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शुक्रवार, 10 मार्च 2017

प्राणप्रियतम सुनू , जा रहल छी कहाँ रंगि दीय आइ हमरा , अहाँ रंग में ।


प्राणप्रियतम  सुनू , जा रहल छी कहाँ 
रंगि  दीय  आइ  हमरा , अहाँ  रंग में । 
छी  मातल   अहाँ  , मस्त  हमहुँ   सुनू 
पूर्ण  यौवन  हमर  ई अहाँक संग में  ॥  
                     प्राणप्रियतम  सुनू  -----
ई अवीर  कर -  कमल सँ  मलू  गाल पर 
आइ  गाबू   ई    होली ,  बिना  ताल  पर 
छन्द  स्वर लय  हेरा  कउ  परा  कउ चलु 
तजि दीय  लाज सबटा  ई हुड़दंग  में  ॥ 
                       प्राणप्रियतम  सुनू  -----
नेत्र   अछि   दुनू   देखु ,  शराबी  जेकाँ 
बकि  रहल  छी  ई  पत्रक जबावी जेकाँ 
अछि   पिपासी  अहाँके    दासी   प्रिय 
भरि  लीय आइ  हमरा , अहाँ  अंग में  ॥ 
                       प्राणप्रियतम  सुनू  ------
रंगल  अछि  वसुधा , रंगल अछि गगन 
ई  अहाँक  रंग  रंगल , हमर  देखु  मन 
रंग   होरी   के   झोरी   लेने   हाथ    में 
"रमण " देखू  पीने  मस्त अइ भंग  में  ॥ 
                      प्राणप्रियतम  सुनू ------
रंगि  दीय  आइ  हमरा , अहाँ  रंग में ।   
रचना कार - 

रेवती रमण झा " रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751

शनिवार, 4 मार्च 2017

मैथिली फगुआ गीत

॥  होरी  ॥ 

उमुख  अनुपम आनन्द  वारि  । 
लायल   होरी   रंगक     विहारि  ॥ 


 जागल  जन -जन  अभिनव  तरंग  
हास्यक   श्रोते   बहि  रहल  बयंग 
निर्भय   विभोर  नाचथि   अनंग  
शंकोच  नीङ   नयनन सँ  गरि   ॥ 
                   लायल   होरी ------
डम्फा      मजीर    भंकृत     मृदंग  
ध्वनि श्रवण पावि  जन - मन  मतंग 
विजया     छानल      अदैत     रसो  
अगणित   लोटे   भरि    कंठ   ढारि ॥  
                    लायल   होरी ------
सब   रास    रंग  में   भेल    लिप्त  
तन   लाल  - लाल ,  मनमोद  तृप्त 
निरखत    नयनन   मुख चंद्र   चारु 
घनश्याम   आइ   घनपट  उधारि  ॥ 
                      लायल   होरी ------
सब जन  अजाति , जानजाति  एक 
नञि    राग - द्वेष     मर्याद -  टेक
उन्मत      भेल    नर -  नारि    वृंद  

कुंकुम    कोपल  मेलय   पछारि  ॥ 
                      लायल   होरी ------ 
अभक्ष्य  हास्य   मुख - गारि छम्य 
वैभव   अभाव   नयि   तकर  गम्य 
सुख - शांति  सुमन  केर  वृक्ष  रोपि  
चिन्ता - बट   चित  फेकल  उखारि ॥
                      लायल   होरी ------
अश्लील   युक्त   सब  गीत - नाद 
श्रवणे  हुलास ,  नयि  जन विषाद  
प्रेमक      वाती      उसकाय    उर्घ  
कामागिन  - कुण्ड  में  घीव  ढारि  ॥
                      लायल   होरी -----
ताम्बूल     तबक    आदर्श    थिक
अघरासव     सँ    अनुराग     पीक
ई स्वर्ण - पर्व , जन  मधुर मिलन
अपवर्ग    आई    आनल     उतारि  ॥
लायल   होरी ------
चउमुख    अनुपम  आनन्द   वारि  । 
लायल     होरी     रंगक     विहारि  ॥ 

रचना कार - 

रेवती रमण झा " रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751

मंगलवार, 15 मार्च 2011

दुईगोट मैथिली फगुआ गीत - रचनाकार: जितमोहन झा (जितू)...

