(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

मंगलवार, 3 मार्च 2015

दहेज मुक्त मिथिलाक चारि वर्ष पूरा: ३ मार्च - २०१५

दहेज मुक्त मिथिलाक चारि वर्ष पूरा: ३ मार्च - २०१५

फेसबुक सँ शुरु कैल अभियान, धरातल पर उतरि बढेलक मिथिलाक शान, कहियो हिन्दुस्तानक फ्रंट पेज पर लिखेलक अपन नाम आ देलक एकटा नवज्योतिक किरणक आभान - आइ पूरा केलक यात्राक चारिम वर्ष आ लऽ रहल अछि पुन: नव संकल्प। 
चारिम वर्ष मे पूरा कैल गेल:
*स्मारिका केर प्रकाशन
*मैथिली महायात्रा केर प्रारंभ
*मुंबई मिथिला महोत्सव
सौराठ मे विमोचित 'दहेज मुक्त मिथिला' केर स्मारिका राजविराज, सहरसा, कोलकाता, कानपुर, दिल्ली, जमशेदपुर - सब ठाम अलग-अलग विमोचन आ आवश्यक अभियान-प्रचार-प्रसार आ आम अपील जे 'माँगरूपी दहेज नहिये ली - नहिये दी, बरु समान रूप सँ शिक्षा दियबैत बेटा आ बेटी सबकेँ आत्मनिर्भर बनाबी। मैथिल लेल एकमात्र आसरा विद्याधनं-सर्वधनंप्रधानम् केर सूत्र अपनाबी।' कहैत अभियान भारत व नेपालक चहुँदिशि अपन आवाज बुलंद कयलक।
    मैथिली महायात्राक शुभारंभ साईंधाम, दिल्ली सँ कैल गेल जेकर मूल उद्देश्य मिथिलाक बिखरल मोती (विभिन्न गणनीय व्यक्तित्व) केर परिचय समेटैत डायरेक्ट्रीक प्रकाशन करब अछि। अही मार्च केर आखिर तक प्रथम भाग डायरेक्ट्रीक प्रकाशन कैल जयबाक अछि। एखन धरि यात्रा दिल्ली, कोलकाता, राजविराज, सहरसा, कानपुर आ जमशेदपुर मे कैल गेल अछि। एकर अतिरिक्त जानकारी आरो-आरो ठाम सँ इमेल द्वारा प्राप्त भऽ रहल अछि। उपलब्ध तथ्यांक मुताबिक प्रथम भाग डायरेक्ट्री बहुत जल्दिये सबहक सोझाँ रहत।
  मुंबई - दहेज मुक्त मिथिला द्वारा भव्य 'मिथिला महोत्सव' - केर आयोजन कैल गेल। विभिन्न दहेज मुक्त विवाह कयनिहार केँ सम्मानित कैल गेल। दहेजक प्रकोप सँ जरि रहल समाजक विभिन्न रूप पर मिथिलाक अनेको प्रसिद्ध गायक एवं कलाकार द्वारा स्वैच्छिक प्रस्तुति देल गेल छल। संगहि विभिन्न गणमान्य नेतृत्वकर्ता आ विद्वान् तथा साहित्यकार लोकनि द्वारा एहि दिशा मे चिन्तन कैल गेल छल जे कोना हमरा लोकनि मिथिलाक बिगड़ैत स्वरूप केँ पुन: गरिमामय बना सकब।
      विदित हो जे 'दहेज मुक्त मिथिला' अपन प्रतिनिधित्व लगभग समस्त महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम मे करैत आबि रहल अछि आ स्वैच्छिक-स्वयंसेवा सँ मिथिलाक सेवा मे लागल एहि संस्थाक सदस्य सब धन्यवादक पात्र छथि।
      पाँचम वर्ष लेल 'शिकायत केन्द्र' केर स्थापनाक लक्ष्य लेल जा रहल अछि। जेकर लक्ष्य अछि: कोनो पीड़ित पक्ष बिना कोनो प्रकारक पूर्वाग्रह रखने - बिना कोनो सेल्फ-फेब्रिकेटेड स्टोरी (मनगढंत कहानी) बनेने विवाह पूर्व 'माँगल गेल दहेज'क आ कथा-वार्ता कोना शुरुआत केलहुँ, कोन स्तरक वरक इच्छा/माँग अहाँक छल, के मध्यस्थकर्ता छलाह, कथा-वार्ता मिलेबाक लेल कि सब शर्त राखल गेल, पैसा-कौड़ी या गर-गहना आ वर-वरियातीक स्वागतार्थ तथा बियाह-विदाई लेल खर्च करबाक लेल माँग कि सब कैल गेल, अहाँक स्वेच्छापूर्ण खर्च सँ बेसी कि सब जबरदस्ती लादबाक कूचेष्टा भेल, आदि समस्त व्योरा उपलब्ध कराउ, दहेज मुक्त मिथिला समुचित मध्यस्थकर्ताक भूमिका निर्वाह कय सकैत अछि।
      एहि संस्थाक सदस्यता लेल सब कियो स्वतंत्र छी। अपन-अपन इलाका मे एहि अभियान केर प्रचार-प्रसार एकमात्र कार्यक्रमक क्रियान्वयन अछि।
     एहि संस्थाक आधिकारिक फेसबुक ग्रुप-पेज एहि लिंक पर अछि, कृपया सदस्यता ग्रहण करी एहि ठाम ज्वाइन करैत:

संपर्क लेल: इमेल पठाबी - dmmithila@yahoo.com
सधन्यवाद,
प्रवीण नारायण चौधरी
अन्तर्राष्ट्रीय संयोजक
दहेज मुक्त मिथिला।

शनिवार, 21 फ़रवरी 2015

मातृभाषा दिवश



21 फरवरी के मनाबु अप्पन 'मातृ भाषा दिवस'
मिथिला धरोहर : 21 फरवरी यानी कि मातृ भाषा दिवस .. अंहा मे सँ बहुते कम लोग के पता होयत कि आय कोन दिन अछि। आधहा सँ ज्यादा लोग के तऽ फरवरी खाली वैलेंनटाइन डे कs लेल याद रहैत अछि।
आय के दिन अपन माँ भाषा के सेलिब्रेट करैय के अछि। आय के दिन अंहा अपन मातृ भाषा चाहे मैथिलि, अंगिका, भोजपुरी, मगही, वजिजका, जे भी होय ओकरा सेलिब्रेट कऽ सकय छि। कियाकि विविध भाषा के अय मोति के पिरोये कऽ भारत देशक एकता के माला बनय अछि, जय मे प्रेमक धागा होयत अछि।
हिंदी दिवस : हर हिंदुस्तानी के आवाज हिंदी..
मुदा बदलैत परिवेश मे जतय आय लोग के लेल वक्त नय अछि ओतय आय लोग सव भाषा के खिचड़ी कऽ देलक अछि। अंहा अपन आस-पासक लोगक बात पर गौर करव तऽ अंहा पैव जे आय शायदे ही कुनो एहन पुरूष औऱ महिला हैत जे कि शुद्ध भाषा के प्रयोग करैत होयत..जेना कि हिंदी बाजैत समय अंग्रेजी के प्रयोग, मैथिलि बाजैत हिंदी आ इंग्लिश शब्दक प्रयोग।
आय तऽ लोग महिलाओं सँ बात करैत कहैत अछि. आप खा रहे हो..या फेर बड़े सँ बात करैत समयो तू-तड़ाके क प्रयोग करैत अछि जेना कि तू खा ले, आप निकलो वगैरह..वगैरह।
दोसर अहम बात जे आय-काइल हर जगह अछि ओ अछि अंग्रेजी के बोलबाला। भौतिकतावादी युग मे स्टेटस मेंटेन करय के चक्कर मे हम विदेशी भाषा के तऽ तेजी सँ अपना रहल छि कियाकि इ बेहद जरूरी अछि, मुदा अपन पहचान ऑउर अपन मातृभाषा के बिसरैत जा रहल छि।
आय अगर मिथिलांचल दंपति दिल्ली, पुणे ऑउर बैंगलोर मे रहैत अछि तऽ हुनका बच्चा के मैथिलि नय आवैत अछि कियाकि ओ अपन बच्चा के कखनो मैथिलि बाजनय सिखेवे नय केलक, अगर बच्चा कखनो काल नकल करैतो अछि तऽ डांट-फटकार परैत अछि कियाकि हुनका लागैत यऽ जे कि हमर बच्चा मातृभाषा सीखे कs की करत ओकरा अंग्रेजी एवा चाहि कियाकि इहे सँ ओ स्मार्ट कहलैत जहनकि अपन क्षेत्रीय भाषा बाइज के पिछडल लागत।
इ सवटा लोगक ग्रसित मानसिकता कऽ सबूत अछि जेकर कारणे आय हमार क्षेत्रीय भाषा के ओ बढ़ावा नय मिलैत अछ जे कि अंग्रेजी कs मिल रहल अछ। हम देशक आन-बान ऑउर शानक बरकरार राखय के लेल कसम तऽ खाइत छि मुदा की मातृभाषा के अनदेखा कऽ के हम वाकई मऽ अपन सप्पत निभा रहल छि।
जय  मैथिलि  जय  मिथिला 

