(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

शनिवार, 17 अगस्त 2013

भारतमें मिथिला राज्यक आन्दोलन तेज


भारतमें मिथिला राज्यक आन्दोलन तेज



स्पष्ट अछि जे भारतीय गणराज्यमें मिथिलाकेँ राज्यक दर्जा देबाक माँग स्वतंत्रता वर्ष यानि १९४७ ई. सँ पूर्वहिसँ कैल जा रहल अछि। पूर्वमें बौद्धिक आन्दोलन शान्तिपूर्ण प्रकृतिक आ दस्तावेजीरूप में बेसी भेल अछि। आन्दोलनमें उग्रताक नाम पर मिथिलाकेँ दू भागमें बँटल रहबाक नैतिक विरोध करैत कोनो समय नेपाल-भारत सीमा पाया तोडूबाक आन्दोलन कैल गेल, तहिना प्रधानमंत्री नेहरुकेँ घेरावके उद्देश्यसँ दर्जनों कार्यकर्ता कलकत्ता मार्च करबाक क्रममें आसनसोलमें गिरफ्तार सेहो कैल गेल। तथापि अलग राज्य के मुद्दापर उग्र आ आमजन समर्थित आन्दोलनक कोनो पूर्व प्रकरण नहि भेटैत अछि।

भारतमें राज्य निर्माणक अवधारणा:
अंग्रेजी उपनिवेशी भारतमें सक्रिय एकमात्र राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस १९२० में निर्णय केने छल जे राज्यक संरचना भाषायी आधारपर होयत। तर्क छलैक - सहज प्रशासन आ जाति तथा धर्मके आधार पर बढि रहल पहिचानक विवादमें न्युनता लेल भाषिक पहिचान उचित होयत। यैह राजनीतिक लक्ष्यके संग राजनीतिक दल आगू बढल छल। एहि दलक प्रान्तीय समितिक गठन सेहो १९२० सँ यैह आधार पर कैल गेल। १९२७ में काँग्रेस पुन: अपन प्रतिबद्धताकेँ घोषणा भाषायी आधारपर राज्यक गठन करबाक बात कतेको बेर दोहरेलक। यैह पुनरावृत्ति १९४५-४६ के चुनावी घोषणा-पत्रमें सेहो देल गेल। लेकिन स्वतंत्रताक तुरन्त बाद काँग्रेस दुविधामें पडि गेल जे मात्र भाषाक आधारपर राज्यक गठन देशमें राष्ट्रीय एकताक हितमें नहि होयत। १७ जुन, १९४८ केँ संविधान सभाध्यक्ष डा. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा गठित भाषायी प्रान्तीय आयोग अर्थात् डार आयोग (Linguistic Provinces Commission - aka - Dar Commission) द्वारा देल रिपोर्ट अनुरूप "the formation of provinces on exclusively or even mainly linguistic considerations is not in the larger interests of the Indian nation". कहि भाषायी आधार पर राज्यक गठनकेँ भारत राष्ट्रकेँ हितमें नहि कहि नकारल गेल। भौगोलिक अखण्डता, आर्थिक आत्म-निर्भरता आ प्रशासन संचालनक सहजताके आधार पर राज्यक गठन लेल मद्रास, बम्बइ, केन्द्रीय प्रान्त आ बरार केँ मुख्यरूपमें बनाओल जयबाक सिफारिश कैल गेल। एहि सिफारिश पर अध्ययन लेल 'जेवीपी समिति' (जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभभाई पटेल व तत्कालीन काँग्रेस अध्यक्ष पट्टाभी सितारमय्या के संयुक्त समिति) जयपुरक काँग्रेस अधिवेशन द्वारा बनल। १ अप्रील, १९४९ केँ एहि समिति द्वारा ओहि परिस्थितिमें नव प्रान्तक गठन लेल अनुकूलता नहि रहबाक निर्णय देल गेल, लकिन संगहि जनभावना यदि एहि तरहक माँग राखत तऽ प्रजातंत्र के रक्षा हेतु किछु निश्चित सीमामें रहैत भारत लेल समग्र हितकेँ ध्यान में रखैत नव राज्य गठन करबाक बात मानय जायत सेहो कहल गेल।

भीम राव अम्बेदकर एक ज्ञापनपत्र १४ अक्टुबर, १९४८ केँ डार आयोगकेँ देलाह जाहिमें भाषाक आधारपर राज्यक गठन करबाक आ विशेषरूपसँ मराठी-बहुल महराष्ट्र राज्य बम्बइ राजधानी सहित बनेबाक माँग रखलनि। राष्ट्रीय एकता लेल हुनकर सुझाव छलन्हि जे केन्द्र व राज्य दुनू के राजकाजक भाषा एकहि हेबाक चाही। तहिना के इम मुन्शी, गुजराती नेता अम्बेदकरक प्रस्तावकेँ विरोध केलैन - जे एकहि राज्यमें विभिन्न भाषा संग कोनो एकहि भाषाभाषीक राजनीतिक लक्ष्यके पोषणसँ विभेदकारी होयत जेकर समाधान संभव नहि होयत। पुन: १९५२ में तेलगु बाहुल्य क्षेत्रकेँ मद्राससँ पृथक राज्य बनेबाक माँग संग आमरण अनशन केनिहार पोट्टि श्रीरामुलु जिनक मृत्यु १६ दिसम्बर, १९५२ केँ भऽ गेल, परिणामस्वरूप १९५३ में आँध्रा राज्यक स्थापना १९५३ में भेल। आ, एकर प्रभाव-प्रतिक्रिया समस्त राष्ट्रपर भाषायी आधारपर राज्य बनेबाक माँग तेज भऽ गेल। अन्तत: सर्वोच्च अदालतकेर पूर्व जज फजल अली केर अध्यक्षतामें राज्य पुनर्गठन आयोग बनायल गेल। ई आयोग ३० सेप्टेम्बर १९५५ में अपन रिपोर्ट देलक जाहि अनुरूपे “Factors Bearing on Reorganization” अन्तर्गत स्पष्ट कहल गेल जे “it is neither possible nor desirable to reorganise States on the basis of the single test of either language or culture, but that a balanced approach to the whole problem is necessary in the interest of our national unity.“ राष्ट्रीय एकता लेल कोनो एकल भाषा या संस्कृतिक आधारपर राज्यक गठन नहि तऽ संभव अछि नहिये वाँछणीय। यैह आयोगक रिपोर्टके आधार मानि The States Reorganisation Act of 1956 बनाओल गेल, हलाँकि एहिमें आयोगक किछुए सुझाव समेटल जा सकल।

