(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

मंगलवार, 30 जुलाई 2013

राजधानी में अक्टूबर में होगा मिथिला महोत्सव


 राजधानी में अक्टूबर में होगा मिथिला महोत्सव
  • नई दिल्ली। अखिल भारतीय मिथिला संघ की ओर से राजधानी दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में आगामी अक्टूबर माह में मिथिला महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। अ. भा. मि. संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की रविवार को संपन्न बैठक में इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई। प्रस्ताव के अनुसार अक्टूबर माह में राजधानी के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग दिनों में कार्यक्रम आयोजित होंगे और फिर वृहत पैमाने पर समापन कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसमें सभी क्षेत्रों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

    मिथिला महोत्सव के दौरान आयोजन स्थलों पर मिथिलांचल की सांस्कृतिक-बौद्धिक और लोकजीवन की झांकी प्रस्तुत की जाएगी। इसमें मिथलांचल की प्रसिद्ध विभूतियों के जीवन और कर्म के अलावा लोक संस्कृति व लोकाचार की अनुपम प्रस्तुति रहेगी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जाएंगे। मिथिलांचल की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग और क्षेत्र की विशिष्ट खान पान शैली की झलक भी इस दौरान देखने को मिलेगी।
    बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने मैथिली भाषा के लिए दिल्ली में अलग मैथिली अकादमी के गठन की मांग भी दोहरायी। प्रतिनिधियों ने वर्तमान मैथिली-भोजपुरी अकादमी के उपाध्यक्ष का पद किसी मैथिली विद्वान को नहीं दिए जाने पर रोष प्रकट किया। अ. भा. मि. संघ के अध्यक्ष श्री विजय चंद्र झा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने संघ के शिष्टमंडल से हुई पिछली भेंट के दौरान आश्वासन दिया था कि अकादमी के नए उपाध्यक्ष का पद मैथिली भाषा के किसी विद्वान को दिया जाएगा लेकिन उन्होंने वादा पूरा नहीं किया है।
    बैठक में हाल में संपन्न मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह की समीक्षा भी की गई और संस्था के आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। वक्ताओं ने राजधानी में मिथिला भवन के निर्माण की दिशा मेें प्रयास तेज करने की जरूरत पर भी जोर दिया। साथ ही प्रतिनिधियों ने विभिन्न राजनीतिक दलों से मांग की कि आगामी विधानसभा चुनाव में दिल्ली में निवास कर रहे बिहार के लोगों को उनकी जनसंख्या के अनुसार उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।

मंगलवार, 9 जुलाई 2013

अक्सर पूछल जायवाला प्रश्न आ उत्तर

  • अक्सर पूछल जायवाला प्रश्न आ उत्तर


    प्रिय द.मु.मि.के आगन्तुक! -

    हम सभ अनुभव कयलहुँ अछि जे दहेज मुक्त मिथिला अपन स्थापना मार्च ३, २०११ सँ एखन धरिक अत्यन्त कम अवधिमें एक अन्तर्राष्ट्रीय समूह बनि गेल अछि; शनैः शनैः समयक माँग अनुरूप बहुत रास सुधार सेहो लाओल गेल अछि जाहिसँ सहभागीजनकेँ सुविधा हो। पहिले ई पूर्णतः मैथिल हेतु मात्र समर्पित छल, कालान्तरमें एतय अन्यके सहभागिता देखैत हम सभ हिन्दी आ अन्य भाषाके सेहो मिथिलाक भाषा मैथिलीके अतिरिक्त मान्यता देलहुँ।

    आब देखयमें आबि रहल अछि जे आगन्तुक एहि समूहके बारे आ एकर प्रतिबद्धता के बारे जानकारी रखबाक लेल बेसी रुचि लऽ रहल छथि। अतः आजुक आवश्यकता एक ‘अक्सर पूछऽ जायवाला प्रश्न आ उत्तर’ के अछि जाहिसँ सभक जिज्ञासा के पूर्ण समाधान हो, एतय तक जे सदस्यगण पहिले सऽ सहभागी बनल छथि हुनकहु जानकारी के अभाव देखल जाइछ, अतः ई कदम हुनकहु लेल हितकारी बनत।

    एखन एकरा अहिना छोड़ल जा रहल अछि बिना कोनो प्रश्नक - अपने अपन तरहें प्रश्न निर्माण कय सकी। या, यस्वतः संज्ञान सऽ सामान्यतया पूछल जायवाला प्रश्न हम सभ स्वयं रखैत अपने लोकनिक जानकारी लेल सभ बात राखब।

    हरिः हरः!

    प्र. १. दहेज मुक्त मिथिला के परिचय संछिप्तमें?

    उ. एक जागृति अभियान! युवा के जागरण हेतु दहेज प्रथा के बढैत प्रकोप पर चर्चा के प्रोत्साहन! दहेज नहि लेब, नहि देब... धिया-पुता में सेहो नहि लेब-देब आ ने एहेन कोनो विवाह में सहभागी बनब जतय लेन-देन भेल हो।

    प्र. २. दहेज के परिभाषा?

    उ. सब किछु पसिन पड़ल, विवाह लेल तैयार छी... मुदा स्वेच्छाचार के विरुद्ध एक-दोसर पर माँग थोपैत छी। माँग कैल कोनो वस्तुके दहेज कहल जैछ। विवाह के पूर्व-शर्तमें एहेन माँग के मात्र दहेज कहल जाइछ जे सामान्य आवश्यक माँग - जेना नीक घर-वर, नीक बोल-वचन, नीक पढल-लिखल, नीक खानदान, सुन्दर आदर्श... ई सभ माँग मानवता के पोषक माँग थीक, एकरा दहेज नहि कहल जा सकैत छैक। ई सभ भावना के माँग भेल जे हर प्राणीमें नीक प्रति आकर्षण रखैछ। वस्तुतः माँग ओ भेल जे हमर बेटी लेल हमरा चान चाही, हमरा २ गो तारा आ वृहस्पति समान गन्धर्व-राजकुमार चाही... ओम्हर जे हमरा अलखचान स्वर्गक परी पुतोहु चाही, ग्रेजुएट आ विदुषी विद्योतमा चाही.. से सभ चाही आ चाह के युद्ध में अन्त के माँग जे मुद्रा एतेक चाही... बरियाती के स्वागत एना चाही... विवाह शहरे में हो... होटल में बरियाती के ठहराव हो... आ अनेको तरहक माँग जे वास्तवमें सामनेवाला के स्वेच्छा सऽ आ क्षमता सऽ बहुत दूर के वा कर्जा करय लेल बाध्यकर हो। एहेन माँग के हम सभ दहेज मानी। अर्थात माँगरूपी द्रव्य वा वस्तु वा थोपुआ भावना के हम सभ दहेज मानी। ओ दहेज नहि भेल जे दुनू पक्ष मनमर्जी सँ अपन सन्तानके विवाह उपलक्ष्य लेन-देन करय लेल तैयार छथि, करैत छथि वा करबाक इच्छा रखैत छथि।

    प्र.३ दहेजक विरोध किया? 
    उ. दहेजक विरोध के मूल कारण जे आइ के विकसित युग में हमर समाज में अखनो बेटा आ बेटी में असमानता मानल जा रहल अछि। बेटा अगर शिक्षित आ रोजगार सँ जुरल अछि तऽ पुतोहु चाही गुणी, शिक्षित, खानदानी आ तेकर संग दहेज़ के मोट रकम आ साज-समान आधुनिक युग मुताबिक। भले बेटा डॉ. अईछ आ पुतहु सेहो डॉ. तैयो बेटा बाला लेबे करता। एकटा गरीब बाप के बेटी जे सर्वगुण संपन्न अछि, मुदा पिता के पास पाई नहि छैन तांइ ओकरा मजबूरन बेमेल वियाह के लेल बाध्य होबय परैत छैक। लोक दहेज़ के प्रतिष्ठा सऽ जोरने जा रहल छैथ। फलाँ के बेटा के एतेक देलकैक तऽ हमर बेटा कि ओकरा सऽ कम अछि? ई प्रश्न दिन ब दिन एहि दहेज़ रूपी दानव के काया बढा रहल अछि। साधारण लोक आजुक एहि आर्थिक संकट के समय में अपन निर्वहन करय में असमर्थ भऽ रहल अछि, तइ पर ई दहेजक चिंता बहुतो के जीवन के सुख-चैन के बरबाद केने अछि। आब समय आइब गेल जे समाज के सब वर्ग एहि विकराल समस्या पर चिंतन करी.   

    प्र.४ दहेज अभिशाप कोना?

    उ. दहेज के शुद्ध स्वरूप तऽ परंपरा सँ केवल आशीर्वाद आ स्वेच्छाके प्रतीक रहल, मुदा कालान्तर में लोभ, लालच आ सौदागरी के कारण आब ई माँगरूप में परिणत भऽ गेल अछि। एकर दूरगामी प्रभाव एतेक खतरनाक जे लोक बेटी पैदा तक करय में डेराइत छथि, आधुनिक विज्ञानक विध्वंसक गति सँ कोइखमें बेटीके भ्रूण केर हत्या होवय लागल अछि। एकर दोसर दुष्प्रभाव ई जे लोक सस्ता-सुभिस्ता निबटय के चक्करमें बेटीके समुचित पढाइ सँ सेहो वंचित रखैत छथि। बेटी जातिकेँ समाजिक दुत्कार के कारण मनोबल गिरल जा रहल छैक आ लिंगभेदके सभ दुष्प्रभाव सऽ समाज पिछड़ल जा रहल अछि। समाजिक सौहार्द्र आ समग्र विकास के जगह विध्वंसक विचारधारा आ अनाचार-कदाचार बढल जा रहल अछि। कतेको बेटी उपेक्षित रहलाके कारण आत्महत्या सनक कलंकी कदम तक उठा लैछ। कतेको गरीबके बेटी अपन देह के बाजार में निलाम तक करय लगैछ। हर तरहें दहेज के चलते विकास ठमैक गेल अछि आ नित्य हिंसा-अत्याचार के चलते समाजक एक सशक्त अंग नारी अवहेलना के शिकार बनि रहल छथि। एकर बुराई तऽ हम किछु मात्र गना सकल होयब, एकर बर्बरता के सीमा नहि छैक जेना बुझा रहल अछि।

    प्र.५ दहेज मुक्त मिथिला कि दहेज मुक्त विवाह लेल आवश्यक कार्य करैत छैक?

    नहि! विवाह नितान्त व्यक्तिगत विचार आ रुचिके बात थीक। एहिमें भला कोनो संस्था कोना के प्रयस करतैक! बस, ई एक मुहिम थीक जे दहेज मुक्त विवाह लेल सभ सँ अपील करत। दहेज मुक्त विवाह करनिहार के सम्मान देत। दहेज के बुराई सभ के लोकक समक्ष राखत। आजुक नव पीढी के संग चर्चा करत जे आखिर कोनो परंपरा के रूप यदि बिगैड़ जाइत छैक तखन बोझ कतेक दिन तऽ उठायल जाय! दहेज के स्वच्छ परंपरा आब मरल लाश जेकाँ वातावरण प्रदूषित केने जा रहल छैक। एहि सँ महामारी पसैर रहल छैक। एहि लाश के संस्कार करब जरुरी छैक नहि कि एकरा लऽ के राजनीति वा समाजिक सम्मानके प्रतीक ठाड़्ह करब! एहि लेल आजुक पीढी जागैथ आ अपन बड़-बुजुर्गके बुझाबैथ। बस यैह सभ तरहक जागृति पसारबाक अभियानके नाम थीक दहेज मुक्त मिथिला। जी! यदि युवा एकत्र होइत छथि तऽ स्वयंसेवाके तर्ज पर किछु कार्य जरुर करैथ। जेना महत्त्वपूर्ण परंपरा के संरक्षण! एहि में वर्तमान समय सौराठ सभा के शुद्ध स्वरूप के संरक्षण लेल प्रयास करैत छैक। देश-विदेश पसरल समस्त मैथिल आइ इहो समस्या सऽ जूझि रहल छथि, अत: एहि लेल एवं मिथिलाक सम-सामयिक समस्या पर सामूहिक चर्चा लेल सेहो एक सांस्कृतिक पर्यटन केन्द्रके रूपमें लोकवर्गकें जमा होयब जरुरी।

    प्र.  हमर बेटी/ बहिन के विवाह मे दहेज देवय परल ताइ हमहूँ दहेज लेब। ई कतेक उचित?

    उ. किछू गोटे के कहब छैन जे हमार बहिन/ बेटी के विवाह मे दहेज देवय परल ताइ दहेज लेब। आब काहू जे जदी आई हमर घर मे चोरी भ जाई त की हमहूँ दोषर के घर चोरी करी। ई की उचित? आहाँ किया दहेज गननौ? एक बेर विरोध त करू। मानाई छि दिकत होयत मुदा दहेज रूपी दानव स लड़े त परबे करत। मात्र आरोपित कय आपण जिम्मेदारी स भगव की उचित?    



    www.dahejmuktmithila.org

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

आखिर कहिया तक सफल होयत दहेज़ मुक्त मिथिला अभियान - ?

आखिर कहिया तक  सफल होयत  दहेज़ मुक्त  मिथिला अभियान - ?
दहेजक कारण युवती प्रताडित
दिनेश शर्मा
राजविराज, सप्तरी (नेपाल) 


माग अनुसारके दहेज निह लाबैके कारणसँ एक युवती अपने सासु, ससुर आ पतिके यातनासँ पीडित भेल अछि । महिला हिंसा न्यूनिकरणके लेल सब नागरिकमे सचेतना अभिबृद्धि करैके लेल विभिनन संघ संस्था क्रियाशील रहल बखत भेल अखनका घटनासँ समाज कोन दिशा तर्फ जा रहल अछि स्पष्ट संकत करैत अछि । 
सदरमुकाम राजविराज २ रहनिहार २६ बरिसके राखी झा दहेजके कारण सासु, ससुर आ पतिके यातना नहि सह सक्लाबाद बाध्य भऽ बुधदिन पत्रकार सम्मेलनके आयोजना करि घटना सार्वजनिक करैत न्यायके लेल पहल कैर दैके लेल आग्रह केलक अछि ।

        सप्तरीके बरही विरपुर लैहजार भेल राखीके डेढ बर्ष पहिनहि राजविराज २ निवासी राधाकान्त झाके बेटा प्रविण संगे हिन्दु रिती रिवाज अनुसार बिआह सम्पन्न भेल छल । बिआहमे कनिया पक्षके क्षमता अनुसारके दजहे देने छल । “आर्थिक अवस्था कम्जोर भेलोपर क्षमतासँ भेल धरि बाबु दहेज देने छल ।”
        बुधदिन आयोजना कएल गेल पत्रकार सम्मेलनमे राखी कहलैन –“ओसभ दहेजमे बेसी अपेक्षा राखैके कारण दुःख तक्लीप दै छल आ नहि मानलाबाद शारीरिक आ मानसिक यातना दैके साथ मारिपीट करै छल ओ कानैत सुनौलक । पति बैदेशीकर रोजगारीके शिलशिलामे विदेशमे रहलोपर घर आएल समयमे दाइजोके कारण दुःख तक्लीप दैत आविरहल पीडितके कथन अछि ।   
           
        विदेशसँ कहियोकाल आएल पति माया ममताके बादसँ बेसी दारु पि के “दहेज नहि आन्लौं” कहैत कुटपिट केलक आ प्रतिकार करैके खोजलाके कारण गुण्डा लगाके जान माकरैके धम्की दैत आविरहल ओ सुनौलक । अहि बेर टोलके किछ साथीसभ मार्फत हमर उपर आक्रमण करौलक आ बचाबैके लेल खेजलापर पडोसी नागेन्द्र झा, घनश्याम झा, ललित झा, परन्धर झा, दिवाकर झा लगायतके समेत मरनासन्न करि कुटपिट कैर घायल बनौलक बतौलक अछि ।