बुधवार, 11 फ़रवरी 2015

डीलरक किरदानी

डीलरक किरदानी 

गाम गाम में शोर भेल अछि , 
डीलर अछि बेईमान 
सभक मुँहे सुनि रहल छी, 
डीलर अछि शैतान
लाबै छथि राशन जनता के नाम पर
आ तुरंत विदा भ जाइत छथि दुकान पर
दूकानदार सँ कनफुसकी क' क'
दस बजे रातुक समय द' क'
सुन दलान देखि अबीह' बौआ
एकटा बड़का बोड़ा ल' क'
पाई नगद तू लेने अबीह'
दाम में नै तू घिच - पिच करिह'
कियाक त' गारिक हार हमहि पहिरै छी
जनता के श्राप हमहि लैत छी
हाकिम के घुस हमहि दैत छी
तैयो हम चोरे कहबै छी
गौंआँ के बुरबक बनाबी
अपने हम हाकिम कहाबी
सब कियो आगा पाछा करैया
घुस में पान तमाकुल दइया
तैयो हम करै छी मनमानी
ककरो कोनो बात नै मानी
दस बोड़ा हम चीनी रखने
तोरे सब के लेल
बाँकी जे दू बोड़ा बाँचत
जनता के ठकी लेब
गाम में दस टा मुँहगर कनगर
मुंह तकर हम भरबै
बाँकी सब ठाम झूठ बाजी क'
चोरी हमहि करबै
अगिला खेपी तेल आनब
तू तखनहि रहिह' सचेत
रस्ते में तू ठाढ़ रहिह' पाई टीन समेत
गाम पर अनिते देरी
भ' जाइया हेरा फेरी
मुखिया जी बदमाशी करैया
टीन झोरा ल' एतय अबैया
दस किलो चीनी आ तेल
ओकरो मंगनी देबय पड़ैया
मुदा दस किलो चीनी आ तेल पर
मुखहिया जी सकदम
टकरा बाद जे मोन करैया
करै छी अपने मन
टकरा बाद किरानी सबके
झूठ बाजी छी हमहि ठकने
लोक सब हमर किरदानी के
महीना में दस टा दैत अछि दरखास
जा गांधी (पांच सौ ) द' आफिसर के
तुरंत करा दैत छी बरखास
घुसक छैक एखन जमाना
तेन ने हम छी बनल दिबाना
चारि साल धरि कहुना कहुना
ई कोटा चलि जाएत
पाँचम साल बुझह
सीमेंट जोड़ी दू तल्ला पिटायत
बेसी तोरा की कहिय'
एहि में घर बैसल बड्ड नफ्फा
मुदा आशीर्वाद में कखनो
घर घरायण सब सफ्फा 



(१९९२ के डायरी सँ )
Sanjay Jha -
नागदह , मधुबनी ,


मिथिला ------

शनिवार, 24 जनवरी 2015

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः

अपनेक समस्त  परिवार  सादर  आमंत्रित  छी 
सरस्वती पूजाक संग   स्टजाम  कीर्तन  में ,
महा मन्त्र  
 काली दुर्गे राधे श्याम -  गौरी  शंकर सीता राम  , 
ध्वनि में  लिप्त  भ अपन  जीवन  के  कृतार्थ  करी , 
धन्यवाद ,
अपनेक दर्शन  अभिलाषी समस्त विद्यापति कॉलोनी निवासी , 
 स्थान -  जलपुरा  ग्रेटर नॉएडा , उत्तर प्रदेश (एनसीआर )
दिनांक - २५ -०१  -२०१५ 


ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।
विद्या: समस्तास्तव देवि भेदा: स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु।
त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्तिः॥

या कुंदेंदु तुषारहार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता |
या वीणावर दण्डमंडितकरा, या श्वेतपद्मासना ||

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभ्रृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता |
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा ||

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमां आद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा पुस्तक धारिणीं अभयदां जाड्यान्धाकारापाहां|

हस्ते स्फाटिक मालीकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदां||
ॐ .....शांति .....शांति ...... शांतिः ......ॐ

सोमवार, 19 जनवरी 2015

नरक निवारण चतुर्दशी


                     नरक निवारण चतुर्दशी 


ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् !!

   माघ मास कृष्ण पक्षक चतुर्दशी - देवाधिदेव महादेव केर प्रिय दिन, आइ देवता लोकनि परमपिता ब्रह्माजी सँ आदेश लय शिवकेर विवाह हेतु राजा हिमालय पुत्री गौरी संग कथा-वार्ता निश्चित कैल गेल छल।

     आजुक दिन अत्यन्त शुभ मानल गेल अछि आ एकर महत्ता बहुते पैघ छैक। मानव प्रजाति गार्हस्थ जीवनमे रहैत जे किछु पापाचार अनचोके केने रहैछ ताहि लेल क्षमायाचना आजुक दिन व्रत राखि करैत अछि। कर्म अनुरूपे फल भेटबाक बात मानव-संसारमे प्रसिद्ध छैक। तुलसीदासजी लिखैत छथि:

कर्म प्रधान विस्व रचि राखा - जो जस करहिं सो तस फल चाखा।
    अर्थात् एहि संसारमे जे कियो आयल अछि ओ निहित कर्म करबे करत आ तही लेल एहि संसारकेँ कर्मप्रधान मानल जाइछ, पुन: कर्म अनुरूप क्रियमाण, संचित ओ प्रारब्ध तीन तरहक फल पबैछ। हिन्दू धर्म-संस्कृतिमे जीवन पर्यन्त कर्मफलकेर जे किछु भोग छैक - तेकर अतिरिक्त मृत्युपरान्त सेहो कर्म अनुसार गति मानल गेल छैक। स्वर्ग आ नरक केर परिकल्पना ताहि लेल मानल जाइत छैक। सीधा शब्दमे पुण्यसँ स्वर्ग आ पाप सँ नर्क केर भोगक मान्यता छैक।
       गार्हस्थ जीवनमे विभिन्न प्रकारक कर्म करैत अनचोके कतेको पापाचार होइत रहैत छैक। लेकिन दर्शनशास्त्र ओ वैदिक कर्मकाण्ड द्वारा एहेन तरहक पापक भोगकेँ मेटाबय लेल किछु व्रत ओ अनुष्ठान आदिक चर्चा आयल छैक। माघ कृष्ण चतुर्दशीक व्रत एहेन पापसँ मुक्तिकारक होयबाक चलते नरक-निवारण चतुर्दशी कहाइछ। आइ लोक दिन भरि उपास रखैत अछि। आजुक दिन शिव-परिवारक पूजनमे बेल आ तीर्थक जलसँ जलाभिषेक केर विशेष महत्त्व छैक।
           मिथिलाक्षेत्रमे मकर संक्रान्तिसँ शुरु भेल शिवमठ पर दर्शन-पूजा, रवि-रवि मकर-मेला जेबाक प्रक्रियामे आइ चतुर्दशी दिन सेहो दर्शन-पूजापाठ लेल शिवमठपर जेबाक विशेष परंपरा छैक। लोक औझका व्रतक पारण लेल मठेपरसँ बेड फर आनैछ, संध्याकाल पारण करैत व्रत समापन कैल जाइछ। कतेक ठाम बेडक संग तील सेहो खाइत नरक निवारण चतुर्दशी व्रतक पारण करैत उपास खत्म करैछ। आजुक व्रत बाल्यावस्थासँ वृद्धावस्थामे रहनिहार सब कियो करैत अछि। मठ सबपर बड पैघ मेला सेहो लगैत छैक। प्राचिनकालसँ मिथिलामे एहेन समय घरक गृहिणी (नारीवर्ग) विशेष रूप सँ मठपर जाइत छथि आ नैहरा सहित अन्य सगा-सम्बन्धी सबसँ सेहो भेंटघाँट होइत छन्हि। कतेको रास वैवाहिक सम्बन्ध आजुक दिन मठेपर कनियां-निरीक्षणसँ पूर्ण होइत छैक। यैह कारण छैक जे संसारक लोकमे ई मान्यता छैक जे वैदिक विधान आ मिथिलाक लोकचर्या बहुत मिलैत छैक। 

