(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

सोमवार, 19 सितंबर 2011

जितिया व्रत कथा एहि प्रकारे अछि -

            जितिया व्रत कथा एहि प्रकारे अछि -
एक दिन कैलाशक अति रमणीय शिखरपर बैसि पार्वती शंकर जी सँ प्रश्न कयलनि जे कोन व्रत वा तपस्या छैक जकरा कयला सँ सौभाग्यवती स्त्रीक सन्तान जीवित रहतैक तकर उत्तर शंकर जी देलनि- आसीन कृष्ण अष्टमी तिथि कऽ यदि स्त्रीगण लोकनि पुत्रक कामनासँ शालिवाहन राजाक पुत्र जिमूतवाहनक कुशक प्रतिमा बना कलशक जल मे स्थापना तकरा खूब सुसज्जित कऽ नजदीक मे एक खाधि खुनि पोखरि निर्माण कऽ ओकर मोहार पर एक गोट पाकड़िक ठाढ़ि रोपि, ठाढ़िक ऊपर मे गोबर माटिक चिल्होड़िक निर्माण कऽ राखथि नीचा मे गीदरनीक आकृति बनाय राखि देथि दुनूक माथ पर सिन्दूर पिठार लगाय फूल माला सँ युक्त भऽ धूप-दीप नैवेद्य लऽ बाँसक पात पर पूजा कयलासँ पुत्रक जतेक जे ग्रह चक्र रहैब अछि ताहि सँ मुक्ति भेटैत छैक ओकर बंशक वृद्धि होइत छैक संग-संग सब मनोरथ पूरा होइत छैक
एहि पृथ्वी पर समुद्रक किनार पर नर्मदाक किनार पर दक्षिण दिशा मे कनकावती नामक एकटा गाम अछि, जाहिठाम सब तरहक सेना सँ सुसज्जित मलयकेतु नामक राजा राज्य करैत छलाह हुनके राज्य मे बहुलूटा नामक मरूभूमि छैक जकरा बिचे बाटे नर्मदा नदी बहैत छथि ओकरे किनार पर एक गोट अति विशाल पाकड़ि गाछ छल ओहि पाकड़िक धोधरि मे एकटा गिदरनी निवास करैत छलीह ठाढ़ि पर एक गोट चिल्होरनी निवास करैत छलीह बहुत दिन एक संग निवास करबाक कारणे दुनू मे बड़ गाढ़ दोस्ती छल ओहि नगरक निवास कयनिहारि महिला लोकनि ओहिगाछ लग आसीन कृष्ण अष्टमी तिथि कऽ जिमूतवाहनक पूजा कऽ कथावाचक सँ कथा सूनि अपन-अपन घर गेलीह गिदरनी चिल्होरनी सेहो व्रत केने छलीह ओहो लोकनि घर गेलीह
ओहि दिन संध्या समय मे ओहिनगर के जे नामी सेठ तकर एकमात्र पुत्रक मृत्यु भऽ गेलैक। ओकर परिजन नर्मदा कातमे आबि संस्कार दऽ घर जाइत गेलाह ओहि अष्टमी रातिमे टपाटप मेघ लागल छल हाथ-हाथ नै सुझै ओहि भयंकर अन्हार मे कखनो-कखनो बिजलौका लोकैत छलैक तकर इजोत मे ओहि मृतकक मांस देखि दिनभरिक उपासल गिदरनी तिनका धैर्य नहि राखल गेलनि। गाछपर जे निवास कयनिहरि चिल्होरनी तिनका सँ प्रश्न कयलनि कि हे बहिना जागल छह अनेक बेर गिदरनी द्वारा जिज्ञासा कयला पर चिल्हो कोनो जवाब नहि देल तहन गिदरनी सोचलनि बहिना शायद सुति रहली कैक बेर गिदरनी द्वारा जिज्ञासा एलो पर जवाब नहीं भेटला पर अपन धोधरि सँ निकलि नदी किनार पर जा ओहिठाम सँ अपन मुँहमे पानि आनि-आनि चिताके जे अग्नि तकरा मिझाओल
तखन चितामे अवशेष मांसक टुकड़ी तकरा खण्ड-खण्ड कऽ पेट भरि खेबो कयलनि अपन धोधरि मे आनि कय रखबो कयलनि गाछ पर बैसल चिल्हो हिनकर समस्त करतूत देखैत छलीह प्रातः काल गिदरनी चिल्हो सँ कहलनि सखी पारणाक चर्चा कियैक नहि करैत छी रातुक बातके जानय वला चिल्होड़ि उदास होइत उत्तर देलनि हे सखी ! पारणा करू गऽ पारणा के बेर भऽ गेल हम स्त्रीगण लोकनि द्वारा देल गेल अक्षत अंकुरीक नैवेद्य लऽ कऽ पारणा करैत छी अहूँ करु गऽ
तहन कालक्रममे प्रयागमे कुंभ लगलै संयोगसँ चिल्हो गिदरनी दुनू गोटे ओतय गेलीह ओहिठाम एक संग दुनूक मृत्यु भऽ गेल कुंभक मृत्युक कारण दुनू गोटेक जन्म वेदक ज्ञाता जे भास्कर नामक ब्राह्मण तिनका घरमे भेलनि दुनू गोटे जौँआं जन्म लेल दुनू के नामकरण भेल चिल्हो जे छलीह से जेठ भेलीह हुनकर नाम शीलावती राखल गेल गिदरनी छोट भेलीह हुनकर नाम कर्पूरावती राखल गेल दुनू गोटे जखन नमहर भेलीह कन्यादान योग्य तहन दुनू के कन्यादान भेल पैघ जे शीलावती तिनक विवाह महामत्त नामक जे धनी-मानी लोक तकरा संग छोटक विवाह मलयकेतु नामक महाराज तिनका संग