आयोगक अन्य सुझावमें किछु महत्त्वपूर्ण पाँति जे एहि ठाम उल्लेख योग्य बुझैछ:

“We do not regard the linguistic principle as the sole criterion for territorial readjustments, particularly in the areas where the majority commanded by a language group is only marginal”. यैह ओ पाँति मानल जा सकैत अछि जेकर बीज अमैथिल विद्वान् राजनीतिपूर्वक मैथिली विरुद्ध पहिने रोपि चुकल छलाह जेकर खुलाशा डा. अमरनाथ झा द्वारा कैल गेल अछि। मैथिलीकेँ षड्यन्त्रपूर्वक विद्वान् केर भाषा मनबाक, खने हिन्दीक उपभाषा मनबाक, खने मैथिल विद्वान् विद्यापति आ मिथिलाक्षरकेँ बंगालीक रूप मनबाक आदि कतेको षड्यन्त्र कैल गेल।

“We are generally in agreement with this view, but in our opinion, the mere fact that a certain language group has a substantial majority in a certain area should not be the sole deciding factor”. एहि पाँति सँ फेर भारतीयताक विरुद्ध मानू पूर्वाग्रही सोच झलैक रहल अछि, हर क्षेत्रमें एक विशिष्ट भाषा आ संस्कृति रहितो शुरुए सऽ एक परिकल्पना जे मेजरिटी आ माइनारिटी के अलग-अलग भाषारूपी राजनीतिक विभेद जानि-बुझि थोपल गेल बुझैछ।

“It should be mentioned that, owing to my long connection with Bihar, I refrained from taking any part in investigating and deciding the territorial disputes between Bihar and West Bengal, and Bihar and Orissa – S.R.C Chairman, Hon. S. Fazl Ali. एहि पाँति सँ बिहार-बंगाल, बिहार-उडीसा सीमापर टिप्पणी अछि जे आयोग अध्यक्ष अपन अनुभवक आधारकेँ सर्वोपरि मानि अनुसंधानसँ बचबाक बात केने छथि।

मिथिला कतहु सँ एहि चर्चामें नहि पडल अछि। एकर मूल कारण आर जे किछु हो, लेकिन प्रोफेसर अलख निरंजन सिंह आ प्रोफेसर प्रभाकर सिंह द्वारा प्रस्तुत शोध पत्र: Finding Mithila Between India's Centre And Periphery में उद्धृत एक निष्कर्स जे निम्न अछि एहि सँ पूर्ण सहमति आम राय बनैछ:

Sadly Dr. Lakshamn Jha and other leaders of this movement failed to connect the cause of a separate Mithila State with its entire population. Clearly, the language based call for a separate Mithila state did not stand the test of the caste-based pluralism that the region enjoys. Very clearly the Dalit and other communities that have been victim of the age old Hindu orthodoxy and ossified Brahminism distanced themselves from such Maithil identification. But, as discussed in what follows, the failure of the movement did harm the region in some ways. The article connects
Bihar’s present day flood-led destruction and the subsequent migration of people to the industrialised States of the country to the failure of Maithil movement. Thus, instead of seeking to ignite the movement on the urges of Sanskritic-Brahminical elitism, the Maithil leaders should have generated a socialist-linguist movement as the grass-root
level in favour of legitimacy.

उपरोक्त निष्कर्समें स्पष्ट कैल गेल अछि आन्दोलनकेँ आमजनतक पहुँचयसँ रोकल गेल, आन्तरिक वा बाह्य जाहि कारणसँ किऐक नहि हो... मार्गदर्शन सेहो समुचित अछि जे यथार्थक धरातलसँ जोडि जाहि जातीय विविधताक संस्कृति वास्तवमें मिथिला रहल तेकर असलियतकेँ आत्मसात् करैत राज्यक माँग सँ सर्वसाधारणकेँ जोडब आवश्यक अछि। मिथिलामें एखन धरि सामाजिक संगठन, बुद्धिजीवी संगठन या कोनो संघर्ष समिति यथार्थक धरातल सँ एहि मुद्दाकेँ मिथिला क्षेत्रक तथाकथित सीमा धरि नहि जोडि सकल अछि। नहिये एहि दिशामें कोनो राजनीतिक दल द्वारा कहियो कोनो प्रयास भेल - नहिये कोनो एहेन सांस्कृतिक क्षेत्रीय एकता लोक-जुडावकेर द्योतक लोक संस्कृति, पर्व वा परंपरा द्वारा मिथिलाक सांस्कृतिक अखण्डताकेँ कायम राखल जा सकल। सकारात्मक पहल सेहो कोनो तेहेन नहि भऽ सकल जाहि के कारण गंगा उत्तर वा दक्खिन कोनो तरहक आपसी जुडाव के विशालता बनैत।

वर्तमान सुगबुगाहट आ मिथिला राज्यक माँग लेकिन फेर तीव्र भेल जा रहल अछि। एक बेर पूर्वहिके भाँति आँध्र समान तेलंगानाक गठनके बात मिथिला सहित अनेको छोट राज्यक माँगकेँ तीव्रता प्रदान केलक अछि आ फेर दोसर बेर राज्य पुनर्गठन आयोग के स्थापनाक माँग करैत संबोधन करबाक माँग राजनीतिक परिवेशमें उठय लागल अछि। एम्हर पुरान आ नव संस्था सभ आपसी एकता करैतो राज्यक संघर्षकेँ जन-सरोकारक विषय बनाबय लेल व्यग्र देखाइत अछि। सभ सऽ मुख्य दू बात जे परिवर्तन देखय में आयल अछि - मिथिला क्षेत्र के विशालता पर कैल जा रहल अभियानकेँ आम लोक सकारात्मक रूपमें ग्रहण करय लागल अछि आ राज्य केर आवश्यकता उपेक्षा विरुद्ध स्वराज्यक स्थापना थीक सेहो बुझय लागल अछि। संगहि आब संघर्षक क्षेत्रमें नहि केवल विद्वत् बुढ-पुरान लोक टा छथि, वरन् युवा-शक्तिमें अपन संवैधानिक अधिकार प्रति जागृति सेहो प्रसार होवय लागल अछि। लिपि, भाषा, साहित्य, संस्कृति सभ किछु विलोपान्मुख होइत देखि आब राज्यक चिन्ता आम बनब स्वाभाविके छैक। तहिना जाति-पातिमें तोडब आ वोट-बैंक राजनीति टा करब नहि कि असलियतके विकास आनब, एहि सभ सँ पीडा आमजनकेँ होयब सेहो स्पष्ट अछि। स्वराज्य लेल जनयुद्ध तखनहि होइछ जखन ई देखार भऽ जाइछ जे वर्तमान प्रशासन-व्यवस्थापन कथमपि उपेक्षा दूर नहि करत, उलटा विभिन्न तरहक राजनीतिक खेलसँ क्षेत्रीय विशिष्टताके नाश करत। मिथिला राज्यक औचित्य आब जन-सरोकारके रूपमें परिणत भेल जा रहल अछि।
Pravin Narayan Choudhary

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

मिथिला राज्य किऐक?

