(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

गुरुवार, 19 जून 2014

DAHEJ MUKT MITHILA - SMARIKA -2014

स्मारिका विमोचन समारोह संपन्न- 
   महादेव केर असीम अनुकम्पा सँ 'दहेज मुक्त मिथिला - स्मारिका २०१४केर विमोचन समारोह भव्यतापूर्वक सम्पन्न भेल। प्रमुख अतिथि मिथिला-मैथिली केर सर्वश्रेष्ठ पुरोधा सम्माननीय डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजु द्वारा स्मारिकाकेर विमोचन कैल गेल। 
समय सँ शुरु भेल कार्यक्रम केर अध्यक्षता संस्थाक संरक्षक पं. धर्मानन्द झा द्वारा कैल गेल आ तहिना सौराठ सभागाछी मे संरक्षक डा. शेखर चन्द्र मिश्र द्वारा स्वागत संबोधन कैल गेल। संस्थाक राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पंकज झा स्वयं मंच संचालन केलैन। संस्थाक महाराष्ट्र अध्यक्ष दहेज मुक्त मिथिला अभियान पर प्रकाश दैत भविष्य योजना केँ सभामे प्रस्तुत कयलनि। सुप्रसिद्ध गायक श्री पवन नारायण द्वारा गोसाउनि गीत सँ प्रारम्भ भेल सभा केर बीच-बीच मे मिथिला-महिमा-गान सहित किसलय कृष्ण द्वारा अस्मिता-बोध जागृति हेतु कविता पाठ कैल गेल। 
संस्थाक उद्देश्य प्रति पूर्ण समर्पण आ १०८ टा दहेज मुक्त विवाह करेबाक संकल्पित व्यक्तित्व पत्रकार श्री राजेश मिश्र द्वारा दहेज मुक्त मिथिला केर अभियान संचालन तथा ओहि सऽ प्रेरणा लेबाक बात सभा मे राखल गेल। संगहि ओ आह्वान करैत कहलनि जे कलमजीवी पत्रकार पर बड पैघ जिम्मा होइत छैकओ सब चाहता तऽ कूरीति जरुर भागत। बस हिम्मत करैत दहेजखोर सबहक विरोध करैत कानून-प्रशासन केँ संविधान अनुसार चलबाक लेल बाध्य केनाय छैक। 
समारोह मे विशेष उपस्थिति भारतीय काँग्रेस केर वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता श्री ज्योति रमण झामधुबनी जिला परिषद् केर उपाध्यक्ष श्री भरत भूषणजिला पार्षद श्री सिंह जीसाहित्यकार श्री सदरे आलममैथिली दर्पण केर संपादक श्री कृष्ण कुमार झा 'अन्वेषक', मिथिला राज्य निर्माण सेनाक राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री श्याम सुन्दर झाकान्तिपुर दैनिक नेपाल केर विशेष संवाददाता तथा अतिथि श्री अवधेश झाउज्यालो दैनिक नेपाल केर विशेष सहयोगी संवाददाता व अतिथि श्री जितेन्द्र ठाकुरदहेज मुक्त मिथिला अभियान केर प्रथमहि दिन सँ सहयोग कयनिहार भास्कर झा (नेपाल)महाराष्ट्र दमुमिसँ आयल श्री सुभाष मिश्रश्री राजेश रायश्री सुबोध ठाकुरदिल्ली सँ कौशल कुमारसाहित्यकार कवि पंकज सत्यम्बिठौली सँ सुभाष रायजटाशंकर राययुवा मैथिल अभियानी अंकित राय सहित विभिन्न हस्ती लोकनि एहि समारोह मे भाग लेला। स्थानीय वक्ता-विद्वान केर सेहो सहभागिता नीक रहल। देल्ही सं  मदन कुमार ठाकुर  जी  सेहो बहुत शारारिक योगदान  देला , सुरुवात सं  जे  लागला फोटो खिचाय आ वीडियो  रिकॉर्ड  कराइ  में पूर्ण रूपे अपन  कर्तब्य निभेला | ,

  
  संपूर्ण कार्यक्रम मे एकमात्र निष्कर्ष 'सौराठ घोषणापत्रकेर निर्माण करय लेल सहायक भेल जे: 
    "
संपूर्ण मिथिला सँ एहि कूरीति केँ भगेबाक लेल जागृतिमूलक कार्य साविककाल सँ होइत रहल वैवाहिक सभास्थली पर एहि संस्था द्वारा क्रमश: आयोजन करैत गाम-गाम मे निगरानी समिति बनाओल जाय। दहेज मुक्त विवाह करनिहार केँ स्मारिका तथा विभिन्न मिडिया द्वारा यशगान करैत प्रोत्साहन कैल जाय। जेना सिया केर विवाह लेल शिवधनुष भंग करयवला दूलहा वरण करबाक कठोर संकल्प छलकिछु तहिना आजुक मैथिल ललना धिया सिया लेल सेहो 'बिन माँगरूपी दहेजक दूलहावरण करबाक संकल्प लेल जाय। शिक्षा व सुविधा बेटा तथा बेटी केँ एकसमान देल जाय। आपसी सहयोग बढबैत मिथिला समाज केँ परिष्कृत बनेबा मे दमुमि केर अभियान प्रति समर्पित सहयोग देल जाय।"
अध्यक्षीय भाषण मे पं. धर्मानन्द झा द्वारा अभियानक उत्कर्ष तथा एकर लाभ बारे निजी अनुभव केर बखानक संग सौराठ सभा स्थित माधवेश्वरनाथ महादेव मन्दिरक जीर्णोद्धार लेल सदिखन तैयार रहबाक बात कहल गेल। तदोपरान्त प्रवीण केर धिया-गान तथा पुन: पवन नारायण केर समदाउनि सँ कार्यक्रम केर समापन कैल गेल। 

        स्मारिकामे एहि बेर मूलत: आलेखमूलक संग्रहक संग ३ वर्ष यात्रा वृतान्त तथा भविष्य केर योजनाकेँ समेटल गेल अछि। बहुत कमहि समय मे प्रतिकूल परिस्थिति रहितो स्मारिका प्रकाशन केर कारण वैयाकरणिक अशुद्धि टाइपिंग-एरर सँ छूटि गेल अछि। बहुतो परिवारक विवरण अन्तिम समय मे समुचित फाइल मे प्राप्त नहि होयबाक कारणे एहि बेरुक स्मारिका मे स्थान देब छूटि गेलऐगला अंक मे वा एकर पुन:संस्करण मे सेहो समेटल जा सकैत अछि। मनवचन आ कर्म सँ एकता रखैत संकल्पित अभियानी बनि दहेज मुक्त मिथिला द्वारा आइ धरिक समस्त आयोजन कैल गेल अछि। समस्त सहयोगी प्रति आभार प्रकट करैत हम प्रधान संपादक प्रवीण सबकेँ फेर सँ धन्यवाद ज्ञापन करैत छी। आशा करैत छी जे भविष्य मे एहि तरहक ऐतिहासिक कार्य आरो भव्यता संग कैल जायत।
जय मैथिल जय मिथिला जय  जय दहेज़ मुक्त परिवार





























































































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बुधवार, 18 जून 2014

दिल्ली मे मैथिली पठन-पाठन केँ मान्यता

दिल्ली मे मैथिली पठन-पाठन केँ मान्यता
     शिक्षारूपी तपस्याक फल 'अनुशासन' होइत छैक। अनुशासनक सर्वोत्तम आ प्राकृतिक शिक्षा मातृभाषा मे सर्वोत्कृष्ट होइत छैक। भारतीय राष्ट्रीय शैक्षणिक तथा अनुसंधान परिषद् द्वारा जाहि शिक्षा पद्धति सँ विद्यालय मे पठन-पाठन कैल जाइछ ताहि मे सर्वप्रथम 'भाषा' ज्ञान अबैत छैक, क्रमश: गणित, विज्ञान, समाजिक शिक्षा, कला (ललितकला, संगीत, गायन, नृत्य, आदि) शिक्षा, स्वास्थ्य आ शारीरिक शिक्षा प्रारंभिक अवस्था केर विषय-वस्तु होइत छैक।
दिल्ली विद्यापति सेवा संघ केर प्रयास दिल्ली शिक्षा बोर्ड, दिल्ली विधानसभा, भारतीय राष्ट्रीय शैक्षणिक तथा अनुसंधान परिषद् सहित सम्बन्धित जनसमुदाय तथा जनप्रतिनिधि सबहक संग 'भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक न्याय' पेबाक लेल आइ दिल्ली क्षेत्र मे रहि रहल लाखों मैथिल (मैथिलीभाषी) लेल विद्यालय मे मैथिली विषय पढेबाक माँग पूरा करौलनि। कोनो माँग केँ पूरा करबाक लेल बहुत रास आधार सेहो पूरा करय पडैत छैक। जेना, मैथिली मे पढाई केकरा लेल.... कतय... कतेक संख्या... संवैधानिक आधार कि.... भाषा-विज्ञान तथा शिक्षण-प्रशिक्षण विषय सामग्री बनेनिहार विज्ञ टोलीक निर्णय कि.... विभिन्न समय मे विधायिका केर एहि दिशा मे कि कहब भेल, कि कहियो न्यायपालिका द्वारा कोनो रूलिंग देल गेल, इत्यादि। हम जानबाक प्रयास केलहुँ जे उपरोक्त संस्थान अखिल भारतीय मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति केर सुनिश्चित अगुवाई, मार्गदर्शन आ सहयोग सँ कोना-कोना एतेक पैघ माँग केँ पूरा करौलनि, एहि संवादक संग किछु रास फोटो-कपी दऽ रहल छी जाहि सँ पाठककेँ सेहो हमरहि दृष्टि सँ समस्त आधार आ विज्ञ जानकारी ग्रहण करबाक पूरा अवसर भेटय।
संछिप्त मे, भारतीय गणराज्य जतय संविधान केर शासन अछि, ओ एहि लेल सर्वथा न्याय दैत अछि अनुच्छेद ३५०ए मे, सबकेँ मातृभाषा मे शिक्षा पेबाक अधिकार अछि। यैह आधार पर बिहार जतय मूल मिथिला अछि ताहि मे मैथिली माध्यम सँ मैथिलीभाषीकेँ पठन-पाठन लेल इन्तजाम करबाक कानूनी संघर्ष डा. जयकान्त मिश्र द्वारा उच्च आ सर्वोच्च न्यायालय सब ठाम जीतल गेल, तथापि बिहार सरकार आइ धरि कोनो खास व्यवस्थापन नहि मिला सकल अछि, बस कय रहल छी आ करबाक अछि कहैत मात्र अन्ठबैत जा रहल अछि। तहिना भिन्न-भिन्न समय मे भाषा-विज्ञान तथा विषय-वस्तु निर्माण समिति द्वारा सेहो मातृभाषा केर शिक्षा माध्यम सर्वोत्तम रहल कहल गेल अछि। भारतक अन्य-अन्य राज्य मे सेहो जे कियो मातृभाषी अपन मातृभाषाक माध्यम सँ अपन धिया-पुता केँ शिक्षा लेल विद्यालय केर व्यवस्था करौने छथि वा विद्यार्थीक संख्या अनुरूप शिक्षक केर इन्तजाम करौने छथि। एहि मामिला मे मैथिल भारतीय संविधानक मान्यता प्राप्त भाषा रहितो अपन स्वयंकेर पछता बुद्धि केर कारण पछुआयल छथि। हालहि २००३ मे संविधानक आठम अनुसूची मे एकरा सम्मानित केलाक बाद चारूकात सुरफुरी जरुर छैक मुदा जे गुदगुदी हेबाक चाही से जेना अधमरू बनि गेल छैक।
मैथिली मे पठन-पाठन हेतु पाठ्य-सामग्रीक विकास दोसर चुनौतीपूर्ण कार्य छैक। जँ हिन्दी पुस्तक केँ अनुवाद करैत मैथिली पढेबैक तऽ भाषाक ज्ञान हेतैक, मुदा मिथिला आ मैथिल अस्मिताक जानकारी केर सर्वथा अभावे रहि जेतैक जाहि सँ अपन आत्मसम्मान बढेबाक मातृभाषाक योगदान वला नीति विफल रहि जेतैक। अत: जरुरत एहि बातक छैक जे मिथिला राज्य निर्माण सेनाक प्रतिनिधि अनुप चौधरी तथा मनोज झा द्वारा पटना मे अनशन केलाक उपरान्त राज्य शिक्षा निदेशालय जाहि बातक समझौता केलकैक तेकर पाछू संघर्ष बढबैत पटना मे सेहो मैथिली केँ स्थापित करैत पाठ्य-सामग्री विकास कैल जाय। दिल्ली मे एहि माँग केँ पूरा होइते बनारस, नागपुर, मुंबई, चेन्नइ, पंजाब, राजस्थान, कलकत्ता, आसाम सहित समस्त देश मे मैथिली केँ स्थापित कैल जा सकतैक। तहिना केन्द्रिय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा सेहो मैथिली विषय केँ मान्यता देबाक कार्य शीघ्र हेतैक। ई मानल बात छैक, जखनहि अपन भाषा, अपन भेष, अपन मूल्य, अपन सिद्धान्त सँ लोक परिचित होइत अछि तखनहि ओकर आत्मसम्मान सेहो अभिवृद्धि पबैत छैक।
दिल्ली विद्यापति सेवा संघ केँ एतेक पैघ सफलता लेल धन्यवाद देनाय प्रत्येक मैथिलक फर्ज बुझा रहल अछि। अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति आ दिल्ली भरि मे पंजीकृत सैकडों संघ-संस्था संग सहकार्य करैत आगामी सर्वे मे प्रत्येक मैथिलीभाषी परिवार द्वारा अपन बाल-बालिका केँ मैथिली विषय पढेबाक लेल अनुरोध पत्र उत्तरी दिल्ली नगर निगम केर हरेक विद्यालय मे जमा हेबाक चाही। एहि सँ लाखों लोक हेतु रोजगार सेहो बढतैक। लेखक, विचारक, टंकक, मुद्रक, छापा, शिक्षक, आदि केर बड पैघ वैकेन्सी (रोजगार सूचना) निकलतैक। मैथिली रजनी-सजनी केर भाषा सँ रोजी-रोटीक भाषा बनतैक, ई मिथिलावासी लेल बड पैघ कल्याणक विषय होयत।
जय मैथिली! जय मिथिला!!

शुक्रवार, 23 मई 2014

माधवेश्वरनाथ महादेव


             सौराठ सभागाछी स्थित ई विलक्षण मन्दिर नहियो किछु तऽ ५०० वर्ष प्राचिन होयत। मिथिलाक एक राजा 'माधवेश्वर सिंह' केर नाम पर राखल गेल एहि मन्दिरक नाम 'माधवेश्वरनाथ महादेव' अछि। दहेज मुक्त मिथिला व ऐतिहासिक सौराठ सभा विकास समिति केर संयुक्त तत्त्वावधान मे ८ जनवरी, २०१२ एक बैसारक मार्फत एहि प्राचिनतम मिथिला धरोहर केर जीर्णोद्धार लेल निर्णय लेल गेल छल। एहि कार्यक वास्ते मधुबनी जिलास्तरीय एक कार्यसमिति सेहो बनेबाक भार आदरणीय शेखर चन्द्र मिश्र व हुनक वकील मित्र (मधुबनी कचहरी वकील संघ केर सचिव - नाम विस्मृति भऽ रहल अछि) पर देल गेल छल। ओहि बैसार मे प्रवीण नारायण चौधरी (नेपाल ) आ करुणा झा (दहेज़ मुक्त मिथिला अध्यक्षा नेपाल ) जी सेहो भाग लेने रहैती । बैसारक पूर्ण विवरण आ निर्णय एहि सँ पूर्व सेहो देल गेल अछि जे आइयो दहेज मुक्त मिथिलाक पुरान पोस्ट मे मौजूद अछि। माननीय विधायक फय्याज भाइ (बिस्फी विधानसभा), मधुबनी ड्योढिक बाबु कुलधारी सिंह, रहिका सँ बाबा निलाम्बर मिश्र, सौराठ सँ प्रो. सर्वेश्वर मिश्र सहित अनेको गणमान्य बुद्धिजीवी, ज्येष्ठ नागरिक, समाजसेवी आदि केर बीच भेल समस्त निर्णय छल जे हम सब स्वयंसेवा सँ एहि मन्दिरक जीर्णोद्धार करब। ताहि समय श्री निलाम्बर मिश्र तात्कालीन विधान परिषद् सभापति  
ताराकान्त बाबु केर स्थानीय प्रतिनिधिक रूप मे तारा बाबु संग लगे हाथ बात करैत ओहि मिटींग सँ दुइ महत्त्वपूर्ण निर्णय करौने छलाह। एक, सौराठ मे 'मिथिला चित्रकला शिक्षण संस्थान' खुलेबाक आर माधवेश्वरनाथ महादेव मन्दिर केर जीर्णोद्धार लेल कला-तथा-संस्कृति मंत्रालय, बिहार सँ कार्य करेबाक पुष्टि, दुनू कार्य लेल बिहार सरकारक टोली सेहो आबि आवश्यक छानबीन करैत वचन दय चलि गेल। संस्थान आ मन्दिर दुनू कार्य हाल धरि बिहार सरकार पूरा नहि कय सकल अछि। आ एहि चक्कर मे हमरा लोकनि स्वयंसेवा सँ सेहो किछु नहि कय सकलहुँ अछि। आब ७ जुन सौराठ सभागाछी मे दहेज मुक्त मिथिलाक स्मारिका विमोचन कार्यक्रम मे पुन: एहि समस्त विषय पर वार्ता करैत आगामी योजना बनायब।

मंगलवार, 29 अप्रैल 2014

केना बनतैक दहेज मुक्त मिथिला

केना बनतैक दहेज मुक्त मिथिला
१ .  अहाँ दहेज मुक्त छी। छी वा नहि?
यदि संकल्प लेने छि जे 'माँगरूपी दहेज न लेब, न देब। धियापुताक विवाह मे सेहो माँगरूपी दहेज न लेब, न देब। माँगरूपी दहेज लेन-देन करनिहारक विवाह मे सहभागी सेहो नहि बनब' - तऽ अहाँ भेलहुँ दहेज मुक्त मिथिलाक योग्य सदस्य।

२.    आब अहाँ अपन परिचित परिजनमे सेहो एहने कम सऽ कम १० परिवार केर पहिचान करू आ हुनका सँ बात करू।

३. हुनकर पूर्ण विवरण दहेज मुक्त मिथिलाक निम्न फारम भरिकय स्मारिका मे डायरेक्ट्री प्रकाशन लेल पठाउ। २५-३० अप्रील अन्तिम तिथि, dmmithila@yahoo.com पर। विशेष किछु बुझबाक हो तँ बात करू: पंकज झा, मुंबई - ९३२०१४०५१६४/९८२१४०५१६४.

