुरुषोत्तम बनलाह राम

चारि-पांति

गृहस्थी छोड़ि ठाम गमाओल
जुलूम केलनि बड्ड भारी
शहर पहुँचि पहिचान गमाओल
एहिसँ गामक नीक गोरथारी

चारि-पांति

अजब खेल संग गजब तमाशा
नगर गाम घर पसरल
कर्ज खेबाक लेल इसरी-मिसरी
सप्पत खाई लै रामेश्वर

जूरि-शीतल

चइत मास विक्रम संवत एलइ
पर्यावरण सेहो स्नेह सिक्त भेलइ
आई मैथिलीक नववर्ष मनेलइ
जूरि-शीतल में सभ जुरेलइ

चास वास देव पितर जुरेलइ
बउवा बुच्ची संग माय जुरेलइ
बाबा मैयाँ बाबू कक्का जुरेलइ
गाछ बिरीछ बाट जुरेलइ

काँच बाँसक फुचुक्का बनलइ
थाल कोदो सँ हुरदुंग केलकइ
हुर्रा-हुर्री के कुसधुम मचलइ
आँगन तुलसी चौड़ा डाबा टंगलइ

टटका आओर बसिया पाबैन भेलइ
बड़ी भात दही दैलपुरी सब खेलकइ
सतुवाइन फेर सँ लवान करेलकइ
बगरा कौवा मेना खन्जनि खेलकइ

मिथिला मैथिली केर मान जुरेलइ
बाबाक दलान खरिहान जुरेलइ
मैथिल सभक अरमान जुरेलइ
नगर गाम घर सभठाम जुरेलइ 

जय मिथिला जयति मैथिली
अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि




बुधवार, 8 अप्रैल 2015

मिथिला धाम, अमरनाथ मिश्र (भटसिमरि)

मिथिला धाम

सुन्दर मिथिला धाम छइ
मैथिली के मुस्कान छइ ।  

भोरे साँझे कोयली कुहकय  
पपीहरा गीत सुनाबैत छइ 

सुरूज पराते तिमिर भगावथि  
लालहि लाल विहान छइ ॥  

ठाँव महादेव घंटीक टन टन  
पौतीमें सालिग्राम छइ  

तुलसीदल सँ तिरपित होइ छइ
महिमा हिनक महान छइ ॥ 

आनन चानन कुसुमक कानन 
गेना आओर गुलाब छइ 

फुल लोढ़य लेल देखल व्याकुल 
मिथिला के सन्तान छइ ॥ 

कोशी कमला चरण पखारथि  
घरहि घर भगवान छइ 

मैथिली के सुन्दर बगिया में 
सुन्दर मिथिला धाम छइ ॥

बाग बगीचा लीच्ची जामुन  
गमगम आम लताम छइ

ठकुआ पुरी बगिया भुसबा  
घरहि में पकवान छइ ॥  

पोखरि झाँखरि बारी झारी 
माछ मखान आओर पान छइ 

लत्ती लतरल चतरल देखल 
कोनचर पर तिलकोर छइ ॥  

अमरनाथ मिश्र (भटसिमरि) 
मधुबनी मिथिला 


जय मिथिला जयति मैथिली जय श्री हरि:

सोमवार, 6 अप्रैल 2015

चाइर पांति - अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि

चाइर पांति - अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि
चाइर पांति
साते भबतू सुपरीता  

देवी शीखर बासनी  |

उगरेन तपसा लबधो  
जया पशुपति पती पती ||


चाइर पांति
नान्हियेटा सँ सुइन रहल छी
मिसरीक भाषा थिकिह मैथिली | 

राम नाम लड्डू गोपाल नाम घी

हरि नाम मिसरी घोइर घोइर पी ||

चाइर पांति

शीलबट्टा पर पीसल भांग 

दुपहरीये में देखब चान |
भांग पिबि कैलाशे देखब
बैसल छथि शंकर भगवान ||
 श्री गौरीशंकराभ्यान नम:

हर हर महादेव
चाइर पांति
बियाह में कनिञा चन्द्रमूखी सन

सूर्यमुखी तकर बाद |

किछुए दिन बाद देखब भयंकर

ज्वालामुखी के अवतार ||

चाइर पांति

नश्वर सुन्नर कोमल काया

जूइन करू एकर गुमान |
उरतै हंस एसगर एकदिन
विधनाक लिखल विधान ||

चाइर पांति

बइस सिंहासन बाबू साहेब

बनलाह लाट गवर्नर |
करनी धरनी बंगौर सनक
भारी छन्हि फुफकार  ||

चाइर पांति

बर बर देखल अजोध

खाली शेखी बघारथि |
ढ़कने ढ़कने सरबे सरबे
जुवैले गप्पो बाँटथि  ||

चाइर पांति

हमरा मिथिला के अभगली दरिद्री

उरहैरियो तूँ जो गइपराइयो तूँ जो |
जागि रहलौ आब सभ मिथिलावासी
खिसैकिये तूँ जो गइबिलाइयो तू जो  ||

चाइर पांति

लटकल फेर किसान की 

आब ने कोनो बाट सुझयै |
बैस सिंहासन मुँहगर देखु
खाली गप्प चिबाबयै ||

चाइर पांति

आषा आओर विश्वास थिक

एहि जीवनक आस |
बारह मास फूलय फलय
छगुन्त भेल संसार  ||

चाइर पांति

टिटही जनता टिटिया रहल

कयो नै सुधि लेनिहार |
तूर तेल द् परल छथि कानमे
जनता छोरल मझधार ||

चाइर पांति
सेहन्ता सँ चरक चिकनी माइट अनलकइ 
आँकड़ पाथर चुइन क् लोइया सनलकइ  |
घिरनी जेकाँ नचैत चाक पर थोइप देलकइ 
सुन्दर मोम सन मुरूतक आकृति बनेलकइ ||

चाइर पांति 
आउ उम्मीदक दिया जराबी  
सुन्दर एहेन जहान बनाबी  |
सुख शांतिक भरोस करी हम  
शांति-विजय के घोष करी हम ||

चाइर पांति 
विक्रम संवत पक्षक राजा 
कृष्ण पक्ष आ शुक्ल पक्ष |
आदि काल सँ साक्ष्य थिक 
राइत दिनक बांटल अन्तर ||

संकलन


अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि