(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

लखना के बाबू

लखना के बाबू 
लखना के बाबू लखना स कहला कि ,
जो जा क हटिया स तरकारी ल क आ .
झोरा -झपटा ल क लखना भेल विदा .
अधे बाट में किछु लोग लखना के लेलेक उठा ,
पट्टी खुजल त  देखलक बियाह क मरबा .
लखना बुइझ  गेल की हैत ओकर वियाह ,
मुस्काईत लखना बियाह क लेलक  ,
ओम्हर बाबू गाइर द  क ओरान क देलक ,  
इ छौरा पी क कतौ ओंघराइत  हैत ,
या दोस-महिम  के संग बौआइत  हैत .
या देख गेल हैत  नटुआ के नाच ,
इ बह्सल छौरा मानैया ने एकोटा बात .
दोसर दिन हुनका पता लागल की ,
लखना कोबर  में बैसल अछि वर बनल ,
केलक कोना बियाह हमरा बिन कहल ?
नै यौ  अई में लखना के कोनो दोष नै ,
ओकरो नै बुझल छलै कि आई ओकर बियाह भ जेतै .
इ सुइन  लखना के बाबु बजला ,
आई स हमही हरदम हटिया जैब ,
तखने कियो बाजल ,
ह यौ  सत्ते कहै छी  नै त दोसरो  बेटा  के दहेज़  गमैब ,
इ बाई नै छै महराज ,
वियाह करब लै कियो हमरो  त  कहियो उठैत ।
हा हा हा .........................
(स्वरचित)


सोहराय  पंडोल  मधुबनी ,मिथिला  , बिहार 

सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

कंजूस मास्टर


एकटा मास्टर जी छला बड  कंजूस ,
हुनक कंजूसी स पत्नी रहै छली बड रुष्ट .
साबुन खर्च के डर स चिकनी माईट  स नहाई  छला ,
धोती   फटइ के डर स गमछे पहिर घुमैत छला .
हुनक कंजूसी स पूरा गाम छल परिचित ,
भिखमंगो हुनका स  माँगइ  में रहै छलै भयभीत .
एकटा  हुनकर खिस्सा  सुनैब ,
एहन कंजूस नै  कहियो देखने हैब .
एक बेर 100 के नोट  पत्नी के देलखिन ,
हर्षित भ पत्नी  खर्च  केलखिन .
हुनका की पता की ?
मास्टर जी ओ पैसा मंगथिन .
किछु दिन बाद ओ पत्नी स कहला,
देने रही पैसा से लाउ  त  कमला .
हुनक हल्ला के डर स कमला,
चूपे-चाप पईच ल क हुनका देलखिन ,
पईसा लईते मास्टर जोर स चिचेयेला ,
बाज  हरासंखनी  पइसा  कत खर्च केलै?
कमला अबाक !
की खर्चक  बात हिनका कोना पता ?
डीरियाइत मास्टर बजला ,
मुझौसी हम देने रहियौ 100 के नोट ,
2 ता पचास कोना भेलौ ?
तू हमरा की बुझइ  छै गदहा ?
कमला बस एतबे कहली ,
जा हउ  दैब एहन लिच्चर  तू कोन माईट  स बनेलअअ ........ .


सोमवार, 27 अगस्त 2012

घोंघाउज आ उपराउंज (हास्य कविता)

घोंघाउज आ उपराउंज

(हास्य कविता)



हम अहाँ के गरिअबैत छि

अहाँ हमरा गरिआउ

बेमतलब के करू उपराउंज

धक्कम-धुक्की करू खूम घोघाउंज.



कोने काजे कहाँ अछि

आब ताहि दुआरे त

आरोप-प्रत्यारोप मे ओझराएल रहू

मुक्कम-मुक्की क करू उपराउंज .



श्रेय लेबाक होड़ मचल अछि

अहाँ जूनि पछुआउ

कंट्रोवर्सी मे बनल रहू

फेसबुक पर करू खूम घोघाउंज.



मिथिला-मैथिल के नाम पर

अहाँ अप्पन रोटी सेकू

अपना-अपना चक्कर चालि मे

रंग-विरंगक गोटी फेकू.



अहाँ चक्कर चालि मे

लोक भन्ने ओझराएल अछि

अहाँ फेसबूकिया ग्रुप बनाऊ

अपनों ओझराएल रहू हमरो ओझराऊ.