कालक्रमे कर्पूरावती गर्भवती भेलीह बच्चा जन्म लेलकनि लेकिन नहि बचलनि मरि गेलनि एहि तरहें कर्पूरावती के सात गोट पुत्र जन्म लेलकनि सातो मरि गेलनि लोकनि परम दुःखी रहैत छलीह
जेठ जे कन्या शीलावती हुनको सात टा पुत्र जन्म लेलकनि सातो जीवित छलनि शीलावती के सेहो कर्पूरावतीक सातो पुत्रक मृत्यु के देखि बड़ संताप होइत छलनि
एहि दुःख सँ कर्पूरावती जिमूतवाहन व्रतक दिन खाट पर सुतल छलीह राजा जहन गृहवासमे उपस्थित भेलाह तँ जिज्ञासा कयलनिरानी कत? तहन रानी के लगमे रहय वाली खबासीन से रानी के जाकऽ कहलक जे महाराज अहाँके तकैत छथि रानी खबासीन द्वारा सम्वाद देलनि जे कहुन गऽ जे शयनागार मे छथि तहन राजा आबि जिज्ञासा कयलनिप्रिये ! एना किऐक सुतल छीतहन जवाब देलनिसुखे सुतल छी राजा कहलनिप्रिये उठू !” ताहि पर कर्पूरावती कहलखिनअहाँ यदि हमरा संग सत्त करब तँ उठब नहि तँ नहि उठबराजा कहलनिअवश्य करब तहन रानी राजा सँ तीन बेर सत्त कराबौलनि
सत्त कयलापर कर्पूरावती ओछाओन सँ उठलीह कहलनि जे हमर जे बहिन शीलावती तकर सातो पुत्रक गरदनि कटा हमरा मँगा दिय तखन राजा पृथ्वीके ठोकैत कान धरैत कहैत छथिपापिन एहन बात अहाँ कियक बजलहुँएहि तरहें बेर-बेर कहलो पर हुनकर कोनो प्रत्युत्तर नहि सुनि हुनकर आज्ञा के स्वीकारि लेल तहन राजा कहलनि काल्हि अहाँ के सातोटा सिर अनाकऽ देब कर्पूरावती हुनकर वचन के सत्य मानि जिमूतवाहनक पूजा एल
तहन राजा अपन सत्यक रक्षा हेतु चण्डाल के बजाय आदेश देलमहामत्तक जे सातोटा पुत्र तकर गरदनि काटि कर्पूरावती के आनि दहुन प्रातः काल सातोटा मूरी आनि देलक ओकरा देखि कर्पूरावती अति प्रसन्न भेलीह
कर्पूरावती सातो मूड़ी के सात गो डाली मे पीयर कपड़ा मे बान्हि सातो पुतहुक पारणा लेल शीलावतीक ओतय पठा देलनि
शीलावती द्वारा निष्ठापूर्वक जिमूतवाहनक पूजाक सातो डाली मुँहक जे मुण्ड से ताड़क फल भऽ गेल सातो बालक जीवित भऽ गेलाह सातो अपन घोड़ा पर चढ़ि अपन घर एलाह सातो भाय स्नान-ध्यान कऽ अपन -अपन पत्नी लग पहुँचलाह तँ सातो पुतहु अपन-अपन स्वामी के मौसी द्वारा पठाओल ताड़क फल देखय देलक कहलक जे अहाँक मौसी पारणा लेल पठौलनि अछि
ओम्हर कर्पूरावती शीलावतीक सातो पुत्रक वधक शोकाकुल कानब सुनक जे आनन्द तकर प्रतिक्षा मे बैसल छलीह जहन कानब नहि सुनलनि तखन जिज्ञासा लेल पुनः दासी के पठाओल दासी ओहिठाम सँ आबि सब समाचार सुनेलक समाचार बुझि अति दुःखी भेलीह तखन राजासँ जिज्ञासा कयलनिहे महाराज ! काल्हि जे अहाँ शीलावतीक सातो बालकक सिर आनि कऽ देने रहि से ककरो दोसरक छलैक ?”
राजा उत्तर देल-“प्रिय ! अहाँक सोझामे सातो मुण्ड राखल छल तहन एहन प्रश्न किएक करैत छी
रानी ताहि पर कहलनिहमहूँ ओकरा सब के देखलियै तँ आश्चर्य भेल सब कोना जीवित भेल ?”
ताहिपर राजा कहलनिहे प्रिये ! अहाँक बहिन पूर्व जन्म मे सत-व्रतक पालन कयने छथि जकर प्रभावसँ हुनकर सातो पुत्र जीवित भय गेलनि अहाँ ओहन व्रतक पालन नहि एने छलहुँ जाहिसँ अहाँक पुत्र सब मरि-मरि गेल अहाँ दुःखी होईत गेलहुँ
राजाक मुँहसँ बात सुनि कर्पूरावती गुम भऽ ठाढ़ि रहलीह अगिला बर्ष जिमूतवाहन जाहि दिन छलैक ओहिदिन अपना दासी के पठेलखिन महामत्तक जे स्त्री शीलावती तिनका ओहिठाम जाकऽ हुनका कहलनि जे रानी कहलनि अछि जे जे दुनू गोटे एके संग पूजा करब कथा सूनब