मंगलवार, 13 जनवरी 2015

तिला संक्रांति

तिला संक्रांति -
 तिल में विटामिन ए और सी छोईड़ वो सभ आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होईत अछि जे नीक स्वास्थ्यक लेल अत्यंत आवश्यक होइत अछि। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स सौं भरपूर होइत अछि । तिल में मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दू गोट बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होइत छै जे बदाम (चना), मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन सन अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहि होइत अछि। ट्रायोप्टोफन के शांति प्रदान करय वाला तत्व सेहो कहल जैत अछि जे अनिंद्रा के दूर करय में सक्षम होइत अछि। ई चमड़ी(त्वचा) आ केश के सेहो स्वस्थ रखैत अछि। मीथोनाइन यकृति (लीवर) के दुरुस्त रखैत अछि आ कॉलेस्ट्रोल के सेहो नियंत्रित रखैत अछि। तिलबीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा केर बड़ पैघ स्त्रोत अछि जे चयापचय को बढ़बैत अछि।
  जेना की अहि पावनीक नामे तिला संक्रांति थीकै आ अहि मे तिल केर उपयोग होइते टा अछि, तS आऊ जानल जाई किछू विशेष "तिल" केर संबंध में।
तिल के घरेलू उपयोगक सुझाव-
1. कब्ज दूर करबाक लेल तिल के मेंही पीस ली आ प्रतिदिन पचास ग्राम तिल के चूर्ण गुड़, चीनी वा मिश्री के संग मिला फाँईक ली।
2. पाचन शक्ति बढ़ेबाक लेल समान मात्रा में बादाम, मुनक्का, पीपर, नारिकेल के गरी आ मावा नीक सS फेंट ली, फेर अहि मिश्रणक बराबर तिल कूटि पीस कय मिला ली , स्वादानुसार मिश्री मिला आ भोरे -भोर खाली पेट सेवन करी। अहि सौं शरीर केर बल, बुद्धि आ स्फूर्ति में सेहो वृद्धि होइत अछि।
3. प्रतिदिन राति में तिल के खूब चिबा के खयला सौं दाँत मजबूत होईत छैक।
4.यदि कोनो घाव भS गेल हुए तS तिल के पानि भिजा कय पीस आ घाव पर बांधला सौं घाव शीघ्रता सS भैर जैत अछि।
5. तिल केर लड्डू ओहि बच्चा के भोर आ साँझ अवश्य खुआबी जे राति में बिछौना गील करैत छथि। तिल के नियमित सेवन कयला सौं शरीरक कमजोरी दूर होईत अछि आ रोग प्रतिरोधकशक्ति में वृद्धि सेहो होइत अछि।
6. पायरिया आ दाँत हिलबाक कष्ट में तिल के तेल के मुँह में १०-१५ मिनट तक राखि, फेर अहि सS कुल्ला करी। अहि सौं दाँतक दर्द में तत्काल आराम भेतैत छैक। गर्म तिल के तेल में हींग फेंट के सेहो ई प्रयोग कयल जा सकैत अछि।
7. पानी में भिजाओल तिल के कड़ाही में हल्का स भूइज ली आ ओकरा पैन या दूधक संग मिक्सी में पीस ली । सादा या गुड़ फेंट के पीला सौं सोनीत (रक्त) केर कमी दूर होइत अछि।
8. जोड के दर्दक लेल एक गोट चाय के चम्मच भैर तिल के राति भैर पैन के गिलास में फुला ली आ भोरे भोर एकरा घोइंट ली वा प्रत्येक भोर एक चम्मच तिल के आधा चम्मच सूखायल अदरकक(सोईंठ) चूर्ण केर संग फेंट के गर्म दूधके संग पीयला सौं जोड़ के दर्द नष्ट भ जैत अछि।
सौजन्य सन - 
  मिथिला संस्कार 