ई काज हमही शुरू केलौहं

नहि नहि एक्कर श्रे त हमरा अछि

धू जी ई त फेक आई.डी छि

अहाँ माफ़ी किएक नहि मंगैत छी?



बेमतलब के बड़-बड़ बजैत छी

त अहाँ मने की हम चुप्पे रहू?

हम की एक्को रति कम छी

फेसबुक फरिछाऊ मुक्कम-मुक्की करू.



आहि रे बा बड्ड बढियां काज

गारि परहू, लगाऊ कोनो भांज

कोनो स्थाई फरिछौठ नहि करू

सभ मिली करू उपराउंज आ घोंघाउज.
http://kishankarigar.blogspot.com 

गुरुवार, 23 अगस्त 2012

मिथिला राज्य के धरना में जुटल मैथिल समुदाय ,


मिथिला राज्य  के  धरना में  जुटल  मैथिल  समुदाय ,




मिथिला राज्य  के  धरना में  जुटल  मैथिल  समुदाय ,
चल -चित्र  में  सेहो  देखू -











बुधवार, 1 अगस्त 2012

अहींटा एकटा नीक लोक छी . (हास्य कविता)

 अहींटा एकटा नीक लोक छी .
                           हास्य कविता

"कारीगर" कतेक दिन बाद परीक्षा पास केलक
ओ त बड्ड बुडिबक अछि
अहाँ त बड्ड पहिने बड़का हाकिम बनि गेलौहं
ताहि द्वारे अहींटा एकटा नीक लोक छी .

अहाँक सफलताक  राज त
कहियो ने कियो कही सकैत अछि
अहाँ अपने लेल हरान रहैत छी
आ अहींटा एकटा नीक लोक छी .

सर समाज सँ कोनो मतलब नहि रखलौहं
परदेश मे दूमंजिला मकान बना लेलौहं
गाम घर सँ स्नेह रखनिहर कें
अपनेमने अहाँ बुडिबक बुझहैत छी .

अप्पन सभ्यता  संस्कृति अकछाह लगइए
ओकरा अहाँ बिसरै चाहैत छी
परदेश मे रंग-बिरंगक संस्कृति मे
अहाँ के नीक लगइए खूब मगन रहैत छी.

धियो-पूता के मातृभाषा नहि सिखबैत छि
ओकरा अंग्रेजी टा बजै लेल कहैत छी
मत्रिभाषक आंदोलन चलौनिहर बुडिबक
आ अहींटा एकटा नीक लोक छी.     

गाम घर पछुआएल अछि रहिए दिऔ
नहि कोनो माने मतलब राखू
अहाँ ए.सी. मे बैसल आराम करैत छि
अहींटा एकटा नीक लोक छी.

सर-समाज सँ स्नेह रखलौहं तहि द्वारे
हम बकलेल बुडिबक घोषित भेल छी
अहाँ रुपैया कम ढ़ेरी लगेलौहं
तहि द्वारे अहींटा एकटा नीक लोक छी.

खली रुपैया टा चिन्हैत छी
अहाँ बिधपुरौआ बेबहर करैत छी.
पाइए अहाँ लेल सभ किछु
आ अहीं टा एकटा नीक लोक छी.

कियो पहिने कियो बाद मे
मेहनत करनिहार त सफल हेबे करत
ओकरा अहाँ प्रोत्साहित कियक नहि करैत छी?
यौ सफलतम मनूख अहींटा एकटा नीक लोक छी
.