तकर उत्तर शीलावती देलनि जे कर्पूरावती महारानी छथि हुनका सँ पूजा करब कथा सूनब संभव नहि छनि
दासी ओहिठाम आबि रानी के कहलनि ताहि पर कर्पूरावती कहलखीन हुनका सातटा बालक छनि तकर गुमान छनि प्रातः काल संग-संग पारणा करक लेल दासीकेँ पठेलनि दासी पुनः आबि कहलकनि कहलनि जे हम दुनू गोटे एक संग पारणा नहि सकैत छी
सुनि जेना रानी के देहमे आगि लागि गेलनि खरखरिया मंगा पारणा के जावन्तो समान लय शीलावतीक ओहिठाम पहुँचलीह ओहिठाम पहुँचलापर पानि पैर धो आसन पर बैसा तखन पुछलखिनअहाँ एहिठाम कोना पहुँचलहुँ ?” तकर उत्तर कर्पूरावती देलनि हम अहाँ संग मिलि कऽ पारणा करब
तकर जवाब शीलावती देलनिहम अहाँ संग एकठाम पारण नहि करब अहाँ राजाक जे राजभोग से करू आबो दुष्टताक त्याग करू
कर्पूरावती तैयो थेथर जकाँ कहलथिन-“ हम अहाँ संग मिलिये कऽ पारण करब
शीलावती सुनि जे आब मानयवाली नहीं अछि, पारणाक ओरिओन मे लागि गेलीह कहलनि जे आब अहाँ हमरा संग मिलि अवश्य पारण करू
तखन शीलावती कर्पूरावती के कहलनि जे पहिने अहाँ हमरा संग नर्मदा तट पर चलू दुनू गोटे ओहिठामसँ जा नर्मदा मे स्नान कयलनि स्नानोपरांत शीलावती कर्पूरावतीसँ प्रश्न कयलनिकि अहाँ के पूर्वजन्मक बात किछु स्मरण अछि कर्पूरावती नहि कहलनि तहन शीलावती कहय लगलखिन- “यैह नर्मदा नदी अछि यैह बाहुलुटा मरुभूमि अछि यैह विशाल पाकड़िक गाछ अछि पूर्व जन्म मे हम चिल्होरि छलहुँ अहाँ गिदरनी एहि पाकरिक धोधरीमे अहाँ निवास करैत छलहुँ डारिपर हम एहिठामक नगर निवासिनी महिला लोकनि जिमूतवाहनक व्रत एने छलीह एतय आबि लोकनि पूजा कयलनि कथा सुनलनि हम अहाँ दुनू गोटे व्रत एने रहि हमहुँ दुनू गोटे हुनके सभ लग मे कथा सुनलहुँ कथा सुनि अपन-अपन निवास स्थान मे चलि गेलहुँ ओहि दिन एहि नगर के जे सेठ तकर एकमात्र पुत्रक देहावसान भय गेलैक बन्धु बान्धव संग आबि चिता रचि संस्कार दय चल जाईत गेल मध्य रात्रिमे अहाँ हमरा जिज्ञासा एलहुँ प्रिय चिल्हो ! जागल छी कि सुतल ? अहाँ थोर-थोर कालपर कैक बेर जिज्ञासा कयल हम जवाब दैत गेलहुँ परन्तु अहाँ हमर बात नहि सुनलहुँ तखन अहाँ जिज्ञासा के देखि देखि हम चुप्पी लगा देलहुँ तहन अहाँ हमरा सुतल बुझि अपन धोधरि सँ निकलि मुँह सँ नदी सँ पानि आनि चिताके आगि मिझा पहिने भरि पेट माँस खयलहुँ तखन किछु आनि प्रातः कालक पारणा लेल सेहो राखि लेल
प्रातः भेने जहन अहाँ हमरा पारणा लेल कहलहुँ तँ रातुक जे वृतांत हम अहाँ के देखने रहीं तँ उदास मन हम कहलहुँअहाँ करु हम कयलहुँ तखन हम ग्रामीण महिला लोकनि द्वारा देल गेल अक्षत अंकुरी पारणा कयलहुँ अहाँ जे रातुक नर माँस रखने रही से पारणा कयलहुँ
सब बात हमरा बुझल अछि आबिकऽ देखि लिय कहि कर्पूरावतीक हाथ शीलावती ओहि पाकरीक धोधरि मे लय जा नर माँस हड्डी शेष मांस देखेलनि
तखन कर्पूरावती के शीलावती कहलखिनव्रत भंगक दोष सँ अहाँक पुत्र सब मरैत गेल अहाँ दुःखी होईत गेलहुँ हम नियमपूर्वक व्रतक पालन कयलहुँ तकर फलस्वरूप हमर सब पुत्र जीवित अछि हम प्रसन्न छी तें हमरा अहाँमे विरोधाभासो अछि
कर्पूरावती पूर्वजन्मक वृतांत शीलावती सँ सुनि ओहिठाम अपन शरीरक त्याग देल शीलावती ओहिठाम सँ धूमि घर एलीह राजा अपन पत्नीक श्राद्ध कर्म निश्चिंत भऽ राज चलावय लगलाह एह जिमूतवाहनक पूजा तक मृत्यु भवनमे लोक अपन सन्तानक दिर्घायुक कामनासँ करैत आबि रहल छथि एहि व्रत के नियमानुसार करय वाली सब तरहें भरल-पूरल रहैत छथि कथा सुनि कर्पूरक दीप जरा आरती कऽ पूजित देवताक विसर्जन करा दियनि ईति
साभारछठ पूजा डाट काम