सोमवार, 5 जनवरी 2015

मैथिली महायात्रा आ रक्तदान कार्यक्रम



  मिथिलांचल महासभा द्वारा आयोजित मैथिली महायात्रा ४ जनबरी केँ होटल रिलेशन केर सभागार मे
भव्यतापूर्वक सम्पन्न भेल। कानपुर सँ सांसद तथा भाजपाक वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता डा. मुरली मनोहर जोशी केर जन्मदिनक पूर्व-संध्या पर आयोजित एहि कार्यक्रम मे सामाजिक सरोकार आ मानव-सेवा प्रति जिम्मेवारीक वहन करैत आयोजक संस्था द्वारा रक्तदानक कार्यक्रम सेहो राखल गेल छल। रोटरी क्लब - कानपुर संग सहकार्य करैत सभागारक बाहर रक्तदान कैम्प लगाओल गेल। विदित हो जे मिथिलांचल महासभा अपन स्थापनाकालहि सँ समाज प्रति पूर्ण संवेदनशील रहि विभिन्न तरहक मानव-सेवाक कार्य करैत आबि रहल अछि। एहि मे फ्री मेडिकल कैम्प, विकलांग लेल ट्राइ-साइकिल वितरण, असहाय परिवार पर अचानक आयल कोनो आफत-विपत्तिक घड़ी सहायक बनि मानवीय सहयोग देनाय, आर्थिक रूप सँ विपन्न बाल-बालिकाक समुचित शिक्षा लेल प्रयास आदि विभिन्न सामाजिक कार्य करबाक पैघ सूची अछि।
        मैथिली-मिथिला प्रति योगदान देनिहार विभिन्न शहर-नगर मे बसनिहार प्रवासी मैथिल लोकनिक परिचय केँ संग्रह करबाक उद्देश्य सँ कैल जा रहल मैथिली महायात्राक पड़ाव कानपुर मे 'मैथिली, मैथिल के प्रति सिनेह एवं एकजुटता' आ 'प्रवासी मैथिलक राजनैतिक अधिकार' पर परिचर्चा गोष्ठीक संग कविता पाठ, भगवती गीत तथा सहभोज सँ समापन कैल गेल। मिथिलांचल महासभाक संस्थापक अध्यक्ष तथा कानपुर मैथिल समाजक अग्रणी श्री रवि नाथ मिश्र केर अध्यक्षता मे लगभग ५ घंटा तक चलल परिचर्चा कार्यक्रम मे विभिन्न ठाम सँ पधारल विद्वान्, अभियानी, नेतृत्वकर्ता, कवि सहित स्थानीय विज्ञजनक नीक सहभागिता देखल गेल। मैथिलक सम-सामयिक अवस्था पर आधारित रहबाक कारणे श्रोतावर्ग शालीनता सँ वक्ता लोकनिक सब बात केँ सुनलैन।
     किसलय कृष्णक कुशल ओ विशिष्ट मंच संचालन सँ चलि रहल कार्यक्रम मे प्रमुख अतिथि प्रो. ज्योति किरण (प्राध्यापक, विमेन्स कालेज, कानपुर) द्वारा दीप-प्रज्वलन तथा हरेराम झा द्वारा गाओल गोसाउनि गीत सँ सभा आरंभ भेल। कार्यक्रम प्रभारी (संयोजक) अनिल झा द्वारा स्वागत-मन्तव्यक संग विषय प्रवेश करबैत मिथिलांचल महासभाक विगत मे कैल गेल विभिन्न मूल्यवान् सेवा सहित भविष्य मे मैथिल केँ अधिकार संपन्न बनेबाक लेल राजनैतिक सामर्थ्य सँ परिपूर्ण बनेबाक लेल संघर्ष जारी रखबाक बात स्पष्ट कैल गेल। ओ अपन प्रखर वाणी सँ समस्त मैथिल समाजकेँ आह्वान कयलनि जे जाबत हमरा लोकनि अपना आप केँ राजनैतिक पद आ पावर सँ परिपूर्ण नहि करब, बाहरी दुनिया हमरा सबकेँ मोजर नहि देत। मुस्लिम वोट बैंक केर उदाहरण दैत ओ मैथिल वोट केर परिकल्पना पर विचार केन्द्रित केलनि। एहि लक्ष्य केर प्राप्ति तखनहि संभव होयत जखन हम सब सशक्त एकजुटता सँ अपन नेता अपनहि बनायब। दुनियाक कोनो राजनैतिक शक्ति मैथिल केँ पाछू नहि कय सकैत अछि जँ हमरा लोकनि एकसूत्री कार्यक्रम चलाबी, अपन समाजक लोक मे कथमपि राजनैतिक लड़ाई मे धोखा नहि दय बस एक स्वर मे आवाज लगाबी। काफी भावुकता सँ भरल विचार सब रखैत श्री झा इहो कहलैन जे कोना लोक अपन मूल घर-द्वारि छोड़ि कतहु शहर मे अबैत अछि, कोन तरहें ओकरा पर ओहिठामक स्थानीय समाजक लोक बिहारी कहिकय वा आन-आन तरहें दुत्कार-फटकार दैत छैक, तथापि अपन माटि-पानि-भाषा-संस्कृतिक प्रसादे कोना एक मैथिल प्रवास पर सेहो अपन जीवटतापूर्ण संघर्ष सँ अपना केँ स्थापित करैत अछि आ आब बेर आबि गेल छैक जे प्रवासी मैथिल केँ अपन राजनैतिक अधिकार प्रति पूर्ण साकांछ रहैत अधिकारसंपन्न बनय। आब कानपुर मे मैथिल केर एतेक अधिकार बनैत छैक जे कुल ७ विधायक मे सँ ३ विधायक मैथिल बनय, कानपुर नगरक मेयर मैथिल बनय, मैथिल बाहुल्य क्षेत्रक वार्ड कमिश्नर मैथिलहि केँ चुनल जाय आ विभिन्न राजनीतिक दलक मात्र मुखौटा वोटबैंक नहि बनि मैथिल ओहि दलक नीतिकार आ पदवीधारी अधिकारी सेहो बनय। मुह ताकयवला समय सँ आब मैथिल ऊपर आबि चुकल अछि। सब तरहें मैथिल मे ई सामर्थ्य छैक जाहिक आधार पर ओ राजनैतिक सामर्थ्य केँ हासिल कय सकैत अछि। एहेन उर्जावान् आ सशक्त घोषणा सुनि उपस्थित जनमानस बेर-बेर तालीक गुंज सँ स्वागत करैत देखायल। एहि उद्घोषणाक तुरन्त बाद बाल गायक निकेतन द्वारा भगवतीक गीत गाबि दर्शक-श्रोताकेँ मंत्रमुग्ध कय देल गेल।
           तदोपरान्त मैथिली महायात्राक उद्देश्य तथा कानपुर धरि अयबाक अनुभूति पर प्रवीण नारायण चौधरी द्वारा सभाकेँ संबोधन कैल गेल। पूर्व वक्ताक भावुक प्रस्तुति सँ अभिभूत प्रवीण सेहो हुनकहि समस्त बातकेँ बल दैत कानपुरवासी सँ अपील कयलनि जे हनुमानी शक्ति जे बिसरायल अछि तेकरे पुनर्स्मृति मे अनबाक लेल ईश्वरीय कृपासँ ई यात्रा आइ कानपुर आबि गेल अछि। कानपुर सहित भारत ओ नेपालक विभिन्न शहर मे मैथिलक जे उपस्थिति अछि ताहिक बले आब मैथिल पुत्र विधानसभा आ संसद भवन तक पहुँचय लागल छथि। मिथिलाक हालत बदतर अछि, ताहि दिशा मे सोराज केर सिद्धान्त टा कारगर होयत। ताहि लेल सेहो आब प्रवासी मैथिल केँ जिम्मेवारी वहन करय पड़तनि। ब्रजस्थ मैथिलक उदाहरण दैत ओ सभा सँ यैह अपील कयलनि जे पहिचानक विशिष्टताक प्रथम आधार भाषा प्रति उदासीनता दुखद अछि। मैथिली भाषा मे सृजनशील कार्य करबाक परंपराक निर्वाह कैल जाय। जहिना मैथिली अन्तो-अन्त तक संविधान द्वारा सम्मानित भेल तहिना मिथिला सेहो सम्मानित हेबाक चाही।
       क्रमश: विषय तथा महायात्राक उद्देश्य पर विभिन्न वक्ता द्वारा सारगर्वित संबोधन कैल गेल। परिचर्चा तखन फेर रंग पकैड़ लेलक जखन दिल्ली सँ यात्रा मे आयल मिथिला राज्य निर्माण सेनाक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर नाथ झा द्वारा मैथिली आ मिथिला लेल कैल जा रहल युवा प्रयास पर प्रकाश देल गेल, संगहि इहो स्पष्ट कैल गेल जे एक रतिक इगो कतेक घातक बनि सकैत अछि आ कोना कोनो सार्थक कार्यकेँ पटरी सँ उतारि सकैत अछि। लोक देवी-देवता केँ पूजा डरे करैत अछि जे जँ पूजा नहि करब तऽ अनिष्ट होयत। तहिना आइ राजनीतिकर्ता एहि डरक सिद्धान्त पर काज करैत अछि जे जँ कोनो खास समुदाय वा भाषाभाषी वा क्षेत्रक लोक केर बात नहि मानब तऽ वोट कटि जायत। मैथिल केँ ई आत्मसात करबाक चाही जे आपसी विखंडन सँ मैथिलक डर केकरो नहि होइत छैक आ यैह कारण सँ आइ मैथिल केर अधिकार संविधान द्वारा सम्मान नहि पाबि सकल अछि। अपन सुन्दर अनुभव केर वर्णन प्रस्तुत करैत ओ आह्वान कयलनि जे हम सब दोसराक पैर पूजा कम करी, अपन भाषाभाषीक नेताकेँ आगू बढाबी आ एकजुटता आर विषय मे हो नहि हो, राजनीतिक विषय मे सबहक स्वर एक रहबाक चाही। एहि लेल दोसर किछु नहि, बस अपन इगोकेँ हम सब कम करी।
गवर्नमेन्ट कालेजक प्राचार्य प्रो. पंकज चौधरी एहि आयोजन प्रति हर्षक अनुभूति प्रकट करैत स्वयं बहुत दिन सँ एहि मौकाक प्रतीक्षा करबाक उद्गार व्यक्त केलनि। मात्र पेपर मे पढि संतोष कय लैत छलहुँ, मुदा आइ प्रत्यक्ष मैथिल द्वारा आयोजित मैथिली महायात्रा कार्यक्रम मे सहभागी बनि प्रवासी मैथिल रहितो स्वयं मिथिले मे रहबाक अनुभव कय रहल छी। एहि तरहक कार्यक्रम निरंतरता मे रहत तऽ स्वत: परिस्थिति निर्माण होइत रहतैक, आ हम सब फेर सँ अधिकारसंपन्न बनबे टा करब। मिथिलांचल महासभाक उपाध्यक्ष देवेन्द्र झा अपन संबोधन मे 'संघे शक्ति कलियुगे' सिद्धान्त पर सबकेँ एकजुट बनबाक आह्वान केलनि। संगहि प्रवासी मैथिल दुइ प्रकारक होइत अछि, एक मैथिलीभाषी आ एक गैर-मैथिलीभाषी, एहि दुनु केँ जोड़बाक बात पर ध्यान देबाक आवश्यकता अछि, तखनहि संघ मजगुत बनत। अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक महासचिव प्रेमकान्त झा सभा मे कने देरी सँ पहुँचलाक कारणे केवल अपन मनक बात राखि मिथिला राज्यक आवश्यकता आ मैथिली भाषाक प्रयोग पर जोर देलनि। समाधान लेल मैथिलीक अपन मिडिया आ मैथिली पढाई लेल सिबिएसई कोर्स मे विषय रखबाक बात पर प्रकाश देलनि। ओ अपन आलोचनात्मक अंदाज मे सभा मे बैसल जोरदार भाषण देनिहार लोक सब सँ सेहो ईमानदारी सँ मैथिली केँ स्वीकारबाक माँग केलनि। दिनेश झा, राधा बल्लभ झा व कानपुर मैथिल समाजक अनेको अगुआ लोकनिक सुन्दर उपस्थिति आ संबोधन सभाक विशेषता रहल।
     तहिना मिथिला राज्य निर्माण सेनाक संस्थापक अध्यक्ष हेमन्त झा द्वारा सेहो राजनीतिक लड़ाई कोन आधार पर लड़ल आ जितल जा सकैत अछि तेकर सुन्दर चित्रण प्रस्तुत कैल गेल। आर कतहु मतभिन्नता हो, मुदा मिथिला राज्य लेल आ मैथिलक राजनैतिक अधिकार लेल एकजुटताक आवश्यकता केँ मनन करी। सरस्वतीक धनी मैथिल लक्ष्मी केँ प्रसन्न किऐक नहि कय पबैत छथि। विखंडित समाज द्वारा कहियो अधिकारसंपन्नता प्राप्त नहि भेलैक अछि, तैँ एकजुटता पर सब कियो निरंतर कार्य करी। मैथिली महायात्रा कार्यक्रम आइ जोड़बाक कार्य कय रहल अछि। मिथिला राज्य निर्माण सेनाक कोषाध्यक्ष तथा नीतिकार संजीब सिन्हा द्वारा एक सँ बढि कय एक प्रेरक उदाहरण दैत संघर्ष लंबा समय धरि करबाक बात पर जोर देलनि। हुनक कहब छल जे बस एकटा ज्ञापन कतहु देला सँ ओ माँग पूरा होयत से जरुरी नहि छैक, ओकर प्रक्रिया छैक आ ताहि मे हमरा सबकेँ बेर-बेर प्रयास करहे टा पड़त। जन-आन्दोलन मे जन-जन केर सहयोगक आवश्यकता पर ओ जोर दैत रहलाह। कौशल कुमार संबोधन करैत कहला जे आइ मैथिल पलायन जेहेन खतरनाक वन-वे-स्ट्रीट मे यात्रा करबाक लेल बाध्य अछि। पलायन तखनहि रुकत जखन प्रवासी संपन्न मैथिल एहेन रास्ताक निर्माण करैथ जाहि सँ पलायन रुकय। विकासक परिस्थिति आइ बाहरे बसल सक्षम आ सामर्थ्यवान मैथिल द्वारा बनि सकैत अछि।
कानपुर युवा मैथिल केर प्रतिनिधित्व करैत मनोज कुमार द्वारा युवा-जागृति पर जोर देल गेल। ओ कहलनि जे हम सब योजनाबद्ध तरीका सँ अपन पहिचान, भाषा, संस्कृति आ एकजुटताक लेल काज कय रहल छी। आब चुप नहि रहब, अधिकार लेबे टा करब। तहिना दिल्ली सँ आयल 'नशा मुक्त मिथिला' केर संस्थापक विक्की ठाकुर द्वारा संबोधन मे कहल गेल जे जँ दहेज मिथिला समाजक लेल साँप छी तऽ नशा समाज लेल जहर छी। साँपक समाधान संभव छैक, मुदा ओकर बिख चढि गेलाक बाद समाधान कठिन छैक। एहि अभियानक कार्य किनको निजी जीवन मे प्रवेश करबाक कदापि नहि मुदा नशाक असर सँ समाजकेँ मुक्त करबाक एहि अभियान मे समाजक सबहक सहभागिता जरुरी छैक। एहि लेल कानपुर समाज सँ सेहो सहयोग भेटत एहि अपेक्षा केँ ओ प्रकट केलैन। मैथिली गीतकार विमल जी मिश्र सेहो दिल्ली सँ आबि एहि यात्रा मे सहभागी बनलाह आ दहेज लेनिहारक पत्नी आ बिन लेनिहारक पत्नी कोन तरहें अपन पति ओ परिवार संग व्यवहार करैत अछि तेकरा लयात्मक प्रस्तुति मे रखलनि।
      मिथिला मिरर केर संपादक ललित नारायण झा मैथिल समाज सँ वर्तमान युग अनुरूप महिलाक सहभागिता बढेबाक बात पर जोर देलनि। उपस्थित जनसमूह मे महिलाक सहभागिताक उदाहरण दैत ओ कानपुर समाजकेँ आइना देखबैत अपन पत्नी सहित ओहि समस्त महिलाक उदाहरण देलनि जे आइ पढि-लिखि सब तरहक फैशन आ मिशन मे आगाँ छथि। मैथिलानी कतहु सँ कमजोर नहि छथि आ ई बात मिथिलावासीक परंपरावादी समाजकेँ आत्मचिन्तन करबाक चाही। तहिना ओ अपन मन्तव्य मे मैथिली सिखेबाक दायित्व माता-पिता पर रहबाक बात कहलनि। भले धिया-पुता अंग्रेजी माध्यम सँ किऐक नहि पढि रहल हो, ओकरा काउ माने गाय मैथिली मे होइत छैक सेहो पता हेबाक चाही। पापा बापे केँ कहल जाइत छैक ई बात हम सब अपन बच्चा केँ जरुर सिखा सकैत छी। माता-पिताक गुणे धिया-पुताक बाढि होइत छैक, संस्कार जेहेन देबैक वैह आगाँ देखब। जे मैथिली नहि सिखबैत छथि ओ स्वयं २० वर्षक बाद परिणाम भुगतय लेल तैयार रहैथ। एहि तरहें मिथिला मिरर द्वारा कैल जा रहल मैथिली ओ मिथिला प्रति विभिन्न योगदान तथा एहि मे सबहक सहयोगक आवश्यकता पर जोर दैत आगामी समय मे सेहो स्वयं प्रतिबद्ध रहैत सेवा करैत रहब ओ अपन भावना व्यक्त केलनि।
           अन्त मे अध्यक्षीय संबोधन करैत मिथिलांचल महासभाक संस्थापक अध्यक्ष श्री आर एन मिश्र समस्त संबोधन-भाषण केँ ध्यान सँ सुनि आ मनन करबाक उपरान्त एक्कहि बात पर जोर देलनि जे वर्तमान कानपुर मैथिल समाजक हित सर्वोपरि अछि, जाहि लेल मिथिलांचल महासभाक स्थापना ओ केलनि। एहि मे सब नि:स्वार्थ भावना सँ मात्र सेवा करैत अपन पहिचान आ आत्मसम्मानक रक्षा लेल आगू बढि गेल छथि। कियो गैर-मैथिल नेता संग फोटो खिचाबय मे गर्वक अनुभूति करैत छथि ताहि सँ बहुत नीक जे स्वयं मे स्थित ओहि विशिष्टताकेँ जगाउ जे आन-आन लोक अहाँक संग फोटो खिचाबय मे गर्वक अनुभूति करैथ। अपन निज जीवनक एक अविस्मरणी उदाहरण रखैत ओ स्मृति मे अनलाह जे कोना हुनक पिता कानपुर मे पुरोहिताइ करेबा समय एक व्यवसायीक घर हुनकर सोझें अपमानित भेल छलाह, जेकरा ओहि समय तँ ओ मजबूरी मे वर्दास्त कय लेने छलाह, मुदा बाद मे अपन संकल्प-शक्ति सँ नौकरी नहि करबाक प्रण करैत व्यवसाय शुरु केनाय आ ओहि अपमान केनिहार व्यवसायीक पुत्र केँ अपन फर्म मे बारह वर्ष नौकर बनाय रखबाक विलक्षण आ अति-प्रेरणादायक जोशीला उद्धरण सभाक समक्ष प्रस्तुत केलनि। अपन संस्थाक युवा आ उर्जावान् शक्ति अनिल झा तथा अध्यक्ष अमित झा केँ दायाँ आ बायाँ हाथ कहैत ओ वचन देलनि जे बस काज करू आ एहि मे नकारात्मक शक्तिक कोनो गिनती नहि कैल जायत। अनिल झा केर उर्जा केँ आ काज करबाक प्रतिबद्धताकेँ आत्मसात करैत ओ एहि मुहिम मे आजन्म आगाँ रहबाक सेहो वचन देलनि। समाजक हर वर्गक लोक केँ आगू आबि मिथिलांचल महासभाक उद्देश्यक संग डेग बढेबाक आह्वान सेहो केलनि। कानपुर मैथिली, मिथिला आ मैथिल लेल सदैव तत्पर रहत आ कानपुरक हरेक समाज संग सहकार्य करैत एहि ठामक विकासक संग मूल मिथिला लेल सदैव अग्रगामी भूमिकाक निर्वाह करत।
      आयोजक संस्था मिथिलांचल महासभाक अध्यक्ष श्री अमित झा द्वारा आगन्तुक अतिथि तथा समस्त सहभागी सभासद लोकनिकेँ हृदय सँ आभार प्रकट करैत धन्यवाद ज्ञापन केलनि। अपन संछिप्त संबोधन मे कानपुरक आयोजन बहुत कम समय मे एतेक गंभीर होयबाक सत्यकेँ साक्षात् दर्शन कय आह्लादित हेबाक बात कहलनि। तदोपरान्त सभाध्यक्षक आदेश सँ महाकवि विद्यापतिक स्मृति करैत प्रवीण नारायण द्वारा 'उगना रे मोर कतय गेलाह' आ 'कहल सुनल सब क्षेमा करियौ यौ बैद्यनाथ' गाबि संपूर्ण दर्शक-श्रोताकेँ भाव-विभोर बनायल गेल।
 