सोमवार, 30 जुलाई 2012

नया संघीय नेपालमें मिथिला राज्य लेल अहिंसात्मक सत्याग्रहरूपी माँग संग धरना पर बैसल मिथिला राज्य संघर्ष समिति - जनकपुर के रामानन्द चौक पर बम द्वारा हमला कैल गेल। एहिमें घटनास्थल पर चारि गोटा निर्दोष सत्याग्रही के मृत्यु भऽ गेल जखन कि लगभग २४ आदमी घायल भऽ गेलाह। नेपाल में कोनो आन्दोलनमें भाग लेनिहार पर एतेक शक्तिशाली बम के प्रयोग आ सेहो सुनियोजित ढंग सऽ होयब अनबुझ रहस्य के तरफ तऽ इशारा करिते अछि संगे मिथिला के पहचान पर एहेन जबरदस्त चोट करब उग्रवादी तत्त्वके अपराधिक मनोवृत्तिके सेहो उजागर करैत अछि। मिथिलाके इतिहासमें शायद ई पहिल दुर्भाग्यपूर्ण बमकाण्ड केर घटना थीक। विगत किछु दिन सँ मिथिला राज्य संघर्ष समिति अपन माँग मिथिला राज्य के निर्माण प्रति नेपाल सरकार के ध्यानाकर्षण हेतु चरणबद्ध रूपमें करैत आबि रहल छल। ठीक जानकी नवमी एहेन पुनीत अवसर पर जनकपुरके पावन धाम के एहेन निन्दनीय घटना सऽ अपवित्रता केर कलंक लगायल गेल। समूचा मिथिलांचल के लोक नेपाल, भारत के संग विश्वके अनेको कोणमें रहनिहार के स्तब्ध कय देलक।

विगत किछु वर्षमें नेपाल सऽ राजतंत्रके खात्मा भेला उपरान्त नया संविधान बनबाक क्रम जारी अछि आ आब मुश्किल सऽ किछु दिन मात्र बाकी अछि जखन नेपाल के संविधान के घोषणा करब अनिवार्य अछि। नेपाल के सर्वोच्च अदालत एक अन्तिम तारीख जेठ १४ गते तक बनाबय लेल संविधान सभाके निर्देशन देने अछि। एहि अन्तिम तारीखके घोषणा भेला उपरान्त वर्तमानमें एहिठाम समस्त जनमानस अपन-अपन जातीय, क्षेत्रीय, सांस्कृतिक, भाषिक व अन्य पहचान के संविधानमें स्थान दियेबाक लेल व्यग्र अछि। एहेन कोनो दिन नहि जे कतहु बन्दी नहि होइ, हड़ताल नहि होइ वा कोनो प्रकार के माँग जनता अपन तरीका सँ सरकार के समक्ष प्रस्तुत नहि करैत हो। राजनीतिक दल सभ सेहो आपसी सहमति लेल जी-तोड़ प्रयास कय रहल अछि। जखन कि मिथिला प्रति सभके हृदयमें सम्मान छैक, लेकिन मधेस के राजनीति आ समग्र मधेस एक प्रदेश के माँग जाहिपर पहिले बेर एतेक रास सभासद चुनाव जीतिके संविधान सभा पहुँचल अछि, एहि सभ सँ मिथिला प्रति उदासीनता स्पष्ट रूपमें देखल जा रहल अछि। जे माओवादी पार्टी अपन चुनावी घोषणापत्र में संघीय नेपालमें मिथिला राज्य के सम्मानपूर्वक गठन करब कहने छलैक तेकर किछुवे दिन पूर्व एक नया प्रस्तावना राज्य-पुनर्गठन आयोग समक्ष रखलक जाहिमे मिथिला के नामोनिशान तक नहि देखेलक आ एक नया नाम मधेस विराट प्रदेश के चर्चा कयलक जाहि सँ मिथिलाके लोकमें उद्वेलन भेलैक आ तदोपरान्त मिथिला राज्य संघर्ष समिति अपन शान्तिपूर्ण आन्दोलन विभिन्न चरणमें करैत आबि रहल छल आ वर्तमानमें सेहो निरंतरता पौने छैक। मिथिला लेल मधेसवादी दल के द्वैत चरित्र सेहो देखयमें अबैत छैक। नेपाल के गणतंत्र घोषित होइते उत्पीड़ित पक्ष सभ के दबल आवाज उखड़लैक आ एहि में मधेस के आन्दोलन द्वारा मधेसीके सम्मान उपलब्धिमूलक भेलैक। चारू कात सऽ बस एक आवाज एलैक जे पहिले समग्र मधेस एक प्रदेश के मान्यता भेटैक तदोपरान्त मधेस भीतर जतेक संस्कृति, भाषा-भाषी, जात-जाति आदि छैक तेकरा लेल विकास क्षेत्र के रूपमें अलग-अलग प्रदेश बनायल जेतैक। लेकिन राजनीतिक धार के दिशा संक्रमण काल के एहि किछुवे वर्ष में एहेन बनि गेल छैक जे मधेस एक प्रदेश निर्माण व्यवहारिक नहि छैक, एतय तक जे स्वयं मधेसवादी दल जे सत्तामें पर्यन्त साझेदार छैक सेहो सभ अलग-अलग फोरम सऽ आवाज निकालय लागल छैक जे एक मधेस प्रदेश के माँग व्यवहारिक नहि छैक। एतबा नहि... मधेस एक प्रदेश के सभ सऽ पैघ बाधक एहिठाम के आदिवासी, जनजाति, मुसलिम आदि सेहो अपन पहचान मधेसी के रूपमें करय सऽ इनकार कयलाके बाद एहेन झगड़ा आ अन्तर्कलह के स्थिति उत्पन्न भेलैक जे नेपालमें एक मधेस प्रदेश के माँग लगभग अनिश्चित बनि गेलैक।

