(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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मंगलवार, 7 सितंबर 2010

अब कृपया इसे पढ़ें ......... "TAJ MAHAL - THE TRUE स्टोरी''


प्रो.पी. एन. ओक. को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस कथन को चुनौती नही दी कि........
"ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था" प्रो.ओक. अपनी पुस्तक "TAJ MAHAL - THE TRUE STORY" द्वारा इस बात में विश्वास रखते हैं कि,-- सारा विश्व इस धोखे में है कि खूबसूरत इमारत ताजमहल को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था..... ओक कहते हैं कि...... ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर,एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था. अपने अनुसंधान के दौरान ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था,, =>शाहजहाँ के दरबारी लेखक "मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी "ने अपने "बादशाहनामा" में मुग़ल शासक बादशाह का सम्पूर्ण वृतांत 1000 से ज़्यादा पृष्ठों मे लिखा है,,जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 परइस बात का उल्लेख है कि, शाहजहाँ की बेगम मुमताज-उल-ज़मानी जिसे मृत्यु के बाद, बुरहानपुर मध्य प्रदेश में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया था और इसके ०६ माह बाद,तारीख़ 15 ज़मदी-उल- अउवल दिन शुक्रवार,को अकबराबाद आगरा लाया गया फ़िर उसे महाराजा जयसिंह से लिए गए,आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारते आलीशान) मे पुनः दफनाया गया,लाहौरी के अनुसार राजा जयसिंह अपने पुरखों कि इस आली मंजिल से बेहद प्यार करते थे ,पर बादशाह के दबाव मे वह इसे देने के लिए तैयार हो गए थे. इस बात कि पुष्टि के लिए यहाँ ये बताना अत्यन्त आवश्यक है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह में वे दोनो आदेश अभी तक रक्खे हुए हैं जो शाहजहाँ द्वारा ताज भवन समर्पित करने के लिए राजा जयसिंह को दिए गए थे....... =>यह सभी जानते हैं कि मुस्लिम शासकों के समय प्रायः मृत दरबारियों और राजघरानों के लोगों को दफनाने के लिए, छीनकर कब्जे में लिए गए मंदिरों और भवनों का प्रयोग किया जाता था , उदाहरनार्थ हुमायूँ, अकबर, एतमाउददौला और सफदर जंग ऐसे ही भवनों मे दफनाये गए हैं .... =>प्रो. ओक कि खोज ताजमहल के नाम से प्रारम्भ होती है--------- ="महल" शब्द, अफगानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश मेंभवनों के लिए प्रयोग नही किया जाता... यहाँ यह व्याख्या करना कि महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है......वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है--------- पहला -----शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था,,,बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ... और दूसरा-----किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए,,,यह समझ से परे है... प्रो.ओक दावा करते हैं कि,ताजमहल नाम तेजो महालय (भगवान शिव का महल) का बिगड़ा हुआ संस्करण है, साथ ही साथ ओक कहते हैं कि---- मुमताज और शाहजहाँ कि प्रेम कहानी,चापलूस इतिहासकारों की भयंकर भूल और लापरवाह पुरातत्वविदों की सफ़ाई से स्वयं गढ़ी गई कोरी अफवाह मात्र है क्योंकि शाहजहाँ के समय का कम से कम एक शासकीय अभिलेख इस प्रेम कहानी की पुष्टि नही करता है..... इसके अतिरिक्त बहुत से प्रमाण ओक के कथन का प्रत्यक्षतः समर्थन कर रहे हैं......तेजो महालय (ताजमहल) मुग़ल बादशाह के युग से पहले बना था और यह भगवान् शिव को समर्पित था तथा आगरा के राजपूतों द्वारा पूजा जाता था----- ==>न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ़ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कि यह दरवाजा सन् 1359 के आसपास अर्थात् शाहजहाँ के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है... ==>मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष (1631) में हुई थी उसी वर्ष के अंग्रेज भ्रमण कर्ता पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था...... ==>यूरोपियन यात्री जॉन अल्बर्ट मैनडेल्स्लो ने सन् 1638 (मुमताज कि मृत्यु के 07 साल बाद) में आगरा भ्रमण किया और इस शहर के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का वर्णन किया,,परन्तु उसने ताज के बनने का कोई भी सन्दर्भ नही प्रस्तुत किया,जबकि भ्रांतियों मे यह कहा जाता है कि ताज का निर्माण कार्य1631 से 1651 तक जोर शोर से चल रहा था...... ==>फ्रांसीसी यात्री फविक्स बर्निअर एम.डी. जो औरंगजेब द्वारा गद्दीनशीन होने के समय भारत आया था और लगभग दस साल यहाँ रहा,के लिखित विवरण से पता चलता है कि,औरंगजेब के शासन के समय यह झूठ फैलाया जाना शुरू किया गया कि ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था....... प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी असंगताओं को इंगित करते हैं जो इस विश्वास का समर्थन करते हैं कि,ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है....... आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं,जो आम जनता की पहुँच से परे हैं प्रो. ओक., जोर देकर कहते हैं कि हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति,त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं....... ==>ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है,, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी किभी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता,जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है,फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब....???? राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थीं.... प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए, और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे .... ज़रा सोचिये....!!!!!! कि यदि ओक का अनुसंधान पूर्णतयः सत्य है तो किसी देशी राजा के बनवाए गए संगमरमरी आकर्षण वाले खूबसूरत,शानदार एवं विश्व के महान आश्चर्यों में से एक भवन, "तेजो महालय"को बनवाने का श्रेय बाहर से आए मुग़ल बादशाह शाहजहाँ को क्यों......????? तथा...... इससे जुड़ी तमाम यादों का सम्बन्ध मुमताज-उल-ज़मानी से क्यों........???????
आंसू टपक रहे हैं, हवेली के बाम से,,,,,,,,
रूहें लिपट के रोटी हैं हर खासों आम से.....
अपनों ने बुना था हमें,कुदरत के काम से,,,,
फ़िर भी यहाँ जिंदा हैं हम गैरों के नाम से......

सोमवार, 10 मई 2010

उठो भाई जागो

ओ भारत के वीर जवानों ,
माँ का क़र्ज़ चुका देना ,
कटे फटे इस मानचित्र को
अबकी ठीक बना देना !!
पटना साहीब से मीलने को
ननकाना बैचेन खड़ा ,
अबकी तिरंगा रावलपिंडी में
घुस कर तुम फहरा देना !!
अटक कटक से सिन्धु नदी तक
सब कुछ हमको प्यारा है ,
कश्मीर मत मांगो कह दो
पाकिस्तान हमारा है !!
जो उपवन से घात करे
वो शाख तोड़ दी जायेगी ,
जो पीछे से वार करे
वो बांह मोड़ दी जायेगी ,
जो कुटुंब का नाश करे
वो गर्दन तोड़ दी जायेगी,
मेरे देश पे उठती
हर एक आँख फोड़ दी जायेगी ,
जो देश द्रोह की बात करे
वो मनुष्य हत्यारा है ,
कश्मीर मत मांगों
कह दो पाकिस्तान हमारा है !!
बन्दे- मातरं
जय हिन्द - जय भारत
(आनंद कुमार )

मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

की हमहूँ रहबै कुमार ?

यौ पाठक गण की कहू अपन मिथिला राज्य चौपट भ' गेल ( से कोना यौ ) एक त कमला कोशीक दहार आ दोसर दहेज़ प्रथाक व्यवहार ! कमला कोशी लेलक पेटक आहार त दहेज़ प्रथा केलक आर्थिक लाचार ! कन्यादान से कतेक पिता लोकनि सेहो भेला बीमार आ कतेको बर छथि ओही बाधा सँ सेहो कुमार आ बीमार ! ओही सभ बात के लs क' हम नब युबक संघक बाधा कs ल'क' पाठक गणक समक्ष अपन गाम घर पर हाजिर छी.......

की हमहूँ रहबै कुमार ?

जय गणेश मंगल गणेश, सदिखन रटलो मंत्र उचार !
सभ बाधाक हरय बाला, कते गेलो अहाँ छोड़ि संसार !!
अपना लेल अगल - बगल मे, हमरा लेल किए दूर व्यवहार !
आब कहू यो गणपति महाराज, की हमहूँ रहबै कुमार...? !!

बरख बीत गेल देखते देखते, जन्म कुंडली मे थर्टी ! (३०)
दहेजक आस मे हम नै बैसब, हमरो उम्र भो जेत सिक्सटी !! (६०)
गाम - गाम मे जे के बाजब, बाबू हमर छथि दुराचार !
आब कहू यो बाबू - काका, की हमहूँ रहबै कुमार... ?!!

ब्रह्म बाबा के सभ दिन गछ्लो, लगाबू अहि लगन मे बेरापार !
ओही खुशी मे अहाँ के देब, हम अपन गाय के दूधक धार !!
हे कुसेश्वर हे सिंघेश्वर, अहाँक महिमा अछि अपरम पार !
अहि लगन मे पार लगाबू, हम आनब दूध दही आ केराक भार !!
आब कहू यो भोले दानी, की हमहूँ रहबै कुमार ....?...

सौराठ सभा मे जे के बैसलों, सातों दिन आ सातो राति !
कियो नै पुछलक नाम आ गाम, की भेल अपनेक गोत्र मूल बिधान !!
घर मे आबी के खाट पकरलो, नै भेल आब हमर कुनू जोगार !
आब कहू यो बाबा - नाना, की हमहूँ रहबै कुमार --?!!

