हमरा गाम में एगो मास्टर जी छला, दूर-दूर गाम तकऽ प्रसिद्ध छला , गपऽ हकबा मऽ माहिर ,ककरो किछ कही कऽ हुथी दैत छला ,
एक दिन टहलैत मदन जी कतौ जय छला , अचानक सामने मास्टर जी आबी गेलिखिन! मदन जी - गोर लगै छि मास्टर जी मास्टर- नीके रहू , कत रहै छि आय कायल मदन जी- नोएडा में सेक्टर -44 सदरपुर छलेरा में रहैत छि मास्टर- की करैत छ मदन जी- आग्रबाल अतुल लग ऽ सिये कऽ काज करै छि मास्टर- हऽ .. अहि सऽ बेसी तू करबे की करबऽ
दोसर दिन अहिना गंगा खेत दिस जायत छला , सामने मास्टर जी के देखैत बजला , गंगा - गोर लगै छि मास्टर जी मास्टर - नीके रहऽ ,कतऽ रहै छ गंगा - दिल्ली में रहै छि मास्टर - हवऽ कीछ कैरतो छ गंगा - सेक्टर 62 a -16, में माली के काज करै छिऽ मास्टर -हऽ .. तऽ अय सऽ बेसी तू करबे की करबऽ
अहिना एक दिन हमरो भेटला ....... मुकेश - गोर लगै छि मास्टर जी मास्टर - नीके रहऽ की करै छ आय -कायल मुकेश - गीत नाद लिखैत छि ,सब स्रोता कऽ मनोरंजन करबैत छिऽ मास्टर - ह.. त अय स बेसी तू करबे की करबऽ
अहिना समाय बितैत गेल ,किछ समाय उपरांत बाद मास्टर जी क कनिया क देहांत भ गेलाइन हम किछ काज बस उम्हर स गुजरैत छ्लव मास्टर जी क देखलव ,किछ परेसान आगू बरी पुछलव -मास्टर जी एतेक परेसान किया छि मास्टर जी - की कहू मुकेश जी जहिया स असगर भेलव तहिया स बर परेसान छि ,कतव जोगार देखियो ने ,कतेक दिन असगर जीबन बितायब ,
(हमरा तऽ बुझु एगो मौका भेटल ,मास्टर जी कऽ बात मोन परलऽ ) हम झट सऽ ठार भलव ,मुस्कैत बजलव ,...... हऽ ....तऽ अय सऽ बैसी आहा कैये की सकैत छि गीटाकार- मुकेश मिश्रा 9990379449 email – mukesh.mishra@rediffmail.com
बर - सनम बेमन स छि हम परदेश में , की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में
कनिया- एतय आहाक बौआ पलैत अछी हमर पेट में आगि लागल बज्र खसल धान बला खेत में
बर - की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में सनम बेमन स छि हम परदेश में ,
कनिया - बीघा के बीघा में आयल दहार यौ खेत रहितो भेल छै जीवन पहार यौ
बर - अबै छि फागुन में चेन लेने भेट में की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में
कनिया- गहुम के हालत खराबे खराब छै गामक किसान त करैत बाप बाप छै खेती ग्रहस्थी में साधनक अभाब छै बिजली के नाम पर बस पोल ठार छै बोडिंग गराउ आऊ पाइन दियौ खेत में नाही त चली जायत इ रौदिक चपेट में
बर - की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में कनिया -एतय आहाक बौआ पलैत अछी हमर पेट में
बर - पत्र पढैत बात मोन केर छुबी गेल करू की आखी स नोर बस चुबी गेल सोचैत छि सुख दुःख गमायब हम साथ में होली में मिली जायब गाम केर रंग में जोरीक रहब हम आब साथ साथ में की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में सनम बेमन स छि हम परदेश में ,
गीत -- मुकेश मिश्रा 9990379449 e mail - mukesh.mishra@rediffmail.com