        पत्रकार सम्मेलने उपस्थित घायल नागेन्द्र झा राखीके सौस, ससुर आ पतिके निर्देशनमे टोलके सल्लाउद्दीन, प्रवेज, रजिद, सजाद आ अकबर मिया लगायतके समूह राखी उपर अचानक आक्रमण केलक आ बचाबैके लेल गेलापर हमरा सहितके घायल बनौलक बतौलक ।   
     
        हुनकर माथपर अखन ८ टा टाका लागल अछि । आक्रमणकारी टोलके अखिलेश झाके को२प ५२६८ तथा बसन्त झाके स२प ७७५४ नम्बरके मोटरसाईकल समेत तोडफोड केलक ओ बतौलक । घटना बाद प्रहरी प्रशासनद्वारा सामाजिक सद्भाव भंग होएत कहैत पीडकके पक्राउ नहि केलक पीडितके आरोप अछि । घटनामे संलग्न विरुद्ध प्रहरीके जानकारी देलोपर कार्वाही नहि केलक ओसभ बतौलक । पत्रकार सम्मेलनमे उपस्थित गामबासीसभ दाइजोके कारण राखीके यातना दैबाला सौस, सासुर आ पति तथा आक्रमणमे संलग्नसभके २४ घण्टा भितर पकैरके कार्वाही नहि केलापर आन्दोलन करैके घोषणा केलक अछि ।

        अहिके बारेमे सप्तरीके निमित्त प्रहरी प्रमुख डिएसपी श्यामसिंह चौधरी कहलैन कुटपिटमे संलगन रहैबाला विरुद्ध मुद्दा दर्ता कएल गेल कहैत ओ सभ जिल्ला बाहार फरार रहल आ ओसभके कोजी काम भरहल जनौलक अछि ।

    अहि बीच बुधदिन दहेजमुक्त मिथिलाके नेपालक अध्यक्ष करुणा झा अहि घटनाके घोर निन्दा आ भत्र्सना करैत दोषी उपर कार्वाही क २४ घण्टा के भितर कानूनी दायरामे लाबैके प्रेस विज्ञप्ती मार्फत माग केने अछि ।

दहेज़ मुक्त  मिथिला  ----
जनहित  में  जारी --

बुधवार, 26 जून 2013

सञ्चार यात्रा नेपाल


राष्ट्रके सबसँ पुरान नगरपालिकाके रुपमे रहल राजविराज नगरपालिका विकास निर्माण लगायत सब पक्षमे पछाडी परैत जाऽरहल कहैत नगरबासीद्वारा चिन्ता व्यक्त केलक अछि । सञ्चार यात्रा नेपालद्वारा मंगलदिन राजविराजमे आयोजित सार्वजनिक सुनुवाई कार्यक्रममे बोलैत नगरबासीसभ ऐहेन चिन्ता व्यक्त केलक अछि ।
नगरपालिका सभाहलमे आयोजित कएल गेल सुनुवाई कार्यक्रममे बोलैबाला अधिकांश वक्तासभ २०१६ सालमे नगरपालिका घोष्णा भेल राजविराज नगरपालिका विकासके गतिमे पाछा परल कारण उल्टा गतिमे चलिरहल आरोप समेत लगौलक । “और नगरपालिका स्तर बृद्धि करैत अगाडी जाईके क्रममे अछि” सञ्चारकर्मी हेम शंकर सिंह कहलैन “मुदा राजविराज नगरपालिका गाविस उन्मुख भऽरहल अछि ।”
राष्ट्रके सबसँ पुरान मध्येके एक आ भारतके प्रशिद्ध शहर जयपुरके नक्सामे आधारित नगरपालिका सरसफाईके क्षेत्रमे समेत सुधार होएल नहि सकलक सिंहके आरोप अछि । हरेक बर्ष किछ न किछ कार्यक्रमके आयोजना करि नगरके विकासमे सक्रिय रहैके प्रतिबद्धता करैबाला मुदा कार्यान्वयन नहि करब प्रक्रियासँ राजविराज नगरपालिका पाछा परैत आविरहल वक्तासभ बतौलक । नगरपालिका पाता परैमे कर्मचारी मात्रके दोस नहि भऽ समग्र नगरबासीके समेत कमजोरी रहल कहैत कार्यालयके काममे नगरबासीद्वारा समेत सहयोग कर परलमे ओसभ जोड देनेछल । नगरपालिकाके स्विपर ७ बजे फोहर संकलनके लेल आबैत अछि, मुदा ९ बजे नगरके सडकमे फोहर फेकैत अछि” स्थानीय शुभचन्द्र झा कहलैन –“अहिमे कर्मचारीमे मात्र दोस दऽ के होएत ?”
कार्यक्रमके अतिथी तथा मैथिल महासंघके अध्यक्ष विष्णु मण्डल कहलैन कर्मचारीसभके रकम प्रतिके आशक्तिके कारण विकास निर्माण प्रक्रिया पाछा परल आरोप लगौलक । “ढल निकासमे भ्रष्टाचार केलक हमर संग प्रमाण अछि ? मण्डल दाबी करैत कहलेन –“अहिमे सुधार नहि आएला धरि नगरके विकास केनाके सम्भव होएत ?” कार्यालय अपनासँ नहि होएबाला काम नगरबासीके सहयोग माग करपरल मण्डल बतौलक ।
कार्यक्रमके अन्तमे बोलैत प्रमुख अतिथी तथा कार्यकारी अधिकृत देवराज चौलागा कहलैन १६ सालसँ जम्मा भेल समस्या एके बेर समाधान करैल असम्भव भेलो पर हम योजना बनाके प्रयास रत रहल बतौलक । कार्यालय भतर आ कार्यालय बाहार भी काममे विभिन्न व्यवधान रहल स्वीकारैत ओ  ओहि कारण मुलुकके ५८ टा नगरपालिका मध्ये राजविराज नगरपालिका सबसँ पाछा परल दावी समेत केलक अछि । और नगरपालिकामे कार्यकारी प्रमुख बनि जाईके लेल सोर्स लगाबैत अछि, राजविराज नगरपालिकामे सुधारके काम करैके बातावरण नहि बनल प्रति संकेत करैत चौलागाइ कहलैन “मुदा अत नहि आबैके लेल सोर्स फोर्स लगाबैत अछि । त केनाके होएत विकास ? हुनकर प्रश्न छल ।
सञ्चार यात्रा नेपालके अध्यक्ष करुणा झाके अध्यक्षतामे आयोजित सार्वजनिक सुनुवाईमे विष्णु मण्डल, पत्रकारसभ ब्यासशंकर उपाध्याय, अम्बिका दाहाल, विनयलाल कर्ण, श्रवण देव, शुभचन्द्र झा, सुधा देव, गैसस महासंघके अध्यक्ष श्यामकान्त चौधरी, पार्थो सरकार, साधना झा, नागरिक समाजके थानसिंह भन्साली, पार्वती राउत लगायतके व्यक्ति समेत बोल्ने छल ।

करुणा झा
राजविराज (नेपाल)

शुक्रवार, 21 जून 2013

मैथिली पञ्चांग 2013 -14

मैथिली  पञ्चांग   2013 -14






































गुरुवार, 13 जून 2013

मिथिला-परिक्रमा

मिथिला-परिक्रमा


पहिने अनशन ,तेक्कर बाद मिथिला राज्य निर्माण यात्रा आ आब "मिथिला-परिक्रमा" ; लागैइत ऐछ जे वर्ष-2013 मिथिला राज्य आन्दोलनक कार्यक्रमक क्षेत्रम सम्पूर्ण मैथिल-संस्था आ मिथिलवासी एकत्रित भक अप्पन अधिकार लेल आब आगू आय्ब रहल छैथ |
   मैथिलगण सबक उत्साह आ अप्पन मैथिल-उमंग देखक मिथिलाक राज्य निर्माण आ विकास स जुरल संस्था सब आब प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप सौं जुईर रहल छैठ, जे नीक गॅप अछि |
एहा द्वारे राज्यक् निर्माण आ विकास लेल आब "अखिल भारतीय मिथिला पार्टी" , "मिथिला-परिक्रमा" क नाम सौं मिथिला भ्रमण कयर मिथिलाम आन्दोलनक नवका अलख़ जगैताय्त्त| 
ई परिक्रमा देवोत्थान एकादशीस विवाह-पंचमी धरि (13 सितंबर स 10 नवंबर तक) चलत जॅयिमा संस्था आ सहयोगी मैथिल सब राज्यक कोन कोन म जाक मैथिल सबक़ जागरूक बनेताय्त्त |