मिथिला राज्य किऐक?

Pravin Narayan Choudhary


* संवैधानिक अधिकार सम्पन्नता लेल 
* संस्कृति आ सभ्यताक संरक्षण लेल
* विशिष्ट पहिचान 'मैथिल' केर संरक्षण लेल 
* पलायन आ प्रवासक खतरा सँ मिथिलाक रक्षा लेल
* आर्थिक पिछडापण आ उपेक्षा विरुद्ध स्वराज्यसम्पन्न विकास लेल
* स्वरोजगार संयंत्र - उन्नत कृषि - औद्योगिक विकास लेल

* बाढिक स्थायी निदान लेल
* शिक्षाक खसैत स्तर में सुधार लेल
* मुफ्त शिक्षा आ शत-प्रतिशत साक्षरताक लेल
* गरीबी उन्मुलन - हर व्यक्ति लेल रोजी, रोटी आ कपडा लेल
* जातिवादिताक आइग सँ जरि रहल समाजमें सौहार्द्रता लेल
* ऐतिहासिक संपन्नताकेर द्योतक धरोहरकेर संरक्षण लेल

* पर्यटन केन्द्रकेर स्थापना, विकास व संरक्षण लेल
* यात्रा संचार के लचरल पूर्वाधारमें ललित विकास लेल
* जल-स्रोत केर समुचित दोहन लेल
* मिथिला विशेष कृषि उत्पाद केर व्यवसायीकरण लेल
* जल-विद्युत परियोजना - जल संचार परियोजना लेल
* मिथिला विशेष शिक्षा पद्धति (तंत्र ओ कर्मकाण्ड सहित अन्य विधाक) अध्ययन केन्द्र लेल

* पौराणिक मिथिलादेश समान आर्थिक संपन्नता लेल
* पौराणिक न्याय प्रणाली समान उन्नत सामाजिक न्याय व्यवस्था लेल
* जन-प्रतिनिधि द्वारा वचन आ कर्म में ऐक्यता लेल
* भ्रष्ट आ सुस्त-निकम्मा प्रशासन तथा जनविरोधी शोषणके दमन लेल
* लचरल स्वास्थ्य रक्षा पूर्वाधार में नितान्त सुधार लेल
* मुफ्त बिजली, पेयजल, शौच, गंदगी बहाव व्यवस्थापन लेल

स्वराज्य सदैव आमजन हितकारी होइछ। मिथिलाक गरिमा अपन स्वतंत्र अस्तित्व १४म शताब्दीक पूर्वार्द्ध धरि कायम रखलक। बादमें विदेशी शासककेर चंगूलमें फँसैत अपन गरिमासँ क्रमश: दूर भेल। एकर समुचित प्रतिकार लेल भारतीय गणतंत्रक विशालकाय शरीरमें आबो यदि राज्यरूपमें संवैधानिक मान्यता नहि पायत तऽ मिथिलाक सांस्कृतिक मृत्यु ओहिना तय अछि जेना एकर अपन लिपि, भाषा ओ समृद्ध लोक-परंपरा-संस्कृति आदि लोपान्मुख बनि गेल। बिना राजनीतिक संरक्षण आ समुचित प्रतिनिधित्वक प्रत्यक्ष प्रमाण ६५ वर्षक घोर उपेक्षा सोझाँमें अछि। अत: राष्ट्रीयता आ राष्ट्रवादिताक सशक्तीकरण संग-संग क्षेत्रीय संपन्नता आ सभ्यताक संरक्षण लेल मिथिला राज्य बनेनाय परमावश्यक अछि। 

मंगलवार, 30 जुलाई 2013

राजधानी में अक्टूबर में होगा मिथिला महोत्सव


 राजधानी में अक्टूबर में होगा मिथिला महोत्सव
  • नई दिल्ली। अखिल भारतीय मिथिला संघ की ओर से राजधानी दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में आगामी अक्टूबर माह में मिथिला महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। अ. भा. मि. संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की रविवार को संपन्न बैठक में इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई। प्रस्ताव के अनुसार अक्टूबर माह में राजधानी के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग दिनों में कार्यक्रम आयोजित होंगे और फिर वृहत पैमाने पर समापन कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसमें सभी क्षेत्रों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

    मिथिला महोत्सव के दौरान आयोजन स्थलों पर मिथिलांचल की सांस्कृतिक-बौद्धिक और लोकजीवन की झांकी प्रस्तुत की जाएगी। इसमें मिथलांचल की प्रसिद्ध विभूतियों के जीवन और कर्म के अलावा लोक संस्कृति व लोकाचार की अनुपम प्रस्तुति रहेगी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जाएंगे। मिथिलांचल की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग और क्षेत्र की विशिष्ट खान पान शैली की झलक भी इस दौरान देखने को मिलेगी।
    बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने मैथिली भाषा के लिए दिल्ली में अलग मैथिली अकादमी के गठन की मांग भी दोहरायी। प्रतिनिधियों ने वर्तमान मैथिली-भोजपुरी अकादमी के उपाध्यक्ष का पद किसी मैथिली विद्वान को नहीं दिए जाने पर रोष प्रकट किया। अ. भा. मि. संघ के अध्यक्ष श्री विजय चंद्र झा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने संघ के शिष्टमंडल से हुई पिछली भेंट के दौरान आश्वासन दिया था कि अकादमी के नए उपाध्यक्ष का पद मैथिली भाषा के किसी विद्वान को दिया जाएगा लेकिन उन्होंने वादा पूरा नहीं किया है।
    बैठक में हाल में संपन्न मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह की समीक्षा भी की गई और संस्था के आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। वक्ताओं ने राजधानी में मिथिला भवन के निर्माण की दिशा मेें प्रयास तेज करने की जरूरत पर भी जोर दिया। साथ ही प्रतिनिधियों ने विभिन्न राजनीतिक दलों से मांग की कि आगामी विधानसभा चुनाव में दिल्ली में निवास कर रहे बिहार के लोगों को उनकी जनसंख्या के अनुसार उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।