दौर - दौर जे पंडित पुर्हित, सभ दिन पूछी राय बिचार !
पंडित जी के मुहँ से फुटलैन ई बकार ..........
जेठ अषाढ़ त बितैते अछि, अघन से परैत अछि अतिचार !!
आब कहू यो पंडित पुर्हित, की हमहूँ रहबै कुमार ....?.

नै पढ़लो हम आइये - बीए, छी हमहूँ यो मिडिल पास !
डॉक्टर भइया - मास्टर भइया, ओहो काटलैथ एक दिन घास !!
ओही खान्दानक छी यो हमहूँ, जून करू आब हमर धिकार !
आब कहू यो बाबू - भैया, की हमहूँ रहबै कुमार ?!!

गोर - कारी सभ के सब दिन रखबै, लुल्ही - लंगरी से घर के सजेबई !
बौकी पगली के दरभंगा में देखेबाई, कन्ही कोतरी से करब जिन्दगी साकार !!
आब कहू यो संगी - साथी, की हमहूँ रहबै कुमार ..?........

अघन के लगन देख हम झूमी उठलो, जेना करैत अछि नाग फुफकार !
लगन बीत गेल माघ फागुन के, गुजैर रहल अछि जेठ अषाढ़ !!
अंतिम लगन ओहिना बितत, नैया डूबत हमरो बिच धार !
आब कहू यो मैथिल आर मिथिलाक पाठक गन,
की हमहू रहबै कुमार --?-!!

नब युवक के बातक रखलो मान, शादी.कॉम में लिखेलो अपन नाम !
नै कुनू भेटल कतो से मेल, लागैत अछि जे ईहो भेल फैल !!
कतेक दिन करब मेलक इंतजार........
आब कहू यो कम्पूटर महाराज, की हमहूँ रहबै कुमार --?!!

भोरे उठी गेलो खेत खलिहान, उम्हरे से केना एलो कमला स्नान
देखलो दुई चैर आदमी के, बात करैत छल कन्यादान !
पीड़ी छुई हम भगवती के, पहुँच गेलो हम अपन दालान !!
हाथ जोरी हम सबके, विनती केलो बारम् बार !
आब कहूँ यो घटक महाराज, की हमहूँ रहबै कुमार --?

मदन कुमार ठाकुर,
पट्टीटोला, कोठिया (भैरव स्थान )
झंझारपुर (मधुबनी)बिहार - ८४७४०४।
मो-९३१२४६०१५०

गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

हम नै ई दुनियाँ कहैया - मदन कुमार ठाकुर


हम नै ई दुनियाँ कहैया

हमरा राज्य में ई सब भेल ,
फल्ला के राज्य में कि सब भेल
फूसी - फटक सब नेता बजैया ,
इलेक्शन बाद फेर के पुझैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

गाम - गाम में मुखिया सरपंच ,
एक दोसरक सब खाइया अंस
ग्राम विकासक काज कहैया ,
अपन रोजी- रोटी के मार्ग बनबैया,
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

बढिक दाही रौदिक अकाली ,
घर- खसि ई सब लोग कहैया
एसडियो -बीडीओ सब के लेखा - जोखा ,
भगवती से सद्दा ईहा मनबैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

हॉस्पिटल चकर सब दिन लगैया ,
बिमारी सबहक खान भेटैया
डाक्टर सब नै नजैर परैया ,
अपन किल्निक सदीखन बैसैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

तिलक द्हेजक जखन बात चलैया ,
लाख डेढ़ लाख से कम नै कहैया
अपना पर जखन विपैत परैया ,
बापरे - बाप कहिय दूर भगैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

साधू – संत के जो बात चलैया ,
लोक -लाज से भीन्ने मरैया
आसन लगा सब भाषण करैया ,
अपन पेट लेल खुद्ये मरैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

चिठ्ठी - पत्री के आब पढ़ेया ,
हेंड सेट से फुर्सत नै भेटैया
खन दरिभंगा , खन मधुबनी ,
अपना में सब लोक बजैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

हाय - हेलो सब लोग बजैया ,
छोरी - छोरा संग नाच करैया
अपना के महान बुझैया ,
अपन मान- सम्मान गम्बैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

शनिवार, 27 मार्च 2010

सत्यानास संग- लग्न



सत्यानास संग- लग्न

अमंगल गुटखा खाद्य्म धुम्रपान अमंगल सर्बब्य्संम
कराग्रे बसती बीडी करमध्य चुरतम,
करमूले श्थितो गुटखा प्रभाते कर दर्शनं


दुर्भाग्वती बीड़ी , कुमारी उर्फ़ सिकरेट देवी
कुपुत्री - श्री तम्बाकू लाल जी ,
एवं श्री मति चिलम देवी ,
निवासी =+++ यमलोक ,
होउस - दुखनगर ,अंतिम इक्छा


संग

मृत्य आत्मा कैंसर कुमार उर्फ़ लाईलाज बाबु ,
कुपुत्र - गुटखा लाल जी एवं श्री मति भंग देवी ,
निवासी - गलत रास्ता ब्यबसनपुर (नसा परदेश)


के अशुभ विवाह तय भेल अछि अन्तह अहि भयानक प्रसंग पर --
काका - गाजा सिंह , काकी- अफीम देवी , बाबा- हुकाराम ,मैया -सुल्फी देवी ,
मामा -चरस राम , मामी - सारवी देवी ,नाना - चाय सिंह , नानी कोफ्फी देवी ,
ताऊ -चुना राम ,फूफ्फा - जर्दा राम ,सन ईहन खास बुजुर्ग सबहक़ उपस्थित में ,
नब दम्पत्ती के अभिशाप करैक हेतु अहाँ सब
सादर आमंत्रित छि ,--------

विवाह समय - अनिशचितकाल
विवाह स्थल -समसान घाट मैरिज होम --
चिन्त्ता भवन ,कष्ट मोहल्ला ,दुर्गात्ति गल्ली ,
दुःख नगर , जिला - परलोक पुर
राज्य - अंतिम धाम पिन -००००००

बुधवार, 10 मार्च 2010

सत्या नास केलक बीमारी - मदन कुमार ठाकुर

(हम आइ एक महिना सँ हॉस्पिटल मे बेड रेस्ट यानी बीमार आवस्था मे छी ! जाहि सँ कतेक फोन, कतेक ई-मेल, कतेको फरमाईस, कतेको मज़बूरी, कतेको तगेदा, कतेको उदासी, कतेको घबराहट, आ बहुतो आर्थिक स्थिति आय हमरा सामने आइब गेल अछि ! जकर उदाहरण हम अपन गाम घर (मैथिली ब्लॉग) पर लs के पाठक गनक समक्ष हाजिर छी !)

यमराजक याद आ संदेश .....
हमरा बीमार अवस्था मे यमराजक संदेश सेहो बुझै मे आबैत छल ! किएकी पुरा एक महिना बिमारी के भs गेल छल ! बिमारी छूटए के नाम नञि लैत छल लागैत छल जे कही अहि बिमारीक कारण हम हुनकर सिकार नञि भs जाय ! यदि एहेंन नौबत आयत तँ हमर घर संसार सभ चौपट भस जायत ! ई बात सोचि - सोचि के हम आर बेसी बिमार पड़ि जाइत छलहुँ !

कम्पनीक तरफ सँ फोन ....
हमरा बिमार अबस्था मे कम्पनीक तरफ से सबसे बेसी फोन आबैत छल जे ... आप को केवल १५ दिन का छुट्टी मिला था ! मगर अब पुरे एक महिना से भी ज्यादा हो गया हैं ! अगर आप इस सप्ताह ड्युटी ज्वाइन नहीं करेगे तो आपको कम्पनी के निष्कासित कर दिया जायेगा .... ई बात फोन से सुइन सुइन के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

बौवा आ बुच्चीक स्कुल सँ नोटिक .....
हमरा बिमार अबस्था मे बौवा आ बुच्चीक स्कुल सँ सेहो नोटिक आइब गेल छल, लिखल छल जे ... आपके लड़के और लड़की की स्कुल फिस और बस फिस पिछले महिने से जमा नहीं हुवा हैं ! जिसके चलते आप के दोनों बच्चो को स्कुल से निकाल दिया जायेगा ! अन्यथा फिस जमा करने का यथा शीघ्र कस्ट करे ... हमर बौवा आ बुच्ची आब कोना स्कुल में पढ़त लागैत अछि जे आब धिया - पुताक जीवन ख़राब भs जायत ई नोटिस पैढ़ - पैढ़ के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

दोकानदार लालाक तगेदा......
हम बिमार अबस्था में (हॉस्पिटल) में रही ताहि समय मे दोकानदार लालाक सेहो तगेदा आबिगेल छल, ओ हमर अर्धांग्नी के कही गेलैन जे ... आपका बहीखाता का हिसाब पिछले महिना से ही बांकी हैं ! आप जब दोनों महीने के रुपैया जमा करायेगे तभी हम आगे से रासन का सामान दे पायेगे अन्यथा दुसरे दूकान दार से संपर्क करे ! ई समाद हमरा कान मे पहुंचल, सोच्लो आब तs हमर घर के चूल्हा सेहो कोना कs जरत ! ई समाद सुनी सुनी के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

गाम - घरक चिठ्ठी आ फोन ....
हम बिमार अबस्था मे (हॉस्पिटल) में रही तान्ही समय मे गाम से सेहो चिठ्ठी आबी गेल छल जाही में लिखल अछि .... जे बोआ अहाँ त देखते आ सूनैते हेब टी।वी यही समाचार मे हे हर साल गाम घर में बैढ़ आबई छैक तहि से धान पान ही हेतै सगे घर सेहो खैस परल अछि यानी गाम मे सभ तरहे बेसाहे चलैत अछि ! बाबु आर माय भैया सभ अहि के आस लगेना बैसल छैथ ! जे दिल्ली सs बौआ कहिया पाई पठेता ! गाम घरक ई चिंता सुनी सुनी आ पैढ़ पैढ़ के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

बैंक से फोन आ ईमेल ....
एतबे नै हमर बीमारीक अबस्था में कतेक बैंक से सेहो फोन आ ईमेल स information के देल गेल छल ! जे अभी तक आप के किसी भी क्रेडिट कार्ड का पेमेंट पिछले दो महीने से नहीं हुवा हैं ! जिस के चलते आप के क्रेडिट कार्ड को स्थाई रूप से बंद कर दिया जायेगा अन्यथा पेमेंट जारी रखे ! बार बार हम ई सोचैत छलो जे आगूक पेमेंट हॉस्पिटलक हम कोना के करब ! ई information पैढ़ पैढ़ के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

LIC कम्पनिक तरफ से नोटिक .......
हमरा बिमारी अबस्था मे LIC के एजेंटक नोटिस सेहो आबिगेल छल कहैत छल जे ठाकुरजी आपके तीनो LIC का किस्त दो दो महिना से पिछे चल रहा हैं ! अगर आप को इस बिच (समय) में कुछ हो गया तो इस का जिम्मेवार LIC कम्पनी नहीं होगा ! अन्यथा तीनो पॉलिसी का पेमेंट जारी रखे ! आप का आभारी LIC एजेंट.... ई LIC के नोटिस देख देख आ सुनी सुनी के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो ! जे हमरा मरलाक बाद हमर परिवारक की गति हेत !

गाम से पाई आबैत छल से भेल चोरी ....
गाम मे जखन सभ के धीरे धीरे पता चललैन जे बौआ एक महिना से हॉस्पिटल मे भरती अछि ! ओकर आर्थिक स्थिति बड ख़राब छैक, त बाबु अपन दुई बिघा खेत कs भरना लगे देलैथ ई सोइच के जे बौआ जखन ठिक भs जेत ते भरना खेत छोरे लेब ! से पाई लs के बाबु आ भैया आबैत छलैथ ! रस्ते में कुनू चोर ट्रेन में हुनकर बेग चोरे लेल्कैन ! ओताही से ओ दुनु आदमी घर वापस चली गेला ! ई खबर जखन सुनलो हम आर बेसी बिमार पैर गेलो !

डॉक्टरक आदेश ....
डॉक्टरक आदेश सेहो भेट गेल छल जे इनका बिमारी का ईलाज हमारे हॉस्पिटल में नहीं हो सकता ! क्योकि हमारे समझ मे यह नहीं आता की इनको बिमारी कौन स हैं ! इसको किसी तांत्रिक जी के पास ले जाए वही इनका कुछ उपचार कर सकेगे ! अन्यथा इनका जान जा सकता हैं ! ई बात हम कान से सुनी सुनी के आर बेसी बिमार भs गेलो जे हमर परिवार, हमर खानदान, हमर समाजक लोक हमरा लेs केs कते कते दर दर भटकत !

गाम से भगतक आगमन .....
गामक लोक के जखन हमर बिमारीक कुन्नु चारा आस नै भेतलैन त तखने हमर बाबु भगत काका के कहलखिन जे दिल्ली मे हमर बौआ बहुत बिमार अछि से अहाँ ओतय चलू ! अहाँ भैरब बाबाक फूल आ बिभुत बौआ के देबैय तहि से हमर बौआ ठिक भs जायत ! भगत काका दिल्ली एलैथ हमरा फूल बिभुत देलैथ तखने से हमर सभ बिमारी धीरे धीरे दूर हुवे लागल ...

अहि दुवारे कहल गेल अछि जे ...
नै वैध डॉक्टरक, भेल भगता के काज !
शहरी रोगी के, भेल गामक इलाज !!
जय मैथिली, जय मिथिला,

लेखक -:

मदन कुमार ठाकुर,
कोठिया पट्टीटोल,
झंझारपुर (मधुबनी)
बिहार - ८४७४०४,
मोबाईल +919312460150 ,
ईमेल - madanjagdamba@rediffmail.com

शनिवार, 23 जनवरी 2010

देश प्रेम में आस्था

शरद ऋतु के महिना छल तिथि पुर्णमासिये के दिन छल़ आ तारिक सेहो ११ छल संग मंगल दिन सेहो छल। सब तरहे शुभ लग्न छल। हम बिमार अबस्थामे छलहुँ ताही द्वारे हम घरे पर रही। ठकन काका भोजन पर बैसले छलथि। हम दलान पर कुर्सी पर बैसल छलहुँ। बाबासँ रामायण आ महाभारतक संर्दभमे बात चित करैत छलो ! की ताबे में ऐगो जिपसी आबी के दलान के आगु में ठार भगेल हम दौर के देखय लेल गेलहुँ ओहीमे सँ चारि गो पुलिस हाथमे एगो पर्चि लके जिपसी के गेट से बाहर ऐला हमरा त बहुत डर भगेल जे हमरा पुलिस पकैर लेत ताही द्वुवरे हम ओतहि से धीरे धीरे ससरी के भागय लागलो की ताबे में ऐगो पुलिसबा हमरा पुछल्क ऐ लड़का ठकन ठाकुर का घर कौन हैं ? हम अपन मन में सोच्लो इ त हमरा काका के पकरैय लेल अयल हन हम पुलिस के दोसर के घर देखा देयत छियक आ ठकन काका के कहबैन जे ओ कतौ भैग जेता हम पुलिस के दोसर के घर देखा देलिय़ पुलिस ओहिठाम जेकs पुछ ताछ केलक आ १० मिनट के बाद फेर हमरे दलान पर आबिगेल आ बाबा से पुछलकैन जे ठकन ठाकुर को बुलाईये उसके नाम से वारन्ट आया हें! बाबा त अकचक्ति भगेला जे वारन्ट ककरा कहैत छै ! वारन्ट परचि जे छल से पुलिस हमरा बाबा के हाथ में पकरा देलकैन ! बाबा हमरा जोर से आबाज देलाइर्थि जे ऐमहर कनी आबह, इ वारन्ट पर्चि के पढ़ के सुनाबह , हम डराइर्ते डराइर्ते दलान पर ऐलो, वारन्ट पर्चि हम हाथ में लेलो देखलो इ अंग्रेजी में लिखल गेल अछि हम ओही के नही पैढ़ सकलो क्याकी हम ओही समय में दुसरी कक्षा में पढैते छलो ! ऐना त गाम घर में के ऐतेक अंग्रेजी पर ध्य्यान दैयत छैक ! ऐतबा में ठकन काका सेहो दलान पर आबी गेलाइर्थ आ पुलिस से कहलखिन जे हमही ठकन ठाकुर छी , सहाब हमरा कि कह चाहैत छी ? पुलिस हाथ में वारन्ट पर्चि के लsके सब के सामने पढैय लागल सब कियो धय्यान से सुनय लागल .......



To,


The Dear Public---


With due respects it is submitted that according to 1991 census your family was having 19 members out of which 11 are sons and 6 are daughters. Now Bihar Military Control Board, Patna needs urgently 4 of your sons. For the sake of the country and dedication towards the home land, as a true patriot, you are requested to surrender 4 of your sons for the service to the country.





