(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

बुधवार, 7 जुलाई 2010

मुरही बाली

मुकेश मिश्रा

9990379449
मुरही बाली

जुरा देबौ

मुकेश मिश्रा

9990379449

जुरा देबौ

टुनिया के मौसी

मुकेश मिश्रा
9990379449


टुनिया के मौसी


शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

हमर मदन मामा

लेखक - मुकेश मिश्रा


हमर मदन मामा


हमर मदन मामा क ऽ के नै जनैत य ऽ ,
हमर मदन मामा कऽ के नै चर्चा करैत यऽ ,
मुदा हे हमरा पर मामा कऽ किछ बिसेष धियान
रहैत छैन,
अहिना घुमैत -घुमैत एक दिन मामा आंगन गोलव ,
मुकेश - मामा गोर लगै छि
मामा - नीके रह बौवाऽ ,आबह बैसहऽ
मुकेश - मामा मामी ठीक छाइथ की ने
(तात मामी घर सऽ निकलैत )
मामी - मुकेश बौवा ....
मुकेश -मामी गोर लगै छि
मामी - भगबान नीके राखेत
मामी- (मामा कऽ ) -यौ सुनै छिये,जव ने दादा पोखैर सऽ
माछ मारी क ऽ नेने आव ने, कतेक दिन पर आय
मुकेश बौवा एलात ह ,
मामा - हऽ जय छि
मामा बिदा तऽ भेला मुदा मामा कऽ माछ पकरल तऽ
अबै नै छान,
दादा पोखैर लग जहन गोलात तऽ देखलात की दू गोरे
आपस में मारी कऽ रहल छल ,
मामा - रे की भेलौ, कथी ले मारी करै छऽ
एक गोरे - यौ मदन बाबु कनी अहि पंचैती कऽ दिय ने
मामा - कथी के पंचैती रे ,कनी फरिया कऽ बज नऽ
दोसर गोरे - मदन बाबु हम दुनु गोरे मिल कऽ माछ
पकरलव , इ कहै यऽ पूरा हम लेबौ ,हम कत जेबै यो ,
एक गोरे - तू दोसर दिन लिह ,आय हमर कनिया
भोरे सऽ मसला पिसने छै,
दोसर गोरे - आरोंव तोरी के ,जेना हिनके टाऽ कनिया
छान , आ हमरा कनिया ले तऽ परोसी माछ अनतै ,
एक गोरे - तोहर कनिया , रे कायलो देखलियो तोहर
कनिया के,इनार पर बैस कऽ नहात, पूरा पिठिया
ओहिना छ्लव देखात,
दोसर गोरे - सार तू हमरा गायर दमा
(दुनु में मारी हूव लागल , मामा देखलात आब तऽ
बरिया मौका यऽ )
मामा - हवऽ जै माछ ले तू सब लराई करै छऽ ओय
माछ कऽ निमोनिया छै , जऽ खेलऽ तऽ गेलऽ
एक गोरे - सही में यौ
मामा - देखै नै छहकऽ , केना सास लै छै ,फेकऽ एकराऽ
(मामा माछऽ लऽ कऽ जंगल में फेक देलखिन ,आ ओत सऽ
खिसैक गेलात, ओहो दुनु गोरे एक दोसरक मुह तकैत
चली गेल )
ओकरा सब कऽ गेला कऽ बाद मामा आबी क माछ उठेला
आ अपन घर एलात , मामी कऽ माछऽ दऽ , हमरा
खिस्सा कहलाइत ....मुदा माछक तिमन बरऽ रसगर छल
एखनो धरी मोन परौत यऽ ,अहू सब कऽ जऽ कनियो
मौका भेट जा , तऽ एक बेर हमर मामा क ऽ माछऽ
खायले जरुर आयब .............
गीतकार - मुकेश मिश्रा
9990379449

तारी बाली

मुकेश मिश्रा

9990379449


तारी बाली

पिया जी झुमका अनथीन

मुकेश मिश्रा

9990379449


पिया जी झुमका अनथीन

दिबाना पूछ लेगा

मुकेश मिश्रा

9990379449


दिबाना पूछ लेगा

लव के टॉनिक

मुकेश मिश्रा

9990379449



लव के टॉनिक

गुरुवार, 1 जुलाई 2010

चिट्ठी आयी है

मुकेश मिश्रा
9990379449
चिट्ठी आयी है

जुलाई मासक,ब्रत त्यौहार आ पर्ब

लेखक - मुकेश मिश्रा


जुलाई मासक,ब्रत त्यौहार आ पर्ब

04 - शीतलाष्टमी
05 - पंचक समाप्ति
08 - योगिनी एकादशी ब्रत
09 - प्रदोस ब्रत
10 - माश शिबरात्रि ब्रत
11 - अमाबस्य
13 - रथोत्सब (जगन्नाथ रथ यात्रा )
15 - गणेश चतुर्थी ब्रत
17 - कर्क संक्रन्ति , स्नकन्द खस्ठी
21 - देबश्यनी एकादशी
22 - चातुर्मास ब्रत प्रारंभ
25 - पूर्णिमा ब्रत
26 - गुरु पूर्णिमा
29- गणेश चतुर्थी ब्रत

गीतकार - मुकेश मिश्रा
9990379449

मंगलवार, 29 जून 2010

बंगाली बाबा

लेखक - मुकेश मिश्रा

बंगाली बाबा

हमर गामक बंगाली बाबा कऽ के नै जनैत यऽ
बंगाली बाबा अपन आधा ज्निगी पढ़ाइये
में बितौला , परबा -लिखबा के उपरान्तो,
हिनका में ओं स्वभाब नै छल जे बिचार
एगो बिद्वता में हैत यऽ ,सब कऽ हिन् भाबना
सऽ देखैत छलखिन ,और अपन बिद्वांक प्रसंसा
करैत रहै छला ,धोखो सऽ जऽ कियो पढ़ल-लिखल
सजनऽ हुनका आगा परि गेलैन ,तऽ फेर जामैत
दस बीसटा लोक नै आबी जय ता धरी वो अपन
ब्याकरण कऽ तानड्ब सऽ सब कऽ ह्कोचित कऽ के
छोरैत छला ,
एक दिन कोट कऽ किछ काज सऽ, झंझारपुर बिदा भेला ,
कमला बलान पर जा कऽ नाव में बैसला ,...
किछ देर आगा गेलात,की अपन अहंकार भरल
मुह सऽ नाव बला कऽ पुछला ....
बंगाली - हवऽ तोरा ब्याकरण अबै छऽ
नाव बला - नै मालिक हमरा नै आबै यऽ
बंगाली - धू -धू तोहर सब कऽ याह लीला छव
(नाव बला चुपचाप सबटा सुनैत छल , मेघ में
बादल से लागल जायत छल,)
बंगाली -हवऽ भूगोल -नागरिक अबै छऽ
नाव बला - नै मालिक
बंगाली - तहन तऽ तोहर पूरा ज्निगी बेकार छव
(नाव बला सबऽ किछ चुपचाप सुनैत छल, अचानक
हबा कऽ तेज सऽ नाव बिच भवर में फैस गेल ,)
नाव बला - मालिक हेलल अबै यऽ
बंगाली - हमरा हेलल नै अबै यऽ
नाव बला - तहन तऽ अपन ब्याकरण,भूगोल ,नागरिक
कऽ मदत के लेल बजा लिय , कियाकि नाव भवर में फैस
गेल , किछ देर में डूबी जायत ,
(एतेक कहि कऽ नाव बला नाव सऽ कुदी गेल ,बंगाली बाबा
मुह तकिते रही गेलएत,)
तहन बंगाली बाबा कऽ समझ में एलन जे आदमी कऽ एगो
बिद्या में निपुण रहला सऽ किछ नै हैय छै, बिद्या कऽ संग -
संग किछ औरो गियान रहनाय अति आबस्यक छैय,
गीतकार - मुकेश मिश्रा
9990379449


सोमवार, 28 जून 2010

मास्टर जी



लेखक - मुकेश मिश्रा




मास्टर जी


हमरा गाम में एगो मास्टर जी छला,
दूर-दूर गाम तकऽ प्रसिद्ध छला ,
गपऽ हकबा मऽ माहिर ,ककरो किछ कही
कऽ हुथी दैत छला ,

एक दिन टहलैत मदन जी कतौ जय छला ,
अचानक सामने मास्टर जी आबी गेलिखिन!
मदन जी - गोर लगै छि मास्टर जी
मास्टर- नीके रहू , कत रहै छि आय कायल
मदन जी- नोएडा में सेक्टर -44 सदरपुर छलेरा
में रहैत छि
मास्टर- की करैत छ
मदन जी- आग्रबाल अतुल लग ऽ सिये कऽ काज करै छि
मास्टर- हऽ .. अहि सऽ बेसी तू करबे की करबऽ

दोसर दिन अहिना गंगा खेत दिस जायत छला ,
सामने मास्टर जी के देखैत बजला ,
गंगा - गोर लगै छि मास्टर जी
मास्टर - नीके रहऽ ,कतऽ रहै छ
गंगा - दिल्ली में रहै छि
मास्टर - हवऽ कीछ कैरतो छ
गंगा - सेक्टर 62 a -16, में माली के काज करै छिऽ
मास्टर -हऽ .. तऽ अय सऽ बेसी तू करबे की करबऽ

अहिना एक दिन हमरो भेटला .......
मुकेश - गोर लगै छि मास्टर जी
मास्टर - नीके रहऽ की करै छ आय -कायल
मुकेश - गीत नाद लिखैत छि ,सब स्रोता कऽ
मनोरंजन करबैत छिऽ
मास्टर - ह.. त अय स बेसी तू करबे की करबऽ

अहिना समाय बितैत गेल ,किछ समाय उपरांत
बाद मास्टर जी क कनिया क देहांत भ गेलाइन
हम किछ काज बस उम्हर स गुजरैत छ्लव
मास्टर जी क देखलव ,किछ परेसान आगू बरी
पुछलव -मास्टर जी एतेक परेसान किया छि
मास्टर जी - की कहू मुकेश जी जहिया स असगर
भेलव तहिया स बर परेसान छि ,कतव जोगार देखियो
ने ,कतेक दिन असगर जीबन बितायब ,

(हमरा तऽ बुझु एगो मौका भेटल ,मास्टर जी कऽ बात मोन परलऽ )
हम झट सऽ ठार भलव ,मुस्कैत बजलव ,......
हऽ ....तऽ अय सऽ बैसी आहा कैये की सकैत छि
गीटाकार- मुकेश मिश्रा
9990379449
email – mukesh.mishra@rediffmail.com


परदेश में



लेखक - मुकेश मिश्रा

परदेश में

बर - सनम बेमन स छि हम परदेश में ,
की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में

कनिया- एतय आहाक बौआ पलैत अछी हमर पेट में
आगि लागल बज्र खसल धान बला खेत में

बर - की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में
सनम बेमन स छि हम परदेश में ,

कनिया - बीघा के बीघा में आयल दहार यौ
खेत रहितो भेल छै जीवन पहार यौ

बर - अबै छि फागुन में चेन लेने भेट में
की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में

कनिया- गहुम के हालत खराबे खराब छै
गामक किसान त करैत बाप बाप छै
खेती ग्रहस्थी में साधनक अभाब छै
बिजली के नाम पर बस पोल ठार छै
बोडिंग गराउ आऊ पाइन दियौ खेत में
नाही त चली जायत इ रौदिक चपेट में

बर - की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में
कनिया -एतय आहाक बौआ पलैत अछी हमर पेट में

बर - पत्र पढैत बात मोन केर छुबी गेल
करू की आखी स नोर बस चुबी गेल
सोचैत छि सुख दुःख गमायब हम साथ में
होली में मिली जायब गाम केर रंग में
जोरीक रहब हम आब साथ साथ में
की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में
सनम बेमन स छि हम परदेश में ,


गीत -- मुकेश मिश्रा
9990379449
e mail - mukesh.mishra@rediffmail.com

लेखक - मुकेश मिश्रा





लेखक - मुकेश मिश्रा , 9990379449

गीत - मुकेश मिश्रा





गीत - मुकेश मिश्रा ,-9990379449

डांस - मुकेश मिश्रा

गीत व एक्टर- मुकेश मिश्रा , 9990379449

गीत - मुकेश मिश्रा

डांस - मुकेश मिश्रा

डांस - मुकेश मिश्रा

9990379449