गुरुवार, 15 सितंबर 2011

मुन्नी बदनाम भेलैए किएक ?

मुन्नी बदनाम भेलैए किएक ?
एकटा हास्य कथा।

इंडिया टी वि में एकटा संगी सँ भेंट केने फिल्म सिटी नोएडा स अबैत रही। समाचार बूलेटिन के समय भ गेल रहै तही दुआरे हरबड़ाएल आकाशवाणी अबैत रही। हम सेक्टर 16 मेटो स्टेशन लक आएले रही की ओतए एकटा मित्र मदन भेंट भए गेलाह कुशल छेमक गप भेलाक बाद हम बजलहू भाए एखन हमरा जाए दियअ फेर कहियो गप नाद करब । ओ बजलाह यौ किशन अहू हरबड़ाएल नोएडा अबैत छी आ फूर सिन पड़ा जायत छी कहियो भेंटो घांट ने पहिन हमरा एकटा गप समझा दियअ तखन जाएब ।हम बजलहु जल्दी कहू त ओ बजलाह ई कहू त मुन्नी बदनाम भेलैए किएक ?
हम किछु बजितहु कि ताबैत डमरू डूगडूग के अवाज सुनलियै ओतए मेटो सीढ़ि लक बाबा भेंट भए गेलाह हमरा देखैत मातर ओ बजलाह हौ कारीगर बच्चा तोरे तकैत तकैत अई ठाम अएलहू पहिने हमरा जल्दी स एकटा गप बुझहाए दैए। हम बजलहू कोन गप यौ बाबा की ओ बजलाह हौ बच्चा एकटा गप कहअ त मुन्नी बदनाम भेलैए किएक ? हम बजलहु इ त हमरो नहि बुझहल अछि मुदा अहॉ कोन मुन्नी के गप कहि रहल छी। बाबा हॅसैत बजलाह हौ कारीगर तहू बड्ड अनठा अनठा के पुछैत छह कहअ त सौंसे दुनिया अनघोल भेल छै जे मुन्नी बदनाम भेलै शिला के जवानी तेरे हाथ न आनी। तई मे तोंही मीडियावला सभ और बेसी हल्ला केने छहक मुन्नी फिर से बदनाम हुई मुन्नी को देख डोला इमान। एतबाक नहि चैनलो में बचिया सभ देहदेखौआ कपड़ा पहिर खालि एहने समाचार सभ पढ़ैत छैक देखू वालीवुड मसल्ला मुन्नी बदनाम भेलै देखैत छहक इ समाचार देख सुनि दोसरो मुन्नी सभ बदनाम होइ लेल एखने स आतुर भेल छै। तहि दुआरे त हम पुछलियअ जे मुन्नी बदनाम भेलै किएक ?
बाबाक प्रशन सुनि त हम गुम भए गेलहु किछु ने फुरा रहल छहल आ हॅसी सेहो लागि रहल छह। बाबा फेर बजलाह हौ एतेक कथि सौचै मे लागल छह ज कहि दिमाग तिमाग भंगैठ जेतह त कोन ठिक तहू बदनाम भ जहियअ। देखहक एकटा गप त हम बुझहलियै जे जेबी मे एक्को टा पाइ नहि रहतह आ थूथून निक नहि रहतह त कतबो नाक रगरब त बापो जिनगी मे शिला के जवानी हाथ न आनी मुदा ई दोसर गप हमरा दिमागे मे ने घूसी रहल अछि जे मुन्नी बदनाम हुई। तहि दुआरे तोरा पुछलियअ जे मुन्नी बदनाम भेलै किएक ?हम बजलहु अच्छा बाबा एकटा गप कहू त अहा केना बुझहलियै जे मुन्नी बदनाम भेलै। बाबा बजलाह कहअ त सौंसे दुनिया ई गप अनघोल भेल छै तहू मे त आब शहर बजार स ल के गाम घर तक ई मुन्नी बदनाम ने भेलै कि हमरा रहनाई मुशकिल भए गेल। आब त कान दै जोग नहि रहलै जतै देखहक ततै मुन्नी बदनाम।
हम बजलहू अई यौ बाबा मुन्नी बदनाम भेलै त अहा किएक अकक्ष भेल छी। बाबा बजलाह हौ कारीगर अकक्ष की जान बचाएब मुशकिल भए गेल अछि देखैत छहक छौंडा मारेर सभ पूजा करैत काल मंदिरे मे गाबअ लगतह मुन्नी बदनाम भेलै हेतै यै मुन्नी अहा के गली गली मे चर्चा किदैन कहा । ततबेक नहि यै छौंडी सभ मंदिरे मे सप्पत खा खा बदनाम होइए के फिराक मे लागल रहतह। कहतह हे भोला बाबा तोंही जान बचबिहअ तोरा दू लोटा बेसी के जल चढ़ेबह। मुदा गारजियन सभ हमरा आबि आबि पुछतह यौ बाबा एतए कोनो मुन्ना मुन्नी के देखलियैए। आब त हमरा डरो होइए जे कहिं बदनाम होइ के झोंक मे कोइ हमरो लेल ने बदनाम भए जाय। तहू मे नबका तूरक धिया पूताक कोनो भरोस नहि एकरा सभ के पढ़नाइ लिखनाई मे कम आ बदनाम होइ मे बेसी मोन लगैत छैक। औग ने पौछ देखतह आ खाली बदनाम होइए के फिराक मे लागल रहतह। हम बजलहू अई यौ बाबा अहा लेल के बदनाम होइए।