मंगलवार, 9 जुलाई 2013

अक्सर पूछल जायवाला प्रश्न आ उत्तर

  • अक्सर पूछल जायवाला प्रश्न आ उत्तर


    प्रिय द.मु.मि.के आगन्तुक! -

    हम सभ अनुभव कयलहुँ अछि जे दहेज मुक्त मिथिला अपन स्थापना मार्च ३, २०११ सँ एखन धरिक अत्यन्त कम अवधिमें एक अन्तर्राष्ट्रीय समूह बनि गेल अछि; शनैः शनैः समयक माँग अनुरूप बहुत रास सुधार सेहो लाओल गेल अछि जाहिसँ सहभागीजनकेँ सुविधा हो। पहिले ई पूर्णतः मैथिल हेतु मात्र समर्पित छल, कालान्तरमें एतय अन्यके सहभागिता देखैत हम सभ हिन्दी आ अन्य भाषाके सेहो मिथिलाक भाषा मैथिलीके अतिरिक्त मान्यता देलहुँ।

    आब देखयमें आबि रहल अछि जे आगन्तुक एहि समूहके बारे आ एकर प्रतिबद्धता के बारे जानकारी रखबाक लेल बेसी रुचि लऽ रहल छथि। अतः आजुक आवश्यकता एक ‘अक्सर पूछऽ जायवाला प्रश्न आ उत्तर’ के अछि जाहिसँ सभक जिज्ञासा के पूर्ण समाधान हो, एतय तक जे सदस्यगण पहिले सऽ सहभागी बनल छथि हुनकहु जानकारी के अभाव देखल जाइछ, अतः ई कदम हुनकहु लेल हितकारी बनत।

    एखन एकरा अहिना छोड़ल जा रहल अछि बिना कोनो प्रश्नक - अपने अपन तरहें प्रश्न निर्माण कय सकी। या, यस्वतः संज्ञान सऽ सामान्यतया पूछल जायवाला प्रश्न हम सभ स्वयं रखैत अपने लोकनिक जानकारी लेल सभ बात राखब।

    हरिः हरः!

    प्र. १. दहेज मुक्त मिथिला के परिचय संछिप्तमें?

    उ. एक जागृति अभियान! युवा के जागरण हेतु दहेज प्रथा के बढैत प्रकोप पर चर्चा के प्रोत्साहन! दहेज नहि लेब, नहि देब... धिया-पुता में सेहो नहि लेब-देब आ ने एहेन कोनो विवाह में सहभागी बनब जतय लेन-देन भेल हो।

    प्र. २. दहेज के परिभाषा?

    उ. सब किछु पसिन पड़ल, विवाह लेल तैयार छी... मुदा स्वेच्छाचार के विरुद्ध एक-दोसर पर माँग थोपैत छी। माँग कैल कोनो वस्तुके दहेज कहल जैछ। विवाह के पूर्व-शर्तमें एहेन माँग के मात्र दहेज कहल जाइछ जे सामान्य आवश्यक माँग - जेना नीक घर-वर, नीक बोल-वचन, नीक पढल-लिखल, नीक खानदान, सुन्दर आदर्श... ई सभ माँग मानवता के पोषक माँग थीक, एकरा दहेज नहि कहल जा सकैत छैक। ई सभ भावना के माँग भेल जे हर प्राणीमें नीक प्रति आकर्षण रखैछ। वस्तुतः माँग ओ भेल जे हमर बेटी लेल हमरा चान चाही, हमरा २ गो तारा आ वृहस्पति समान गन्धर्व-राजकुमार चाही... ओम्हर जे हमरा अलखचान स्वर्गक परी पुतोहु चाही, ग्रेजुएट आ विदुषी विद्योतमा चाही.. से सभ चाही आ चाह के युद्ध में अन्त के माँग जे मुद्रा एतेक चाही... बरियाती के स्वागत एना चाही... विवाह शहरे में हो... होटल में बरियाती के ठहराव हो... आ अनेको तरहक माँग जे वास्तवमें सामनेवाला के स्वेच्छा सऽ आ क्षमता सऽ बहुत दूर के वा कर्जा करय लेल बाध्यकर हो। एहेन माँग के हम सभ दहेज मानी। अर्थात माँगरूपी द्रव्य वा वस्तु वा थोपुआ भावना के हम सभ दहेज मानी। ओ दहेज नहि भेल जे दुनू पक्ष मनमर्जी सँ अपन सन्तानके विवाह उपलक्ष्य लेन-देन करय लेल तैयार छथि, करैत छथि वा करबाक इच्छा रखैत छथि।

    प्र.३ दहेजक विरोध किया? 
    उ. दहेजक विरोध के मूल कारण जे आइ के विकसित युग में हमर समाज में अखनो बेटा आ बेटी में असमानता मानल जा रहल अछि। बेटा अगर शिक्षित आ रोजगार सँ जुरल अछि तऽ पुतोहु चाही गुणी, शिक्षित, खानदानी आ तेकर संग दहेज़ के मोट रकम आ साज-समान आधुनिक युग मुताबिक। भले बेटा डॉ. अईछ आ पुतहु सेहो डॉ. तैयो बेटा बाला लेबे करता। एकटा गरीब बाप के बेटी जे सर्वगुण संपन्न अछि, मुदा पिता के पास पाई नहि छैन तांइ ओकरा मजबूरन बेमेल वियाह के लेल बाध्य होबय परैत छैक। लोक दहेज़ के प्रतिष्ठा सऽ जोरने जा रहल छैथ। फलाँ के बेटा के एतेक देलकैक तऽ हमर बेटा कि ओकरा सऽ कम अछि? ई प्रश्न दिन ब दिन एहि दहेज़ रूपी दानव के काया बढा रहल अछि। साधारण लोक आजुक एहि आर्थिक संकट के समय में अपन निर्वहन करय में असमर्थ भऽ रहल अछि, तइ पर ई दहेजक चिंता बहुतो के जीवन के सुख-चैन के बरबाद केने अछि। आब समय आइब गेल जे समाज के सब वर्ग एहि विकराल समस्या पर चिंतन करी.   