** "मिथिला-परिक्रमाक" यात्रक-नक्शा अय प्रकार सौं आईछः :-

((बेगुसराय)) -->खगरिया-->नवगच्छिया-->कटिहार-->किशनगंज-->पूर्णिया-->अररिया-->मधेपुरा-->सहरसा-->सुपौल-->झंझारपुर ->दरभंगा-->बेनिपुर-->रोसरा-->समस्तीपुर-->महनार-->हाजीपुर-->मुजफ्फ़रपुर-->मोतिहारी-->बेतिया-->रक्सौल-->सेओहर-->सीतामढी-->पुपरी-->((मधुबनी))

** अय "मिथिला-परिक्रमा" क मुख्य विकसी-बिंदु निम्न आईछः :-

1) सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्र मे मातृभाषक माध्यम सा 12वी कक्षा तक पढ़ौनिक व्यवस्था आ तहि म हॉस्टिल के निर्माण आ आधुनिक स्तरकशिक्षक सुविधा |
2) मैथिली सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्रक राजकाज के भाषा आ राजकीय कार्यविधिक भाषा |
3) कृषि प्रधान क्षेत्र मिथिलक उर्वर भूमिक समुचित दोहन आ उत्पादन |
4) जलशक्तिक समुचित उपयोग आ उचित वितरनक व्यवस्था एवं जल संचय |
5) मिथिलक कृषि उत्पादपर फुड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीयक विशाल ढांचाक निर्माण |
6) कृषि आधारित, पत, कगत, चीनी, तम्बाकू इंडस्ट्रीयक व्यवस्थापन |
7) मिथिलक तरकारी, फल आ फुलक लेल बजारक निर्माण आ कोल्ड स्टोरेजक व्यवस्था |
8) समस्त पोखरी ,चौर आ नदी सब पर बाँध बना मत्स्यपालनक व्यवस्था |
9) बरौनी मे पेट्रोकेमिकल के परियोजनाक स्थापना आ विस्तार |
10) लौकाहा, रीगा, सुपौल, फारबिसगंज आ लौरिया मे बिजली उत्पादन केन्द्रक निर्माण |
11) कटिहार, बेगुसराय ,सहरसा आ बेतियाः म मेडिकल कॉलेज के स्थापना |
12) सब ज़िला मे ईन्जीनियिरिंग कॉलेज केस्थापना केन्द्र एवं राज्यकद्वारा |
13) भाषाई चेतना आ संस्कृतिक सुरक्षक लेल सब गम मे पुस्तकालय |
14) दर्शनयी आ पौराणिक स्थान के पर्यटन स्थलक रूप देवक व्यवस्था |
15) मिथिलाक हस्तकला, हस्‍त-करघा आ चित्रकला क बीच सामंजस्य आ रोजगार सृजन |
16) यातायताक उन्नतिक लेल मिथिला स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के गठन |
17) क़ृषि उत्‍पादकता बढवा लेल विभिन्न उत्पादक कृषि सोध संस्थान |
18) राज्यक शहरीकरण हेतु समस्त प्रखंड के टाउनशिपक दर्जा |
19) खेल-कुदक बढ़ावा लेल बच्चाक चयन खेल-कूद विकास प्राधिकारकगठन |
20) समस्त पंचायत मे सर्व सुविधा संपन्न हॉस्पिटलक स्थापना आ विस्तार |
21) उड्डयनक विकास लेल हवा अडडक नगरीय उपयोग आ हवा सेवक विस्तार |

ई आन्दोलनक सफलता आ समस्त मिथिलवासी आ मैथिल सब सौं सहयोगक आशा हम करै छि |
Jha Chandan

सोमवार, 20 मई 2013

समस्त जागरुक मैथिल मित्र सँ निवेदन जे एहि महत्त्वपूर्ण मुद्दा पर जरुर ध्यानकेन्द्रित करी....





   समस्त जागरुक मैथिल मित्र सँ निवेदन जे एहि महत्त्वपूर्ण मुद्दा पर जरुर ध्यानकेन्द्रित करी....

मिथिलामें मैथिली सिनेमा लागत - १००% स्योर भऽ जाउ।

मिथिलामें मैथिलकेँ प्रथमत: रोजगार भेटत - १००% स्योर भऽ जाउ।

मिथिला क्षेत्रक कला-संस्कृतिक संरक्षण-प्रवर्धन लेल प्राथमिकता देल जायत - १००% स्योर भऽ जाउ।

मैथिली भाषा सहित विभिन्न उप-भाषाके सेहो भाषारूपमें पूर्ण विकासक काज होयत - १००% स्योर भऽ जाउ।

उद्योग, पर्यटन, कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य आ शिक्षा - एतेक विन्दुपर ध्यानकेन्द्रित कैल जायत - १००% स्योर भऽ जाउ।

अनावश्यक चिन्ता जे कोनो रहत से सभ दूर होयत - १००% स्योर भऽ जाउ।

लेकिन एहि सभ के लेल केवल आ केवल स्वराज्य बनौनाय जरुरी अछि। मिथिला राज्य चाही। मिथिला के अपन राजनीतिक धार होयब जरुरी। नेता वैह जे आइ अछि, लेकिन ओकरा ऊपर जे बिहार आ भारतक नेतागिरी वाला लाबी हावी छैक से खत्म होयब जरुरी छैक। ताहि हेतु भारतीय संविधानमें मिथिला राज्यके स्थापित करबाक एहि पहल में अहाँ सभ कियो शरीक होउ।

स्मृतिमें आनय चाहब - ओहि मित्रकेँ विशेषरूपेण जे विभिन्न मुद्दा में हमर नाम टैग करैत छी आ विचार चाहैत रहैत छी... से जरुर एहि आवश्यक 'सहयोग लेल अपील' पर ध्यान दी।

विशेष शुभ हो!
       सहयोग लेल अपील- 

मिरानिसेक वीर सपुत मैथिल अपन उठल डेग संग आगू बढैत रही। काज सगर मिथिला लेल लेकिन विशुद्ध स्वयंसेवा सँ करबाक प्रण पर अडिग रही। समय बहुत कम छैक, तैयारी सऽ पहाड ढाहबाक जरुरत छैक। तत्परताक संग वीरपुत्र आगू बढैत रहू। अपन योग दियौक, बाकी भार वहन करबाक लेल स्वयं परमेश्वर छथि।

लेकिन एहि यज्ञमें समस्त मिथिलावासीक वांछणीय सहयोग लेल कोनो सीमा निर्धारित नहि करैत केवल स्वैच्छिक सहयोग ग्रहण करबामें हमरा कोनो हर्ज नहि बुझैत अछि। ताहि लेल हमर परिचित आ मिथिला-मैथिली प्रति सकारात्मक सोच संग अग्रसर हरेक मैथिलकेँ हम अपन मोबाइल द्वारा स्वैच्छिक सहयोग देबाक लेल अनुरोध कैल अछि।

संगहि फेसबुक द्वारा सेहो हरेक मैथिल संग एहि पुण्यक कार्यमें सहयोग लेल निवेदन करैत छी।

"मिथिला राज्य निर्माण यात्रामें अपनेक स्वैच्छिक सहयोग हेतु सादर अनुरोध सहित,

 एकाउन्ट डिटेल: अनुप कुमार चौधरी, खाता सं.: २००७१६२२३१७, बैंक: स्टेट बैंक अफ ईण्डिया।
 अपन योगदानक पुष्टि एहि नं. ८०५१५१८६८७ (अनुपजी)केँ जरुर करी।

मिथिला राज्य निर्माण सेना - दिल्ली।"

नोट: अपनेक नजरिमें जे कियो सहयोग करय योग्य होइथ हुनका सेहो मेसेज फोरवार्ड/शेयर जरुर करी।