बाबा बजलाह हौ बच्चा जूनि पूछह कि कहियअ पछिला कोजगरा मे हम अप्पन सासुर हरीपुर गेल रही कुशल छेमक गप भेलाक बाद हमर छोटकी सारि टुन्नी बजलीह यौ पाहुन एकटा गप कहू । हम कहलियैन कहू ने की एतबाक मे केम्हरो स हमर बीरपुर वाली सरहोइज चाह पान नेने दौगल अएलीह। हम एक घोंट चाह पीनैहे रही की बीरपुर वाली बजलीह पाहुन एकटा गप बुझहलियैए हम हुनका पुछलियैन कोन गप यै त ओ बाजल चुपू अनठिया कहि के बुरहारी मे खाली गप अनठा अनठा बजैत छी आ हमर सरहोइज सारि खूम जोर सॅ हा हा के हसैए लगलीह। फेर बीरपुर वाली खिखिआ के हसैत बजलीह टुन्नी बदनाम हेतै यै बुरहबा पाहुन अहि के लिए। टुन्नी ताली बजा बजा सुल मे ताल मिला गाबए लागल टुन्नी बदनाम हेतै यौ बुरहबा पाहुन अहि के लिए । हौ बच्चा टुन्नी के गप सुनी त कि कहियअ हम असमंजस मे परि गेलहु जे इ अपनो बदनाम होएत आ बुरहारी मे हमरा गंजन टा कराउत। डरे हम दोसर घोंट चाहो नहि पिलहु चाह सेरा के पानि भ गेल।
फेर कि भेल यौ हम उत्सुकतावस बाबा स पुछलियैन त ओ बजलाह हौ बच्चा सभटा गप तोरा कि कहियअ टुन्नी के हम कहलियै अई यै टुन्नी एतेक छौंडा मारेर सभ साइकिल ल के ओइ बाध स ओई बाध शहर स बजार मुन्नी के तकने फिरै छै तेकरा सभ लेल बदनाम हएब से नहि त फुसियाहि के हमरा पाछु लागल छी। टुन्नी बजलीह नहि यौ पाहुन हम त अहि लेल बदनाम होएब तब ने लोको हमरा चिनहत जे हमहू बदनाम होइ लेल आतुर भेल छी। भने मीडियावला सभ के एकटा खबर सेहो भेट जेतैए जे मुन्नी फिर बदनाम हुई आ हमरो कोनो धारावाहिक मे झगरलगौन माउगी वा कि कोनो फिल्म मे आइटम गर्ल के काज भेट जाएत। कि कहियअ टुन्नी के बदनाम हेबाक प्रबल इच्छा देखि हम फुर दिस अपना सासुर स बिदा भगलहु आ फेर कहियो हरीपुर नहि गेलहु। ओकर गप सुनि त डरे हमरा हुकहुकी धए लेलक जे कहि ठीके मे टुन्नी बदनाम भेलै आ कि एना केलकै त हमहू बदनाम भए जाएब। तहि दुआरे त कहलियअ हौ बच्चा जे कहिं कोई हमरो लेल ने बदनाम भए जाए तहू मे आबक धिया पूता के कोनो ठेकान नहि बदनाम होइ दुआरे फिलमी फंडा अपनौतह। गारजिअन के इ कहतह जे हम टीशन पढ़ै लेल जाइत छी आ पढ़नाइ छोड़ि के पार्क कॉफि हाउस घूमै लेल चलि जेतह आ बदनाम होइ के फिराक में लागल रहतह। जेना ओकरा सभ के और कोनो काजे नहि रहै तहिना।
बाबा बजलाह हौ बच्चा तू ख़बर लेल हाट बजार स ल के शहर गाम सभ ठाम जाइत छह मुदा हमरा एकटा गप नहि बुझहा देलह। हम पुछलियैन कोन गप यौ बाबा की ओ बजलाह अईं हौ कारीगर तहू बड्ड अनठाह भ गेलह तोरा त ई गप बुझहले हेतह जे मुन्नी भेलै आ तहू मे मीडियावला सभ और बेसी हल्ला केने छहक। कतए कोन मुन्नी बदनाम भेलै सेहो ख़बर रखैत छह मुदा हमरा सिरिफ एक्के टा गप बुझहा दए ने जे मुन्नी बदनाम भेलै किएक ?