    प्र.४ दहेज अभिशाप कोना?

    उ. दहेज के शुद्ध स्वरूप तऽ परंपरा सँ केवल आशीर्वाद आ स्वेच्छाके प्रतीक रहल, मुदा कालान्तर में लोभ, लालच आ सौदागरी के कारण आब ई माँगरूप में परिणत भऽ गेल अछि। एकर दूरगामी प्रभाव एतेक खतरनाक जे लोक बेटी पैदा तक करय में डेराइत छथि, आधुनिक विज्ञानक विध्वंसक गति सँ कोइखमें बेटीके भ्रूण केर हत्या होवय लागल अछि। एकर दोसर दुष्प्रभाव ई जे लोक सस्ता-सुभिस्ता निबटय के चक्करमें बेटीके समुचित पढाइ सँ सेहो वंचित रखैत छथि। बेटी जातिकेँ समाजिक दुत्कार के कारण मनोबल गिरल जा रहल छैक आ लिंगभेदके सभ दुष्प्रभाव सऽ समाज पिछड़ल जा रहल अछि। समाजिक सौहार्द्र आ समग्र विकास के जगह विध्वंसक विचारधारा आ अनाचार-कदाचार बढल जा रहल अछि। कतेको बेटी उपेक्षित रहलाके कारण आत्महत्या सनक कलंकी कदम तक उठा लैछ। कतेको गरीबके बेटी अपन देह के बाजार में निलाम तक करय लगैछ। हर तरहें दहेज के चलते विकास ठमैक गेल अछि आ नित्य हिंसा-अत्याचार के चलते समाजक एक सशक्त अंग नारी अवहेलना के शिकार बनि रहल छथि। एकर बुराई तऽ हम किछु मात्र गना सकल होयब, एकर बर्बरता के सीमा नहि छैक जेना बुझा रहल अछि।

    प्र.५ दहेज मुक्त मिथिला कि दहेज मुक्त विवाह लेल आवश्यक कार्य करैत छैक?

    नहि! विवाह नितान्त व्यक्तिगत विचार आ रुचिके बात थीक। एहिमें भला कोनो संस्था कोना के प्रयस करतैक! बस, ई एक मुहिम थीक जे दहेज मुक्त विवाह लेल सभ सँ अपील करत। दहेज मुक्त विवाह करनिहार के सम्मान देत। दहेज के बुराई सभ के लोकक समक्ष राखत। आजुक नव पीढी के संग चर्चा करत जे आखिर कोनो परंपरा के रूप यदि बिगैड़ जाइत छैक तखन बोझ कतेक दिन तऽ उठायल जाय! दहेज के स्वच्छ परंपरा आब मरल लाश जेकाँ वातावरण प्रदूषित केने जा रहल छैक। एहि सँ महामारी पसैर रहल छैक। एहि लाश के संस्कार करब जरुरी छैक नहि कि एकरा लऽ के राजनीति वा समाजिक सम्मानके प्रतीक ठाड़्ह करब! एहि लेल आजुक पीढी जागैथ आ अपन बड़-बुजुर्गके बुझाबैथ। बस यैह सभ तरहक जागृति पसारबाक अभियानके नाम थीक दहेज मुक्त मिथिला। जी! यदि युवा एकत्र होइत छथि तऽ स्वयंसेवाके तर्ज पर किछु कार्य जरुर करैथ। जेना महत्त्वपूर्ण परंपरा के संरक्षण! एहि में वर्तमान समय सौराठ सभा के शुद्ध स्वरूप के संरक्षण लेल प्रयास करैत छैक। देश-विदेश पसरल समस्त मैथिल आइ इहो समस्या सऽ जूझि रहल छथि, अत: एहि लेल एवं मिथिलाक सम-सामयिक समस्या पर सामूहिक चर्चा लेल सेहो एक सांस्कृतिक पर्यटन केन्द्रके रूपमें लोकवर्गकें जमा होयब जरुरी।

    प्र.  हमर बेटी/ बहिन के विवाह मे दहेज देवय परल ताइ हमहूँ दहेज लेब। ई कतेक उचित?

    उ. किछू गोटे के कहब छैन जे हमार बहिन/ बेटी के विवाह मे दहेज देवय परल ताइ दहेज लेब। आब काहू जे जदी आई हमर घर मे चोरी भ जाई त की हमहूँ दोषर के घर चोरी करी। ई की उचित? आहाँ किया दहेज गननौ? एक बेर विरोध त करू। मानाई छि दिकत होयत मुदा दहेज रूपी दानव स लड़े त परबे करत। मात्र आरोपित कय आपण जिम्मेदारी स भगव की उचित?    



    www.dahejmuktmithila.org

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

आखिर कहिया तक सफल होयत दहेज़ मुक्त मिथिला अभियान - ?

आखिर कहिया तक  सफल होयत  दहेज़ मुक्त  मिथिला अभियान - ?
दहेजक कारण युवती प्रताडित
दिनेश शर्मा
राजविराज, सप्तरी (नेपाल) 


माग अनुसारके दहेज निह लाबैके कारणसँ एक युवती अपने सासु, ससुर आ पतिके यातनासँ पीडित भेल अछि । महिला हिंसा न्यूनिकरणके लेल सब नागरिकमे सचेतना अभिबृद्धि करैके लेल विभिनन संघ संस्था क्रियाशील रहल बखत भेल अखनका घटनासँ समाज कोन दिशा तर्फ जा रहल अछि स्पष्ट संकत करैत अछि । 
सदरमुकाम राजविराज २ रहनिहार २६ बरिसके राखी झा दहेजके कारण सासु, ससुर आ पतिके यातना नहि सह सक्लाबाद बाध्य भऽ बुधदिन पत्रकार सम्मेलनके आयोजना करि घटना सार्वजनिक करैत न्यायके लेल पहल कैर दैके लेल आग्रह केलक अछि ।