४. एहि तरहें पहिल वर्ष मात्र १५०० परिवारक विवरण दहेज मुक्त विवाह लेल अवसर बनबैत कुल १० हजार परिवार मे स्मारिका पहुँचायत।

५. पहिल वर्ष एहि १५०० दहेज मुक्त परिवार संग बिना दहेजक स्वच्छ सम्बन्ध बननाय शुरु होयत तऽ जरुर ऐगला वर्ष कुल १५००० परिवार एहि मे जुडि जेता आ कम सऽ कम १ लाख प्रति स्मारिका छपाबय के हिम्मत हमरा लोकनि करब।

 ( मिथिला में दहेज़ रूपी कुप्रथा के समाप्ति हेतु दहेज़ मुक्त मिथिला एकटा स्मारिका के विमोचन ७ जून २०१४ क करवाक योजना बनने ऐछ, कम स कम १५०० मैथिल परिवार के विवरण जे दहेज़ कय विरोधी छैथ इ स्मारिका में समेटवाक प्रयाश. जाइ वर-कन्याक जानकारी आपस में भेट सके. अपने अगर इ अभियान में शामिल होबै चाहैत छी त स्वेंग व् अपन अरोश परोष के मैथिल में विवरण निम्नलिखित फॉर्म के भैर द सकैत छी. प्रत्येक फ्रॉम के संग १५१ टाका उपरोक्त बैंक :- panjab national bank, kalbadevi branch a/c no. 0063000100244217 ,  IFSC code. PUNB0006300 में जमा कय. फॉर्म dmmithila@yahoo.com पर पठा दी आ सूचित करी ९८२१४०५१६४ पर. 



क्रमश: दहेज मुक्त मिथिला केर निर्माण होयत। शुभकामना आ सहयोग लेल अपील!

गुरुवार, 6 मार्च 2014

आउ मनाबी महिला -दिवस !

आउ मनाबी महिला -दिवस !

     आन बेरक जकां फेर महिला दिवस आबि गेल ! आब ई त बुझले अछि जे ,लोग -बाग ,महिला सब के बधाई दई जेथिन  कोनों संस्था क तरफ सं विशिष्ट महिलागन के पुरस्कार ,गुलदस्ता क आदान-प्रदान  कयल जेतैक .बस ! समाज अपन कर्तव्यक इतिश्री मानि जाईत  अछि .


        दरअसल महिला दिवस कोनों एक दिन अथवा ,एक वर्ष मनाबय वला पर्व नही अछि ,ई त सतत चलय वला एकटा विचार -व्यवहार हेबाक चाही .हम सब एक दिनक लेल महिला दिवस मना त लईत छी ,मुदा दोसरे दिन सं बल्कि ओहो दिन ओहिना महिला सब  प्रताड़ित  होई छथि ,दहेज हत्या ,बलात्कार ,वैश्यावृति,में कोनों कमी नहि देखल गेल अछि .बल्कि दिनों दिन महिलाक प्रति अपराध ब्ध्ले जा रहल अछि ..तखन उपाय कोन?
                    
     अपन देशक कानून महिला सब के बराबरि क  अधिकार द चुकल छैक मुदा ओहि कानून के व्यवहार में लाबयक  प्रयास  केनाई त हमरे सभक कर्तव्य थिक .समाज में एखनो महिला के दोयम दर्जा देल जाईत अछि .बेटी के नेनपने सं सिखैल जाईत अछि  जे ओ पुरुख सं हीन छैक . बुच्ची दाई पढाई में कतबो कुशाग्र किये न् होथि  !अंग्रेजी  स्कूल में बुचने के नाम लिखाओल जाईत छैक .संगहि ट्यूशन सेहो! .घर में जों माछ रान्हल गेल त माछक मूडा हुनके परसाई छनि , बेचारी बुच्ची दाई  के पूछीये सं संतोष करय पड़ईत छनि  ..

   ई शोधक विषय हेबाक चाही जे  पईघ भेला पर वैह बुच्ची दाई ,अप्पन बेटी संगे ओहने व्यवहार कियैक करैत छथि

       एखनो युवा लड़की के सबसं अधिक संघर्ष अपने घर सं करय पडैत छैक .माय ,पितियाईन  दादी ,सब ओक्कर पहिरब ओढब ,बात -विचार ,कत्तौ गेनाई-एनाई ,सब पर आपत्ति करैत छथिन. कियैक ने हम महिला सब अप्पन बेटी सब के एहन माहौल दी ,जाहि में ओ अप्पन व्यक्तित्व के सर्वांगीन विकास क सकय,अप्पन भविष्यक सपना साकार करय .सही मायने में महिला दिवस तखने सार्थक होयत .
                                             
 नीता झा   भागलपुर
        08051824576

शनिवार, 1 मार्च 2014

दहेज मुक्त मिथिलाक ३ वर्ष पूरा


    मिथिलावासी द्वारा छिटफुट सही, मुदा कतेको रास प्रयास अपन गति ओ रंगमे संचालित कैल जा रहल अछि। ताहिमे सँ एक अछि - फेसबुकिया युवा-युवती सब द्वारा संचालित 'दहेज मुक्त मिथिला' जे आब अपन तेसर वर्ष सेहो ३ मार्च, २०१४ केँ पूरा करय लेल जा रहल अछि।

एहि अवसरपर दहेज मुक्त मिथिलाक तरफ सँ १०० पेजक एक स्मारिका छपेबाक विचार भेल अछि। एहि स्मारिकामे दहेज मुक्त मिथिलाक स्थापना सँ लैत आइ धरिक यात्रा पर समीक्षा, अहाँक विचार, वर्तमान मिथिला समाजमे वैवाहिक व्यवहारमे आडंबर व अन्य कूरीति पर अहाँक लिखल आलेख, दहेज मुक्त मिथिलाक स्वतंत्र शाखा स्थापना लेल प्रस्तावना, जनजागृति लेल विगत मे कैल गेल कार्यक्रम व ओकर प्रभाव आदि जेहेन जिनका सँ संभव हो से १५ मार्च धरि निम्न स्थान पर पोस्ट करैत या इमेल द्वारा पठाबी।
१. दहेज मुक्त मिथिला केर फेसबुक ग्रुपपर

:https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/

www.dahejmuktmithila.org 

विज्ञापन व अन्य सहयोग देबाक लेल सम्पर्क करी:
१. पंकज झा, राष्ट्रीय अध्यक्ष       -  09320405164/ 9821405164 
२. संजय मिश्रा, महाराष्ट्र अध्यक्ष - 09820896477
३. मदन ठाकुर, दिल्ली अध्यक्ष   - 09312460150 
४. संतोष चौधरी, राष्ट्रीय सचिव - 9910607720
५. प्रवीण चौधरी, अन्तर्राष्ट्रीय संयोजक -  00977- 9852022981




कृपया अपन सदस्यता ग्रहण करी, लेकिन याद राखी, सदस्यता केवल ओहि व्यक्ति, परिवार वा संस्थान लेल जे निम्न शपथ लेने होइ:

'हम न माँगरूपी दहेज लेब न दहेज देब'
'हम न अपन धिया-पुताक विवाहमे माँगरूपी दहेज लेब वा देब'
'हम माँगरूपी दहेजक लेन-देनवला विवाहमे सहभागी सेहो नहि बनब'

उपरोक्त बात तऽ भेल दहेज प्रतिकार सम्बन्धी आ स्वच्छ सुन्दर मिथिला समाज निर्माण लेल। एकर अतिरिक्त एहि संस्थाक प्रमुख उद्देश्य अछि मिथिलाक ऐतिहासिक, पारंपरिक, सांस्कृतिक, भाषिक व अन्य कोनो भी तरहक 'धरोहर'केर संरक्षण। जँ अहाँ एकर सदस्य छी, अपन गाम वा आसपास कोनो धरोहरक संरक्षण लेल उत्सुक छी, तँ समस्त भारत व विश्वमे रहनिहार दमुमि सदस्य मैथिलक सामूहिक लगानीसँ - स्वयंसेवाक तर्जपर वगैर कोनो याचना वा भीखक कोषसँ यथासंभव धरोहरकेर संरक्षण करू। 
एहि संस्थासँ जुडबाक लेल व अपन योगदान पठेबाक लेल खाता विवरण निम्न अछि, संगहि कोनो भी योगदानक रसीद व प्रमाणपत्र लेब नहि बिसरब, एहि सँ अहाँकेँ बाकायदा आयकर छूट सेहो भेटबाक संभावना अछि आ अहाँक एक-एक छदामक हिसाब दूधक दूध आ पानिक-पानि समान सीधा एक माँग पर भेटबाक वचनबद्धता अछि। 

ACCOUNT NAME: DAHEJ MUKTA MITHILA 
BANK NAME  : PUNJAB NATIONAL BANK 
ACCOUNT NO. 0063000100244217 
IFSC CODE: PUNB0006300 
BRANCH : KALBADEVI, MUMBAI

खातावालाक नाम: दहेज मुक्त मिथिला
बैंक: पंजाब नेशनल बैंक, कलबादेवी शाखा, मुंबई, महाराष्ट्र
खाता संख्या: ००६३०००१००२४४२१७
आइएफएससी कोड: PUNB0006300

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

महा शिवरात्रिक पुजनोतसब शुभ अवसर पर - शिव भक्ति बंदना आ भजन


महा शिवरात्रिक पुजनोतसब शुभ अवसर पर - सुनिल कुमार झा (पवन) जी के मुखारबिंद सन सुनल जाओ - शिव भक्ति बंदना आ भजन

शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

मिथिला - पहिने आ आब: एक छोट समीक्षा

         मिथिला - पहिने आ आब: एक छोट समीक्षा


       पहिने मिथिलामे नदी सब बान्हल नहि रहैक, एकर पाइन नव-नव पाँक-माइट आ नव अनाज-उत्पत्तिक जोगार संग बेसी रास खेत मे पहुँचि जाय, तहिना सैकडों तरहक मत्स्य (माछ), घोंघा, सितुआ, सिगहार, सेमार, काउछ आ तरह-तरहकेर नव जीवन-आधारक प्रवेशसँ समूचा मिथिलाक पोखैर, डबरा, चभच्चा आदिकेँ भरने रहैत छलैक। लोक गद्दर चाउर सँ लैत बिरनफूल-बासमतीतककेर उत्पादन करैत माछ-काउछ-घोंघीझोर सँ सेहो सन्तुष्टि पबैत छल। सवा कट्ठा एक परिवारक भरण-पोषण लेल काफी होइक। आब ओहि पाइनकेँ बान्हसँ बान्हि सीधा गंगाजी आ फेर सीधा गंगासागर समुद्रमे खसायल जाइछ। पाइनसँ संस्कार बनैत छैक। ई कहबी सुनैत रही - ओ सच भऽ गेलैक अछि। आब सगरो बाहरी कमाईसँ जीवन-निर्वाहक हवा चलि रहल छैक। गाममे रहनिहार बेवकूफ कहाय लागल छैक। आब आध्यात्मिकताक ठामपर भौतिकता सवारी कसैत छैक। आधुनिक मिथिलाक निर्माणमे गंभीर शोध आ बड पैघ परिवर्तनक जरुरत छैक। 
  
      मिथिलामे नदी ऊपर बाँध बनाबय के योजना कोना बनल? उपलब्ध जानकारी आ शोधपत्र सँ ज्ञात होइत अछि जे ब्रिटिश ईन्डिया सरकार मिथिला क्षेत्रकेँ जलमग्न आ बाढिग्रस्त मानैत एक मेगा प्रोजेक्ट तैयार केलक जेकरा लोक 'वैभेल प्रोजेक्ट' केर नामसँ जानैत अछि। लेकिन जाबत एहि परियोजनापर काज शुरु होइत ताबत भारत स्वतंत्र भेल आ भारतीय नेतृत्व स्वराज्य पबैत तात्कालीन राजनीतिक उग्रपाँति (यानि पंजाब ओ बंगाल) सबकेँ तुष्टीकरणमे हत्त-पत्त वैह वैभेल प्रोजेक्ट लेल छूटायल बजेट बिहार मे खर्चा नहि कय भाखडा नांगल ओ दामोदर घाटी परियोजनाकेँ स्वीकृति दैत उपेक्षाक सबसँ पहिल डाँग हमरा लोकनिपर बरसेलक। अफसोस जे एहि तरहक डाँगक प्रतिकार पर्यन्त मिथिलावासी या बिहारवासी नेतृत्त्व पाँति कोनो खास नहि केलनि। जरुर बिहारक पहिल मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण बाबु एहि लेल बिहारक प्रभावशाली नेता डा. राजेन्द्र प्रसादकेँ पत्र लिखलनि, मुदा ताहि समय धरि राजेन्द्र बाबु आर एकटा विशिष्ट समूह सरदार बल्लभभाई पटेलकेर पक्षमे रहबाक चलते संस्थापन पक्ष यानि नेहरुजी सँ दूर रहबाक चलते मात्र अफसोस प्रकट करैत एहि लेल सीधा प्रधानमंत्री नेहरुसँ पत्राचार करबाक अनुरोध करैत बात अन्ठा देलनि। 
  
      लेकिन बात धीरे-धीरे चर्चाक विषय बनल आ ओहि वैभेल परियोजनाक नामपर वगैर कोनो तरहक विशेष शोध या विचार केने भारत सरकार कोसी बाँध परियोजना अनैत लगभग वैह तर्ज सँ आ कोसी प्रोजेक्टकेर स्थापना करैत सब नदीपर बाँध बान्हि लोककेँ फुसलाबैत-बहलाबैत मिथिलाक बर्बादीक एक पटकथा तैयार करैत काज शुरु करौलनि। एम्हर बाँध परियोजनासँ एक सऽ एक ठीकेदार - जमींदार सब अठन्नी अपना लेल अठन्नी काज लेल सूत्रपर ब्रह्मलूट मचौलक आ अन्ततोगत्वा मिथिलाक भविष्य ५६ फाटकवला कोसी बराजक स्वीचपर लटका देल गेल। जँ समीक्षा कैल जाय आ खर्चाक शुरुसँ अन्त धरि जोडल जाय तऽ ई बात स्पष्ट होयत जे आम जनमानसकेर कल्याण मात्र कागज मे आ राजनीति करबा लेल ब्रह्मलूटक एक नीक साधन एहि बाँध परियोजनामे रहल। हम एकर विस्तृत प्रभाव मिथिलाक शनै:-शनै: मृत्युक दिशामे गमनरूपमे सेहो देखैत छी। नहिये पनबिजली, नहिये सिंचाई लेल उपयुक्त नहर, नहिये पोखैर व छोट-छोट नदीकेँ निरन्तर पाइन भेटबाक जोगार, नहिये मत्स्य-मखानक विस्तृत कृषि आ नहिये मिथिलावासीक लेल मिथिलामे कोनो तरहक स्वरोजगारक नव बाट - एतय तक जे पहिले रहल सेहो बर्बाद होइत लोक पलायन करय लेल मजबूर आ आन राज्यमे जाय सस्ता मजदूरी करैत अपन बाल-बच्चाकेँ पोसय लेल मजबूर निरीह मैथिल बिहारी बनि आसाम, पंजाब, बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यमे माइर-गाइर खाइतो जीवन चलबैत अछि। 

पहिले पलायनक मात्रा न्यून छल, लेकिन जेना-जेना बिहारक सूरज जातिवादिताक भुमडीमे फँसैत गेल, तहिना-तहिना सक्षम व समृद्धवर्ग सेहो गाम छोडि अपन पूँजी समेत मिथिलासँ पलायन करबाक बाट निकालय लगलाह। गाम आरो विपन्न बनि गेल। लोक बोनि-मजदूरी करय लेल पर्यन्त लजाय लागल। खेत - खरिहान सब मशानमे परिणति पाबय लागल। पतझड केर मौसम मिथिलामे अपन कहर बिहारी राजनीतिक कूचाइलसँ चारू कात कनकन शीतलता पसारय लागल। यैह कारण छैक जे २०१३ मे आब मिथिलाक युवा तुरिया सेहो अपन सोराज बिना किछु संभव नहि अछि से सोचि मिथिला राज्य आन्दोलन तीव्र केलक।
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Pravin Narayan Choudhary 

गुरुवार, 23 जनवरी 2014

मिरनिसे के जन्म एक महत्वपूर्ण विषय

          सब स पहिने दिल्ली कार्यक्रम के ले तमाम मिरानीसे सेनानी के हार्दिक शुभकामना, मिथिला राज्य के लेल प्रयास जाहि स्तर पर मिरानीसे द्वारा सम्भव अछि शायद कोनो दोसर मंच सा सम्भव नहीं अछि, पिछला एक दू साल में जे कोनो कार्यक्रम, जन जागरण और धरना प्रदर्शन वा नेतागण नेतागण संग भेट वार्ता काबिलेतारीफ छल।

      आई मिथिला नहीं सम्पूर्ण देश और विदेशो में भी अलग मिथिला राज्य के मांग (मिरानीसे) द्वारा जे उठाओल जा रहल अछि से चर्चित अछि, संगहि एक टा बात (जे गंभीर अछि) जन समर्थन, और एक आवाज पर इकठ्ठा भेनाई महत्वपूर्ण अछि (उदाहरण : - जाई जगह जगह पर अपन मिरनिसे कार्यकर्ता प्रदर्शन करबाक लेल इकठ्ठा भेल डेल्ही पुलिस द्वारा हटा देल गेल और देश के सब स महत्वपूर्ण जगह पर १४४ के बाबजूद दिल्ली c. m द्वारा अपन समर्थक संग दू दिन तक भांगरा के कार्यक्रम भेल से पूरा देश देखलक और संगहि पुलिस और तमाम केंद्र सरकार के मंत्रीगण सेहो सहभागी भेल, कारण - धरना कोनो पार्टी प्रायोजित छल ताई लेल केंद्र सरकार सेहो अपन वोट के खातिर उपयुक्त कार्यवाई करय में हमेशा बचय के कोशिश कयलक) मतलब साफ अछि जे अगर धरना प्रदर्शन राजनीतिक होयत त सरकारो गम्भीरता स एक्शन लई छै ओना अगर कोनो आम धरना होयत ता याद आबैत अछि (बाबा रामदेव के रामलीला). अलग मिथिला राज्यक मांग शायद ही कोनो पार्टी एखुनका परिदृश्य में पूर्ण रूपेण समर्थन करत।
            भाजपा सांसद कीर्ति झा जी द्वारा समर्थन स्वागत योग्य अछि, 

एक टा सुझाव/निवेदन/जनाकांक्षा … जे किया नै मिरनिसे के एक राजनीतिक रूप देल जाय लगभग सब पदाधिकारी (मिरानीसे के) एक जन प्रतिनीधि के हिसाब सा कार्यरत छि और संगहि राजनीतिक परिवेश स छि ज्यादा तकलीफ नहि होयबाक चाही कारन राजनीतिक पार्टी के अपन एजेंडा होयबाक चाही जे मिरनिसे के जन्म एक महत्वपूर्ण विषय के पूरा करबाक लेल भेल अछि (अलग मिथिला राज्य) ई प्रमुख मुद्दा होयबाक चाही जन समर्थन जरूर जरूर भेटत। जमीनी स्तर पर हर मैथिल के अई संग्राम में सहभागिता लेल उत्साहित करबाक जरुरत अछि संगहि मिथिलांचल के हरेक गाव और शहर में सदस्यता अभियान चलेबाक जरुरत अछि.
         