लेखक - किशन कारीगर

सोमवार, 12 सितंबर 2011

उठो देश वाशियों , जागो ,सबेरा होगया

उठो  देश  वाशियों , जागो  ,सबेरा  होगया

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार २०११


साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार २०११ मैथिली लेल ले.क. मायानाथ झा केँ हुनकर लोककथा संग्रह "जकर नारी चतुर होइ" लेल देल गेल अछि। डॉ.भगवानजी चौधरी, प्रो. चन्द्रधर झा आ डॉ. इन्द्रकान्त झा जूरी रहथि, जूरीमे सं दू गोटे मैथिली साहित्य लेल अज्ञात नाम रहथि, से विवाद उठल जे जूरी लोकनि साहित्य अकादेमी मैथिली परामर्शदाता समितिक अध्यक्ष श्री विद्यानाथ झा "विदितक " रबर स्टाम्प रहथि । २०११ क विदेह साहित्य अकादेमी समानान्तर बाल साहित्य पुरस्कार सेहो ले.क. मायानाथ झाकेँ "जकर नारी चतुर होइ" लेल देल गेल छल।

ई घोषणा साहित्य अकादेमीक मैथिली विभाग लेल ओतेक असहज निर्णय नै छल। साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक ब्राह्मणवादी चेहराक असल परीक्षा हएत जखन ओकर मूल पुरस्कारक घोषणा हएत। २०११ क विदेह साहित्य अकादेमी समानान्तर मूल साहित्य पुरस्कार श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जी केँ मैथिलीक आइ धरिक सर्वश्रेष्ठ कथा संग्रह “गामक जिनगी” लेल देल गेल छन्हि।


नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य,  दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे  सर्वोच्च सम्मान)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता
श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)
श्री राम दयाल राकेश (1999)
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता
स्व. सुन्दर झा शास्त्री

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव

फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान
फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ

साहित्य अकादेमी  फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली)


           १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि।
            २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- ) - मैथिली साहित्य लेल।

साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):-
           
           २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
           २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
            पं. श्री उमारमण मिश्र

 साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली


१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)
१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)
१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)
१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)
१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)
१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)
१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)
१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)
१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)
१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)
१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)
१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)
१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)
१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)
१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)
१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)
१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)
१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)
१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)
१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)
१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)
१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)
१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)
१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)
१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)
 १९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)
 १९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)
 १९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह)
 १९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)
 १९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)
 १९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)
 २०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)
 २००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)
 २००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)
 २००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)
 २००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)
 २००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)
 २००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)
 २००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)
 २००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)
 २००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)
 २०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास)
  
साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार
 १९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)
 १९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)
 १९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)
 १९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)
 १९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)
 १९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)
 १९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)
 १९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)
 २०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)
 २००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)
 २००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)
 २००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)
 २००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)
 २००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)
 २००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)
 २००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)
 २००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)
 २००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)
 २०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी)

साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार
२०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल"  लेल
२०११- ले.क. मायानाथ झा "जकर नारी चतुर होइ" लेल
प्रबोध सम्मान
 प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )
 प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )
 प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )
 प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )
 प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )
 प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )
 प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )
 प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- )
  
यात्री-चेतना पुरस्कार

 २००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;
 २००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;
 २००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;
 २००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;
 २००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;
 २००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;
 २००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;
 २००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;
 २००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी
 २००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा
 २०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा

कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान
 २००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झा (कविता संग्रह “एना त नहि जे”)
 २००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता” (नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश)
 २०१० ई.- श्री महाप्रकाश (कविता संग्रह “संग समय के”) 

भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता
युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल।

भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।  रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।

विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार

१.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ 
२०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल)
२०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल)

२.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ 
२०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह)
२०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह)
२०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक)
२०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मा नदीक माझी, बांग्ला- माणिक वन्दोपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद)

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

दहेज मुक्त मिथिला के तरफ सँ विभिन्न नगरके --


दहेज मुक्त मिथिला के तरफ सँ विभिन्न नगरके जे चार्ज बहुतो जुड़ल सदस्य सभ लेने रही से अपन-अपन नेतृत्वमें किछु-किछु कार्यक्रम घोषणा करै जाइ। एहि सँ सभके संस्थाके वर्तमान प्रगति, सौराठके सफल आयोजन, पंजियन लेल बाकी काज, वर्तमान उद्देश्य आ आगामी दिल्ली कार्यक्रम एहि प्रमुख विन्दुपर सभके जानकारी सेहो दऽ देबैन आ संगहि सभके नैतिक जागरण करैत एहि... मूहिममें जुड़य लेल आग्रह करबनि। हम स्मरण कराबय लेल चाहब:

१. सोनु मिश्रा, पटना (आइ के दिनमें अहाँके कृष्णानन्दजी सेहो सहयोग करताह।)

२. राजु ठाकुर, मद्रास

३. अमित झा, बंगलौर

४. विकास झा, जमशेदपुर

५. अरविन्द झा, कलकत्ता (राघवेन्द्रजी सेहो सहयोग करताह।)

६. अभिषेक आनन्द, दिल्ली (राघवेन्द्रजी, संतोषजी, विभिन्न मित्र सभ सेहो सहयोग करताह।)

७. मदन ठाकुर, नोएडा

८. पंकज भाइ, मुंबई (जितमोहनजी आ संदीपजी सेहो सहयोग करताह - ओनाहू अहाँ पहिले सऽ निर्णय केनहिये छी जे कार्यक्रम करबैक।)

९. राकेश रौशन, वाराणसी (सहयोग के आकांक्षा रहलापर आरो कार्यकर्ता देल जा सकैत अछि।)

१०. चन्दन झा, रायपुर

११. प्रकाश भाइ, मधुबनी

१२. प्रवीण चौधरी, बिराटनगर (एवं अन्य - यथासंभव)

१३. पवन झा, जनकपुर

१४. देवेन्द्र मिश्र, राजबिराज

१५. धीरेन्द्र भाइजी, काठमाण्डु संग अन्यत्र

१६. अजित भाइजी, लेखक बीच एवं अन्यत्र

१७. कुञ्जबिहारी मिश्रजी, अपन प्रत्येक कार्यक्रम में

१८. सियाराम झा सरस, अपन कार्यक्रम में

१९. डा. देवेन्द्र झा, अपन कार्यक्रम में

२०. सत्यानन्द पाठक, गुवाहाटी

२१. संजय घोष, सिलिगुड़ी एवं भूटान

एतेक सदस्य एवं गणमान्य लोकनि जाहिमें बहुत गोटे स्वयं जिम्मेवारी लेने छी से हमरा स्मरण अछि - यदि किनको कोनो प्रकारके असुविधा होय तऽ जानकारी दी जाहि सँ वैकल्पिक व्यवस्था देखल जाय। किछु सदस्यके नाम हम बिसैर गेल होइ तऽ अपनहि जानकारी देब। संगहि बहुतो महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व सभ संग एखन सम्पर्कके सिलसिला चलिये रहल अछि। समय-समय पर जानकारी दैत रहब। सभ गोटे मिलिके यथार्थके धरातलपर दहेज मुक्त मिथिलाके अभियानके जोर-शोर सऽ चलाबी से आग्रह।