    मैथिली महायात्राक कार्यक्रमक संग रक्तदान कैम्प मे लगभग ४० गोटा अपन रक्तदान केलनि। रोटरी क्लब अफ कानपुर केर सेहो सक्रिय सदस्य तथा ऐगला सत्रक अपेक्षित अध्यक्ष मिथिलांचल महासभाक अध्यक्ष अमित झा केर सृजनशील प्रयास सँ एहि महान मानवीय कार्यकेँ निष्पादन कैल गेल। कार्यक्रम मे लगभग ५ बजे अत्यन्त गरिमामयि उपस्थितिक संग डा. मुरली मनोहर जोशी द्वारा कार्यक्रम सराहना कैल गेल, ५ जनबरी हुनक जन्मदिनक उपलक्ष्य आयोजित कार्यक्रम मे सेहो मिथिलांचल महासभाक उपस्थिति लेल आमंत्रणाक संग मैथिली भाषा जेना संविधान मे हुनक दल भारतीय जनता पार्टी स्थापित केलक तहिना मिथिला राज्य केँ सेहो स्थापित करबे करत। एहि लेल विशेष कार्यदल द्वारा समुचित गृहकार्य कैल जा रहल रहस्य सेहो प्रकट कैल गेल। समस्त अभियानी केँ अपना संगे सोफा पर बैसाय फोटो सेशनक संग बेर-बेर डा. जोशी द्वारा मैथिली-मिथिला प्रति शुभकामना संदेश देल गेल। भविष्य मे सेहो मिथिलांचल महासभा एहेन गौरवपूर्ण कार्यक्रम करैत रहबाक अपेक्षा रखैत सभा सँ विदाइ लेलनि।
        आगन्तुक अतिथि लोकनि केँ जहिना आरंभ मे पाग, बैज आ माला सँ सम्मान कैल गेलनि, तहिना अन्त मे 'मिथिलांचल महासभा अंकित स्मृति चिह्न'क संग दोपटा दऽ के अनन्तकाल धरि आयोजित मैथिली-महायात्रा-कानपुर केँ मोन राखबाक अनुपम संदेश देल गेल। कार्यक्रमक अन्त एक भव्य सहभोज सँ भेल। समस्त श्रोता-दर्शक आ आगन्तुक अतिथि लोकनि एक संगे मिथिलाक पारंपरिक शैली मे भोजक रसास्वादन करैत सभाक समापन कैल गेल।
 प्रवीण नारायण चौधरी
कानपुर उत्तर प्रदेश  

गुरुवार, 1 जनवरी 2015

नव वर्ष २०१५ केर हार्दिक मंगल कामना


लिखा गेल २०१५ ई काल केर कपाल पर !
आउ नव संकल्प ली, एहि नवका साल पर !

जाति-धर्मक भेद नहि, जन-जनमे प्रीत हो,
विश्व भरिक मंच पर ,बस शांति केर गीत हो,

गमकेत गुलाल लगय, ब्रह्माण्ड केर गाल पर !
आउ नव संकल्प ली, एहि नवका साल पर !

अश्लीलताक अंत हो, बचा ली हम संस्कृति,
समाज सं हटा दियौ, एकहक टा विकृति,

पराती केर मीठ धुन बजय सुर आ ताल पर !
आउ नव संकल्प ली, एहि नवका साल पर !

मैथिली बाजयमे ककरो नहि कनिको लाज हो,
गाम-घर-प्रवास धरि माटिए लेल काज हो,

किसलय शुभकामना एहि अंतर जाल पर !
आउ नव संकल्प ली, एहि नवका साल पर !

Kislay Krishna
 .नव वर्ष २०१५ केर हार्दिक मंगल कामना..