           ओना बिना राजनीतिक भेने सेहो सफलता भेटइ छै मुदा शनैः शनैः (एक बात और अगर झारखण्ड, विदर्भ, तेलंगाना, पूर्वांचल या और कोनो राज्यक मांग गैर राजनीतिक होईत त शायद अहि पर कार्यवाई सम्भव नहीं छल, झारखण्ड, तेलंगाना बनी गेल शीघ्रहि विदर्भ और उ.प में सेहो छोट - छोट राज्य बनी जायत कियाक ता हर पार्टी अपन नफा नुकसान देखति कार्यवाई करैत अछि से त आहाँ सभ लोकनि ज्यादा समझदार/जानकार छी). 

अंत में - उपरोक्त विचार किछु ग्रामीण जनमानस और हमर अपन अछि हमर विचार स अगर किनको तकलीफ या ठेस पहुँचनि त हैम क्षमाप्रार्थी छी। — 

सोमवार, 20 जनवरी 2014

बस एक मात्र संकल्प ध्यान में , मिथिला राज्य होई संबिधान में.

जय मिथिला 
जय मिरानिसे
        

बस एक मात्र संकल्प ध्यान में , मिथिला राज्य होई संबिधान में.

   मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा आयोजित राष्ट्रिय संगोष्ठी में अपन उपस्थिति देनिहार हर मिथिला प्रेमी भाई बहिन के बहुत धन्यवाद। अपने सब के उपस्थिति इतिहास बनेलक। आगू और सक्रिय सहयोग के अपेक्षा मिरानिसे राखैत अछि।
कार्यक्रम के दू सत्र में नियोजित कैल गेल छल। प्रथम सत्र मिरानिसे के सांगठनिक संबोधन स सम्बंधित छल। 


मुंबई,गोहाटी,नेपाल और मिथिला क्षेत्र स आयल मिरानिसे के सदस्य अपन बात रखला। सब के केवल एक आवाज-हमरा चाही मिथिला राज। मिरानिसे स सहयोग केनिहार जे बहुत भाई किछु अपरिहार्य व्यस्तता के कारण नै आबि सकला हुनको आभासी उपस्थिति रहल।

   द्वितीय सत्र मिथिला राज्य के मुद्दा पर राजनीतिक एकीकरण लेल राखल गेल छल। दलगत भावना स ऊपर उठि के मिथिला राज्य लेल अपन प्रतिबद्धता सुनिश्चित करबाक समय मिरानिसे हर दल स सम्बद्ध राजिनितिग्य के देलक। इ कठोर सत्य अछि जे आमंत्रित वक्ता में स केवल बीजेपी के सांसद और विधायक गण न केवल अपन उपस्थिति दर्ज करेला बल्कि पुरजोर तरीका स मिथिला राज्य मांग के समर्थन केला। कांग्रेस ,राजद ,जेडीयू स गछ्ला बादो वक्ता नै आयला। निर्दलीय सदस्य पप्पू यादव सेहो सत्र के संबोधित केला। एहेन सांकेतिक घटना के बादो मिरानिसे अपन सूत्र वाक्य - समर्थन द रहल व्यक्ति के समर्थन आ विरोध क रहल व्यक्ति के विरोध - स एखन धरि सटल अछि।

   
 आदरणीय प्रभात झा जी आन्दोलन के लेल हर तरहक सहयोग देबाक वचन देला। भाई कीर्ति झा आज़ाद त मिथिला राज्य के लेल सदैव अपना स्तर स कार्य क रहला है। पुनः अपन जोशगर उदबोधन स नव उर्जा के संचरण केला। भाई गोपाल ठाकुर( विधायक बेनीपुर) ,भाई संजय सरावगी( विधायक दरभंगा शहरी) और भाई संजीव झा ( पूर्व विधायक सहरसा) सब तरहक सहयोग के वचन देला और कार्यक्रम के अंत तक रहि मिरानिसे के मान बढौला।

     

शेफालिका जी और कुमुद जी द्वारा सेहो मिथिला राज्य के समर्थन कैल गेल।
कार्यक्रम के दौरान मैथिली पुस्तक प्रदर्शनी के सेहो व्यवस्था छल। मिरानिसे के नवीन वेबसाइट mrns.in के सेहो लोकार्पण भेल। मधुबनी जिला परिषद् सदस्य भारत भूषण जी, बिजय झा भोला भाई आ मो. कलीम भाई द्वारा मिथिला राज्य के समर्थन कैल गेल।
कार्यक्रम के औपचारिक शुरुआत जय जय भैरवि के सामूहिक गायन और समाप्ति वन्दे मातरम द्वारा कैल गेल।

पुनः सब के कोटिशः धन्यवाद। जय मिथिला जय मिरानिसे

गुरुवार, 16 जनवरी 2014

मैथिलीक विकासक बाधा


मैथिलीक  विकासक  बाधा थिक
आजुक युवाशक्ति मिथिलाक
पढ़ि लिख कए बनि  जाइ छथि
डाक्टर आ कलक्टर
मुदा नहि पढ़ि लिख सकैत छथि
मिथिलाक दू आखर ।

घरसँ निकलैत
ओ कहथिन "चलो स्टेशन"
लागैत छनि शंकोच
कहैमे की "चलू स्टेशन"
जेता जखन गामक चौकपर
लागत जेना
बसि रहला मैथिलीक कोखिपर।

सदिखन दूगोट समभाषी
बाजत अपने भाषा
परञ्च दू गोट  मैथिल
जतबैलेल अपन प्रशनेल्टी
मैथिली  तियागि कए
बजए लगता सिस्टमेटी
अपन माएक भाषासँ
प्रेस्टीजपर लागैत छनि बट्टा
लोग की कहतनि
संस्कारीसँ भs गेला मरचट्टा
संस्कारीसँ भs गेला मरचट्टा ।

@ जगदानन्द झा 'मनु'

मंगलवार, 14 जनवरी 2014

मकर संक्रान्ति - तिला संक्राइत - मिथिला लेल तिल-चाउर बहब!

मकर संक्रान्ति - तिला संक्राइत - मिथिला लेल तिल-चाउर बहब!

मकर संक्रान्तिके शुभ अवसरपर समस्त जनमानस लेल शुभकामना!
      

मकर संक्रान्ति के त्योहार मोक्ष लेल प्रतिबद्धता हेतु होइछ - निःस्वार्थ सेवा - निष्काम कर्म करैत मुक्ति पाबैक लेल शपथ-ग्रहण - संकल्प हेतु एहि पावनिक महत्त्व छैक।

जेना माय के हाथ तिल-चाउर खाइत हम सभ मैथिल माय के ई पुछला पर जे ‘तिल-चाउर बहमें ने..?’ हम सभ इ कहैत गछैत छी जे ‘हाँ माय! बहबौ!’ आ इ क्रम तीन बेर दोहराबैत छी - एकर बहुत पैघ महत्त्व होइछ। पृथ्वीपर तिनू दृश्य स्वरूप जल, थल ओ नभ जे प्रत्यक्ष अछि, एहि तिनूमें हम सभ अपन माय के वचन दैत तिल-चाउर ग्रहण करैत छी। एक-एक तिल आ एक-एक चाउरके कणमें हमरा लोकनिक इ शपथ-प्रण युगों-युगोंतक हमरा लोकनिक आत्म-रूपके संग रहैछ। बेसी जीवन आ बेसी दार्शनिक बात छोड़ू... कम से कम एहि जीवनमें माय के समक्ष जे प्रण लेलहुँ तेकरा कम से कम पूरा करी, पूरा करय लेल जरुर प्रतिबद्ध बनी।

आउ, एहि शुभ दिनक किछु आध्यात्मिक महत्त्वपर मनन करी:  
१. मकर संक्रान्ति मानव जीवन के असल उद्देश्य के पुनर्स्मरण हेतु होइछ जाहि सँ मानव लेल समुचित मार्गपर अग्रसर होयबाक प्रेरणा के पुनर्संचरण हेतु सेहो होइछ। धर्म, अर्थ, काम आ मोक्ष के पुरुषार्थ कहल गेल अछि - जे जीवन केर आधारभूत मौलिक माँग या आवश्यकता केर द्योतक होइछ। एहि सभमें मोक्ष या मुक्ति सर्वोच्च पुरुषार्थ होइछ। श्रीकृष्ण गीताके ८.२४ आ ८.२५ में दू मुख्य मार्गकेर चर्चा केने छथि - उत्तरायण मार्ग आ दक्षिणायण मार्ग। एहि दू मार्गकेँ क्रमशः ईशकेर मार्ग आ पितरकेर मार्ग सेहो कहल गेल छैक। अन्य नाम अर्चिरादि मार्ग आ धुम्रादि मार्ग अर्थात्‌ प्रकाशगामिनी आ अंधकारगामिनी मार्ग क्रमशः सेहो कहल जैछ।

