(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

बुधवार, 5 मई 2010

शंकर - पार्वती जी के मूर्ति भेटल


लोग कहैत अछि अबक समय में धर्म - कर्म सब धीरे- धीर निप्टल जायत अछि , मुद्दा हम एखनो देखैत छिक गाम - घर में पूजा - पाठ एखनो धरी सर्बोपारित अछि , चाहे रौदिक अकाली होय या बढिक दाहर ओहिमे अपन कर्म पूजा पाठ के चलन जरी राखैत छैथि ,

देखू ने एखनो कलना (हरलाखी , मधुबनी ) नामक गांव गाम में , भिसन गरमी आ सुखार के कारने दामेस्वरी पोखैर के साफ - सुतरा आ खूनेय के कल में सोमदिन भगवान शंकर - पार्वती के आलिंगन मुद्रा में अति प्राचीन आकार्सक मूर्ति भेटल अहि मूर्ति के देखय आ पूजा करैक लेल हजारो के संख्यां में लोगक भीड़ उमैरी गेल ,
मूर्ति देखेक में अति सुन्दर लागैत अछि , प्रतिमा के निचला भाग में बसहा आ पार्वती मूर्ति के निचिका भाग में सिंह क मूर्ति सेहो सामिल अछि , ई पोखैर भिसन गरमी के कारने बिलकू सुखा गेल छल जहि के चलती गाम - घरक लोग सब अहि पोखैर में से मैट कैट के अपन घर अगना के भरैत छल ,
आखिर सत्य अछि ताहि दुवारे धर्म के सर्वब्याप्त रहै के लेल समय -समय पर धर्म के समाबेस होयत रहैत अछि --
अहि दुवारे कहल गेल अछि ---
सतेयन धारिते पृथ्वी सतेयें तपते रवि
सतेयं वती बयुस्यच सर्वम सत्यम परितिठितम

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