Jai Hind Jai Bharat


BMC (B) Patna

पुलिसबा अंग्रेजी में सबटा धुरघार पढ़ने चली गेल मुदा ओकर मतलब गाम में कियोक नही बुझलक ! डैरते - डैरते ठकन काका पुलिस से कहलखिन सहाब हमरा मैथिली में बता दिय जे ऐकर मतलब कि होइत अछि ? पुलिस के मैथिली बाजल नही होइत छलये तयो ओ कोसिस के कs हिन्दीये में ठकन काका से वर्तालाप केलकैन ! पुलिस - आप के शादी के कितने वर्ष हुवा है ? ठकन काका २८ वर्ष पुलिस - आपने अपने घर की जनसंख्याँ पे कंट्रोल क्यों नही किये ? ठकन काका – सहाब हम अपन जनानी से कहलये जे तु छः महिन एक साल के लेल नैहर चली जो लेकिन ओ नही गेल , कहैत रहीगेल जे हमर माय बाबु बहुत गरीब अछी ! ओही मे हम की करब ? पुलिस - ठाकुर जी घबराने कि कोई बात नही है , आपके घर परिवार आज मंगल दिन से सदा के लिये मंगल मय रहेगा ! ठकन काका – सहाब जी से अहा कोना बुझैत छियेक ! पुलिस – ठाकुर जी मैं बिहार बिहार मिलेट्री संचालक पटना से आया हूँ ! कंट्रोल बोड़ के तरफ से आपके चार पुत्रो का बुलाबा हैं ! इन चारो को सिपाही फैज में नौकरी मिलेगा और तीन हजार रूपैया प्रतिमाहा के हिसाब से तंखा मिलेगा ! जिस से आपके बांकी बच्चे अछे से अछे स्कुल कालेज में पढ़ सकेगा और देश प्रेम में आस्था बनाये रखेगा ! ई बात सुनी के ठकन काका झटसन अपन बरका बेटा राम के कहलखिन जे दौर के भैरव स्थान से ताबे हलवाई के दुकान से उधारी पॉँच किलो मोती चुर के लडू लेने आउ आ पहिने भगवती के भोग लगाउ आय मंगल दिन सेहो छी भगवती सदा मंगल करती ! तखने चारू भाई राम , श्याम, घनश्याम आ बलराम बी एम पी केम्प - ६ मुजफ्फरपुर चली गेला ट्रेनिंग पर ! ऐमहर गाम में सातो भाई आ छबो बहिन धीरे धीरे स्कुल आ कालेज जाय लागला पढ़ लिख के सब कियो निक निक पोस्ट पर पहुच गेला ! कियो सीए त कियो डाक्टर आ इनजिनीयर , सब तरहे ठकन काका के नाम रोशन करैय लगला ! ठकन काका के चारू तरफ् से जान पहचान हुअ लगलैन , नेता मुखिया , पत्राकार , आ मिडिया बाला सब रोज कुन्नू नै कुन्न् बहाने हुन्का से पुछ ताछ करैय लेल आबैय लगलैन ! कियाकी ठकन काका के आय इन्कम लाखो , करोरो मेंs आबैय लगलेन ! ज्यो - ज्यो समय बितल गेल ताही अनुसार ठकन काका के सब बेटा आ बेटी के विवाहा दान होइत गेलैन ! कतेक में दहेज लके त कतेको मs बिना दहेज दके , सब तरहे सब काज धन्धा ठिक ठाक से चलैत छलैन ! ऐक दिन अचनक हुन्का घर पर ऐगे एमबुलेन्स आबिगेल सब लोक धीरे धीरे देखय लेल आब लागल , देख के सब चुपे चाप अपन घर दिस जाइर्ते रही जायत छल ! अही दृश्य के देखैक लेल ठकन काका सेहो गेला देखलखिन ओही में एगो लास जे हुन्कर माझिल बेटा श्याम के छलैन ! देख के ठकन काका बेहोश भगेला ! एमबुलेन्स के संग दुगो सिपाही और छल तकरा से सब कियो बात कारैय लागल , सिपाही कहलकैन जे हिनकर मौत कारगिलक लराई में भगेलाइन तै हम सब हिन्कर लास लके हिन्कर परिवार कए समरति करैय लेल आयल छी ! ठकन काका के समाज आ गाम घर में जतेक लोक सब छल सब कियो अंतिम संस्कार में भाग लेलैथ क्याकी ओ देश रक्षक शहीद पुत्र छला ! समय बितल गेल ठकन काका आब सेहो ७२ वर्ष के भगेल छला आ नैत आ नातीन के सेहो भरमार भगेल छलैऩ ! आइके समय मे हुनक परिवार के जनसंख्या ६८ सदश्य के भगेलेन तही उपलक्ष्य में आय १५ अगस्त के दिन , ठकन काका अपन सब परिवार के जतेक रिस्तेदारी नातेदारी सर समाज में जतेक भाइ बन्धु छल सब के ऐतबा नही सब नेता , मुखिया , शिक्षक गन आर जतेक आैफिसर सब छलैथ ! सब के आमंत्राण केने छलैथ , ठकन काका के मुख से ----- हम आई सब देश वासि के प्रति '' देश प्रेम में आस्थ '' बनाबैय या राखैय के लेल सब के प्राेतसाहन दैयत छी जे अपन देश अपन अधिकार अपन कर्त्वय अपन आत्म समान केवल देश प्रेम में आस्था रहला के बादे भेटैयत छैक ! जय हिन्द जय भारत , जय मैथिल जय मिथिला अहि अनुसारे सब नेता मुखिया, आर जतेक अभिवावक गन छलैथ सब कियो अपन अपन मुखारबिन्द से देश प्रेम में आस्था के लेल भाषन केलाइर्थ आ राष्ट्र् के मान बधेलाईथ आ देश भक्ति गीत से सेहा देश के सम्मान केलैथ ....


ला ला ----- ला ला


तिरंगा लहरे जो धीरे - धीरे


जय हिंद बोलू रे मैं धीरे - धीरे - २


सारे नेता जय हिंद बोले -


२हो हो ------ ला ला ------


तुम्ही मेरे देश का गौरव हो


तुम्ही मेरा देश का अभिमान हो


तुम्ही मेरा देश का भविष्य हो


तुम्ही मेरा देश का उज्जवल रूप हो


मेरे साथी हो तुम, मेरे सहारे हो तुम - २


बोले सारे बच्चे धीरे - धीरे


बोले सारे शिक्षक धीरे - धीरे हाँ - २


मेरा ये तिरंगा लहराता रहे


तिरंगा लहरे जो धीरे धीरे
हिंद जय बोलू रे मैं धीरे - धीरे - २


सारे नेता जय हिंद बोले - २


हो हो ----- ला ला


१८५७ से आजादी का नारा था


१९४२ को भारत छोरो आन्दोलन था


१९४७ को देश मेरा आजाद हुआ


सारे देश वासी मिलके नारा दिया


मेरा ये तिरंगा लहराता रहे


तिरंगा लहरे जो धीरे - धीरे,
जय हिंद बोलू रे मैं धीरे - धीरे - २


सारे नेता जय हिंद बोले - २








हो हो ----- ला ला


महात्मा गाँधी जैसे अहिंसा वादी थे

सुभाष - भगत जैसे क्रांति कारी थे


आम्बेडकर जैसे राईटर था


मोती और शास्त्री जैसे लीडर था


मेरा गौरव थे वो मेरा अभिमान थे वो - २


गाये गुणगान उनके धीरे - धीरे


गाये गुणगान वो भी धीरे - धीरे


मेरा ये तिरंगा लहराता रहे


तिरंगा लहरे जो धीरे - धीरे, जय हिंद बोलू रे मैं धीरे - धीरे - २


सारे नेता जय हिंद बोले - २

जय हिंद, जय भारत, जय मैथिली, जय मिथिला !!




मदन कुमार ठाकुर,
कोठिया पट्टीटोल,
झंझारपुर (मधुबनी)
बिहार - ८४७४०४,

मोबाईल +919312460150 ,91-9555076439
ईमेल - madanjagdamba@rediffmail.com
madanjagdamba@yahoo.com

शनिवार, 9 जनवरी 2010

लन्दन वाली कनियाँ



   ( हम थोर बहुत जे शिक्षा के अध्यन केलो से गाम से केलो , शिक्षा कोनो खास नही अछि जतेक अछि ओतबे में समांबेस अछि

परिवार ,समाज ,गाम - घर में ऐगो अलगे पहचान होयत अछि , जकरा हर मनुष्य अपन संस्कृति के तोर पर अध्यन आ पालन करैत अछि, चाहे मुर्ख होय या अमूल्य शिक्षा धरी ज्ञानी , देशी होय या कुनू विदेशी सब के लेल अपन-अपन संस्कृति के पहचान होयत अछि , जकर उदाहरण हम अपनेक सबहक सामने उपस्थित करैत छी , )




                     लन्दन वाली कनियाँ

(अनुराधा अपन बाबु जी से उदास स्वर में , ---)

बाबु जी भैया के गाम से लन्दन गेना तक़रीबन चारिम साल छी ,मुद्दा एखन तक कुनू खोज -खबैर नही अछि , सब साल भरदुतिया आ रक्षा बंधन के दिन उदास बैस परैत छी , मुद्दा भया के कुन्नु चिन्ते नही ?

बाबु जी अनुराधा से -

बुच्ची एतेक उदास जुनी होऊ एक न एक दिन अहांक भैया जरुर ओता , लन्दन अहिठंन से सात समुन्दर पर स्थित अछि , वक्त त लगवे करैत अछि आखिर कत जायत ओ हमर बंस के मान मर्यादा रखबे करत --

(बच्चा काका बाबु जी से बात करैत बजला - )

भैया , कोइलख गाम से अपन बड़का बउवा पर घटक बनी आयल छल ओ सब हमरा से बहुत निक जेका बात केलनी बुझाना गेल जे घटक सब निक आचार बिचार बाला सब छैथि , आ कनियाँ सेहो आर के कालेज से बी ए केने छैन , यदि अहांक आदेस होय त हुनका सब के अपन दलान दरबज्जा पर बजाबी ?

(बाबु जी काका से धर्य पूर्वक बात करैत -- )

सुनू बचे लाल , बोउवा हमरा जायत जायत बस ईहा कहैत गेल जे बाबु जी हमरा लन्दन में दू साल के कोर्श अछि ओकर बाद अहाँ जे कहब से हम करैक लेल तैयार भ जायब , वियाह आ शादी त आई-कैल के युग में आम बात अछि ,

       समय बितल गेल घटक पर घटक अबैत छल मुद्दा बड़का बोउवा के लेल धन्य सन, कुनू हाहेबरबादे नही गाम-घर के कुनू चिंता नही

एक दिन के बात अछि बाबु जी दरिभंगा कुन्नु खास काज के प्रयोजन से गेल छलैथि त ओतहि बाबु जी के स्कुलिया संगी साथी से मुलाकात भेलानी , बहुत देर के बाद बड़का बोउवा के विवाह दान के सेहो चर्चा चलल , सब आदमी बाबु जी से कही सुनी के जबरदस्ती गाछ लेलकैन, मज़बूरी बस बड़का बोउवा के विवाह बाबु जी से ठीक करा लेलकैन
अंत में बाबु जी के हाँ कहै परलैन

      गाम में सब कियो वियाहक तयारी में लगी गेल छल , कन्या गत के त और बेशी चिंता रहित छैक जे कतेक बर्याती आयात कतेको सर कुटुम सब राहत आ सर समाज सेहो सब राहत , ओही हिसाब से वियाहक तयारी करैत छलैथि , मुद्दा बड़का बोउवा के कुन्नु अता-पत्ता नही , कतय छैथि आ की करैत छैथि ?