नेपालमें सभ दिन राजनीतिक निर्णयमें भारतके मुख्य भूमिका देखल गेलैक अछि। हालहि भारत के सेना प्रमुख अपन नेपाल यात्रा पर आयल समयमें प्रेसके सम्बोधित करैत कहलखिन जे नेपालमें एक मधेस प्रदेश के प्रारूप व्यवहारिक नहि छैक। नेपाल के प्रमुख राजनीतिक दल नेपाली काँग्रेस, एमाले व एमाओवादी सभ एहि बात पर अपन प्रतिबद्धता जाहिर कयलक जे नेपालमें एक मधेस प्रदेश संभव नहि होयत। तखन आब मिथिलाके पहचान लेल राजनीतिक दलमें कि सोच अछि व हुनका सभके द्वारा राखल गेल प्रारूपमें मिथिला के चर्चा किऐक नहि कैल गेल अछि इत्यादि महत्त्वपूर्ण विन्दुपर मैथिल सभ सोचय लगलाह आ लगभग तीन दशक सऽ मिथिला राज्यके माँग करनिहार मिथिला राज्य संघर्ष समिति के नेतृत्वमें ई माँग राखल गेल जे मिथिला राज्य कायम कैल जाय।

एहि तरहक अनेको आन्दोलन नेपालमें सर्वत्र चलि रहल अछि। मधेसमें अन्य समूह द्वारा सेहो अपन पहचान आ क्षेत्र के अलग राज्यके रूपमें कायम करबाक लेल आन्दोलन चलि रहल अछि। लेकिन किछु धार एहनो अछि जे मधेस स्वतंत्र देश निर्माण करय लेल अपन प्रतिबद्धता जाहिर करैत आबि रहल अछि। वर्तमान हमला के जिम्मेवारी एहने एक गूट लेलक अछि जेकर माँग मधेस स्वतंत्र देश के छैक। लेकिन विडंबना एहेन छैक जे अन्य समूह द्वारा मधेसमें कैल जा रहल कोनो माँग के प्रतिकार स्वरूप आइ धैर एहेन कोनो कार्रबाई एहि भूमिगत समूह सभ द्वारा नहि कैल गेल अछि। लेकिन मिथिलाके लोक स्वभाव सऽ कोमल हृदयके आ व्यक्तिवादी सोचमें बेसी अग्रसर रहैछ तखन एहेन माँग लऽ के सड़क पर आन्दोलन करैत देखि प्रतिद्वंद्विताके भावना सऽ या अन्जान कोनो भय व आक्रोश के कारण एहेन जघन्य हमला कैल गेल संभव बुझैछ।