शुक्रवार, 17 मई 2013

सीताजीक आरती


सीताजीक आरती 














सीता बिराजथि मिथिलाधाम सब मिलिकय करियनु आरती।
संगहि सुशोभित लछुमन-राम सब मिलिकय करियनु आरती।।
विपदा विनाशिनि सुखदा चराचर,सीता धिया बनि अयली सुनयना घर
मिथिलाके महिमा महान...सब मिलिकय करियनु आरती।।सीता बिराजथि...
सीता सर्वेश्वरि ममता सरोवर,बायाँ कमल कर दायाँ अभय वर
सौम्या सकल गुणधाम.....सब मिलिकय करियनु आरती।। सीता बिराजथि...
रामप्रिया सर्वमंगल दायिनि,सीता सकल जगती दुःखहारिणि
करथिन सभक कल्याण...सब मिलिकय करियनु आरती।। सीता बिराजथि...
सीतारामक जोड़ी अति मनभावन,नैहर सासुर कयलनि पावन
सेवक छथि हनुमान...सब मिलिकय करियनु आरती।।सीता बिराजथि...
ममतामयी माता सीता पुनीता,संतन हेतु सीता सदिखन सुनीता
धरणी-सुता सबठाम...सब मिलिकय करियनु आरती ।। सीता बिराजथि...
शुक्ल नवमी तिथि वैशाख मासे,’चंद्रमणि’ सीता उत्सव हुलासे
पायब सकल सुखधाम...सब मिलिकय करियनु आरती।।
सीता बिराजथि मिथिलाधाम सब मिलिकय करियनु आरती।।।
DrChandramani Jha
चंद्रमणिझा,
9 1 - 9430827795

गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

मिथिला में मैथिलि फिल्लमक भूमिका



मिथिला  में  मैथिलि  फिल्लमक   भूमिका --

किछु मैथिल  फिल्लम ,  जे आजुक  समय  में  मिथिला  लेल  बरदान  सवित  भसकैत  अछि , जाही  सन  भाषा  में  बढ़ोतरी  और  मनोरंजनक संग आई इन्कोम के   प्रमुख  साधन  बनत , गाम- घर  में  पसरल  भोजपुरी   के  चलन  किछु  कम  होइय्त , और मिथिला  में  मैथिलि  फिल्लम  फेस्टिवल  के  कार्य  सेहो   निम्न  होयत  से  आशा  कैल जासकैत  अछि  ,  एक   नजीर  अहूँ   दी  अहि  पर देखल जाओ   ---

1.ममता गाबै गीत  सन  सुरुवात  कैल  मैथिल  फिल्लमक  आब  अप्पन  रफ़्तार  पकैर   चुकल  अछि , ई फिल्लम  निकलला के  बद  मैथिलि  फिल्लम  पर  बरेक  जरुर  लगी  गेल् छल , मुदा  २.  सस्ता जिनगी  महाग  सेनुर  ई  साबित  केलक  जे  नै  मिथिला  में   मैथिलि फ़िल्मक बहुत  अभिलाषी  छैथि , ई  फिल्लम निकलक  बाद  किछु बिराम  जरुर  लेलक  ,मुदा  आब  निरंतरण में कत्तार लागल जैत  अछि ,  देखल  जाओ  ओहि  पर एक जानकारी ।

३. आओ पिया हमर  नगरी ४. ममता  ५ . कखन हरव दुःख मोर  ६ . दुलरुवा बाबू  ७.  सेनुरक लाज  ८ . गरीबक  बेटी ९ . सोहागिन  १ ० . सजना  के अगना में सोलहो सिंगर  १ १ . मुखिया जी  १ २ . सेन्हक  बंधन     १ ३. पिया  भेल परदेशी  १ ४ . सेनुरिया   १ ५ . सजना अहाँ बिना  १ ६ . कमला  १ ७ .  मिथिला  के  योधा  १ ८ .अफवाह   १ ९ . प्रितीया   २ ० . हम नै जयाव पिया के गाम   २ १ .  मरी गेल  बेटी  दहेजक खातिर  २ २ . सब दिन सौस के एक दिन पुतोह के  २ ३  कर्म आ  भाग्य  २ ३ . हमर गाम  अप्पन लोक   २ ४ .  चट  मगनी पट बियाह  २ ५ खुरलूची  , 26. एक चुटकी  सिंदूर

आ और  किछु  निर्माणधीन  सेहो  अछि   , जेनाकी   -  १.  सेनुरक मोल बड  अनमोल  २ . हीरो तहर दीवाना  ३ . रंगवाज  छोरा  ४ . छुटत  नै प्रेमक रंग ५ . अछिंजल  ७ . घोघ में चाँद  ८ .  हमर सोतिन   ९ . हरबरी  बियाह  कानपट्टी  सेनुर  १ ० .  छोटकी कन्या बडकी कन्या   १ १ . चैन पुर वाली  १ २ . संस्कार  १ ३  . हमरो  करा द बियाह  १ ४  . घटकैती   १ ५ सोतिनक  बेटी   १ ६ . अयं रोँ  घुटरा ई की केलही  इतियादी

आब अहिं  सब  कहु  मात्र  २-३  वर्ष  में  मैथिलि फिल्लम  एंडस्ट्रि  कतय  पहुँच  गेल  ,  किछु  एहो  जानकारीभेटल  हन  जे किछु कलाकार  ओ  हिंदी  और  भोजपुरी  छोरी  मैथिलि  दिस  मुहँ  मोराला हान    , ई   मिथिला  लेल  गौरव  के  बात  अछि ,  अहं  सब  एक  नजर  अहि  प्रोमो  पर सेहो  ध्यान  दी  -   जय मैथिल  जय मिथिला ,


 

गुरुवार, 28 मार्च 2013

मिथिला राज्य लेल ४ दिना अनशन:


   मिथिला राज्य ---
लेल ४ दिना अनशन: युवा पीढी द्वारा (पृष्ठभूमि आ कार्यक्रम आयोजन: विस्तृत समीक्षा). अनशनकारी कवि एकान्त द्वारा ४ दिनक अनशनक फैसलाक संग मिथिला राज्यक माँग प्रति युवामें चेतना जागृतिक एक महान अवसर भेटल से सोचि जनबरी ९, २०१३ केर 'कन्नारोहट कार्यक्रम'में कार्यक्रमके भव्यतापूर्व आयोजन करबाक निर्णय लेल गेल छल। कवि एकान्तक हृदयमें अनशन प्रति जिम्मेवारी आ कार्यपथ-निर्माण संग योजनाक सुन्दर निष्कर्ष निम्नरूपे कैल गेल छल: "आन्दोलन मे ऐबाक उद्देश्य इहो रहय " मिथिला राज्य लेल संघर्ष आ संघर्ष मे लागल मैथिल आ संगठन के एका "। क्रमशः एका बनय आ से होईत प्रतीत भ रहल अईछ। एहि कार्यक्रम मे जे रहथि मैथिल रहथि। अप्पन पार्टी आ बिचारधारा स उप्पर उठी के एकटा मैथिल मात्र आर किछो नहि। आरंभिक कन्नारोहट आ अप्पन अप्पन क्वाथ के बोकर्लाक उपरांत शुद्ध भय सब मैथिल सभक बिचार रहय जे एहि आन्दोलन के एक भ'य उद्देश्य लेल लाड़ल जाई। प्रवीन भाई के बैजू बाबू सँ सेहो गप्प भेलैन, ओहो आशीर्वाद देलाह आ हुनक समर्थन सेहो भेटल (प्रवीन भाई के वार्तानुरुप आ उपश्थित अमरेन्द्र भाई के कथनानुसार )।