         कन्या गत के तरफ से बेर बेर ई समाद आबैत छलैन जे अहाँ के लड़का कहिया धरी गम आबैत छैथि , जतेक जल्दी होय ओतेक जल्दी वियाह कन्या दान भ जय त ठीक होयत छैक
       बाबु जी के पास नै कुन्नु फोन नंबर आ ने कुन्नु अता पत्ता जे बड़का बउवा के खबैर करता
गाम में बाबु जी के सब कियो ताना मारैत छलैन जे फला के बेटा एहन छैन , त फला झा के इज्जत नहीं छैन , बेटा के वियाह्य ठीक क लेलैथि आ बेटा के आते - पते नहीं छैन , बाबु जी शर्म से मरेय मान सन लागैत छलथि
बस आशा ईहा छलैन जे कियो किमरोह से आवी के ई कहैं जे बड़का बोउवा आबी गेल बियाहक तयारी करू
दिन ,सप्ताह , महिना सब बितल जायत छल , मुद्दा भैया के कोनो खोज खबैर नै , कएक महिना बीत गेल कन्यागत सब अपन ई कथा के वापस क लेलकैन , ई कहिके जे हम अपन बेटी के वियाह अहि घर में नहीं करब , जकरा अपन परिवार ,समाज में मान मर्यादा के अपन संस्कृति के कुन्नु इज्जत नही छैन , हम दोसर थम कन्या दान क लेब , हमर बेटी सी- एम् सैंस कालेज से डिगरी केने अछि , ओकरा लेल अनेको आइ एस ऑफिसर भेटतैक

एहन - एहन बात सुईनी - सुईनी के बाबु जी के की हालत होयत छैन से त हमही सब जानैत छि , आखिर भैया किया नै गेलखिन जे गाम - घर के इज्जत ककरा कहैत अछि

दुखक पहर सन लागैत छल , दिन कटानायं सपना सन लागैत छल , प्रेम से बोल बचन सुनैक लेल कान समायक आश लागोने छल , जे दिन कहिया घुरत , देखलो कईक दिन के बाद हमरा दलान पर डाक पिन आयल छैथ
बाबु जी हमरा झट सन अबाज देलैथि - आ कहलैथि जे देखियो ककर ई टेल्ली ग्राम आयल अछि , हम झट सन डाक बाबु से टेल्ली ग्राम लके देखय लगलो
देखलो जे ई टेल्ली ग्राम बाबु जी के नाम से लन्दन से आयल अछि
हमरा अपना आप क ख़ुशी के भंडार भेट गेल , ख़ुशी के अंत नहीं छल , जे हम अपन मुँह से केना क कोन रुपे शब्द निकालब ? एक तरफ से भैया के टेल्ली ग्राम के ख़ुशी आ दोसर भैया से जुरल भात्र प्रेम के याद के आंखी से नोर पोछैत कनिते हम बाबु जी से कहलियनि जे , भैया के ई टेल्ली ग्राम आयल अछि , बाबु जी के ई बात सुनी के , आँखी के सामने ख़ुशी क बदल छा गेलानी , जे ओ कुन रुपे कोनाक के अपन मुँह से शब्द के बरशात करता
जे हमर बड़का बोउवा के टेल्ली ग्राम आयल अछि
टोल मोहल्ला सारा गाम सोर भ गेल जे बड़का बोउवा के टेल्ली ग्राम आयल अछि सब कियो सुनी के बहुत खुश्ही भेला , जे आब बड़का बोउवा जरुर अपन गाम आयत


( बाबु जी अनुराधा से --)

बुच्ची ई टेल्ली ग्राम पढ़ी के सुनाऊ जे बड़का बोउवा कहिया धरी गाम आबैत अछि ? ---

अनुराधा - अछ बाबु जी ठीक अछि सुनबैत छी ---


आदरनिय माय - बाबु जी एवं काका- काकी ---

चरण स्पर्श ----

और छोट बुवा - बुच्ची सब के प्यार आ स्नेह संग शुभ आशीर्वाद -----

हम अहिठं अपनेक सबहक आशीर्वाद से कुसल मंगल सं छी ,

आ माँ भगवती सं सदा कामना करैत छी , जे अहुँ सब कुसल

मंगल सं होयब ----

आगा बात समाचार सब ठिक अछि , हमर चिन्ता नहीं करब
हम अगिला महिना धरी अपन परिवारक संग फलाईट से पटना आयब आ पटना से गाम आयब , वाकी बात समाचार गाम एला के बाद करब ----


( अहाँ के बड़का बउवा )---

ई बात सुनी के जे हम अपन परिवारक संग अगिला महिना धरी गाम आबैत छी , सब कियो पहिने से जायदा मरेय मान सन भगेला , ई सोईची के जे बेटा हमर नालायक भगेल , अपन मान मर्यादा ,अपन संस्कृति के विसैरी गेल , विदेश में जाके बियाह केलक शर्म से हमर नक् कटी गेल , सपनो में नही ई शोच्लो जे बड़का बोउवा ई एहन काज करत , बियाहो केलक त सतसमुन्दर पर जाके जाकरा अपन संस्कृति नही, संस्कृति ककरा कहैत अछि से ज्ञान नही , बोली बच्चन के ताल - मेल नहीं , जाकरा सीता और सावित्री जेका मान मर्यादा नहीं , उटैय - बसैय के तौर तरीका नहीं , ससुर- भैशुर के मान सम्मान नै , पहिरे - सोहारिय के ढंग नहीं , ओ की अपन मथिली संस्कृति के रक्षा करत , ई बात सब कियो सोची -सोची के अपन जिनगी के आखिरी साँस लैत छल

समाय बितल जायत छल , की एक दिन अचानक बड़का बोउवा के फोन आयल की हम सब दरिभंगा तक आबिगेल छी, कुछीक घंटा में अपन गाम आबी जायब ---

गामक लोक सब कियो तैयार भगेल छल , ई देखैक लेले जे बड़का बोउवा लन्दन से कनियाँ आनैत छैथि , ओकर केहन रंग , केहन रूप , केहन अंग्रेजी बोल बच्चन आ केहन पहिरे सोहरै के संस्कार हतय ? से देखै लेलेल सब कियो दालान के आगू में ठाड़ छल
मुद्दा माय - बाबु , काका - काकी सब कियो नही सामने एलखिन देखैक लेलेल , कियाकि हुनका से पहिने हजारो लोग दालान के सामने ठाड़ छल , बड़का बोउवा के शर्म से निचा करैक लेल जे ई अहां की काज केलो समाज के नाम रोशन करैक बदला में बिदेशी क बियाह क अनलो ?

देखलो एतबा काल में एगो टेम्पू में से दू सालक एगो छोट बच्चा आ एगो दुराग्मानिया साड़ी सन पहिरने , हाथ में भरल हाथ लहठी चुरी , मांग में भरल सिनुर , आ माथ पर साडी लेने टेम्पू से बहार एली , देखि के सब कियो अकबक सन भगेला जे ई के आबिगेली , तबे में पछा से बड़का बोउवा सेहो एलैथ , सब के बेरा- बेरी से पैर छू के गोर लगल खिन आ एतेक भीड़ देखि के बड़का बोउवा झट सन बजला जे गाम में कुनह मेला लागल अछि की जे पूरा परपटा के लोक सब अहिठन ठाड़ छी ? तबे में किमरोह से एगो छोट का बच्चा बजल जे सब कियो अहिके कन्या के देखाई क लेल आयल अछि ---

( ई बात सुनी के लन्दन वाली कनिया अचम्भा में पारी गेली जे आब हम ककरा सब के की कहबै -- )

लन्दन वाली वाली कनिया बहुत बिलम्ब के बाद सोइच बिचारी के अपन मुहँ से आबाज निकैलते बजली -----

हमहूँ एगो आदर्श नारी छी , सीता यदि बड़ सुन्दर आ पतिवर्ता छली तयो हुनका अग्नि परीक्षा देबई परल छलैन, यदि हुनकर रहन - सहन आ बैवहार निक छलैन त हमहूँ ओही सं कम नै छी
अहाँ सब अपन- अपन संस्कृति के बचाबई में जनम गुजारी देत छी , अपन मात्री भाषा शिखई में जनम से अनेको बरस लगाबैत छी , लेकिन हम अहाँ के मात्री भाषा आ संस्कृति सिखाई में केवल मात्र चरिय साल गमेलो