उत्तरायण मार्ग ओहि आत्माके गमन लेल कहल गेल छैक जे निष्काम कर्म करैत अपन शरीर केर उपयोग कयने रहैछ। तहिना जे काम्य-कर्म में अपन शरीरकेँ लगबैछ, ताहि आत्माकेँ शरीर परित्याग उपरान्त दक्षिणायण मार्ग सऽ गमनकेर माहात्म्य छैक। उत्तरायण मार्गमे गमन केँ मतलब ईश्वर-परमात्मामे विलीन होयब, जखन कि दक्षिणायणमे गमन केँ मतलब कर्म-बन्धनकेर चलते पुनः जीवनमे प्रविष्टि सँ होइछ। मकर संक्रान्ति एहि मुक्तिक मार्ग जे श्रीकृष्ण द्वारा गीतामे व्याख्या कैल गेल अछि ताहि केँ पुनर्स्मरण कराबय लेल होइछ।  

२. सूर्यक उत्तरगामी होयब शुरु करयवाला दिन - जेकरा उत्तरायण कहल जैछ। अन्य लोकक लेल ६ महीना उत्तरायण आ बाकीक ६ महीना दक्षिणायण कहैछ।

३. पुराण के मुताबिक, एहि दिन सूर्य अपन पुत्र शनिदेवकेर घर प्रवेश करैत छथि, जे मकर राशिक स्वामी छथि। चूँकि पिता आ पुत्र केँ अन्य समय ढंग सऽ भेंटघांट नहि भऽ सकल रहैत छन्हि, तैं पिता सूर्य औझका दिन विशेष रूप सऽ अपन पुत्र शनिदेव सऽ भेटय लेल निर्धारित केने छथि। ओ वास्तवमें एक मास के लेल पुत्र शनिदेवके गृह में प्रवेश करैत छथि। अतः यैह दिन विशेष रूप सऽ स्मरण कैल जैछ पिता-पुत्रके मिलन लेल।

माहात्म्य: सूर्यदेव कर्म केर परिचायक आधिदेवता छथि, तऽ शनिदेव कर्मफल केर परिचायक आधिदेवता! मकर संक्रान्ति एहेन दिवसकेर रूपमे होइछ जहिया हम सभ निर्णय करैत छी हमरा सभकेँ कोन मार्ग पर चलबाक अछि - सूर्य-देव द्वारा प्रतिनिधित्व कैल निष्काम-कर्म (प्रकाशगामिनी) या फेर शनि-देव द्वारा प्रतिनिधित्व कैल काम्य-कर्म (अन्धकारगामिनी)।

४. यैह दिन भगवान्‌ विष्णु सदाक लेल असुरक बढल त्रासकेँ ओकरा सभकेँ मारिकय खत्म कयलाह आ सभक मुण्डकेँ मंदार पर्वतमे गाड़ि देलाह।

माहात्म्य: नकारात्मकताक अन्त हेतु एहि दिनकेर विशेष महत्त्व होइछ आ तदोपरान्त सकारात्मकताक संग जीवनक प्रतिवर्ष एक नव शुरुआत देबाक दिवस थीक मकर संक्रान्ति।

५. महाराज भागिरथ यैह दिन अत्यन्त कठोर तपसँ गंगाजीकेँ पृथ्वीपर अवतरित करैत अपन पुरखा ६०,००० महाराज सगरक पुत्र जिनका कपिल मुनिक आश्रमपर श्रापक चलतबे भस्म कय देल गेल छलन्हि - तिनकर शापविमोचन एवं मोक्ष हेतु मकर-संक्रान्तिक दिन गंगाजल सँ आजुक गंगासागर जतय अछि ताहि ठामपर तर्पण केने छलाह आ हिनक तपस्याकेँ फलित कयलाक बाद गंगाजी सागरमें समाहित भऽ गेल छलीह। गंगाजी पाताललोक तक भागिरथकेर तपस्याक फलस्वरूप हुनकर पुरुखाकेँ तृप्तिक लेल जाइत अन्ततः सागरमें समाहित भेल छलीह। आइयो एहि जगह गंगासागरमे आजुक दिन विशाल मेला लगैछ, जाहिठाम गंगाजी सागरमे विलीन होइत छथि, हजारों हिन्दू पवित्र सागरमे डुबकी लगाबैछ आ अपन पुरुखाकेँ तृप्ति-मुक्ति हेतु तर्पण करैछ।

माहात्म्य: भागिरथ केर प्रयास आध्यात्मिक संघर्षक द्योतक अछि। गंगा ज्ञानक धाराक द्योतक छथि। नहि ज्ञानेन सदृशम्‌ पवित्रमिह उद्यते! पुरुखाक पीढी-दर-पीढी मुक्ति पबैत छथि जखन एक व्यक्ति अथक प्रयास, आध्यात्मिक चेतना एवं तपस्या सऽ ज्ञान प्राप्त करैछ।

६. आजुक दिनकेर एक आरो अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सन्दर्भ भेटैछ जखन महाभारतक सुप्रतिष्ठित भीष्म पितामह एहि दिवस अपन इच्छा-मृत्युक वरदान पूरा करय लेल इच्छा व्यक्त कयलाह। हुनक पिता हुनका इच्छामृत्युकेर वरदान देने छलखिन, ओ एहि पुण्य दिवस तक स्वयंकेँ तीरकेर शय्यापर रखलाह आ मकर संक्रान्तिकेँ आगमनपर अपन पार्थिव शरीर छोड़ि स्वर्गारोहण कयलाह। कहल जैछ जे उत्तरायणमें शरीर त्याग करैछ ओ पुनर्जन्मकेर बंधन सँ मुक्ति पबैछ। अतः आजुक दिन विशेष मानल जैछ अन्य दुनिया-गमन करबाक लेल।

माहात्म्य: मृत्यु उत्तरायणके राह अंगीकार कयलापर होयबाक चाही - मुक्ति मार्गमें। ओहि सऽ पहिले नहि! आत्माकेर स्वतंत्रता लेल ई जरुरी अछि। एहिठाम उत्तरायणक तात्पर्य अन्तर्ज्योतिक जागरण सऽ अछि - प्रकाशगामिनी होयबाक सऽ अछि।

एहि शुभ दिनक अनेको तरहक आन-आन माहात्म्य सब अछि आ एहि लेल विशेष रुचि राखनिहार लेल स्वाध्याय समान महत्त्वपूर्ण साधन सेहो यैह संसारमे एखनहु उपलब्ध अछि। केवल शुभकामना - लाइ-मुरही-चुल्लौड़-तिलवा आ तदोपरान्त खिच्चैड़-चोखा-घी-अचाड़-पापड़-दही-तरुआ-बघरुआक भौतिकवादी दुनिया मे डुबकी लगबैत रहब तऽ मिथिलाक महत्ता अवश्य दिन-प्रति-दिन घटैत जायत आ पुनः दोसर मदनोपाध्याय या लक्ष्मीनाथ गोसाईंक पदार्पण संभव नहि भऽ सकत।

अतः हे मैथिल, आजुक एहि पुण्य तिथिपर किऐक नहि हम सभ एक संकल्प ली जे मिथिलाकेँ उत्तरायणमे प्रवेश हेतु हम सभ एकजूट बनब आ अवश्य निष्काम कर्म सऽ मिथिला-मायकेर तिल-चाउरकेँ भार-वहन करबे टा करब। जेना श्री कृष्ण अर्जुन संग कौरवकेर अहं समाप्त करय लेल धर्मयुद्ध वास्ते प्रेरणा देलाह, तहिना मिथिलाक सुन्दर इतिहास, साहित्य, संगीत, शैली, भाषा, विद्वता एवं हर ओ सकारात्मकता जेकरा बदौलत मिथिला कहियो आनो-आनो लेल शिक्षाक गढ छल तेकरा विपन्न होइ सऽ जोगाबी। जीवन भेटल अछि, खेबो करू... मुदा खेलाके बाद बहबो करियौक। मातृभूमि आ मातृभाषाक लेल रक्षक बनू। मिथिला मायकेर तरफ सँ तिल-चाउर हमहुँ खा रहल छी, जा धरि जीवन रहत ता धरि बहब, फेरो जन्म लेबय पड़त सेहो मंजूर - आ फेरो बहब तऽ मिथिलाक लेल बही यैह शुभकामनाक संग, मकर संक्रान्ति सँग जे नव वर्षक शुरुआत आइ भेल अछि ताहि अवसर पर फेर समस्त मैथिल एवं मानव समुदाय लेल मंगलकेर कामना करैत छी।

जय मैथिली! जय मिथिला!

ॐ तत्सत्‌!



प्रवीण चौधरी ‘किशोर’


बुधवार, 25 दिसंबर 2013

आखिर मैथिल कियाक मिथिलासन दूर ?

 आखिर मैथिल  कियाक मिथिलासन दूर  ? 

     कखनो काल इ बात के बरा कचोट होइत अइछ जे आखिर मिथिलाक सेलेब्रिटी सब मैथिलि मिथिलाक नाम स दूर किया रहs चाहैत छैथ? आन आन भाषा भाषी जेना बंगाली, मराठी, पंजाबी, तेलगु, तमिल, आसामी, ओडिया एवं प्रकारे सब प्रान्त के सेलिब्रिटी सदेव अपन भाषा आ अपन संस्कृति के सम्मान लेल आगा रहैत छैथ. अतय तक कि भोजपुरी के लेल मनोज तिवारी तक के समर्पण आ योगदान अविश्मरणीय छैन. मुदा मैथिलि के? तकर कारण कि? शायद इ त नई कि मैथिल सेलेब्रिटी आई तक मैथिलि के कारण सेलिब्रिटी नई बनला. ताई ओ मैथिलि के स्नेह रखितो मैथिलि के महत्व नई दई छैथ. तखन त जिम्मेदार हम मैथिल छी.