सोमवार, 29 दिसंबर 2014

दहेज मुक्त मिथिला मुंबई-

28 दिसम्बर -२०१४    दहेज मुक्त मिथिला मुंबई-
द्वारा आयोजित 'मिथिला महोत्सव' २८ दिसम्बर भारतक आर्थिक राजधानी मुंबई मे भव्यतापूर्वक समापन भेल। एहि कार्यक्रमक विधिवत् उद्घाटन पंडित राजेन्द्र झा तथा कृष्ण कुमार झा 'अन्वेषक' केर वेदपाठ आ स्वस्तिवाचन सँ प्रारंभ कैल गेल। तदोपरान्त रश्मि प्रिया द्वारा विद्यापतिरचित गोसाउनि गीत 'जय जय भैरवि' केर गान सँ प्रारंभ कार्यक्रम मे एक सँ बढि कय एक प्रस्तुति परसल गेल। माधव राय, मनुवा ठाकुर, ज्ञानेश्वर दुबे, सुरेशानन्द, रश्मि प्रिया, प्रीति सुमन, पूजा झा - हिनका लोकनि द्वारा एक सँ बढिकय एक दहेज पर आधारित लोकगीत, विद्यापति गीत आ मिथिला महिमागान कैल गेल। भाइ माधव राय द्वारा उगना रे मोर कतय गेलाह आ ज्ञानेश्वर दुबे केर आजु नाथ एक व्रत महासुख लागत हे आ फेर सुरेशानन्द केर हे हर हमर करहु प्रतिपाला सहित अनेकानेक शिव ओ शक्ति केर आराधना जे मिथिलाक खास विशेषता अछि तेकर प्रस्तुति सँ हर मैथिली कार्यक्रम मे स्वयं महादेव आ गौरीक संग मिथिलाक पाहुन राम आ धिया सिया सब कियो आह्लादित भेलाह। उपस्थित जनमानस केर बाते कि कैल जाय जखन स्वयं आराध्यदेव आह्लादित होइथ। कार्यक्रमक भव्यता पर विमल जी मिश्र बस एतबी कहैत छथि "जे एकर वर्णन शब्द मे संभव नहि अछि'। पंकज झा, संयोजक व दहेज मुक्त मिथिलाक राष्ट्रीय अध्यक्ष कहैत छथि "समयक पाबंदी सजा बुझाइत छल - कार्यक्रमक भव्यताक शिखर-शोभा कि कहू"। राजेश राय केर शब्द अछि "बस भाइजी, अहीं टा के कमी छल, बाकी कार्यक्रम तऽ लाजबाब भेल।
   एहि अवसर पर दहेज मुक्त मिथिला अभियान लेल खास रूप सँ नवीन मिश्रा द्वारा तैयार कैल गेल एक डक्युमेन्ट्री फिल्म केर प्रदर्शन सेहो कैल गेल। दहेज समाजक केहेन कूरीति अछि, एहि कूरीतिकेँ लोक जानि-बुझि कोना प्रश्रय दय रहल अछि, एकरा सँ समाजकेँ निजात दियेबा लेल अभियानक दिशा ओ दशा केहेन अछि, एहि मे आमजनक सहभागिता कोन तरहें कैल जाय.. इत्यादि विषय पर समेटल बात राखैत एहि डक्युमेन्ट्री सँ उपस्थित सब कियो एतेक प्रभावित भेला जेकर परिणामस्वरूप उपस्थित हजारों लोकक भीड़ सँ युवाक आवाज आबय लागल जे हम सब संकल्पित छी दहेज मुक्त मिथिला लेल, माँगरूपी दहेजक प्रतिकार करबा मे हम सब एहि अभियानक संग छी। मिथिला तखनहि स्वच्छ आ सुन्दर बनत जखन स्वेच्छाचारिताक बढाबा देल जाय। एहेन सांगीतिक समागम जाहि मे वैचारिक क्रान्ति हो, यैह तऽ मूल उद्देश्य रहैक एहि भव्य कार्यक्रमक। आ अभियानक सफलता लेल जतय मुंबई केर समस्त मैथिल सितारा लोकनि उपस्थित भऽ जाइथ तऽ फेर कल्पना कैल जा सकैत छैक जे समागम कतेक महान ओ गंभीर छल। उल्लेखनीय अछि जे सब सितारा 'राजीव सिंह (गजरा), राहुल सिन्हा, फूल सिंह, मनोज झा, नविन मिश्र, डा. अभय झा, संजीव पूनम मिश्र, गौरव झा, ज्ञानेश्वर दुबे' स्वस्फूर्त दहेज मुक्त मिथिला अभियानक सफलता लेल आगाँ आबि एहि कार्यक्रम मे भाग लेलनि आ संदेश देलनि जे घर-घर एहि अभियानक संदेश केँ पहुँचाबय मे ओ सब सदिखन संग छथि। ओना तऽ एहि कार्यक्रम मे उपस्थिति बहुतो लोकक होइत मुदा उत्तर भारत मे कड़क ढंढक चलते बाहरी उपस्थिति कम भऽ सकल, धरि दिल्ली सँ विमल जी मिश्र अपन वचन केँ निर्वाह करैत एहि कार्यक्रम मे महत्त्वपूर्ण सहभागिता प्रदान केलैन, आयोजक समिति आभार सहित धन्यवाद प्रकट कयलनि एहि लेल।
      कलाकार, फिल्मी सितारा, गायक, विद्वान्,समाजिकनेतृत्वकर्ता अभियानी आ खास कय आयोजक संस्थाक समस्त समर्पित युवा-शक्ति - सबहक समर्पण सँ सुव्यवस्थित एहि ऐतिहासिक विश्वस्तरीय कार्यक्रम आयोजन मे संचालक किसलय कृष्ण अपन प्रखर ओ ओजपूर्ण संचालन सँ मंच केँ एहि तरहें बान्हिकय प्रस्तुति सब करैत रहलाह जाहि मे प्रमुख अतिथि डा. बुद्धिनाथ मिश्र केँ सीधे मंच पर सम्मान कार्यक्रम मे आमंत्रित करबाक अवसर भेटल आ हुनक मुखारविन्द सँ संबोधन भेल जे 'दहेज सँ समाज प्रभावित अछि, निवारण आवश्यक'। तहिना अतिथि लोकनिक सम्मानक क्रम निरंतरता मे रखैत मंच पर सांसद गोपाल सेठी द्वारा कहल गेल जे 'दहेज सब समाजकेँ प्रभावित कय रहल अछि, तैँ एकरा समाप्त करू आ बेटा-बेटी केर समानरूप सँ शिक्षित करू'। एहि कार्यक्रमक विशिष्ट आमंत्रित अतिथि दिल्ली सँ आयल अखिल भारतीय मिथिला संघ केर अध्यक्ष श्री विजय चन्द्र झा केँ मंच सँ सम्मान करैत हुनक मुखारविन्द सँ संबोधन भेल जे 'एक समय दहेज उन्मुलन लेल बैजु बाबु संग सौराठ सँ कार्यक्रम प्रारंभ केने रही, ओकरे नवरूप दहेज मुक्त मिथिला केर कार्य प्रशंसनीय अछि'। स्थानीय विधायक प्रकाश सुर्वे सेहो मंच द्वारा सम्मानित होइत अपन उद्गार प्रकट केला जे 'दहेजक लोभी केर सामाजिक बहिष्कार कैल जाय'। संस्थाक संरक्षक पंडित धर्मानन्द झा सेहो सम्मानित भेला उपरान्त अपन संबोधन मे कहलनि जे 'हम जाहि वचन मे अपना केँ बन्हलहुँ तेकरा अपन बेटीक विवाह सँ पूरा केलहुँ, आगाँ दुइ-दुइ पुत्रधनक पिता रहैत एहि वचनकेँ निर्वाह करबाक लेल प्रतिबद्ध छी'। समयाभाव मे बहुते रास वक्ताकेँ मौका नहि भेटलनि, दयानन्द झा द्वारा सेहो संछिप्त संबोधन मे कहल गेल जे 'सामाजिक विकास लेल दहेज परित्याग करबाक जरुरत अछि'।   अन्त मे एहि सुन्दर आयोजन लेल दहेज मुक्त मिथिलाक समस्त मुंबई कार्यकारिणी केँ समुचित सराहनाक संग अध्यक्ष पंकज झा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन करैत अभियान संग निरंतर सहयोग करैत 'दहेज मुक्त मिथिला' निर्माण हेतु सबहक संग पेबाक आह्वान कैल गेल। विदित हो जे ई अभियान फेसबुक सँ शुरु होइत आइ ग्लोबल बनि गेल अछि आ हर मैथिलक संग अन्य-अन्य सहयात्रीवर्ग मे विषय प्रवेश करैत क्रान्ति-आमंत्रण भऽ रहल अछि। एहि आयोजना केँ फेसबुक सँ लाइव फेसबुकास्ट सेहो कैल गेल। कैमरा आ मैसेज द्वारा नियंत्रित समस्त कार्यक्रम केँ स्लट-वाइज फेसबुक पर प्रसारण कैल गेल जाहि मे आयोजन पक्षक धर्मेन्द्र झा, राजेश राय आ राधेश्याम खाँ चुनचुनक संग हम प्रवीण समस्त पोस्ट केँ मैनेज कय रहल छलहुँ। ई आयोजन केँ एहेन कहल जा सकैत छैक जे 'न भूतो न भविष्यति'।  
   बिना कोनो भेद भाव कें एहेन कार्यक्रम, पहिल बेर देखल गेल की,जाहि में मुम्बई कें सांसद विधायक आ अनेकानेक संगठन सबहक कार्यकर्ता,बुद्धिजीबी सब कें सब इक्कठा भऽ कें एक सुर में,बिना कोनो राजनीति कें, दहेज मुक्त मिथिला' अभियानक प्रशंशा केलक आ बाजल जे देश समाज कें लेल,शुरु कएल गेल "दहेज मुक्त अभियान" सब सँ उत्तम कार्य अछि । एहेऩ सुन्दर भव्य आयोजन कें परिकल्पना में श्री प्रविण नारयण चौधरी जी कें दूर दृष्टि,दिव्य विचार धारा, अमुल्य परिश्रम सर्वविदित अछि । पं.श्री धर्मन्नद जी आ पंकज जी कें कार्य दछ्ता अतुलनिय अछि । एक कृष्ण अछि तऽ दोसर अर्जुन,किनका सारथि कहि किनका महारथि कहि । एक सँ बढि कें एक,दिग्गज रथि सब कें संग,दानव रुपि दहेज कें दमन करबाक लेल,वचन आ कर्म रूपि अस्त्र -शस्त्र सँ सुसज्ति भऽ कें महायुद्ध जितबाक लेल प्रतिबद्ध । पितामह भिष्म कें सदृश शोभायमान,श्री विजय चन्द्र झा जी, मिथिलाक कुरीति कें समाप्त करबाक लेल महारथि सब कें अन्दर जोश क संचार करैत छलाह । बुद्धि नाथ मिश्र जी,एहि महाभारतक व्युह रचना भेदन पर,अपन अमोघ दृष्टांत सँ अवगत करा रहल छलाह । पं.श्री धर्मानन्द जीक आतिथ्य आ पंकज जीक सेवा भाव सँ अभिभुत छी । अद्वितय स्वभाव आ हृदयस्पर्शि बिचारधाराक गंगा बहैत पहिल बेर देखबाक सौभाग्य मिलल । धन्य हमर मिथिला,धन्य हमर मैथिल । हम किएक नहि गर्व करब । पुर्व जन्मक कोनो सतकर्मक फल थीक जे एतेक नीक कार्यक्रम में,पं.श्री धर्मानन्द जी आ पंकज जी कें संग भ्राति स्नेहक दुर्लभ खजाना मिलल  जय मिथिला जय मैथिल ।