नेपालमें हर तरफ सऽ एहि हमलाके निन्दा भेल अछि। भूमिगत संगठन सभ सेहो एहि तरहक कार्रबाई के अपराधिक कहलक अछि। राष्ट्रसंघीय मिशन द्वारा घटनाके संज्ञान लैत नेपाल सरकार सऽ निष्पक्ष जाँच करैत आवश्यक कार्रबाई के सिफारिश कैल गेल। तहिना भारत के दूतावास द्वारा सेहो एहि घटना के भर्त्सना कैल गेल। समूचा राष्ट्रमें एक अजीब शोक-लहर पसैर गेल अछि। मिथिला क्षेत्र सँ बाहर सेहो मैथिल सभ एकर भर्त्सना आ शोक सभा कय रहल छथि। भारतमें सेहो एहि घटना पर मैथिल सभ अपन आक्रोश प्रकट कयलनि अछि। राजनीतिकर्मी सभ मिथिला राज कायम करय लेल अपन शुभकामना संदेश पठौलनि अछि। आगामी १२ मई, २०१२ के एक वृहत रैली के द्वारा श्रद्धाञ्जलि सभा जानकी मन्दिर प्राँगणमें आयोजित कैल जायत से मिथिला राज्य संघर्ष समिति के सह-संयोजक सुनील मल्लिक बतौलनि अछि। संयोजक परमेश्वर कापड़ि सेहो बम-हमलामें घायल भऽ गेल छलाह। हुनक इलाज काठमाण्डुमें चलि रहल छन्हि आ ओ खतरा सऽ बाहर छथि। एहि घटनामें मारल गेल पाँचो जनकेँ नेपाल सरकार शहीद घोषणा कयलक आ सभक परिवार के दस-दस लाख के क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराबय के घोषणा कयलक अछि। संगहि घायल सभक बेहतरीन इलाज लेल स्वयं प्रधानमंत्री एक विशेष मिटींग करैत डाक्टर सभके निर्देशन देलनि। घटना के फोटो सभ निम्न अछि।

- प्रवीण चौधरी

मिथिला राज्य संघर्ष समिति - जनकपुर द्वारा सभा-गोष्ठीके दृश्य

जानकी नवमी दिन धरना पर बैसकी के घटना सऽ किछु काल पहिलेक दृश्य

घटनामें प्रयुक्त मोटरसाइकिल - एहि में बम लगायल गेल छल

घटना उपरान्त के दृश्य

घटनामें शहीद प्रसिद्ध रंगकर्मी रंजू झा के मृत शरीर

बम लागल मोटरसाइकिल के क्षतिग्रस्त भेलापर के दृश्य

घटना उपरान्तक दृश्य

मिथिला राज्य संघर्ष समिति - संयोजक परमेश्वर कापड़ि गंभीर घायल अबस्थामें

घटनामें घायल दीपेन्द्र दास के उद्धारकर्ता एम्बुलेन्स तरफ लऽ जाइत कालक दृश्य - ४ दिन तक भेन्टीलेटर पर रहला के बाद अन्तिम साँस लेनिहार दीपेन्द्र दास

घटना उपरान्त शहीदके अन्तिम यात्राकालके दृश्य

Prasiddh Rangkarmi Ranju Jha - Shahid bain geli Mithila Rajya ke lel - Janaki Navami ke din Janakpur me!

Ghatna me shahid 5 jan ke photo sang shraddhanjali rally lel aamantran patra

Ghatna ke virodh me Rajbiraj me aandolankaari sabh virodh sabha aa putla dahan me..

Rajbiraj ke virodh juloos

Itahari ke shok sabha

Itahari ke shok sabha

Biratnagar ke shok sabha

Biratnagar ke shok sabha

Biratnagar ke shok sabha
अपन घर के खोज नहि अन्ना के पुछारि
अपने भ्रष्ट से सोच नहि सभ्यताके बिसारि!

मिथिला राज बनाबय लेल तेलंगाना के वेट
बारीक पटुआ तीत अछि दूरक लगबी रेट!

कौआ कुचरय सांझ के खायब नहि आब गुँह
भिन्सर फेरो बिसरैत अछि दौड़ि मारय मुँह!

मोरक पाँखि पहिरि के नाचि सकय नहि जोर
पाउडर मुँह रगड़ि कतबो बनय केओ कि गोर!

नित्य नया टन्टा झाड़य मारय झटहा तीर
महाबूड़ि कोढिया मनुख बनय हमेशा वीर!

साहित्यक समुद्रमें सुन्दर सनके सम्हारि
हाइकू शेर्न्यू रूबाइ ओ गजलक देखू मारि!

चोर-चोर हल्ला मचबय गाम के भेल जगारि
भेल पुछारि जे चोर कतय चोरहि हल्ला पारि!

देख रे मूढ टेटर अपनहु माथ भरल छौ आगि
प्रवीण भनें गैरखोर बनें चोतमल काजक लागि!
रचना :- प्रवीन नारायण चौधरी

हरिः हरः!