और एतबा नही अहांक संस्कृति के सात समुन्दर पार रहितो हम मान - सम्मान देलो
हम लन्दन पोस्ट ग्रेजवट जरुर छी , मुद्दा अहाँ सबहक संस्कृति / कल्चर के सामने हम आई नस्त मस्तक छी , ओही कारने से हम आई अपनेक सबहक सामने सीता और साबित्री सन बनय चाहैत छी
लक्ष्मी आ सरस्वती ओताही निवास करैत छैथि जतय नारी के मान - सम्मान आदर के साथ भेटैत अछि , ओ अछि अहाँ के मिथिला
एतय हम बैदेही रूप में अपना - आप के देख चाहैत छी , जे हमहूँ एगो मिथिला के नारी छी ----

ई दिर्श्य देखि आ सुनी के , माय - बाबु ,काका -काकी सब कियो घर से बहार एला आ सब कियो बेरा - बेरी से लन्दन वाली कनिया के सामने हाथ जोरी का , आदर पुर्बक मिथिला के नारी जेका हुनको बिध क अनुसारे दुरागमन जेका लन्दन वाली कनिया के अपन घर के पुतोहू बनोलथी




( समाप्त )



लेखक - 

जगदम्बा ठाकुर
पट्टीटोल, कोठिया ,
भैरव स्थान , झांझरपुर
मधुबनी , बिहार -८४७४०४
मोबाईल - 09312460150
ई मेल - madanjagdamba@yahoo.com
madanjagdamba@rediffmail.com

रविवार, 20 दिसंबर 2009

चारि टा टेलीग्राम मदन कुमार ठाकुर


चारि टा टेलीग्राम -------
हमरा गाममे एक टा पुजेगरी बाबा छलथि ! ओऽ सभ भगवानक परम भक्त छलथि (खाश कs भैरब बाबाक बेसी पूजा पाठ करैत छलथि) मानू जेना ओऽ सभ देवता गणकेँ अपना बसमे कs लेने छथि ! गाममे बहुत प्रतिष्ठा आऽ मान सम्मान हुनका भेटैत छलनि, सभ कियो पुजेगरी बाबा पुजेगरी बाबा हरदम अनघोल करैत रहैत छल ! सबटा धिया पुता सभ साँझ-भोर-दुपहरिया बाबासँ कहानी आऽ चुटुक्का सुनए के लेल ललाइत रहैत छल ! बाबा सबकेँ केवल भलाई करैत छलखिन ! किएकी बाबा भैरबक परम भक्त छलखिन ! चारी घंटा केवल पूजा पाठ करयमे समय लागैत छलनि ! शीत-लहरी ठंढी रहए वा वर्षा होइत रहए, हुनका केवल पूजा पाठसँ मतलब रहैत रहनि ! खेती बारीसँ कुनू मतलब नञि रहैत रहनि, पूजा केलाक बाद केवल समाजक भलाईमे ध्यान दैत छलखिन ! जे की केला सँ, समाजमे यश आर प्रतिष्ठा रहत आऽ ग्रामीण लोकनिक भलाई होइत रहत!
एतबे नञि दू चारि गाममे यदि किनको झगड़ा होइत छलनि तँ पुजेगरी बाबा पंचैती करैत छलखिन !मुदा पुजेगरी बाबाकेँ एकटा बातक विशेष ध्यान रहैत छलनि, जे हम यदि मरि जायब तँ हमर समाजक की होयत ! हमर मृत शरीरकेँ केना अग्निमे जराओल जायत, ई सब बात हुनका परेशान केने रहैत छलनि !
एक दिन पुजेगरी बाबा यमराजसँ प्रार्थना आऽ विनती केलथि, जे हे यमराजजी, हमर मरए के समय जखन नजदीक आबए तँ हमरा डाक द्वारा टेलीग्राम, वा नञि तँ ककरो दिआ समाद पठा देब ! जाहिसँ हम निश्चिंत भs जायब आऽ अपन सबटा काजकेँ समेट लेब, आर हमर जे अपन सम्पति अछि (पूजा पाठक सब सामान) से हम कुनू निक लोककेँ दऽ देबैन जाहिसँ आगू ओऽ हमर काज धंधाकेँ देखताह !
समय बितल जाइत छल ! पुजेगरी बाबा वृद्ध सेहो हुअ लगलथि ! केश सेहो पाकि गेलनि ! दाँत सेहो आस्ते-आस्ते टूटए लगलनि आऽ डाँर सेहो झुकए लगलनि, ओऽ आब यमराजक टेलीग्रामक इंतजार करए लगलाह !एक दिन पुजेगरी बाबा भगवानक पूजा-पाठ केलथि आऽ भैरब बाबाक सेहो ध्यान केलथि ! भोजन केलाक उपरांत कुर्सी पर बैसल छलथि, अचानक पेटमे दर्द उठलनि, ओहिसँ आधा घंटाक बाद हुनकर शरीरसँ प्राण निकलि गेलनि, सब ग्रामीण लोकनि मिलि कए हुनक अंतिम संस्कार कs देलकनि ! किएकी पुजेगरी बाबाकेँ किओ वंशज नञि छलनि,ताहि लेल ग्रामीणक सहयोगसँ पंचदान-श्राद्ध कर्म बिधि पूर्वक कs देल गेलनि !
पुजेगरी बाबा जखन स्वर्ग लोक गेलाह तँ हुनका लेल चारू द्वार खुजल छल! यमराज हुनका आदर पूर्वक सभा भवनमे लs गेलथि ! हिनकर बही खातामे सबटा नीके कर्म कएल गेल छलनि, ताहि लेल पुजेग्अरी बाबाकें निक स्थान निक व्यबहार आऽ निकसँ स्वागत कएल गेलनि!हुनका स्वर्गमे कुनू तरहक कष्ट नञि होइत छलनि, मुदा ओऽ पूजा पाठ, पूजाक सामिग्री आर समाजक कल्याण लs कए बहुत चिंतित छलाह ! हुनका कनियोटा स्वर्गलोकमे मोन नञि लागए छनि !
एक दिन पुजेगरी बाबा खिसिआ कए यमराजसँ कहलखिन, जे हम अहाँकेँ कहने रही जे हमरा मरएसँ पहिने अहाँ टेलीग्राम भेज देब ताकि हम अपन काज धंधाकेँ सही सलामत कs कए स्वर्ग लोक आबितहुँ से अहाँ नञि केलहुँ ?यमराज कहलखिन :पुजेगरी बाबा हम अहाँकेँ चारि टा टेलीग्राम भेजलहुँ मुदा अहाँ ओकरापर ध्यान नञि देलहुँ से कहू हमर कोन कसूर अछि ? पुजेग्री बाबा सुनि कए चकित भs गेलाह, जे हमरा तँ कोनो टेलीग्राम नञि आयल! नञि यौ यमराज, अहाँ झूठ बजैत छी ! दुनु व्यक्तिकेँ आपसमे बहस चलए लगलनि तँ यमराज कहलखिन, सुनू पुजेगरी बाबा, हम अहाँकेँ कखन-कखन टेलीग्राम पठेलहुँ, अहाँ ओकर ध्यान राखब !
(१): हम पहिल टेलीग्राम जखन पठेलहुँ तखनसँ अहाँकेँ कारी केश पाकय लागाल
(२): हम दोसर टेलीग्राम जखन पठेलहुँ तखनसँ अहाँक आस्ते-आस्ते सभ दाँत टूटय लागल
(३): हम तेसर टेलीग्राम जखन पठेलहुँ तखनसँ अहाँकेँ आस्ते-आस्ते डाँर झुकय लागाल
(४): हम चारिम टेलीग्राम जखन केलहुँ, तखन अहाँ एतेक देरी कs कए हमरा ओहिठाम एलहुँ !
आब अहीँ कहू पुजेगरी बाबा, हमर कते गलती अछि ?
पुजेगरी बाबा कहलखिन :
यमराजजी अहाँ ठीके कहैत छी ! हम अपन काज-धंधामे लागल रही, ताहि द्वारे नञि ध्यान दए सकलहुँ आऽ नञि पढ़ि सकलहुँ अहाँक चारि टा टेलीग्राम ........
जय मैथिली, जय मिथिला-:
लेखक :-
मदन कुमार ठाकुर
पट्टी टोल ,कोठिया ,
झंझारपुर , (मधुबनी)बिहार - ८४७४०४
मो - ९३१२४६०१५०
ईमेल - madanjagdamba@yahoo.co

शनिवार, 7 नवंबर 2009

आयल अपन गामक याद-


आयल अपन गामक याद- 

एक समयक बात छल हम दिल्लीसँ गाम गेल छलहुँ, हमर काकाक बेटा सेहो २६ सालक बाद गाम आयल छलथि ! हुनका सोझाँ देखि कs मन हर्षित भेल, जेना एकटा मरल प्राणीमे जान अबैत अछि, ओहिना हम अपनाकेँ महसूस करैत छलहुँ ! ई बात हमर जन्मसँ पहिनेक छी ! भैयाक मुखसँ सुनल ई वास्तविक कहानी छी ! हम भैयासँ पुछलियनि जे अहाँ अपन जीवनक यथार्थ कथा सुनाउ , अहाँ गामसँ केना भागलहुँ आऽ केना गामक मोन पड़ल, से हम अहाँसँ जानए चाहैत छी !