        सप्तरीके बरही विरपुर लैहजार भेल राखीके डेढ बर्ष पहिनहि राजविराज २ निवासी राधाकान्त झाके बेटा प्रविण संगे हिन्दु रिती रिवाज अनुसार बिआह सम्पन्न भेल छल । बिआहमे कनिया पक्षके क्षमता अनुसारके दजहे देने छल । “आर्थिक अवस्था कम्जोर भेलोपर क्षमतासँ भेल धरि बाबु दहेज देने छल ।”
        बुधदिन आयोजना कएल गेल पत्रकार सम्मेलनमे राखी कहलैन –“ओसभ दहेजमे बेसी अपेक्षा राखैके कारण दुःख तक्लीप दै छल आ नहि मानलाबाद शारीरिक आ मानसिक यातना दैके साथ मारिपीट करै छल ओ कानैत सुनौलक । पति बैदेशीकर रोजगारीके शिलशिलामे विदेशमे रहलोपर घर आएल समयमे दाइजोके कारण दुःख तक्लीप दैत आविरहल पीडितके कथन अछि ।   
           
        विदेशसँ कहियोकाल आएल पति माया ममताके बादसँ बेसी दारु पि के “दहेज नहि आन्लौं” कहैत कुटपिट केलक आ प्रतिकार करैके खोजलाके कारण गुण्डा लगाके जान माकरैके धम्की दैत आविरहल ओ सुनौलक । अहि बेर टोलके किछ साथीसभ मार्फत हमर उपर आक्रमण करौलक आ बचाबैके लेल खेजलापर पडोसी नागेन्द्र झा, घनश्याम झा, ललित झा, परन्धर झा, दिवाकर झा लगायतके समेत मरनासन्न करि कुटपिट कैर घायल बनौलक बतौलक अछि ।

        पत्रकार सम्मेलने उपस्थित घायल नागेन्द्र झा राखीके सौस, ससुर आ पतिके निर्देशनमे टोलके सल्लाउद्दीन, प्रवेज, रजिद, सजाद आ अकबर मिया लगायतके समूह राखी उपर अचानक आक्रमण केलक आ बचाबैके लेल गेलापर हमरा सहितके घायल बनौलक बतौलक ।   
     
        हुनकर माथपर अखन ८ टा टाका लागल अछि । आक्रमणकारी टोलके अखिलेश झाके को२प ५२६८ तथा बसन्त झाके स२प ७७५४ नम्बरके मोटरसाईकल समेत तोडफोड केलक ओ बतौलक । घटना बाद प्रहरी प्रशासनद्वारा सामाजिक सद्भाव भंग होएत कहैत पीडकके पक्राउ नहि केलक पीडितके आरोप अछि । घटनामे संलग्न विरुद्ध प्रहरीके जानकारी देलोपर कार्वाही नहि केलक ओसभ बतौलक । पत्रकार सम्मेलनमे उपस्थित गामबासीसभ दाइजोके कारण राखीके यातना दैबाला सौस, सासुर आ पति तथा आक्रमणमे संलग्नसभके २४ घण्टा भितर पकैरके कार्वाही नहि केलापर आन्दोलन करैके घोषणा केलक अछि ।

        अहिके बारेमे सप्तरीके निमित्त प्रहरी प्रमुख डिएसपी श्यामसिंह चौधरी कहलैन कुटपिटमे संलगन रहैबाला विरुद्ध मुद्दा दर्ता कएल गेल कहैत ओ सभ जिल्ला बाहार फरार रहल आ ओसभके कोजी काम भरहल जनौलक अछि ।

    अहि बीच बुधदिन दहेजमुक्त मिथिलाके नेपालक अध्यक्ष करुणा झा अहि घटनाके घोर निन्दा आ भत्र्सना करैत दोषी उपर कार्वाही क २४ घण्टा के भितर कानूनी दायरामे लाबैके प्रेस विज्ञप्ती मार्फत माग केने अछि ।

दहेज़ मुक्त  मिथिला  ----
जनहित  में  जारी --

बुधवार, 26 जून 2013

सञ्चार यात्रा नेपाल


राष्ट्रके सबसँ पुरान नगरपालिकाके रुपमे रहल राजविराज नगरपालिका विकास निर्माण लगायत सब पक्षमे पछाडी परैत जाऽरहल कहैत नगरबासीद्वारा चिन्ता व्यक्त केलक अछि । सञ्चार यात्रा नेपालद्वारा मंगलदिन राजविराजमे आयोजित सार्वजनिक सुनुवाई कार्यक्रममे बोलैत नगरबासीसभ ऐहेन चिन्ता व्यक्त केलक अछि ।
नगरपालिका सभाहलमे आयोजित कएल गेल सुनुवाई कार्यक्रममे बोलैबाला अधिकांश वक्तासभ २०१६ सालमे नगरपालिका घोष्णा भेल राजविराज नगरपालिका विकासके गतिमे पाछा परल कारण उल्टा गतिमे चलिरहल आरोप समेत लगौलक । “और नगरपालिका स्तर बृद्धि करैत अगाडी जाईके क्रममे अछि” सञ्चारकर्मी हेम शंकर सिंह कहलैन “मुदा राजविराज नगरपालिका गाविस उन्मुख भऽरहल अछि ।”
राष्ट्रके सबसँ पुरान मध्येके एक आ भारतके प्रशिद्ध शहर जयपुरके नक्सामे आधारित नगरपालिका सरसफाईके क्षेत्रमे समेत सुधार होएल नहि सकलक सिंहके आरोप अछि । हरेक बर्ष किछ न किछ कार्यक्रमके आयोजना करि नगरके विकासमे सक्रिय रहैके प्रतिबद्धता करैबाला मुदा कार्यान्वयन नहि करब प्रक्रियासँ राजविराज नगरपालिका पाछा परैत आविरहल वक्तासभ बतौलक । नगरपालिका पाता परैमे कर्मचारी मात्रके दोस नहि भऽ समग्र नगरबासीके समेत कमजोरी रहल कहैत कार्यालयके काममे नगरबासीद्वारा समेत सहयोग कर परलमे ओसभ जोड देनेछल । नगरपालिकाके स्विपर ७ बजे फोहर संकलनके लेल आबैत अछि, मुदा ९ बजे नगरके सडकमे फोहर फेकैत अछि” स्थानीय शुभचन्द्र झा कहलैन –“अहिमे कर्मचारीमे मात्र दोस दऽ के होएत ?”
कार्यक्रमके अतिथी तथा मैथिल महासंघके अध्यक्ष विष्णु मण्डल कहलैन कर्मचारीसभके रकम प्रतिके आशक्तिके कारण विकास निर्माण प्रक्रिया पाछा परल आरोप लगौलक । “ढल निकासमे भ्रष्टाचार केलक हमर संग प्रमाण अछि ? मण्डल दाबी करैत कहलेन –“अहिमे सुधार नहि आएला धरि नगरके विकास केनाके सम्भव होएत ?” कार्यालय अपनासँ नहि होएबाला काम नगरबासीके सहयोग माग करपरल मण्डल बतौलक ।
कार्यक्रमके अन्तमे बोलैत प्रमुख अतिथी तथा कार्यकारी अधिकृत देवराज चौलागा कहलैन १६ सालसँ जम्मा भेल समस्या एके बेर समाधान करैल असम्भव भेलो पर हम योजना बनाके प्रयास रत रहल बतौलक । कार्यालय भतर आ कार्यालय बाहार भी काममे विभिन्न व्यवधान रहल स्वीकारैत ओ  ओहि कारण मुलुकके ५८ टा नगरपालिका मध्ये राजविराज नगरपालिका सबसँ पाछा परल दावी समेत केलक अछि । और नगरपालिकामे कार्यकारी प्रमुख बनि जाईके लेल सोर्स लगाबैत अछि, राजविराज नगरपालिकामे सुधारके काम करैके बातावरण नहि बनल प्रति संकेत करैत चौलागाइ कहलैन “मुदा अत नहि आबैके लेल सोर्स फोर्स लगाबैत अछि । त केनाके होएत विकास ? हुनकर प्रश्न छल ।
सञ्चार यात्रा नेपालके अध्यक्ष करुणा झाके अध्यक्षतामे आयोजित सार्वजनिक सुनुवाईमे विष्णु मण्डल, पत्रकारसभ ब्यासशंकर उपाध्याय, अम्बिका दाहाल, विनयलाल कर्ण, श्रवण देव, शुभचन्द्र झा, सुधा देव, गैसस महासंघके अध्यक्ष श्यामकान्त चौधरी, पार्थो सरकार, साधना झा, नागरिक समाजके थानसिंह भन्साली, पार्वती राउत लगायतके व्यक्ति समेत बोल्ने छल ।