  ज्ञात हो की एहि आन्दोलन के एकटा मैथिल बनि लड़बाक निर्णय के सर्प्रथम समर्थन पूज्य धनाकर बाबू आ आदरनीय रत्नेश्वर बाबू केने रहथि आ संस्थाक रूप मे AMP के पूर्णिया ईकाई केने अछि। आन्दोलन मे अनशन के एहि अध्याय के संचालन लेल प्रवीन भाई आ दिवाकर भाई मे नीक बहस आ सार्थक बर्तालाप के परिणाम सुखद रहल जे सब अप्पन अप्पन बेदना के मुखर भ' क' रखलाह आ प्रस्ताब रहल जे: * मिथिला राज्य के निर्माण आ मिथिला मैथिली मैथिल के बिकाश के आधारभूत कारक मानि आन्दोलन के आगाँ बढेबाक आवश्यकता अईछ। * समग्र मिथिला राज्य के माँग के छोड़ी, भारत मे मिथिला राज्य के माँग के लक्ष्य कयल जाई। * आन्दोलन international border के आदर करैत नेपाल स्थित अप्पन मैथिल स्वजन के लेल संबेदना के प्रति सदैब कटिबद्ध रहय, जेना नेपाल स्थित मैथिल छथि। अस्मिताक संघर्ष दुनू दिस चलि रहल अईछ। * आन्दोलन ब्यक्ति स उप्पर उठी कय हो उद्देश्य लेल हो, मैथिल के संगठित आ एकाकार करबाक माद्दा मात्र मुद्दा मे अछि आ ताहि हेतु मुद्दा भेल नायक। समस्त आन्दोलन के स्वाभाबिक प्रतिनिधित्व मिथिला राज्य निर्माण के उद्देश्य हो। * कहब बहुत आवश्यक नहि जे आन्दोलन मे समस्त मैथिल संगठन के समर्थन देबाक लेल आग्रह करबाक बिचार भेल। * उद्देश्य के साधबाक लेल Joint Committee बनेबाक प्रस्ताब भेल। * अनशन के उपरान्त मिथिला राज्य निर्माण लेल एकटा joint memorendum देबाक बिचार भेल, से हो कोना ई बिचार के बिषय रहल। * प्रवीन भाई आन्दोलन के एहि गुटनिरपेक्ष स्वरुप के अधिक स अधिक मैथिल तक पहुँचेबाक सार्थकता पर जोर देलाह। हम एतबे कहब मिथिला आ मैथिली सब मैथिलक के छी, चाहे ओ कतुको होथि, बजैत कोनो भाषा होथि मुदा ह्रदये मैथिल होथि। मिथिला राज्य के निर्माण के एहि महायज्ञ मे अप्पन भूमिका निर्धारण पर बिचार करू, इतिहास के बनबा के प्रक्रिया मे अप्पन योगदान पर बिचार करू। समय आबी गेल जे "मूक दर्शक के भुमिका के तलांजलि दय इतिहास निर्माण मे आबी, अप्पन मैथिली बचाबी, अप्पन मिथिला बनाबी" जय मिथिला !! जय मैथिली !! जय मैथिल !!" (कवि एकान्तक विचार, जनवरी १०, २०१३ फेसबुकपर)। -------------- दिल्ली सऽ वापसी करबाक क्रममें अपन विचार जे सभक समक्ष प्रेषित केने रही जनवरी ११, २०१३ केँ: "आउ दिल्ली यात्रा के समेटी। काल्हि प्रस्थान करबाक अछि, से सभक ध्यानाकर्षण महत्त्वपूर्ण विन्दु तरफ चाहब, कृपया ध्यान दी आ सहयोग हेतु वचन दी। १. कवि एकान्त द्वारा मिथिला राज्यके माँग लेल ४ दिनक अनशन कार्यक्रम। प्रस्तावित तारीख मार्च २२-२५, २०१३। स्थान: जन्तर-मन्तर, दिल्ली। संयोजन भार: दिवाकर बाबु। २. मैथिल युवा द्वारा मिथिला राज्य लेल वृहत धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम। स्थान, तिथि उपरोक्त कार्यक्रम के समापन दिन घोषणा कैल जायत। संयोजन भार: सागर मिश्र। उपरोक्त कार्यक्रम १ लेल कवि एकान्तजी अपन जन-सम्पर्क दिल्ली लगायत समस्त मिथिलामें कय रहल छथि। जतेक संघ-संस्था आ सहयोगी मैथिल व्यक्तित्व सभ छथि तिनका सभसँ दिल्लीमें सभ जगह घूमि-घूमि सहयोग सदेह उपस्थिति लेल प्रथम द्वितीय सदाचार-विचार अनुरूप जे स्वेच्छा हो ताहि तरहें याचना कैल जा रहल छैक। सभकेँ अपन माटि-पानि-इतिहास आ पहचान लेल राज्य निर्माण जरुरी कहि सहयोग हेतु अग्रसर होयबाक निवेदन कैल जा रहल छैक। ई पहिल बेर हिम्मत देखौनिहार मिथिलाक युवा वर्ग सँ मैथिलीसेवी कवि थिकाह जिनका प्रति अपार समर्थन बनेबाक जिम्मा हमहुँ लेलहुँ, स्वेच्छा सँ। हम ई नहि देखय लगलहुँ जे एहिमें के-के छथि आ किनका-किनका सँ हमरा पटरी बैसैत अछि आ कि हमर सिद्धान्तके माननिहार छथि। हम केवल यैह देखलहुँ जे हम कि कय सकैत छी, आ कि करबाक अछि, कोना करब। आर ताहि अनुरूप आन्दोलनक प्रासंगिकता ऊपर समस्त मिथिला समाजमें विभिन्न मिडिया द्वारा एहि बात के प्रसार जे उपरोक्त कार्यक्रम जे मिथिलाक अस्मिता जोगेबाक लेल कैल जा रहल अछि ताहिमें सभक शुभकामना आ वाँछित सहयोग देल जाय। अही क्रममें जन-जन तक बात पहुँचय जे आइ धरि मिथिला लेल कि-कि भेल, कतेक सफलता-असफलता, आदि पर उल्लेखणीय चर्चा कराओल जायत आ बेसी सँ बेसी लोक के जोडल जायत। जोडय लेल किनको ५०० टाका के नोट पठाय वा गर्दैनमें गमछी बान्हि बलजोरी राजनीतिक रैला जेकाँ नहि आनल जायत, बल्कि समस्त मिथिला सँ जतेक कलाकार-रंगकर्मी-पेशाकर्मी-जातिय संगठनकर्मी आदि छथि तिनका सभकेँ आह्वान कैल जायत जे एक जोरदार प्रदर्शन लेल दिल्ली आबी आ भारत सरकारकेँ मजबूर करी जे मिथिला राज्य निर्माण लेल सोचैथ आ शीघ्रातिशीघ्र सम्बोधन करैथ। खाली भाषणमें बिहार राज्य द्वारा मिथिलाक विकासक बात बहुत भेल, मुदा असलियत एतबी जे दलाल-ठीकेदार-हाकिम-होशियार लेल छूद्र-लूट-खसोट के ललीपप आ आम जनतामें जातिवादिताके झगडाके अलावा मिथिलाके दोसर किछु नहि देल गेल एखन धरि। सुशासनके सरकार सेहो बस गपहि टा देलक, जमिनी सुधार बस खोखला प्रमाणित भेल। एकर सभक लेखा-जोखा कैल जाय आ केन्द्रके विशेष पर्यवेक्छक मिथिलाक जमिनी यात्रा करय आ उपेक्छा के हर संभव वैकल्पिक समाधान ताकय। मिथिलासँ आयल सांसद-विधायक सभकेँ ई सोचय पडत जे आखिर विकासक कोन गति मिथिला लेल चलल, राज्य वा केन्द्र सरकार के द्वारा। विकास लेल सेहो राज्यक निर्माण वांछणीय अछि। पहिल कार्यक्रमके सफलतापूर्वक पूरा भेला उपरान्त बस दोसर महत्त्वपूर्ण कदम यैह जे मैथिल युवा द्वारा धरना आ प्रदर्शन के संपूर्ण भार लैत आन्दोलन के ताबत निरन्तरता देल जाय जाबत मिथिला राज्य ससम्मानपूर्वक बनि नहि जायत। हरि: हर:!" -----------