भैयाक मुखसँ निकलल बास्तविक सच ई अछि !
हम आठ सालक छलहुँ, बाबू काका सभ स्कूल जाय के लेल कहलथि, तँ हम आन गाम भागि जाइत छलहुँ ! एहिना सभ दिन कुनू न कुनू बहाने कतहु ने कतहु चलि जाइत छलहुँ ! एक दिन स्कुलक खातिर काका आओर बाबू बड़ मारि मारलथि, हम किताब कॉपी लए स्कुल चलि गेलहुँ, ओम्हरसँ अबैत काल किताब कोपीकेँ एगो बोनमे फेक देलियैक आर गाम छोरि देलियैक ! भगिते - भगिते विदेश्वरस्थान एलहुँ, पटना बला बसक पाछाँमे हम लटकि गेलहुँ। जतए टोकैत छल ओतय हम उतरि जाइत छलहुँ ! एहिना कऽ कए पटना पहुँचि गेलहुँ, पटना जाइत जाइत हमरा भूख बहुत जोर लागि गेल छल ! हम एकटा मारवाड़ी होटलक सामने गेलहुँ, जाऽ कए ठार भऽ गेलहुँ ! हमरा जेबमे एकोटा फुटल कौरी नञि छल, जे हम भोजन करितहुँ, आधा घंटा हम होटलक सामने ठार छलहुँ, तँ ओकर मालिक कहलक, जे "बेटा तोहार के भूख लागल बा का?" हम चुप - चाप मूड़ी डोलाऽ देलियनि। ओऽ हमरा रोटी आर तरकारी देलक, हम भरि पेट भोजन केलहुँ ! बादमे कहलियनि, जे हमरा होटलमे नोकरी देब की ? ओऽ हमरा ८५ रुपैया महिनाक हिसाबसँ नोकरी पर रखलक ! हम होटलमे तीन मास काज केलहुँ, ओतय एक दिन कारीगरसँ झगड़ा भऽ गेल, तँ हम स्टेसन पर आबि कए बैसि गेलहुँ, ओतय आठ घंटा बैसल छलहुँ ! चारिटा आदमी सेहो बैसल छलथि, ओऽ आपसमे बात करैत छलथि, जे गुजरातमे बड़ नीक नोकरी भेटैत छैक, से सभ आदमी ओतय चलितहुँ ! हम ई बात अपन कानसँ सुनलहुँ आर हुनका सभकेँ कहलियनि, हमहूँ अपने सभक संग चली? लेने जाएब ? ओ सब कहलथि, चलू। किए नञि लऽ जाएब ! हुनका सभक संग गुजरात पहुचलहुँ, ओइठाम सभ आदमी कपड़ा छपाई केर कंपनीमे काज पकड़लहुँ ! ओतय हमरा १६० रुपैआ महिनाक हिसाबसँ तनखा भेटए लागल ! दिन , महिना , साल बीति गेल, हम सेहो २० सालक भऽ गेलहुँ ! सोचलहुँ जे गाम चलि जाइत छी, ओतय बाबू काकाकेँ कह्बनि, विवाह दान कराऽ देताह, आऽ गामेमे रहब, खेती बारी करब ! फेर एक दिन अचानक मोन पड़ल, जे हमरा बाबु आऽ काका बड़ मारि मारलथि, आऽ घरसँ भगा देलथि। हम गाम नञि जायब ! समय बितल गेल, अचानक एक दिन दरभंगाक एक व्यक्ति भेटलाह, पुछलथि, जे अपनेक घर कतए भेल ? हम अपन घरक पता बिसरि गेल छलहुँ ! केवल अपन गामक नाम बतेलियनि आऽ बाबुक नाम ! ओऽ कहलथि, जे ओहि गाममे तँ १९८७ मे बड़ बाढ़ि आयल छल, ओहि गाममे बहुत लोक भसिया गेल, कतेक घर सेहो उजरि गेल ! पता नञि अहाँक घरक की भेल ! हम कहलियनि, जे हमरो घर फूसेक छल ! पता नञि, ओहो भासि गेल की ठीक अछि ! सुनि कऽ बड़ दुःख भेल, सोचलहुँ, आब की कएल जाय ! ओहि व्यक्तिसँ पुछलियनि ! जबाब भेटल, जे अहाँ एतहि विवाह दान कs लियऽ, हमरा एकटा सुपुत्री अछि हुनकेसँ !
            ओहिठाम विवाह केलहुँ, दुटा संतान सेहो उत्पन्न भेल, लक्ष्मी आर आनंद ! दुनुकेँ अएलासँ हमरा अपन परिवार , अपन घर , अपन गाम सभ बेर-बेर मोन आबए लागल, मुदा करब तँ करब की ! दुनुटा आठ आर छः सालक भऽ गेल छल ! ओऽ सभ बेर-बेर पुछैत छल, जे हमर बाबा आऽ मैयाँ कतए छथि ! हम मोनमे मात्र ईएह सोची, जे माई आर बाबु आब कतए हेथिन आऽ कोना ई जीबैत हेताह ! जेना हम लक्ष्मी आऽ आनंदक लेल जान प्राण दैत छी, तहिना हमरो माई आर बाबु हमरा लेल प्राण दैत हेताह ! नञि, हमरासँ बड़का भूल भेल, जे हम अपन गामकेँ त्यागलहुँ ! मोनमे मात्र माञि आर बाबुक याद अबैत छल ! जे बाबु केना हेताह, माई हमर कतए हेतीह ! पता नञि काका आऽ काकी कतय हेताह, बेर-बेर मोनमे ईएह खयाल अबैत छल ! सोचलहुँ जे एक महिनाक छुट्टी लए गामसँ घूमि आबी ! आऽ सभ धिया-पुताकेँ सेहो घुमा देबए ! जे कमसँ कम गामक याद तँ अबिते रह्तए ! सभ परिवार मिलि कए हम दरभंगा पहुचलहुँ ! ओतयसँ टेकर कऽ कए बिदेश्वर स्थान पहुचलहुँ, ओतयसँ हम ई नञि जानैत छलहुँ, जे हमर गाम किमहर अछि आऽ हम कतय जायब , हम की करब ! ओतय बाबा बिदेश्वरक पोखरिमे स्नान केलहुँ आऽ बाबाकेँ सेहो प्रणाम केलहुँ ! सभ बच्चा सभकेँ भूख सेहो लागि गेल छल ! सोचलहुँ जे गामक पवित्र भोजन चूडा दही चीनी होइत छञि, से ग्रहण करी ! भोजन केलाक उपरांत होटल मालिकसँ पुछलियनि, जे यौ हमरा पट्टीटोल जेबाक अछि, से हम केना जाएब ! ओऽ हमरा कहलथि जे अहिठामसँ रिक्सा भेटत, ओऽ अहाँकेँ घर तक छोड़ि देत ! हम सभ रिक्सापर बैसलहुँ, रिक्सा बाला भरि रस्ता ईएह पुछैत छल, जे मालिक अहाँक कोन टोल घर अछि ! जबाब किछु नञि भेटैत छल, जे हम रिक्साबाला के कहबइ ! जौँ जौँ हम अपन घरक दिस जाइत छलहुँ, किछु नञि किछु याद जरुर अबैत छल ! रिक्सा बालासँ बस केवल ईएह कहैत छलहुँ, जे कनिक दूर घर आर अछि ! अपन घरक लग जखन गेलहुँ तँ छोटका काका नज़र पड़लाह, हम हुनका चीन्हि गेलियनि, मुदा हमरा ओऽ नञि चीन्हि सकलाह। किएक तँ २६ साल भऽ गेल छल ओऽ बहुत जरुरी काजसँ हाथमे टेंगारी लए जाइत छलथि ! कनेक दूर जखन आगू गेलहुँ, देखलहुँ जे ओऽ फूसिक घर ओहि दिशामे अछि जाहि दिशामे हमरा सभ किछु यादि छल ! सभ ठीक-ठाकसँ याद आबए लागल ! हम जखन दलान पर पहुंचलहुँ, सब हमरा दिस घुरि-घुरि कए देखैत छल, जे ई व्यक्ति अपन परिवारक संग के थिकाह ! हम रिक्सा बालाकेँ पाइ दऽ देलियनि आऽ एकटा छोट बुच्चीसँ पुछलियनि, अपन बाबुक नाम लऽ कए, जे हुनकर घर कोन छियनि। ओऽ बुच्ची कहलथि जे ईएह छियनि हुनकर घर ! अंगनामे कन्नारोहट होइत छल, सभ जोर-जोरसँ कनैत छल, काकी यै काकी, हमरा छोड़ि कऽ कतय चलि गेलहुँ ! आँगन जखन पहुंचलहुँ, देखलहुँ, ओऽ लाश ओऽ मुर्दा हमर माइक छी ! हम अपन आपकेँ सम्हारि नञि सकलहुँ ! जोर-जोरसँ कानए लगलहुँ! लक्ष्मी आर आनंद पुछलक, जे पापा अहाँ किए कनैत छी ! हम कहलियनि, जे ई अहाँक दादी माइ छथि। ई अपना सभकेँ छोड़ि कए चलि गेलीह। बहुत गलती भेल जे हम एको दिन पहिने किएक नञि अएलहुँ ! हमरा आसमे हमर माइ आइ अपन प्राण त्याग कऽ लेलक ! हम बहुत अभागल छी, हम बहुत पापी छी, जे हम अपन माइ बाबुकेँ बात नञि मानलहुँ, हमरासँ आइ बहुत अपराध भेल ! हम आइ कतहु के नञि रहलहुँ ! एतबामे बाबु आऽ काका सभ क्यो बाँस काटि कए आबि गेलाह, माइक अंतिम संस्कार करबाक लेल ....