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014

श्रद्धांजलि ( स्वर्गीय श्री शैलेन्द्र मिश्र भाइके )

श्रद्धांजलि ( स्वर्गीय श्री  शैलेन्द्र मिश्र भाइके )
M  S अपार्टमेंट  सिविल  सर्विस  ऑफ़िसर कलव  के जी  मार्ग देल्ही
२१ दिसम्बर २०१४ 
 
१६ दिसम्बर  २०१४  के  शैलेन्द्र  मिश्र  बिमारी सं ग्रषित  के  कारन  मात्र  - ५२ वर्ष के अवस्था  में  स्वर्गवशी  भगेलहा , हुनक श्रद्धांजलि  देबाक लेल  मिथिला कला मंच आ सुगति - सोपान  के  सानिंध्य  में श्री मति - कुमकुम झा   और  A -वन फिल्ल्म  इंडिस्ट्री    के  संचालक  सुनील झा पवन के अगुवाई  में  विभिन्  प्रकार के डेल्ही   एन सी आर  में  जतेक  भी संस्था  अच्छी  हुनका  सब  के  समक्ष  शैलेन्द्र  मिश्रा नामक  बल्ड  बैंक  के योजना  बनबै  के  मार्गसं अविगत  केला ।  जे  गति शैलेद्र  भाई , हेमकान्त  झा , अंशुमाला झा  के  संग  भेल ।  ओहि विपप्ति  सं  दोसर किनको  नै  गुजरै परैं ।  कियाक  नै  हम  सब  मिल  एकटा  एहन  काज  करी  जाहिसं  मैथिलि कला मंच के हित  में राखी  हुनका  लेल  किछु  राशि निवित  राखल  जय और  ओहि  राशि  के  शैलेन्द्र  भाई  एहन  लोक  लेल  जरुरत  परला पर  मैथिल कला मंच  काम  आबैथि  ।
      
       ब्लड  बैंक के  जिम्बारी  डॉक्टर  विद्यानन्द  ठाकुर  आ  ममता  ठाकुर  जी  स्वीकार  करैत  अपन  मार्ग   सं  सब  के  अबगति  करेला ।   ओतय  दहेज़  मुक्त  मिथिला   डेल्ही  प्रभाड़ी  मदन कुमार  ठाकुर   सेहो   अप्पन  जिम्मेबारी  के  निर्वाह  करैत  डी म म  के  पूर्ण सहयोग  के  अस्वाशन  देला  ।

         आखिर मिथिला कला मंच सन  पिछरल  कियाक ? से  मैलोरंग  के  समस्त  टीमसं जानकारी  और   रहस्य मय  बात के  पूर्ण  सहयोग भेटल ।   मैथिल  कला  रंगकर्मी सं  जे  भी  जुरल  छथि  हुंकर  जिनगी  कोनो  खास  नै  कहल  जय  ओहिसं जिनगी के गुजर - वसर  नै  कैइयल जा  सकइत  अच्छी ।  ताहि  हेतु  भारत  सरकार  से  उचित न्याय  के  मांग  कइल जैय ।

        एवं प्रकारे   सेकड़ो  के  संख्या   में आवि  भाई  शैलेन्द्र के  श्रद्धांजलि  दय  प्रणाम  करैत  हुनक  आत्मा के  शांति  प्रदान  होयक  लेल   गयत्री  मन्त्र  के  उच्चारण  करैत   २ मिनट  के  मोन धारण  कइल  गेल  ।

   शैलेन्द्र  भाई  के  गुजरालसं खास के  कला और  साहित्य  दुनू  में  बहुत  नुकसान  अच्छी ।   कही  नै  सकैत  छी  कतेको   शैलेन्द्र भाई  के  चेला  रंग कर्मी  कला  मंच  सं पाछू छुटी गेला ।  मिथिला  मैथिलि के प्रति  हुनक  एकटा  बस  अवाज  बानी  रही  गेल --
 हे  मिथिला  अहाँ  मरैय  सन  पहिने  हम  मरीय   जय    

गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

मिथिला महोत्सव - २०१४

मिथिला महोत्सव - २०१४
दहेज़ मुक्त  मिथिला  के  सानिध्य में  - 28  दिसम्बर - 2014  के  देहिसर  मुंबई में   मिथिला  मोहोसव के  आयोजन  होबय जा रहल  अच्छी ,  जाहि  में  अपनेक समस्त परिवार के  उपस्थिति  अनिवार्य  अच्छी  ,  दहेज़  खास क मिथिला  में एकटा  बहुत  पैघ समस्या अच्छी , जाहि  के  निवारण  हेतु , दहेज़ मुक्त मिथिला  परिवार  अपन  कर्तव्  के  पालन  करैत  बेर - बेर  देल्ही  आ   मुंबईटा  नै पूरा विस्व  में  दहेज़ समस्या के  खत्म  कराय  में  लागल  अच्छी , चाहे  नेपाल  सन  करुणा  झा  होयत या प्रवीण जी   आई  तक  अपन  कर्तवय  सं  पाछू  नै हैट पोलैथि  ,  ओहे जिम्बारी के  पालन  करैक  लेल  दहेज़ मुक्त  मिथिला  अध्यक्ष , पंकज झा (मुम्बई ) आ संरक्ष   पंडित  श्री  धर्मनद  झा  , संजय मिश्र  इतियादी  अनेको  भी  सहयोगी शामिल  छैथि , हुनक  अभिलाषा  कइ  पूरा  करैक  लेल  अपनेक  सहयोग  अनिवार्य  अच्छी  । 

याद रखाब - 28 दिसम्बर - २०१४  रवि  दिन 
जय मैथिल जय  मिथिला 

शुक्रवार, 7 नवंबर 2014

शामा- चकेवा मोहत्सव शिव शक्ति सोसाएटी के द्वारा नॉएडा -

शामा- चकेवा  मोहत्सव  शिव शक्ति सोसाएटी के  द्वारा   नॉएडा -
   
      लगातार सात वर्ष से कार्य - कर्म   के  पालन  करैयत शिव  शक्ति   सोसाईटी  फेर एक  बेर  अपन ज़ीमेबरी  के  निर्वाह करैयत   नॉएडा सेक्टर 71 मे  समा - चकेवा पर्व  मोह्होत्सव के  आयोजन विश्मभर ठाकुर  के  अध्यक्छता मे सम्पनय भेल  , जाहि में  मुखय अतिथि  संसद श्री महेश शर्मा  आ विधायक  बिमला नाथन के कर कमाल द्वारा दीप प्रज़ोलित करैत सभा के मनोरंजनक दिस  इसारा करैत   किसलय कृष्ण जी के माइक सुपूर्ति  कइल  गेलन  –

      मंच के  संचालन क्रिसलय कृष्ण जी करैयत सुनील झा पवन , हरीनाथ झा , रिचा ठाकुर , निशा झा , संगीता तिवारी ,कोसल किशोर  अनिल अकेला , जी के सानिध्य में  रंगा रंग कार्य करम - चालू  भेल - निशा  झा  के  समां -चकेव गीत सुनी  दर्शाक  खास क मई - बहिन  बहुत  रास  आनंद  उठेली ,