     यैह आन्दोलनक पृष्ठभूमें छल निम्न सोच: "मिथिलाक माँग केकरा लेल अवाञ्छित? हालहि २८ दिसम्बर, २०१२ ई. विराटनगर में आयोजित विद्यापति स्मृति पर्व समारोह २०६९ में आयल छलाह विशिष्ट अतिथि भू.पू. अररिया साँसद मा. सुखदेव पासवानजी, ओ दिल्ली रहैथ वा कतहु, लेकिन हर वर्ष एहि समारोह में अपन गरिमामय उपस्थिति सँ आम जनमानस के ओ दाकियानूस धारणा के झूठलाबैत छथि जे मैथिली आ मिथिला बस किछु उच्च जातिके माँग मात्र थीक। हमरा लिखैत हर्ष भऽ रहल अछि जे सम्माननीय अतिथि ओहि मंच सँ घोषणा कयलाह - बहुत जोर दैत बजलाह जे हम आइ यैह मंच सऽ घोषणा करैत छी जे बिहारके १८ जिला मिलाय मिथिला राज्य बनय। ओ किछु जिला के नाम तक लेलाह आ ताहिमें शामिल छल कटिहार, किशनगंज, अररिया, पुर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, खगडिया, समस्तीपुर.... आदि। छद्म बुद्धिके पत्रकार आ बिना पेंदी के लोटा समान कतेको चुटपुट नेता एहि आह्लाद के शायद नहि बुझि सकत, लेकिन हमरा गर्व अछि सुखदेव पासवान जी पर, गर्व अछि मेहताजी (फारबिसगंज पूर्व विधायक) पर आ गर्व अछि हर ओ गूढ रहस्य बुझनिहार बुजुर्ग अनुभवी पत्रकार आ नेतापर जे मिथिलाक सम्मान लेल हर समय तैयार रहैत छथि आ हर सतह पर आवाज उठबैत छथि। तहिना नेपाल सरकार के उप-प्रधान तथा गृहमंत्री आ उपरोक्त समारोहके प्रमुख अतिथि मिथिलाक गरिमाके प्राचिनतम् कहैत संवैधानिक सम्मान हेतु वचन देलाह आ बजलाह जे बिना मिथिलाक सम्मान देने नेपाल देशके सम्मान नहि भेटतैक। ओ खूलिके बजलाह जे मधेस एक बनेनाय बहुत कारण सँ संभव नहि छैक तऽ बारा सऽ पूब झापा धरि एक राज्य बनाउ जेकर नाम मिथिला मधेस राखू, हमरा एतराज नहि अछि। ई दू घोषणा उपरोक्त मंच सँ साधारण नहि छलैक। लोक आइ-काल्हि १७ नव नाम के पाछू जमानी-दीवानी गबैत अछि, मुदा गहिराई में जाय सोचैत नहि अछि जे केवल नामकरण कैला सऽ सीमाँचल-धर्मांचल-बूरिराजान्चल-पूर्वान्चल कयला सऽ मिथिलाक गरिमा ऊपर ग्रहण नहि लगा सकैत अछि। मिथिलाक जे महासागर भूगोल, इतिहास, भाषा, साहित्य, संस्कृति, पहचान आ हरेक सन्दर्भ जे एक राज्य हेतु गणतंत्रमें पूरा करैत अछि से स्वत: प्रमाण बनि पहाड समान ठाड्ह होइछ आ भूकयवाला अदूरदर्शी लोक के सीना तानिके कहैछ जे मिथिला के सम्मान बिना तोहर कोनो मान नहि। तदापि मिथिला अवाञ्छित अछि आ एहि सत्य सँ हम सभ पाछू नहि हँटि सकैत छी। प्रश्न उठल जे अवाञ्छित अछि... तऽ केकरा लेल? आउ मंथन करी! १. जनसाधारण जनमानस: जे आइ धरि बोनि - मजदूरी करैत रोजी कमेलक, ओकरा लेल धैन सन! ओकरा तऽ लालटेन धरा दियौक आ ईशारा कय दियौक... बुझि गेलहक न... यैह छाप थिकैक। केओ दोसर दिस सऽ आयत आ गाँधीजी छाप मैन्जनके हाथमें दैत कहत जे बस एहि बेर प्रभाकर बाबु के पार लगा देबैन, छह महीना के जोगार बखारी सऽ उठा लेब। मैन्जन तैयार तऽ सभ तैयार। ओकरा लग राज्य के कि माने छैक आ कि पहचान के महत्त्व ताहि सभ सऽ सरोकार कि? तखन प्रयासो किछु नहि भेलैक अछि केकरो द्वारा जे राज्य किऐक आ तेकर सार्थक प्रभाव कोना से मानय पडत। १३३-१३४ बेर यात्रा प्रवीण केलक लेकिन ध्यान सभ दिन ओहि बकथोंथी करयवाला टा पर रहलैक। आबो यदि नजैर खुलल छैक तऽ आगू जाय किछु करय, बस! बुझबय ओहि मिथिलाक गणकेँ जे विदेह राजा जे सम्पन्नता, ऐश्वर्य, रिद्धि आ सिद्धिके संग समस्त मिथिला भूमिके शुद्ध-शिक्त रखलाह जे केरो के पात पर देवता के इहा-गच्छ - इहि-अतिष्ठ कहलापर दौडल आबय पडैत छन्हि से फेरो होयत आ अहीं सभक प्रत्यक्छ सहभागिता सँ पूर्ण समावेशी आ प्रदेश-विकास सरकार बनत जे बस मिथिले लेल सोचत। आइ धरि जे ६० वरख अहिना बहलाबैत-फुसियाबैत बिता देलक स्वतंत्र भारतमें से मिथिला बनेनहिये कल्याणक मार्ग प्रशस्त होयत। जे शिक्छा हिन्दी आ अंग्रेजीमें देबाक चलते सभक धियापुता पढाइ करबा सऽ वञ्चित रहि जाइत अछि से मातृभाषा मैथिलीमें पढेलापर सभ आराम सऽ साक्छर बनत। मजदूरी करबाक लेल दिल्ली-मुंबई नहि जाय अपन राज्यमें रोजगार भेटत। अपन खेत के पटाबय लेल उधारके दमकल नहि अलग-अलग नदी सँ चिरल अपनहि नहर होयत। पानिक कमी थोरेक न अछि, बस बेईमान व्यवस्थापन आ जाहि नामपर बिहारी नेता लूट-खसोट मचबैत अछि तेकरा नियंत्रण करबा सऽ काज होयत। आ मनमें शंका जे ब्राह्मण बडका जातिक लोक सभ ऊपर बैसि लूटत तेकर प्रतिकार बहुल्यजन कोना करैत छैक से आब ककरो सऽ छूपल नहि अछि। अत: अपन राज्य अपनहि अधिकारवाली सूत्रपर सभके जुडैत काज करबा लेल मिथिला राज्य निर्माण करू। २. मैथिली बिसरल लोक: अफसोस जे मैथिली ऊपर ततेक रास डांग मारल गेलैक, अपनो आ सहजहि बहरियो द्वारा जे रोजीके भाषा पूर्णरूपेण मैथिली नहि बनि सकल आ स्वत: लोक मैथिली बिसरय लागल। आब जे मैथिली बिसरि गेलाह तिनका लेल मिथिला राज्य के प्रासंगिकता पुन: एक उच्च बुझनुक तवका मात्र लेल बाँचल, बाकी सभ जहिना-तहिनामें खुश छथि। कोनो आत्मसम्मानके भूख नहि, जखन मैथिली बिसरा गेल, दोसर भाषा अपना लेलहुँ तऽ आब मिथिला हो, बज्जिकाँचल हो, अंग प्रदेश हो, सीमांचल हो, कोसी प्रदेश हो, झारखंड हो, दियारा प्रदेश हो या जे भी हो - सभ सऽ उत्तम बिहारहि में रहब। खूब जाति-जाति भोकरब आ कहियो लालटेन जरायब तऽ कहियो तीरे मारब, कमल तऽ फूलाइ सऽ रहल आ हाथ तऽ कहिया नऽ कटि गेल जे मिल बन्द भेने पार। अहू दिस ध्यान कि देबय पडतैक जे मैथिली भाषा हो या मैथिली के भाषिका, सभके मिथिलाक पूर्ण भाषा मानि बस ऐतिहासिक पहचान प्रति सम्मान लेल जोडय के काज करैत मिथिला निर्माण लेल एकजूट करय पडतैक। संगठन एक बेर तऽ नेताजीके डायरीमें बनैत छैक लेकिन पुन: संगठनात्मक कार्य कि करी, प्रगति कि भेल, कतेक दिन प्रखंड पर धरना भेल, कतेक गरीब के राशन उपलब्ध करबाओल गेल, कतेक विकासक काजके लेखा-जोखा लेल गेल.... सभ नदारद! आ जे स्थापित राष्ट्रीय पार्टी सभ छैक तेकरा तऽ कोन योजना अन्तर्गत कतेक पाइ निर्गत भेल आ लूटय लेल के सभ छें ताहि सऽ फूर्सते नहि, भाँडमें गेल मिथिला या बिहार या भारत या पहचान या आत्मसम्मान! ३. बिहार सरकार के कर्मचारी: मलफाइ उडबय लेल मोट तनख्वाह भेटिते यऽ आ हमरा कोन लेना-देना है ई आन्दोलन-फान्दोलन से! होत तब अच्छा है, ना होत तबो अच्छे है। एहि वर्गके जोडबाक लेल आर्थिक भार दैत आन्दोलन करय के आवश्यकता, जाबत ई वर्ग चाप महसूस नहि करतैक तऽ आन्दोलन नहि सफल होयत आ सभ दिन खाली आली-हौसे चलैत रहत। ओना कोनो कार्य लेल बुद्धिजीवी प्रकोष्ठके निर्देशन जरुरी! ४. कलेजिया विद्यार्थी: 'यार! हमरे सेन्टर पर तऽ खूब चोरी हुवा, तोरा सेन्टरपर केना हुवा?' यैह अर-दर बहस चलैत छैक कारण नागेन्दर बाबु के समय सऽ जे रोग लगायल गेल चोरी सेन्टर के तेकर दुष्परिणाम आइ धरि भोगि रहल अछि विद्यार्थी वर्ग। आदर्शता गायब छैक। धोइधफूल्ला मास्टर सब पढेतैक कि कपार बस गप लडबैत छैक, नोट लिखबैत छेक, खूब घोंकबैत छैक, पास करबैत छैक। ओ विद्यार्थी भला कि बुझय गेलैक आत्मसम्मान-संस्कृति-पहचान? तऽ झंडा धराय कार्यकर्ता एकरहि सभके बनाबय पडतैक। स्वत: धीरे-धीरे जानकारी बढैत जेतैक। काजो प्रबलताके संग आगू बढतैक। ५. मैथिलानी: 'चुल्हा फूकय सऽ फुर्सत भेटय बौआ तऽ अहाँके आन्दोलनमें आबी?....' 'धू जाउ! हुनका एहि सभ सऽ घृणा छन्हि।......' 'अहाँ सभ हमरा सभके पूछबो करैत छी?....' ईत्यादि! बस बाजिके खानापुर्ति! बाकी किछु नहि। केओ लाजे परेती तऽ केओ कुनु बहन्ने! संगठन विशुद्ध हिनकहि सभके हो आ किछु काज लेल संपूर्ण जिम्मेवारी हिनकहि सभके देल जाय तऽ सुधारक गुंजाईश छैक। बाकी हम अनुभवहीन छी एहि मामले! अपने घरवाली नहि टेरती तऽ दोसर के के पूछैत अछि। ;) एहिमें बहुत रास विन्दुपर सोचब हमरा लेल समयाभावमें नहि भऽ पायल, यदि संभव हो तऽ किछु महत्त्वपूर्ण विन्दु जरुर जोडी! हरि: हर:!" तदोपरान्त जेना सामान्यतया मैथिल द्वारा घोषित हरेक कार्यक्रममें होइत छैक जे गूट-निरपेक्ष मानितो खूब गूटबाजी आ वैमनस्यता पसारबाक नांगट खेल, किछु तहिना सकारात्मक सोच संग नियोजित एहि कार्यक्रममें भेलैक आ संवादविहीनताक कारण, एक-दोसराक पीठ पाछू कूचेष्टापूर्ण निन्दाक खेल सँ सशक्त आन्दोलनके जगह निरीह आ कामचलाउ आन्दोलन सेहो कठोर प्रतिबद्धता आ सात्त्विकताक संग २२-२५ मार्च, २०१३ केर ४ दिना अनशन अपार सफलतापूर्वक इतिहास रचैत पूरा भेल। मिथिला निर्माण में एहि आन्दोलनक भूमिका युवावर्गमें मिथिला-राज्यक माँग प्रति सचेतना जाग्रत केलक। उतार-चढाव सेहो भेल कारण हमर बात सऽ केकरो टीस आ केकरो बात-व्यवहार सऽ हमरा टीस उठब मैथिलक पुरान पहचान थीक। लेकिन जे मूल उद्देश्य छलैक से पूरा भेलैक। एक कवि सऽ अनशनकारी तीन मिथिलाक धरतीपुत्र बनि गेलाह - नमन कौशल कुमार व मनोज झा केँ जे स्वस्फुर्त आ बिना केकरो कोनो उकसाहटक एहि पवित्र आन्दोलनकेँ चारि चाँद लगा देलाह। कवि एकान्तकेँ मना केला के बावजूदो अनशनक प्रारूपपर असगर ठाड्ह राखब आ बहुत अन्तिम क्षणमें ई स्पष्ट करब जे समन्वय समिति या कार्यक्रम आयोजन हेतु एक संयुक्त कार्यदल नहि बनल, कोष निर्माण नहि भेल, के सब औता तय नहि भेल, ज्ञापन पत्र कोना बनत, कि बनत... किछु स्पष्ट नहि भेल... मिडिया सहयोग, भारत सरकारसँ वार्ता करबाक लेल प्रतिनिधि मंडल.... सभ बात लेल कोनो पूर्व योजना नहि तैयार भेल.... एतेक तक कि मंच केना बनत, साउण्ड सिस्टम, उपस्थिति पुस्तिका.... कोनो पूर्वाधार के किछुओ इन्तजाम नहि भेल... ई समस्त बात मानू जे अपने आप में कतेक भयंकर डरावनापूर्ण आ लज्जास्पद छैक... तखन दोष केकरो नहि बस अनुभवहीनता मात्र हावी बनल। अनुभवहीनता तऽ सोझाँ देखायवाला वस्तु थीक, मूल में कारक किछु आर रहल जे कोनो सार्वजनिक स्थलपर रखला सऽ हमरा सभक नुकसान अछि, बस ई बुझू जे मैथिलक आपसी मेलमें व्यक्तिगत स्वार्थक भयानक मारि अछि आ दुष्परिणाम जे गूटबाजी नहि छूटि रहल अछि। लेकिन अपन थोर-बहुत अनुभव सँ कहयमें संकोच नहि भऽ रहल अछि जे 'महादेव सर्वोपरि छथि' आ कोनो हृदय सँ विचारल कार्य पूरा करबाक लेल आइ धरि ओ स्वयं ठाड्ह होइत रहलाह छथि, ठीक तहिना कवि एकान्त पूर्व-संध्यापर विचारल योजना तहत बस माँ काली के शरणापन्न होइत अनशन स्थलपर विदा भेलाह आ बाकी अपनहि महादेव त्रिशूल नचबैत सभ कार्य अपराह्न होइत-होइत डोरिया देलखिन। दुनियामें ढिंढोरा पीटनिहार भले किछु बाजि एहि आन्दोलनक मर्मके तुच्छता आ छूद्र नाम लेल झाइल बजबैथ, मुदा काजक रहल केवल बाबा बैद्यनाथक कृपा! :) बस शरणागत भक्त लेल ओ स्वयं सेहो साक्षात् माँ पार्वती (काली) केर कृपा संग ४ दिनक अनशन मानू ४० मिनटमें तय कय देलनि। एक सऽ एक विचार कयलनि, क्रान्तिक बिगूल बाजल, नवपथ सोझाँ आयल आ आब जल्दिये निरंतरताक क्रम बनत। मिथिलाक धरतीपर - भारतक राजधानीमें - दुनू जगह तऽ कम से कम मैथिल प्रण कय लेलाह जे अपन सुसुप्त शक्तिकेँ जगायब। उपरोक्त अनशन मानू जे जाम्बवन्तजी समान हरेक सुच्चा मैथिलमें हनुमानजीक शक्तिके आभान करौलक। आब जल्दिये नव-नव घोषणा सँ पुरान संस्थाक संग नवयुवा डेग बढबैत चलताह से हमरा विश्वास अछि।