बुधवार, 25 जुलाई 2012

मिथिलाक जिला आ ओकर आबादी ।



Krishnanand Choudharyposted to मिथिलाक जिला आ ओकर आबादी ।



बिहार आ झारखण्डक निम्नोक्त जिला संभावित मिथिला राज्यक अंतर्गत अबैत अछि । जिला सभक संग ओकर जनसंख्या सेहो देल गेल अछि , जे जनगणना 2011क अंतरिम आँकड़ा पर आधारित अछि ।
* w. champaaran-3922780
* e.champaaran-5082868
* sitamadhi-3419622
* shivhar-656916
* madhubani-4476044
* muzaffarpur-4778610
* darbhanga-3921971
* vaishali-3495249
* samastipur-4254782
* supaul-2228397
* araria-2806200
* kishanganj-1690948
* madhepura-1994618
* saharsa-1897102
* purania-3273127
* khagaria-1657599
* katihaar-3068149
* begusarai-2954367
* munger-1359054
* bhagalpur-3032226
* lakhisharaai-1000717
* jamui-1756078
* baka-2029339
* godda-1311382
* saahebganj-1150038
* deoghar-1491879
* dumka-1321096
* paakur-899200
* jamtaara-790207

उपरोक्त जिला सभक जनसंख्या जोड़लाक उपरान्त मिथिलाक कुल
जनसंख्या 7,17,20,565 होइत अछि ।

सोमवार, 25 जून 2012

सौराठ सभा : गौरवशाली अतीत, धुंधला वर्तमान



Jun 24, 08:45 pm
फोटो- 24 एमडीबी 1
फ्लैग : कभी जूटते थे लाखों सभैती, कन्या को देखे बिना तय हो जाती थी शादी