जय मैथिली, जय मिथिला


मदन कुमार ठाकुर


कोठिया पट्टीटोला


झंझारपुर (मधुबनी)


बिहार - ८४७४०४
MO  -9312460150
(हम खट्टर काका के दलान पर जखन पहुचलो खट्टर काका भोजनोपरांत कुर्सी पर बैसल छालैथ)

हम कहाल्यैन खट्टर काका गोर लगैत छी !

खट्टर काका - जिवैत रहू हम आहा के पह्चैन नै पेलो आहा के थिको !
हम - हम मैथिल और मिथिला सं आयल छी , हमर नाम मदन कुमार ठाकुर भेल, हमर घर कोठिया - पट्टीटोला अछि
खट्टर काका - तखन आहा हमरा सं की पुछेय चाहैत छी !
हम - आई सं किछ साल पहिने अपनेक ओहिठंम हरिमोहन भईया आयल छालैथ ओ आहा सं चुरा दही चीनी के मूल तत्व के वर्णन जाने आयल छलाह ! तीनो लोक से मिल के बनल अछि जे इ चुरा दही चीनी से आहा सं जानकारी हुनका भेटलैन ! ओही उद्देश सं हम आय अपनेक समक्ष मिथिला विकाश के संदर्भ मं किछ बात करै लेल आयल छी यदि अपनेक के आज्ञा होय त हम किछ अर्ज करी !
खट्टर काका - बाजल जाऊ आहा की पूछे चाहेत छी !

हम - खट्टर काका हम मिथिला के संस्कृति पर पहिने ध्यान देब चाहैत छी जे हमर संस्कृति कहेंन अछि, एकर मान - सम्मान, आचार - वैवहार एक दोसर के प्रति आदर - सत्कार, प्रेम - भावना कहेंन अछि ! आगा जेके एकर मिथिला के उत्पवित संतान पर कतेक प्रभाव परते और नारी जाती के कतेक सम्मान रहते ! मिथिला महान बनत की नै से हम अपने सं जाने चाहे छी !

खट्टर काका - मदन बाबु यदि मिथिला के संस्कृति के बात करी त पहिने बीतल इतिहास के देखि ! आय से कई साल पहिने विद्यापति जी छला मंडनमिश्र, अयाची मिश्र शंकराचार्य जी इत्यादि अनेक महाविद्वान सब भेलैथ ओ सब अपन - अपन कर्तव्य पुरा के क मिथिला के मान - सम्मान दैत चल बैसला ! एतबे नै हम राजा जनके लग सं सुनैत छी मिथिला वर्णन, मिथिला दर्शन, मिथिला के आचार - बिचार दोसर के प्रति सदभावना मधुरबचन इ सब त अपन मिथिला के देन अछि ! दोसर थम कथापी इ कतो नै भेटत क्येक त इ मिथिला मेखूबी छै जे एक - दोसर सं प्रेम मधुर बोली केना बाजल जायत अछि, आय यदि मिथिला बासी चाहैथ जे हमरा संस्कृति पर कुनू आंच नै आबय त पहिने अपन घर के संस्कृति पर ध्यान देब परतेय ! क्येक त हम आय घर - घर मे देखैत छी जे अपन संस्कृति के छोड़ी विदेशी कल्चर लोग अपनाबैत अछि ! माँ - बाबूजी कहब त दूर आब मोम - डैड कहल जायत अछि ! एक दोसर के प्रणाम केनाय त दूर आब हेल्लो - हाई बाजल जायत अछि ! मानलो आई - कैल मे लोग सब किछ अंग्रेजी ज्यादा पैढ़ - लिख लेलक अमेरिका लन्दन सब जाय लागल तकर माने की हम अपन संस्कृति के छोरी दिए इ हमर कर्तव्य अछि इ हमर अधिकार अछि जे विदेशो मे जाय के अपन संस्कृति के उपयोग करी ताहि मे हमर सब मिथिला वासी के कल्याण होयत , और हर मिथिला राज्य आगा - आगा मार्ग पर चलैत रहत ! हमर इ कामना आर दुवा अछि !

हम - खट्टर काका हम देखैत छी जे हमरा मिथिला मे महान - महान कविगन, लेखक, डॉक्टर, इंजिनियर,प्रेस रिपोर्टर सब छैथ ताहि उपरांत हमर मिथिला राज्य आगा विकाश क्येक नै के रहल अछि ! एकर की कारन अछि ?

खट्टर काका - देखु मदन बाबु आय कैल के जूग मे सब अपन - अपन रोजी - रोटी के मार्ग बनबैत छैथ ! दोसर से दोसर के ककरो - ककरो त मेलो - मिलाप नै होइत छैन ताहि हेतु ओ मिथिला विकाश की ओ त अपन घरो के विकाश नै कs सकैत छैथ !

हम - खट्टर काका हम देखैत और सुनैत छी जे आय कैल मे सरकार शिक्षा पर पूर्णरुपे खर्चा कs रहल अछि ! ताहि उपरांत कुनू परिवर्तन नै देखैत छी , सब कियो दिल्ली - मुम्बई भागैत फिरैत अछि !

खट्टर काका - सुनु सब के मन के सोच अपन अलग - अलग होइत छै यदि कुनू आदमी के पैसा ज्यादा भ जायत छै त ओकरा पैसा कूट-कूट काटे लगे छै त ओ अपन पाई के जोगार करतै न ! हुनके सब के देख के आस - पास के जे रहनिहार सब छैथ सब सोचैत छैथ जे फलना के बेटा दिल्ली गेले त हमर बेटा क्येक नै मुम्बई जेता इ जे गाम-घर के रित रिवाज बनल अछि दे बड ख़राब अछि ! अहि मे शिक्षक गन की करता ओ अपन हाजरी लगबैत छैथ और तनखा पबैत छैथ ! अहि मे मारल जायछी हम गाम - घर के गरीब लोकसब (नै घर के नै घाट के) और विषेस की कहब !

हम - खट्टर काका हम हर सहर मे सुनैत छी जे उत्तरी बिहार के सब जिला के सड़क यातायात पर केन्द्र सरकार के सेहो नज़र गेलैन हं ओ नितिस जी के माध्यम सं दिल्ली आसाम रोड सेहो बनी रहल अछि और साथ मे ग्रामीण सरक व्यवस्था के सेहो सूधार भ रहल अछि !
कट्टर काका - हाँ हाँ से तs हमहू सुनैत और देखैत छी सब इ चैल नेता सब के जे N H और ग्रामीण सरक व्यवस्था भ रहल अछि ! की कहू आहा के आय सs साठ साल पहिने हमरा गाम से पूरब पुल टूटल से त एखन तक कियो सोंगर दै बाला नही आयल ! बाढ़ी मे गामक गाम दैह गेल से तs देखेय लेल कियो नही आयल और आहा कहैत छी जे रोड बनबैत अछि ! पिछिला साल न्यूज़ मे सुनलो जे केवल मधुबनी बिकाश के लेल चारी हजार करोड़ रुपैया केन्द्र सरकार देल्कैय से तs नेता और मुखिया सब कुनू पैर - पैखी नही लगेय देल्कैय आ आहाँ कहैत छी जे यातायात व्यवस्था बरहल अछि यो मदन बाबु सब कियो अपन कुर्सी के फ़ायदा उठा रहल अछि !

हम - खट्टर काका तखन किसान भाई के लेल सेहो काफी मुवाब्जा भेट रहल अछि जेनाकी दहार के सुखार के और जगह जगह पर बिजली पम्प के व्यवस्था हर गाव हर पंचैत मे चालू होई बाला अछि कई जगह सब मे नहर के सेहो व्यवस्था भगेल और भो रहल अछि ! अहि विषय पर अपने'क की विचार अछि !
खट्टर काका - सुनू मदन बाबु हमरा सं जे पूछी तs हम सचे कहब की गामक - गाम दहा जायत छै आ मुवाब्जा भेटैय छै एक दु गाम मं जिनकर गाम मे कुछ नाम गाम छै ओ अपन पुरा पुरा प्रोपटी के नाम लिखा दैत छै इये हाल सब जिला के हरेक ब्लोक मे अछि ! और बिजली व्यवस्था के की कहू जिला मे दु तीन थम के नाम सुन्लीय हम आ नहर व्यवस्था व्यवस्था सब चौपट कs गेल जेता किसान भाई के खेती करैय बाला जमीन छल से तs नहर मे चल गेल ओ खेती की करता ! खेत गेला के बात हम १० वर्ष से देखैत छी जे नहर मे पैन नै, आब कतेक नहर पैन के आशा ओ तs धन्यवाद दियोंन इन्द्र देवता के जे हुन्कर कखनो कखनो दया दृष्टि हमरो सब पर भो जैट छैन !
हम - खट्टर काका हम मिथिला बासी के मुह सं सुनैत छी जे हमरा मिथिला राज्य चाही ताहि मे अपने'क की राय अछि ?

खट्टर काका - यदि हमर मिथिला राज्य अलग भो जायैत अछि तs बहुत गर्व के बात छी फेर पुनः मिथिला विदेहक नगरी कहाओत और मिथिला के मान - सम्मान पान मखान सं होयत

                               जय मैथिली, जय मिथिला



~: लेखक :~

मदन कुमार ठाकुर
कोठिया ,पट्टीटोल
झंझारपुर (मधुबनी)
बिहार - ८४७४०४
मो - 09312460150
Email -madanjagdamba@yahoo.com

          madanjagdamba@rediffmail.com