करुणा झा
राजविराज (नेपाल)

शुक्रवार, 21 जून 2013

मैथिली पञ्चांग 2013 -14

मैथिली  पञ्चांग   2013 -14






































गुरुवार, 13 जून 2013

मिथिला-परिक्रमा

मिथिला-परिक्रमा


पहिने अनशन ,तेक्कर बाद मिथिला राज्य निर्माण यात्रा आ आब "मिथिला-परिक्रमा" ; लागैइत ऐछ जे वर्ष-2013 मिथिला राज्य आन्दोलनक कार्यक्रमक क्षेत्रम सम्पूर्ण मैथिल-संस्था आ मिथिलवासी एकत्रित भक अप्पन अधिकार लेल आब आगू आय्ब रहल छैथ |
   मैथिलगण सबक उत्साह आ अप्पन मैथिल-उमंग देखक मिथिलाक राज्य निर्माण आ विकास स जुरल संस्था सब आब प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप सौं जुईर रहल छैठ, जे नीक गॅप अछि |
एहा द्वारे राज्यक् निर्माण आ विकास लेल आब "अखिल भारतीय मिथिला पार्टी" , "मिथिला-परिक्रमा" क नाम सौं मिथिला भ्रमण कयर मिथिलाम आन्दोलनक नवका अलख़ जगैताय्त्त| 
ई परिक्रमा देवोत्थान एकादशीस विवाह-पंचमी धरि (13 सितंबर स 10 नवंबर तक) चलत जॅयिमा संस्था आ सहयोगी मैथिल सब राज्यक कोन कोन म जाक मैथिल सबक़ जागरूक बनेताय्त्त |

** "मिथिला-परिक्रमाक" यात्रक-नक्शा अय प्रकार सौं आईछः :-

((बेगुसराय)) -->खगरिया-->नवगच्छिया-->कटिहार-->किशनगंज-->पूर्णिया-->अररिया-->मधेपुरा-->सहरसा-->सुपौल-->झंझारपुर ->दरभंगा-->बेनिपुर-->रोसरा-->समस्तीपुर-->महनार-->हाजीपुर-->मुजफ्फ़रपुर-->मोतिहारी-->बेतिया-->रक्सौल-->सेओहर-->सीतामढी-->पुपरी-->((मधुबनी))

** अय "मिथिला-परिक्रमा" क मुख्य विकसी-बिंदु निम्न आईछः :-

1) सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्र मे मातृभाषक माध्यम सा 12वी कक्षा तक पढ़ौनिक व्यवस्था आ तहि म हॉस्टिल के निर्माण आ आधुनिक स्तरकशिक्षक सुविधा |
2) मैथिली सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्रक राजकाज के भाषा आ राजकीय कार्यविधिक भाषा |
3) कृषि प्रधान क्षेत्र मिथिलक उर्वर भूमिक समुचित दोहन आ उत्पादन |
4) जलशक्तिक समुचित उपयोग आ उचित वितरनक व्यवस्था एवं जल संचय |
5) मिथिलक कृषि उत्पादपर फुड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीयक विशाल ढांचाक निर्माण |
6) कृषि आधारित, पत, कगत, चीनी, तम्बाकू इंडस्ट्रीयक व्यवस्थापन |
7) मिथिलक तरकारी, फल आ फुलक लेल बजारक निर्माण आ कोल्ड स्टोरेजक व्यवस्था |
8) समस्त पोखरी ,चौर आ नदी सब पर बाँध बना मत्स्यपालनक व्यवस्था |
9) बरौनी मे पेट्रोकेमिकल के परियोजनाक स्थापना आ विस्तार |
10) लौकाहा, रीगा, सुपौल, फारबिसगंज आ लौरिया मे बिजली उत्पादन केन्द्रक निर्माण |
11) कटिहार, बेगुसराय ,सहरसा आ बेतियाः म मेडिकल कॉलेज के स्थापना |
12) सब ज़िला मे ईन्जीनियिरिंग कॉलेज केस्थापना केन्द्र एवं राज्यकद्वारा |
13) भाषाई चेतना आ संस्कृतिक सुरक्षक लेल सब गम मे पुस्तकालय |
14) दर्शनयी आ पौराणिक स्थान के पर्यटन स्थलक रूप देवक व्यवस्था |
15) मिथिलाक हस्तकला, हस्‍त-करघा आ चित्रकला क बीच सामंजस्य आ रोजगार सृजन |
16) यातायताक उन्नतिक लेल मिथिला स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के गठन |
17) क़ृषि उत्‍पादकता बढवा लेल विभिन्न उत्पादक कृषि सोध संस्थान |
18) राज्यक शहरीकरण हेतु समस्त प्रखंड के टाउनशिपक दर्जा |
19) खेल-कुदक बढ़ावा लेल बच्चाक चयन खेल-कूद विकास प्राधिकारकगठन |
20) समस्त पंचायत मे सर्व सुविधा संपन्न हॉस्पिटलक स्थापना आ विस्तार |
21) उड्डयनक विकास लेल हवा अडडक नगरीय उपयोग आ हवा सेवक विस्तार |

ई आन्दोलनक सफलता आ समस्त मिथिलवासी आ मैथिल सब सौं सहयोगक आशा हम करै छि |
Jha Chandan

सोमवार, 20 मई 2013

समस्त जागरुक मैथिल मित्र सँ निवेदन जे एहि महत्त्वपूर्ण मुद्दा पर जरुर ध्यानकेन्द्रित करी....