नव नवेली नवयौवना सँ विवाह रचेलाक बाद पतिदेव रोजगारक तलाश मे परदेश चैल जैत छथिन! ओ अपन अर्धांग्नी सँ वादा के कs गेल छथिन, की किछ दिन मे कमा - धमा कs ओ वापस गाम ओउता! तकर बाद बड्ड धूम - धाम सँ हुनकर दुरागमन करोउता! मुदा एहेंन नै भेल! प्रियतमक बाट जोहैत - जोहैत ओय नवयुवतीक व्यथा कs हम फगुआ गीतक माध्यम सँ अपने लोकैंन के बिच व्यक्त करे चाहे छी!!! जितमोहन झा (जितू)....

(१) पहिलुक फगुआ गीत...

लागल अछि फागुन मास यो पिया !
हमर कहियो नै भेलई सुदिनवां !!

अगहन निहारलो, हम पूष निहारलो,
माघ महिनवां मे जिया अकुलाबय,
चरहल फागुनवां रिझाबई यो पिया !
हमर कहियो नै भेलई सुदिनवां !!
लागल अछि फागुन.........

राह देखि - देखि हमर दिनवां बीतल,
जुल्मी सजनवां परदेशिया मे खटल,
'पंडित' कs हमर सुधिया नै आबई,
चढ़ल अछि हमरो जवनिया यो पिया !
हमर कहियो नै भेलई सुदिनवां !!
लागल अछि फागुन.........

आमक गाछ पर बाजै कोयलिया,
सुनी-सुनी करेजा मs लागैत अछि गोलिया,
चिट्ठी नै सन्देशवां पठेलो यो पिया !
हमर कहियो नै भेलई सुदिनवां !!
लागल अछि फागुन.........

जल्दी सँ अहाँ टिकटवां कटायब,
एहिबेर बलम हमर गवना करायब,
अहाँ सँ मिल कs जियरा जुरायत,
कचका कोरही सँ फूल फुलायत,
छुटत संगतुरियाकें ताना यो पिया !
हमर कहियो नै भेलई सुदिनवां !!
लागल अछि फागुन मास यो पिया.....


(२) दोसर फगुआ गीत....

फगुआ मे जियरा नै जुरायब यो पिया !
हमर पाउते चिट्ठी चल आयब !!

गामक मोहल्ला के राह सजैत अछि,
गल्ली गल्ली मे जोगीरा चलैत अछि,
ढोलक के थाप पर बुढबो नाचैत छैथ,
बुढबो गाबैत छैथ जोगीरा यो पिया !
हमर पाउते चिट्ठी चल आयब !!
फगुआ मे जियरा.............

तोरी उखैर गेल, गहुमो पाइक गेल,
आमक गाछ मे मोजर लैद गेल,
सखी सहेली करैत छली मस्करियां,
दूध भंगा घोटायत अपने दुवरियां,
ननदों के बहकल बोलीयां यो पिया !
हमर पाउते चिट्ठी चल आयब !!
फगुआ मे जियरा.............

देवर जीक मन सन - सन सनकाई,
राह चलैत हुनक खूब मोंन बहकाई,
देखि के जियरा डराबे यो पिया !
हमर पाउते चिट्ठी चल आयब !!
फगुआ मे जियरा..............

गामक छौरा सभ बाजैत अछि कुबोली,
कहलक भोउजी खेलब अहिं संग होली,
रंग गुलाल सँ रंगब अहाँक चोली,
भोउजी भोउजी कैह घेरयाबे यो पिया !
हमर पाउते चिट्ठी चल आयब !!
फगुआ मे जियरा..............

आस परोसक लोग ताना मारैत छैथ,
बूढियो मई सेहो मुह बिच्काबैत छैथ,
छौरा जुआन सभ मिल खिस्याबैत छैथ,
चलैत अछि करेजा पर बाण यो पिया !
हमर पाउते चिट्ठी चल आयब !!
फगुआ मे जियरा.............

अहाँक बिना सेजयो नै सोभई,
रहि रहि जियरा हमर रोबई,
अहाँक कम्मे पर करब कुन गुमानवां,
सबके बलम छैथ आँखक समनवां,
कोरा मे कहिया खेलत लालनमां यो पिया !
हमर पाउते चिट्ठी चल आयब !!
फगुआ मे जियरा..............

सैयां "जितू" कोना गेलो भुलाई,
सावन बीतल आब फगुओ बीत जाई,
अहींक संगे रंगायब हम अपन सारी,
कतो रहब जून पियब भाँग तारी,
फगुआ मे जिया नै जराबू यो पिया !
हमर पाउते चिट्ठी चल आयब !!
फगुआ मे जियरा.............

हमरा आ ब्लॉग परिवारक तरफ सँ समस्त मैथिल बंधूगन के फगुआक हार्दिक शुभकामना....