किछु दिन पहिने इ बात सामने आयल जे मिथिला क्षेत्र के सिनेमा हॉल मैथिलि सिनेमा लगेबा तक स मना का दई छैथ. आ भोजपुरी लेल तुरंत तैयार. इ कारण त बहुत दुखद आ चिंता योग्य अइछ.

कि इ सत्य छई कि मैथिलि सिनेमा पर टैक्स और भोजपुरी टैक्स फ्री? अगर एहन बात छई त इ चिंतन बहुत गम्भीर.

मैथिलि सिनेमा के लेल पूंजी निवेश स पूंजीपति मैथिल किया कात होई छैथ?

कि मिथिला में मैथिल के मोन स मैथिलि के प्रति स्नेह कम भ रहल अइछ? आखिर किया? कारण की? अगर अई में सच्चाई छई त माँ मैथिलि के अस्तित्व के खतराक घंटी बुझी.

कतौ कतौ इहो सुनय में आयल जे मैथिल कलाकार सब के मैथिलि के नाम पर गुमराह कायल जाइत अइछ. हुनक सहयोग लय किछु व्यक्तिगत लोक अपन निजी स्वार्थ शिद्ध सेहो करैत छैथ..

जे किछु हो सायद इ अंतिम मोका के दौर गुजैर रहल जे सब मैथिल जागौथ, सब अपन अस्मिता के रक्षा लेल आगा आबौथ, ठगना सब के चिन्ह सार्थक काज में योगदान करैथ, कियाक की आब नई जागब त पहचान मिटा जायत.

मिथिला राज्य निर्माण सेना के १९ जनवरी २०१४ के कोंस्टीटूशन क्लब, देल्ही में मैथिलि मिथिलाक अस्मिताक पर चिंतन लेल महा सभा के आयोजन में माँ मैथिलि के प्रति हम सब अपन कर्त्तव्य निर्वाहन लेल जरुर पहुंची.....अपनेक उपस्थिति आ सहयोग निश्चित माँ मैथिलि के सम्मान के लेल एक टा सकारात्मक दिशा देत.

मुम्बई 

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

मुंबई मैथिलकेर दहेज विरुद्ध एकजुटता


मुंबई मैथिलकेर दहेज विरुद्ध एकजुटता

   
         दहेज मुक्त मिथिला - महाराष्ट्रा द्वारा ,  22-12-2013  मुंबई केर नालसोपाडामे एक महत्त्वपूर्ण बैसार राखल गेल छल।  एहि संस्था द्वारा लैंगिक विभेद अन्त करबाक लेल, बेटीक शिक्षा अनिवार्यरूपे करबैत आत्मनिर्भर बनेबाक लेल आ माँगरूपी दहेज नहि लेबाक-देबाक लेल जोर-शोरसँ प्रचार-प्रसार कैल जाइत अछि। संगहि मिथिलाक विभिन्न धरोहर सबहक संरक्षण लेल वर्तमान सरकारी उदासीनता आ राजनैतिक उपेक्षाक चलतबे स्वस्फूर्त स्वयंसेवासँ लोकमानस द्वारा अपनहि कैल जायत तखनहि मिथिला फेर अपन समृद्धि ओ उत्कर्ष प्राप्त करत - एहेन कठोर प्रतिबद्धताक संग ठाम-ठाम जागृतिमूलक कार्यक्रम ओ समारोह द्वारा अलख जगेबाक काज करैत आबि रहल ई संस्था हालहि महाराष्ट्रमे गठित राज्य समितिक सक्रियतासँ मुँबईवासी मैथिल बीच अभियान तीव्र गतिसँ स्थान पाबि रहल अछि। लोक एहि अभियानकेँ हृदयसँ लगबैत आत्मगौरवक बोध करैत अपन वृत्ति स्वच्छ रखबाक संकल्प लऽ रहल छथि आ एहि संस्थाक अभियान संग अपनाकेँ जोडि रहल छथि। 
     "मात्र ४ महीनाक छोट अन्तरालमे २ महत्त्वपूर्ण शाखा खोलि चुकल दहेज मुक्त मिथिला अपन लक्ष्य हर बेटी लेल शिक्षा आ दहेज प्रथाक अन्त लेल विभिन्न योजना बनबैत आगू बढि रहल अछि।" कहैत छथि संस्थाक महाराष्ट्र अध्यक्ष संजय मिश्रा। ज्ञातब्य हो जे २८-०७-२०१३ केर पहिल बैसारसँ ई संस्थाक महाराष्ट्र ईकाइ गठन भेल छल। एहिमे फेसबुकसँ जुडल बहुते रास मिथिला-मैथिली चिन्तक अपन सुन्दर सूझ-बूझसँ धरातलपर अभियान संचालन करबाक संकल्प लेने छलाह। "मिथिलाक हेराइत गौरवकेँ फेर वापसी करबायब, एहि लेल दृढ संकल्पित छी। समाजक हरेक वर्गमे समानता, मैथिली भाषाक मधुर-मिठाससँ परिचय आ मिथिलाक विकास लेल मिथिला राज्य प्रति सदैव समर्पित रहब।" ई विचार रखैत छथि दहेज मुक्त मिथिला प्रवक्ता राम नरेश शर्मा जे अनेको मैथिली-मिथिला अभियानकेर संचालक-सहयोगी सेहो छथि। संस्था लेल समर्पित दीपक खाँ, लालबाबु शर्मा, रंजित झा, करुणेश निशेष, वी. एन. झा आ नमो नारायण मिश्र सहित सैकडों अभियानी हाल धरि जुडिकय अभियानकेँ व्यापकता प्रदान कय रहल छथि। "एहि अभियानक पवित्रता देखि - नारी प्रति समुचित सम्मानक बात सुनि समाजक हर वर्ग चाहे मैथिल वा मराठी, सब कियो हृदयसँ स्वागत कय रहल छथि। हम धर्म-कर्मसँ जुडल रहैत मानव समाज लेल एहि पवित्र उद्देश्य लेल निरन्तर काज करब आ निश्चितरूपेण मिथिलाक गौरव दहेज मुक्त समाज बनेलासँ हेतैक।" अपन विचार रखैत छथि संस्थाक संरक्षक पंडित धर्मानन्द गुरुजी। 



    दहेज मुक्त मिथिला जेकर स्थापना ३ मार्च, २०११ ई. मे फेसबुक पर उपस्थित मैथिल युवासमूह द्वारा कैल गेल छल - संस्थापक सदस्य व राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज झा स्वयं मुंबईमे रहैत छथि आ मिथिला लेल हर अभियानमे अपन तन, मन आ धन सँ योगदान देबाक हिनक विशिष्ट प्रतिभासँ मिथिला समाज, मराठी समाज सब आह्लादित अछि। "समूचा भारतमे ई अभियान पसरय ताहि लेल आह्वान करैत छी। हमर मिथिलाक पौराणिक कालसँ वर्तमान काल धरि एक अलग पूर्ण संस्कृति-सभ्यताक रूपमे रहल अछि। संसारमे के नहि जनैत अछि जे सीता मिथिलाक बेटीरूपमे पृथ्वीपर अवतार लेने छलीह। जनक समान विदेह कहौनिहार हमरा लोकनिक राजा होइत रहलाह अछि। मूर्त-अमूर्त आइयो हमरा सबहक राजा जनकहि छथि। भारतक संविधानसँ मैथिली एतेक देरी सँ मान्यता पौलक, नहि जानि राज्यरूपमे स्वशासन करबाक अधिकार संविधानसँ कहिया भेटत। लेकिन स्वयंसेवासँ विकास करबाक लेल हम सब सक्षम छी आ से करैत रहब।" उद्गार प्रकट करैत राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज समस्त भारतक मैथिलसँ एहेन प्रतिबद्धता निर्माण लेल आह्वान करैत छथि।
   काल्हि मैथिली अधिकार दिवसपर आयोजित नालसोपाराक बैसारमे ओहि ठामक नगर सेवक श्री भरत मकवाना केर प्रमुख आतिथ्य रहल छल। तहिना गायत्री परिवार केर अधिकारी सेहो अपन उपस्थिति रखलैन। हिनका लोकनि द्वारा हर तरहें संस्थाकेँ सहयोग करैत समाजसँ गन्दगी सफाई अभियान लेल निरंतर सहयोग देबाक घोषणा कैल गेल। तहिना मैथिल समाजक अनुपम उपस्थिति जाहिमे अनुप सत्यनारायण झा, धर्मेन्द्र झा, कृष्णकान्त झा अन्वेषक, इन्दिरा देवी, पुनीता शर्मा सहित दर्जनों लोककेर उपस्थिति रहल छल। 

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

बुधियार छौंडा आ राजनीति

बुधियार छौंडा आ राजनीति

              फूलचन्द्र शर्मा 'श्रोत्रिय' - प्रेमसँ पुकारल जाइत रहल फूलबा! खचरक आइड जे धियापुताक नंगटइक कारण विशेषण भेटैत छैक ताहिसँ विभूषित। विद्यालयमे पहिल घंटीसँ अन्तिम घंटीतक खुरापाती दिमागसँ किछु टेनामनी करिते टा छल। कखनहु कियो तऽ कखनहु कियो ओकर शिकायत मास्टरसाहेबकेँ कहैत छलन्हि आ २ छडी मारैत ओकरा दोबारा फेर ओ गलती करबाक लेल नहि कहि कक्षामे पठा देल जाइत छलैक। लेकिन ओ छौंडा चोटभुस्सूक बनि गेल छल, तैयो दिमाग ओकरा बुझबैत रहैक जे वैह गलती नहि लेकिन दोसर तँ कैले जा सकैत छैक... कि हेतैक, २ छडी आरो सही, लेकिन गलती पर गलती करैत रहि गेल फूलबा। एवम् क्रमसँ ओ जखन मैट्रीकमे गेल तऽ एक दिन ओकरा विद्यालयकेर सबसँ बेसी लोकप्रिय मास्टरसाहेब बजाकय कहलखिन जे देख फूलबा, भले बदमस्तीमे मुदा तोहर दिमाग कम नहि छौक। तोँ जँ चाहमे तऽ ओतबा बुधियार बनि सकैत छेँ! ई बात ओकरा बुझबामे सेट कऽ गेलैक। ओ तहिये हँसैत मास्टरसाहेबकेँ देखैत रहल चुप्पे मुदा मोने-मन धरि शप्पथ खा लेलक जे आब बुधियार बनबाक नवका प्रयोग जरुर करत। देखा चाही जे बुधियार बनि कय कि होइत छैक!


हौ बाबु! ओ तऽ सही मे तेना बुधियार बनि गेल जे आब ओकरा बिना कक्षा सून्न लागय लगैक। सब मास्टरसाहेब भालचन्द्र बाबु (लोकप्रिय मास्टरसाहेब)केँ बेर-बेर धन्यवाद देथिन जे अपने जहियासऽ ओकरा गुरुमंत्र देलियैक तहिया सऽ तऽ फूलबा मानू जे एकदम आदर्श विद्यार्थी बनि गेल अछि। कतेक बेर फूलबाक सोझाँमे सेहो प्रशंसा करबासँ लोक नहि चूकैत छल। चारूकात तूती बाजय लागल - बुधियार फूलबा, बुधियार फूलबा..... एम्हर फूलबा धरि मोने-मोन बदमाशे छल आ सोचैत छल जे देखियौ, मात्र नाटक पर तऽ लोकक ई हाल छैक जे बुधियार-बुधियार के रट्टा मारैत रहैत अछि। कनेक आरो प्रयोग बढा दैत छी। देखा चाही जे बुधियारक सीमा कि होइत छैक। ओ आब मोनिटर बनिकय कक्षाक सब विद्यार्थी सबहक नेता बनि गेल। एक-एक विद्यार्थीकेर समस्याकेँ अपन जिज्ञासा सँ बुझैत ओकर समाधान निकालबाक भरपूर चेष्टा करय लागल। केकरो लाइब्रेरीसँ किताब दियाबैक, तँ केकरो पुअर ब्वाइज फंडसँ परीक्षा फीस दियाबैक.... होइत-होइत फूलबा आब भैर विद्यालय केर एकछत्र नेता बनि गेल छल। हलाँकि विद्यालयमे ओकर ई रुतबा कनिये दिन रहलैक ताबत ओ टेस्ट परीक्षा पास करैत फाइनलकेर तैयारी लेल बहरा चुकल छल.... लेकिन ओकर बुधियारी आ राजनीति दुनू ताबे तक खूब प्रसिद्धि पाबि गेल छलैक। लोक प्रशंसा करैक, लेकिन फूलबा मोने-मोन हँसैत रहैत छल। ओकरा तऽ एखनहु बदमाशिये बुझाइत छलैक, कारण ओ बुधियार तऽ बस देखबय लेल बनि गेल छल, भीतर तऽ ओ खचरइ ओहिना छलैक, बरु ओकरा एना लगैक जे आब ओकर ओ खच्चरपन जुआन भऽ गेल छलैक। ओकरामे बहुत रास नव प्रयोगक यानि बुधियार बनबाक देखाबटीक चलते आरो परिपक्वता बढि गेल छलैक। 

आब ओ कालेजमे पहुँचि गेल आ शहरक कालेज जतय अलग-अलग गामसँ छात्र-छात्रा सब आयल छलैक ततय ओकरा एना लगलैक जे कियो चिन्हि नहि रहल अछि.... से फेर शुरु तँ बदमाशिये सँ करय पडत। कारण एतय के-कतेक बुधियार अछि तेकर पहिचान होयबामे कनेक समय लागि जायत। लेकिन बदमस्ती करैत शुरु करब तऽ बड जल्दी पोपुलर भऽ जायब। ओ सोचैत-सोचैत निर्णय केलक जे आब ओ धियापुतावला बदमस्ती करब से नहि शोभा देत... तऽ आब जे फर्स्ट ईयरवला बदमस्ती होइत छैक.... यानि फिल्म फूल आ काँटा मे जेना अजय देवगन करैत छैक तेना करब आ कलेजिया छात्रा सबसंग हिरोपनी देखबैत शुरु करब। खूब स्टाइलमे कपडा पहिरब। बापक देलहा पाइसँ पहिने एगो हिरो रेन्जर साइकिल कीनब। बूटवाला जुत्ता आ जीन्स पहिरब। कहियो-कहियो मंगलहबो मोटरसाइकिल लेकिन वैह चढि कलेज जायब.... आदि। सहीमे फूलबा कनिये दिनमे कालेजमे सेहो प्रसिद्ध लफुआ बनि गेल। लफुवइ मे लेकिन ओकरा राजनीतिक जीवन खतरामे बुझेलैक.... तखन ओ तुरन्त दोसर रूप यानि विद्यालयकेर अनुभवसँ क्लासमे अपन लफुवे मित-मितनी सबहक झमेलाकेँ संबोधन करैत प्रोफेसर साहेब सब पर इम्प्रेशन आ क्रमश: अपन प्रभावशाली कुशाग्रतासँ जल्दिये ओ कालेजमे सेहो नेता बनि गेल। विद्यार्थीवाला कोनो संगठनमे ज्वाइन केलक आ फेर सीढी-दर-सीढी चढैत ओकर राजनीति चमैक गेलैक। मुदा ओ मोने-मोन आइयो बदमस्तीमे रमल छल। 

फूलबा ग्रेजुएशनकेर डिग्री लेलक आ ओकरा युवा नेता मानि एगो पार्टी (नवका) ओकरा चुनाव लडय लेल गछलकैक। फूलबा आब मुंगेरीलालवाला सपनामे अपन आँखि मिचमिचबैत बुझू जे कनाह बनि गेल छल। धरि ओ आब अपना केँ विधायक बनेबाक लेल पूर्णरूपेण तैयारीमे बदमाशी-बुधियारीक ब्लेन्ड जे ओ स्कूल-कालेजमे अपनौने छल से प्रयोग करबाक प्लान बनेलक। ओकरा लेकिन आब किछु बेसी मेहनत करय पडि रहल छलैक, कारण आब ओ सिविक-सोसाइटीकेँ फेस करय जा रहल छल आ ओकर इमैच्योरिटी ओकरा कतहु-कतहु गडबडा दैत छलैक। बा-मोस्किल ओ अपन युनिक ब्लेन्डकेर प्रयोग करय लेल आतूर बनि गेल। ओ ताइक-ताइक कय पुरनका स्थापित नेता सबहक डाटा सब डिकोड करय लागल। खने ओ विकासक डाटा तँ खने ओ निर्वाचनक डाटा सब पर काज करय आ दिन-राइत बदमस्ती-बुधियारीक ब्लेन्डसँ अपन खुरापात-होशियारी देखबय लागल। सिविक सोसाइटीमे सेहो ओकर विभिन्न घोषणाक असैर पडय लगलैक। आमसभाक चुनावमे ओ अपन भाग्य अजमेलक। ओहि ठाम लेकिन ओ पहिल बेर पास नहि भेल धरि तेसर स्थानमे रहल। लेकिन ओकर हिम्मत बनल रहलैक। बाबु, भैया सब ओकरा बोल-भरोस दैत रहल आ बेर-बेर प्रयाससँ एक दिन ओ नेता बनत से कहि ओकरा धैर्य रखबाक लेल कहल जाइत रहलैक। लेकिन फूलबाक मोने-मन हँसी लगैत रहलैक आ ओ अपन भितरिया बदमस्ती मुदा देखौटी होशियारी सँ क्षेत्रक सेवा रोजगार उपलब्ध करेबा आ सूचना केन्द्र खोलि सार्वजनिक हितक कार्य करैत रहबाक प्रण लेलक। फूलबाक भविष्य पर ध्यान छैक, ओ ऐगला चुनाव मे नहि प्रथम तँ दोसर जरुर आयत आ ताहि सँ ऐगला बेर ओ प्रथम पक्का बनत। तेकर बाद ओ अपन बदमस्ती-बुधियारीक ब्लेन्ड आधारित नव राज्य गठन करबा धरि अपन जीवनक लक्ष्य मानैत अछि। लेकिन ओ ततेक सोचैत अछि जे अपनो सोचलहबा कहियो कार्यरूपमे नहि अबैत छैक आ बेर भेलापर ओ बेसीकाल असफल बनैत अछि। धरि फूलबा हिम्मत नहि हारल अछि। 

क्रमश:......

      फूलबा सेहो ऐगला चुनावक इन्तजार कय रहल अछि आ हमर पाठक सेहो ताबत इन्तजार करता। लेकिन अपन प्रतिक्रिया धरि जरुर लिखता से अनुरोध अछि। हाँ, संयोगसँ फूलबा मिथिला राज्यक आन्दोलनमे सेहो जुडबाक योजना बना रहल अछि, ई बात लेखककेँ कानमे कहलकैन अछि।