   समस्त जागरुक मैथिल मित्र सँ निवेदन जे एहि महत्त्वपूर्ण मुद्दा पर जरुर ध्यानकेन्द्रित करी....

मिथिलामें मैथिली सिनेमा लागत - १००% स्योर भऽ जाउ।

मिथिलामें मैथिलकेँ प्रथमत: रोजगार भेटत - १००% स्योर भऽ जाउ।

मिथिला क्षेत्रक कला-संस्कृतिक संरक्षण-प्रवर्धन लेल प्राथमिकता देल जायत - १००% स्योर भऽ जाउ।

मैथिली भाषा सहित विभिन्न उप-भाषाके सेहो भाषारूपमें पूर्ण विकासक काज होयत - १००% स्योर भऽ जाउ।

उद्योग, पर्यटन, कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य आ शिक्षा - एतेक विन्दुपर ध्यानकेन्द्रित कैल जायत - १००% स्योर भऽ जाउ।

अनावश्यक चिन्ता जे कोनो रहत से सभ दूर होयत - १००% स्योर भऽ जाउ।

लेकिन एहि सभ के लेल केवल आ केवल स्वराज्य बनौनाय जरुरी अछि। मिथिला राज्य चाही। मिथिला के अपन राजनीतिक धार होयब जरुरी। नेता वैह जे आइ अछि, लेकिन ओकरा ऊपर जे बिहार आ भारतक नेतागिरी वाला लाबी हावी छैक से खत्म होयब जरुरी छैक। ताहि हेतु भारतीय संविधानमें मिथिला राज्यके स्थापित करबाक एहि पहल में अहाँ सभ कियो शरीक होउ।

स्मृतिमें आनय चाहब - ओहि मित्रकेँ विशेषरूपेण जे विभिन्न मुद्दा में हमर नाम टैग करैत छी आ विचार चाहैत रहैत छी... से जरुर एहि आवश्यक 'सहयोग लेल अपील' पर ध्यान दी।

विशेष शुभ हो!
       सहयोग लेल अपील- 

मिरानिसेक वीर सपुत मैथिल अपन उठल डेग संग आगू बढैत रही। काज सगर मिथिला लेल लेकिन विशुद्ध स्वयंसेवा सँ करबाक प्रण पर अडिग रही। समय बहुत कम छैक, तैयारी सऽ पहाड ढाहबाक जरुरत छैक। तत्परताक संग वीरपुत्र आगू बढैत रहू। अपन योग दियौक, बाकी भार वहन करबाक लेल स्वयं परमेश्वर छथि।

लेकिन एहि यज्ञमें समस्त मिथिलावासीक वांछणीय सहयोग लेल कोनो सीमा निर्धारित नहि करैत केवल स्वैच्छिक सहयोग ग्रहण करबामें हमरा कोनो हर्ज नहि बुझैत अछि। ताहि लेल हमर परिचित आ मिथिला-मैथिली प्रति सकारात्मक सोच संग अग्रसर हरेक मैथिलकेँ हम अपन मोबाइल द्वारा स्वैच्छिक सहयोग देबाक लेल अनुरोध कैल अछि।

संगहि फेसबुक द्वारा सेहो हरेक मैथिल संग एहि पुण्यक कार्यमें सहयोग लेल निवेदन करैत छी।

"मिथिला राज्य निर्माण यात्रामें अपनेक स्वैच्छिक सहयोग हेतु सादर अनुरोध सहित,

 एकाउन्ट डिटेल: अनुप कुमार चौधरी, खाता सं.: २००७१६२२३१७, बैंक: स्टेट बैंक अफ ईण्डिया।
 अपन योगदानक पुष्टि एहि नं. ८०५१५१८६८७ (अनुपजी)केँ जरुर करी।

मिथिला राज्य निर्माण सेना - दिल्ली।"

नोट: अपनेक नजरिमें जे कियो सहयोग करय योग्य होइथ हुनका सेहो मेसेज फोरवार्ड/शेयर जरुर करी।


शुक्रवार, 17 मई 2013

सीताजीक आरती


सीताजीक आरती 














सीता बिराजथि मिथिलाधाम सब मिलिकय करियनु आरती।
संगहि सुशोभित लछुमन-राम सब मिलिकय करियनु आरती।।
विपदा विनाशिनि सुखदा चराचर,सीता धिया बनि अयली सुनयना घर
मिथिलाके महिमा महान...सब मिलिकय करियनु आरती।।सीता बिराजथि...
सीता सर्वेश्वरि ममता सरोवर,बायाँ कमल कर दायाँ अभय वर
सौम्या सकल गुणधाम.....सब मिलिकय करियनु आरती।। सीता बिराजथि...
रामप्रिया सर्वमंगल दायिनि,सीता सकल जगती दुःखहारिणि
करथिन सभक कल्याण...सब मिलिकय करियनु आरती।। सीता बिराजथि...
सीतारामक जोड़ी अति मनभावन,नैहर सासुर कयलनि पावन
सेवक छथि हनुमान...सब मिलिकय करियनु आरती।।सीता बिराजथि...
ममतामयी माता सीता पुनीता,संतन हेतु सीता सदिखन सुनीता
धरणी-सुता सबठाम...सब मिलिकय करियनु आरती ।। सीता बिराजथि...
शुक्ल नवमी तिथि वैशाख मासे,’चंद्रमणि’ सीता उत्सव हुलासे
पायब सकल सुखधाम...सब मिलिकय करियनु आरती।।
सीता बिराजथि मिथिलाधाम सब मिलिकय करियनु आरती।।।
DrChandramani Jha
चंद्रमणिझा,
9 1 - 9430827795