सुनील कुमार मिश्र, मधुबनी, निज संवाददाता : विश्व में शादी के लिए इच्छुक वर की सभा लगने का एक मात्र उदाहरण सौराठ सभा है। आषाढ़ के अंतिम शुद्ध में लगने वाली इस सभा में प्रतिवर्ष लाखों ब्राह्माण यहां पहुंच कर वर व वधू का वैवाहिक संबंध तय करते थे। मैथिल ब्राह्माणों के विषय में एक कहावत प्रसिद्ध है कि चट मंगनी पट ब्याह। सो, इस समाज में शादी तय होने के साथ वर व बराती कन्या वाले के यहां पहुंच कर शादी की रस्म पूरी कर लेते थे। बिना किसी आडंबर के शादी करने की परंपरा यहां स्पष्ट थी। लेकिन धीरे धीरे दहेज लोभियों के कारण इस अनमोल परंपरा को ठेस पहुंचने लगी और घर कथा को बढ़ावा मिलने लगा। फिलहाल सभा के उस अस्तित्व को पुनस्र्थापित करने का असफल प्रयास मैथिल ब्राह्माणों द्वारा किया जाने लगा है।
गौरवशाली अतीत
प्रारंभ में सभा का रूप अलग था। यहां देश के कोने कोने से मैथिल ब्राह्माण विद्वान जमा होते थे। उनमें शास्त्रार्थ भी चलता था। इन विद्वत मंडली के साथ युवा शिष्य भी आते थे। वहीं दूर दूर के लोग शास्त्रार्थ सुनने व देखने आते थे और कन्या के लिए उपयुक्त वर चुनते थे। इस तरह खास वैवाहिक लग्न पर वहां विद्वानों की टोली व वर को चुनने के लिए कन्या के अभिभावकों के आने की परंपरा बन गई। इससे वर के चुनाव में दर-दर भटकने के श्रम व अन्य व्यय से मैथिल ब्राह्माणों को राहत मिलती थी। वर कन्या विवाह के लिए अधिकार का प्रमाण पत्र तद्विषयक ज्ञाता के रहने से मिल जाता था।
राजा ने दिया 25 बीघा
चौदहवीं सदी के दूसरे दशक तक वर्तमान पंजी प्रथा का प्रचलन नहीं हुआ था, छिटपुट रूप से वंश परिचय लोग रखते थे। उस आधार पर वैवाहिक अधिकार का निर्णय स्मरण के आधार पर करते थे और इस प्रकार यहां वर का चुनाव होता था। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार महाराज माधव सिंह के राज्यारोहण के समय तक सभा अव्यवस्थित थी। पूर्व में परतापुर व समौल सहित अन्य स्थानों पर सभा लगने का प्रमाण है। राजा माधव सिंह के राजत्व काल से प्रारंभ सौराठ सभा को व्यवस्थित किया गया। राजा ने सभा के लिए 25 बीघे का भूखंड दिए।
अनोखी शादी
मैथिल ब्राह्माणों की शादी की परंपरा अनोखी है। सभा के दौरान कन्या की कब शादी हो जाएगी, पता नहीं रहता।
पाग में आते थे वर
सभा में जाकर वहां से शादी रचाकर घर आना काफी रोमांचित करता था। वर घर से लाल धोती, कुर्ता व ललका पाग धारण कर महिलाओं द्वार चुमावन करने के बाद सभा के लिए प्रस्थान करते थे। वहां वे निर्धारित स्थान पर दरी बिछाकर अपने अंिभभावकों के साथ बैठते थे। जहां कन्या पक्ष के लोग समकुल वर का चयन कर शादी तय करते थे।
बदहाली का दौर
अस्सी के दशक में सौराठ सभा में विकृतियां आने लगी। चोरी छिपे पैसे लेने का चलन शुरू हुआ। धीरे-धीरे सभा में खुले आम पैसे का लेन देन करने लगे। वर्तमान स्थिति यह है कि गत दस वर्षो से यहां नाम मात्र के लोग आते हैं व यहां की दुर्दशा देख भारी मन लिए वापस हो जाते हैं। यहां सभैती के लिए बनाए गए विशाल तीन शेड जर्जर हो चुके हैं। सभा स्थित माधवेश्वर शिवालय मूक गवाह के रूप में खड़ा है।
ऐसा था अतीत
- कुलशील को दिया जाता था महत्व, शादी में लेन देन की नहीं थी परंपरा
- लाल धोती में वास करते थे वर, पांच से पंद्रह बरात जाने की थी परंपरा
- मध्यम व गरीब ब्राह्माणों के लिए वरदान थी सभा
- मिथिला के विभिन्न भागों से ही नहीं अन्य राज्यों के प्रवासी मैथिल ब्राह्माण भी आते थे
बदहाली के कारण
- दहेज प्रथा ने किया कुठाराधात, पैसे के लोभ ने कुलशील विचारों को हाशिए पर डाला
- नवधनाढ्य ने घर कथा को दिया बढ़ावा, दहेज विरोध लेकर महिला संगठन का सभा में प्रवेश
इनसेट :
सभा के पहले लग्न में एक वर शादी को गए
-चौथे दिन 11 सिद्धांत लिखे गए
फोटो 24 एमडीबी 19 
रहिका (मधुबनी), निज प्रतिनिधि : सौराठ सभा के चौथे दिन जहां कुल 11 सिद्धांत लिखे गए वहीं आज प्रथम लग्न में एक वर यहां से शादी करने के लिए प्रस्थान किए। जानकारी हो कि पंडौल प्रखंड के ब्रह्माोत्तरा गांव निवासी बुद्धिनाथ झा व निर्मला झा के पुत्र मिहिर कुमार झा उर्फ महादेव ने बिना दहेज लिए झंझारपुर के लक्ष्मीपुर निवासी लाल बहादुर मिश्र की पुत्री कल्याणी कुमारी के संग शादी करने को प्रस्थान किया। जानकारी हो कि मिहिर ने बिना दहेज के शादी करने की घोषणा की थी। जिस पर सभावधि में लाल बहादुर मिश्र ने वर को चुना व मिहिर के परिजनों से बातचीत कर शादी तय की। मिहिर को नेपाल के विराट नगर से आए दहेज मुक्त मिथिला के अंतर्राष्ट्रीय सचिव प्रवीण नारायण चौधरी व वहां उपस्थित लोगों ने शादी के लिए विदा किया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद के अध्यक्ष कमला कांत झा, प्रवक्ता धनाकर ठाकुर सहित अन्य सदस्य गण व सौराठ महासभा समिति के सचिव शेखर चंद्र मिश्र भी उपस्थित थे।
dainik  jagaran - 

शनिवार, 23 जून 2012