ओहिना  रिचा  ठाकुर  के  स्वमधुर सं निकलल समां चकेवा के  गीत  होय  या  भगवती  बंदना , श्रोता सुनी मन्त्र - मुग्ध  भगेला , तहिना सुनील जी के अहा - अहा- की  कहु कोना के  तुटलो मोती के हार , आ हैए तुमोल वाली  हे ये सुपौल वाली , एतेक  दर्शक  उत्साहित भेलाह  वर्णन  नै  क सकैत  छी ।  कहावत  कोनो खराप  नै  छैक  जनम  यदि  ली त  मिथिलेटा  में  ली  से हरिनाथ झा सावित केला १०३डिग्री बोखार रहैत  मंच पर ऐला , जेना लागल  जे  गामक हवा  संगे  लेक  ऑयल  छैथ - हेगै  बुधनी माय --- चल गए बच्ची गाम पर ---  जातेय   देखे  छी  ततय  बिहार -- सुनिक  दर्शक लोकनि  लोट  पोट भगेला ,


   संगीत मनोरंजन  समापन के  बाद  - मिथिला मैथिलिक मौलिक अधिकार भारतीय संघ  द्वारा , 
तकर  कलस यात्रा  जे १३ सेप्टेम्बर  २०१४ के साईं करुणा धाम सं सुरुवात  कइल गेल छल , ओहि  कलस  यत्रा  के  सुनील झा पवन जनजागरण  हेतु भर  उठेने छाला ओ भार मदन कुमार ठाकुर (विद्यापति गौरव मंच)  विद्यापति कालोनी जलपुरा ग्रेटर नॉएडा निवसी के सोपल गेलानिं  

सोमवार, 3 नवंबर 2014

देवोत्थान अर्थात देवता के जगेबाय वाला तिथि :


देवोत्थान अर्थात देवता के जगेबाय वाला तिथि :
जे कियो एकादशी तिथि के भगवान विष्णुक पूजन अभिवंदन करैत छथि ओ समस्त दुख सौं मुक्त भs जन्म मरण के बंधन सौं मुक्त भs जैत छथि।
आई देवोत्थान एकादशी अछि ।
आई चारि मासक बाद भगवान् नींद सौं उठताह, तदर्थ अपने सभक हेतु भगवानकेँ उठेबाक मंत्र :-
ऊँ ब्रह्मेन्द्र रुद्रैरभिवन्द्यमानो भवान ऋषिर्वन्दितवन्दनीय:।
प्राप्तां तवेयं किल कौमुदाख्या जागृष्व-जागृष्व च लोकनाथ।।
मेघागता निर्मल पूर्ण चन्द्र: शरद्यपुष्पाणि मानोहराणि।
अहं ददानीति च पुण्यहेतोर्जागृष्व च लोकनाथ।।
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द! त्यज निद्रां जगत्पते।
त्वया चोत्थीयमानेन उत्थितं भुवनत्रयम्
विष्णु पुराणक अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी के हरिशयनी एकादशी कहल जैत अछि। अहि दिन भगवान विष्णु चारि मासक लेल क्षीरसागर में शयन करबाक लेल चैल जैत अछि।
चारि मासक बाद भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी के जगैत छथि।
ताही कारणे कार्तिक एकादशी के देवोत्थान अर्थात देवता के जगेबाय वाला तिथि के रूप में मानेबाक प्रचलन पौराणिक काल सौं अछि।
अहि एकादशी के तुलसी एकादश सेहो कहल जैत अछि।
अहि दिन तुलसी विवाहक सेहो आयोजन कयल जैत अछि।
आजूक दिन तुलसी जी केर विवाह शालिग्राम सौं कराओल जैत अछि ।
मान्यता अछि कि अहि तरहक के आयोजन सौं सौभाग्यक प्राप्ति होइट अछि ।
एहेन मान्यता अछि कि तुलसी शालिग्रामक विवाह करेला सौं ओहने पुण्य प्राप्त होइट अछि जे माता-पिता अपन पुत्रीक कन्यादान कs पबैत छथि ।
अहि वर्ष ई एकादशी 3 नवम्बर 2014 के दिन अछि।
एक गोट पौराणिक कथा अनुसार भगवान विष्णु भाद्रपद मासक शुक्ल एकादशी के महापराक्रमी शंखासुर नामक राक्षसक संहार विशाल युद्धक बाद समाप्त केने छलाह तs थकावट दूर करबाक हेतु क्षीरसागर में जाs सुइत रहलाह आ चारि मासक पश्चात फेर जखन ओ उठलाह तs ओ दिन देवोत्थनी एकादशी कहायल।
अहि दिन भगवान विष्णुक सपत्नीक आह्वान कय विधि विधान सौं पूजन करबाक चाही। अहि दिन उपवास करबाक विशेष महत्व अछि ।
अग्नि पुराण के अनुसार अहि एकादशी तिथि के उपवास बुद्धिमान, शांति प्रदाता व संततिदायक होइत अछि ।
विष्णुपुराण में कहल गेल अछि कि कोनो कारण सौं चाहे लोभ के वशीभूत भs, चाहे मोह के वशीभूत भs जे कियो एकादशी तिथि के भगवान विष्णुक पूजन अभिवंदन करैत छथि ओ समस्त दुख सौं मुक्त भs जन्म मरण के बंधन सौं मुक्त भs जैत छथि।
ओतहि सनत कुमार अहि एकादशीक महत्त्ता केर वर्णन करैत लीखैत छथि कि जे व्यक्ति एकादशी व्रत या स्तुति नहीं करैत छथि ओ नरकक भोगी होइत छथि। महर्षि कात्यायन के अनुसार जे व्यक्ति संतति, सुख सम्पदा, धन धान्य व मुक्ति चाहैत छथि हुनका देवोत्थनी एकादशी के दिन विष्णु स्तुति, शालिग्राम व तुलसी महिमा के पाठ व व्रत रखबाक चाही।
भागवतपुराणक अनुसार विष्णु केर शयन कालक चारि माह में मांगलिक कार्यक आयोजन निषेध होइत अछि।
शास्त्रोंक अनुसार श्रीहरि विष्णु अहि समय क्षीरसागर में शयन अवस्था में रहैत छथि तथा पृथ्वी अहि काल में रजस्वला रहैत अछि ।


Santosh Jha

शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2014

मिथिलाक लोकपर्व सामा चकेवा

मिथिलाक लोकपर्व सामा चकेवा
   
         छठि के भोरका अर्घ्य के दिन सं अपन मिथिला मे एकटा पावनि मनाएल जाएत अछि सामा-चकेवा. सामा-चकेबा के अहां मिथिलांचल के एकटा खास लोकपर्व कहि सकैत छी. सामा-चकेवा अहां के आओर दोसर ठाम देखय लेल नहि मिलत.

       बच्चा मे गाम मे बहिन सभ के सामा-चकेवा पावनि के मनाबैत देखैत छलहुं. एकरा अहां सामा-चकेवा खेलैत सेहो कहि सकय छी. ओना त ई पावनि लड़की-महिला सभ के अछि… मुदा बच्चा मे ओहि मे हमहुं सभ शामिल भs जाएत छलहुं.

सामा चकेबा भाई-बहिनक प्रेमक पावनि अछि. अहि मे सामा-चकेवा… सतभइया… बृंदावन… चुगला… ढोलिया बजनिया… वन तितिर … पंडित आओर दोसर मूर्ति खिलौना सं खेलल जाइत अछि… सन स बनल चुगला के जलायल जाइत अछि… सामा चकेवा भोरका छठि के शुरू भs कार्तिक पूर्णिमा के दिन तक खेलल जाएत अछि आओर विसर्जन करि देल जाइत अछि
.
सामा चकेवा के बारे मे कहल जाइत अछि जे सामा भगवान श्रीकृष्ण के पुत्री श्यामा छलीह. ओ अपन पिताक शाप के कारण चिड़य बनि गेल छलीह. कहल जाइत अछि जे भगवान श्रीकृष्णजी के बेटी श्यामा… सामा के जंगल में खेलय के शौक छलन्हि… अपन एहि प्रकृति सं जुड़ल रहय के शौक… फूल पत्ती… पक्षी सं खेलय के शौक के लेल ओ हर दिन पौ फूटतहिं जंगल दिस चलि जाइत छलीह. सामा के प्रकृति सं जुड़य… गाछ-बृक्ष… पशु-पक्षी सं खेलय के ई बात चुगला…चूड़क के नीक नहि लागल. ओ श्रीकृष्णजी के पास जा क सामा के बारे मे उल्टा पुल्टा बात बता देलक. एहि पर खिसियाक भगवान कृष्ण सामा के चिड़य बनि जाइ के शाप दs देलथिन्ह. जेहि सं सामा चिड़य बनि गेलीह.


जखन एहि बातक पता सामा के भाई के लगलन्हि. त ओ अपन बहिन के शाप सं मुक्त करय आ वापस लाबय लेल लगि गेलाह. ओ तप करय लगलाह. हारि कs भगवान के कहय पड़लन्हि जे कार्तिक मास के अहांक बहिन अयताह आओर पूर्णिमा के दिन विदा भय जएताह. ताहि दिन सं भाई- बहिनक प्रेमक.. स्नेहक ई पावनि… सामा चकेबा के रूप में मनावल जाइत अछि.


एहि पावनि मे सामा-चकेवा के मूर्ति लs क आठों दिन सामा चकेवा खेलल जाएत अछि. एहि मे एकटा आओर बात अछि जे ई शाम के बाद खेलल जाएत अछि. सामा चकेवा के गीत गाएल जाएत अछि.

Amit Chaudhary