योजनानुसार मिथिलाके हर गाम में हमरा लोकनिक प्रवेश आ संगठन निर्माण सेहो छल जे पंजियन में देरी के कारण लटकल अछि। पंडित विश्वमोहन चन्द्र मिश्रजीके अध्यक्षतामें एक पंजिकार भ्रमण टोलीके गठन के बात सेहो छल जाहि लेल दिल्लीके कार्यक्रम उपरान्त आवश्यक पहल होइक से जानकारी देबय चाहब।
अपने लोकनि सँ आग्रहजे अपन विचार सेहो निरंतर दैत रहियौक।

जय मैथिली! जय मिथिला!!

हरिः हरः!

सोमवार, 25 जुलाई 2011

बचाऊ माईक लाज


बचाऊ माईक लाज
फेर हमर धरती भेल रंजित,
फेर छाती पर फाटल बम,
सुरक्षि छी, विश्वास भेल भंग॥

कतेक घरक तारा टूटल,
कतेक माथक सिन्दुर लुटल,
कतेको आँचर भेल सुन्न,
कतेक दिन देखैत रहब मतसुन्न?

की हमर नहि कोनो कर्तव्य?
निराकरण मे नहि कोनो अधिकार?
की हम कडोरो, सब बेकार?
कखन धरि सहब?

कतेक बेर मरब?
आऊ देशक सब कर्णधार,
करू युगपरिवर्तणक संखनाद,
उखारि फेकू आतंकतावाद,

बचाउ फेर एक बेर माइक लाज्॥

Kripa Nand Jha

बुधवार, 20 जुलाई 2011

मैथिलि पंचांग २०११-१२


मैथिलि पंचांग २०११ -१२






























































 




शनिवार, 16 जुलाई 2011

विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान (मैथिली)

१.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११
२०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल)
२०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल)

२.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२
२०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह)
२०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह)
२०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक)
२०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मा नदीक माझी, बांग्ला- माणिक वन्दोपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य,  दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे  सर्वोच्च सम्मान)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता
श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)
श्री राम दयाल राकेश (1999)
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता
स्व. सुन्दर झा शास्त्री

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव

फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान
फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ

साहित्य अकादेमी  फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली)


           १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि।
            २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- ) - मैथिली साहित्य लेल।

साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):-
           
           २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
           २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
            पं. श्री उमारमण मिश्र

 साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली


१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)
१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)
१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)
१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)
१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)
१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)
१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)
१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)
१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)
१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)
१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)
१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)
१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)
१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)
१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)
१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)
१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)
१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)
१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)
१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)
१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)
१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)
१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)
१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)
१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)
 १९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)
 १९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)
 १९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह)
 १९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)
 १९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)
 १९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)
 २०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)
 २००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)
 २००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)
 २००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)
 २००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)
 २००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)
 २००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)
 २००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)
 २००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)
 २००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)
 २०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास)
  
साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार
 १९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)
 १९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)
 १९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)
 १९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)
 १९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)
 १९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)
 १९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)
 १९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)
 २०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)
 २००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)
 २००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)
 २००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)
 २००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)
 २००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)
 २००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)
 २००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)
 २००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)
 २००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)
 २०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी)

साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार
 २०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल"  लेल

प्रबोध सम्मान
 प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )
 प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )
 प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )
 प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )
 प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )
 प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )
 प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )
 प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- )
  
यात्री-चेतना पुरस्कार

 २००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;
 २००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;
 २००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;
 २००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;
 २००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;
 २००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;
 २००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;
 २००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;
 २००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी
 २००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा
 २०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा

कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान
 २००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झा (कविता संग्रह “एना त नहि जे”)
 २००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता” (नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश)
 २०१० ई.- श्री महाप्रकाश (कविता संग्रह “संग समय के”) 

भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता
युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल।

भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।  रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।

विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार

१.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ 
२०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल)
२०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल)

२.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ 
२०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह)
२०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह)
२०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक)
२०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मा नदीक माझी, बांग्ला- माणिक वन्दोपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद)