(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

गुरुवार, 28 मार्च 2013

मिथिला लेल आगाँ कि?

मिथिला लेल आगाँ कि?


एखन धरि मिथिला राज्यके माँग प्रति बहुत रास महत्त्वपूर्ण कार्य कैल गेल अछि जाहिमें मिथिलाक नक्शा प्रमाण सहित भारत सरकारके देल गेल अछि, १९४७-१९५६ भारतीय साँसदमें मिथिला राज्यक माँग पर कैल गेल बहस आ राज्य गठन आयोगके सिफारिश आदि सरकार के पास अपनहि दस्तावेजमें अछि जेकर पूरा सान्दर्भिक अध्ययन जरुर कैल गेल होयत से आशा राखी, तहिना मैथिलीक अधिकारसम्पन्नता संविधानक अष्टम् अनुसूचीमें दर्ज करैत पहिले कय देल गेल अछि, पुरातत्त्व अन्वेषण/खोज सभसँ नित्य नव आ मिथिला समर्थक बहुते रास बात सभ जे आबि रहल अछि तेकरो पूरा लेखा-जोखा रखैत मिथिला राज्यक माँग पूर्णता पौने अछि.... जरुरत यैह जे २०१४ के लोकसभा चुनावमें ई मुद्दा बनय आ ताहि लेल एक संपूर्ण मिथिलाके प्रतिनिधित्व करयवाला कार्यदल व संगठन निर्माण हो। समय बहुत कम अछि आ काज बहुत बेसी। वर्तमान जतेक संगठन मिथिला राज्य लेल काज करनिहार छी से सर्वदलीय सामूहिक बैठक करी आ संयुक्त कार्यदल गठन करी। 

जेना हालहि एक महत्त्वपूर्ण कार्य मिथिला लेल सम्पन्न भेल - जे युवा शक्ति मानू कि आन्दोलनमें सक्रियतापूर्वक नहि जुडल छल सेहो सभ स्वयं चारि-चारि दिनक अनशन करैत क्रान्ति करबाक लेल आ बलिदान देबाक लेल तैयार अछि। युवा सभक सेहो संगठन अखण्ड मिथिला क्षेत्रक हो आ राजनीतिक मंच व युवा मंचके बीच नीक तालमेल हो तेकर व्यवस्था करब जरुरी। ताहि लेल आवश्यक आदर्श कार्यकर्ता विधान निर्माण राजनीतिक मंच द्वारा करैत युवा मंच केँ सेहो विश्वासमें लेब जरुरी अछि आ ताहि अनुरूपे मिथिलाक सेवक जोडब सेहो जरुरी अछि। सच देखल जाय तऽ माँग कायम जरुर अछि लेकिन संगठनात्मक स्तरपर काज आइ धरि नहि भेल अछि। दाबी कतबो पैघ हो मुदा काज शून्य अछि तेकर प्रमाण तथाकथित खोंखीबाज संघ-संस्थाक कोनो बैठकमें सहभागिताक अत्यंत कमजोर स्थितिमें प्रत्यक्ष देखल जा सकैत छैक। आबो यदि केवल खखसला सऽ काज चलय तऽ लागल रहू, लेकिन ईमानदार प्रयास लेल संगठनात्मक ढाँचाके मजबूत बनायब बहुत जरुरी छैक।

एहनो नहि छैक जे साफ निकम्मा संस्था सभ लागल छैक, लेकिन कमजोर आ कूपोषित बच्चा कतबो जोर सऽ चिकरतैक ओकर आवाज बहुत दूर तक नहि जेतैक। तदापि ईमानदारी सँ आपसी तालमेल बनायल जाय तऽ शीघ्र प्रभाव देखय में आबि सकैत छैक। हमर छोट अनुभव कहैत अछि जे आम जनमानस के मिथिला राज्य के परिकल्पना पता नहि छैक, राज्य होइत कि छैक सेहो पता नहि छैक... आम सऽ ऊपर पढल-लिखल युवा पर्यन्त बेसी मात्रामें गणतंत्र, राज्य, स्वराज, आदि सऽ नहि पूर्णत: तऽ अंशत: अनभिज्ञ छैक। तखन जागृति पसारबाक दृष्टिकोण सँ वर्तमान कार्यरत हरेक मजबूत संस्था अपन कर्तब्य एतबी बुझय जे जगह-जगह जनसभाके आयोजन हो आ कम से कम खर्चमें बेसी सऽ बेसी लोक एहि बात के आत्मसात करय कि अपन राज्य कि होइत छैक, आबो मिथिला राज्य नहि बनत तऽ मैथिली भाषा समान संस्कृति सेहो आखिर साँस कोनो क्षण लऽ लेत, विकास आ आर्थकि अवस्थामें सुधार जे पलायन रोकत आ आगामी पीढीकेँ मिथिला प्रति सम्मान उत्पन्न करत... ई समस्त बात के जानकारी दैत २०१४ के चुनाव में मात्र ओहि राजनीतिक दल वा नेताके समर्थन करबाक आग्रह कैल जाय जे मिथिलाक हरेक सरोकार पर ध्यान देत आ मिथिलाके सरकार निर्माण करत, आन के प्रवेश निषेध आज्ञा हरेक गाममें लगा देल जाय।

गुरुवार, 21 मार्च 2013

हर मैथिल सँ निवेदन: चली दिल्लीके जन्तर-मन्तर पर

व्यक्तिसँ संस्था बनैत छैक, संस्था सँ व्यक्ति नहि। कवि एकान्त मिथिलाक लाखों-करोडों युवामें संवाद संचरण कय रहल छथि आ युवाक संस्था मिथिलाक बागडोर अपन हाथमें अपन असफल मुदा तजुर्बासँ भरल पीढीक हाथे लगभग छीनि रहल छथि। परंपरा तऽ एहेन होइत छैक जे स्वयं बुजुर्ग अपन युवा पीढीकेँ युवराजक गद्दी दैत अपन असफलताक नीक आकलन-व्यकलन सँ आगू नीक करबाक लेल जागरुक करैत छैक, लेकिन अफसोस जे मिथिला लेल तेना नहि भऽ कऽ बस जहिना एका-एकी सभ कियो प्रयासमें लगलाह आ नव आश जगेलाह तहिना एहि बेर युवा पीढी सेहो बस व्यक्तिगत रूपमें बीडा उठेलाह, आ ई बीडा असगर एक व्यक्ति मात्र किऐक उठेलाह तेकर निम्न कारण छैक:

ओ समस्त संघ-संस्था आ मिथिला प्रेमीकेँ मिथिला लेल एकजूट बनबाक आह्वान करय लेल असगर व्यक्ति मात्रक नाम सँ अनशनके घोषणा कयलाह। कारण साफ छैक - जखनहि लोक गूटबाजीमें फँसल केवल मिथिलाक नाम पर ढकोसला आन्दोलन करैत छथि आ नाम बेर अपन नामक चकाचौंध देखैत छथि ताहिके कारण कवि कम से कम पहिल युवा बनि आन्दोलनमें कूदबाक प्रेरणा संचरण करय लेल आ ई संवाद सेहो देबाक लेल जे एखन धरि कोनो संस्था जखन आम जन तक पहुँच बनेनहिये नहि अछि तखन कोना केकरो क्रेडिट देल जाय, केकरो छोडल जाय... दूविधा सँ बहुत नीक जे असगरे डेग उठाबी आ तखन सभ संस्था हमरा आशीर्वाद देबाक लेल आगू आबैथ आ समस्त मिथिलासँ लोक के एहि आन्दोलन सँ हमरे संग जोडैथ। 
नकारात्मक प्रभाव: लेकिन जहिना हमेशा सऽ मैथिलक वैन रहल अछि जे खोट मात्र निकालब, संग देब वा देबाक क्षमता विकास करब नहि करब, खोट जरुर निकालब... बस तहिना पहिले तऽ खूब लेखा-जोखा आ कविकेँ पोल्हेबाक कतेको अंदरूनी खेल सभ भेल... जे संग देबाक लेल आ योजना सहित मुहिम के एहि बेर मिथिलाक जैडतक पहुँचेबाक लेल आगू डेग उत्साहके संग उठेने छलाह तिनका प्रति सेहो कतेको अनाप-शनाप प्रलापगान करैत कविके हतोत्साहित कैल गेल (जेकर पूरा विवरण ठीक होली दिन 'मिथिलाक जयचन्द' शीर्षक अन्तर्गत पढब) आ अन्ततोगत्वा जखन कवि अपन सिद्धान्त सँ नहि डिगलाह तखन सभ कियो कविपर अपन कोपके प्रयोग करब शुरु कयलाह। संग देनिहार जे सुच्चा लोक छथि ओ शुरु सऽ आखिर धरि संगे रहताह, आ जे केवल गडबडघोटालेबाज छथि ओ सभ दिन खण्डी-खण्डी खेल खेलेबे करताह। अस्तु!



सार्थक परिणामक भविष्यवाणी:
*जे कहियो नहि भेल छल से एहि बेर होयत - मिथिलाक आन्दोलनमें ई एक ऐतिहासिक पहल साबित होयत। 
*मिथिला राज्यक माँग समस्त आम मिथिलावासी लेल बनत।
*मिथिलाक सरोकार मिथिलावासी बुझताह।
*मिथिलाक हरेक अभियानी एकजूट बनताह आ बतहपनी देखेनिहार कतय फेकेता जेकर मिथिलाक आन्दोलन सँ सरोकार एकदम नहि रहत।
*६ महीना के भीतर मिथिलाक आन्दोलन लेल एक निश्चित प्रारूप बनत।
*कवि एकान्त स्वयं अपन अनेको ऐगला कार्यक्रम के घोषणा करताह।
*मिथिलाक आरो युवाशक्ति अपन मातृभूमि आ मातृभाषाक सेवार्थ एहि आन्दोलनसँ जुडताह।

उपरोक्त समस्त सुखद परिणाममें स्वार्थविहीन आन्दोलनकर्मी सफल हेताह, बाकी के जहिना होइत आयल अछि से होयत जे कतहु कोनो पूछ तक नहि हेतैन।

जय मैथिली! जय मिथिला!!

http://www.facebook.com/SeparateMithilaStateSamithi 

सोमवार, 18 मार्च 2013

चलू जंतर - मंतर देल्ही 22-25 मार्च २०१ ३



  Pankaj Jha 
चलू जंतर - मंतर  देल्ही  --
 चलू जंतर - मंतर  देल्ही  22-25 मार्च २०१ ३ 

  अधिकार रेली मे माननीय मुख्य मंत्री जी के भाषण पर गौर करू। नितीश जी अपन पूरा भाषण मे बिहारक जते समस्या गिनेला ओ सब उत्तर बिहारक (मिथिला) समस्या छल। मतलब अशपष्ट आइछ जे नितीश जी सेहो बुझइत छईथ जे मिथिला पिछरल अइछ। मुदा अखन तक आम मैथिल जिनका राहत कोश के आदत सं सरकार निकम्मा बनेवाक प्रयश करैत अइछ, ओ अखानों अपन पिछरापन स अनिभिज्ञ छईथ।
गाम मे रहनीहार राहत मे मस्त छईथ। परदेश वला के कोनो लेने देन नई छैन। एकर विरोध के करत? अपन हक के मांग के करत? पिछरल लोक के डर होई छैन, आम आदमी के बात के सुनत?, संम्पन लोक के गरज नई छैन। तखन त मिथिलाक विकाश नई होबाक मुख्य कारण येह जे हम सब समुचित ढंग स अपन बात के सरकार तक नई पाहुचा सकलौअखन कवि एकांत एक टा अनशन के घोषणा केलखिन, आब लिया आहु मे मारा मारी, बहुत युवा हिनकर समर्थन मे आयला, बहुत हिनका प्रोत्शहित सेहो केलखिन, बहुत संग मे ठार भेला, मुदा आहु मे किछू लोक अपन बुद्धिक प्रकासठा के परिचय द ई तक कहे लागला जे ले आब त कवि एकांत फइश गेला। हिनका आब पिपली लाईव बाला हाल भ गेल। काहू जे कवि एकांत की आहा के पिपली लाईव वला किरदार जांका बुरबक बुझाइत छईथ? कवि एकांत माँ मैथिली के ओ समर्पित बेट्टा छईथ जिनका स मैथिल युवा के प्रेरणा लेवक चाही। हुनक अई समर्पण,त्याग के अपन दूषित मानशिकता स गंदा करय बाला लोक के मात्र आते अनुरोध जे जदी आहा किछू कई नई सकाइत छि त आहा के कोनो हक नई जे सार्थक पहल करे बाला लोक के टाग खिची।आरे कवि एकांत एक हार के लोक छाईथ, हुनका बाली के बकरा बना देल गेल, ई सब विकृत मानसिकता स ओई सपूतक त्याग के गंदा नई करू। आहा के अते चिंता कवि एकांत के अइछ त रोकी लिय हुनक, कहियौन जे मैथिल सब आहा के ठगइत छईथ, देख लिय की जबाब भेटत।
मिथिलाक विकाश मे सब स पइघ वाधक मैथिल खुद छईथ। आपसी घिनमा-घिनौज, कही हमारा स आगा ओ नई चल जाइथ, कही हम पाछा नई रही जाई , ई मानशिकता के जा धईर त्याग हम सब नई करब, ता धईर समाज के लेल हम सब खुद श्राप बनल रहब। आ ई श्राप के फायदा नेता आ राजनीतिक दल मिथिला स उठाबैत राहत।

शुक्रवार, 8 मार्च 2013

नारी दिवसके अवसरपर अन्तरक्रिया कार्यक्रम


प्रथम  दिन -
नारी दिवसके अवसरपर अन्तरक्रिया कार्यक्रम
महिला अधिकारके वात भाषणैमे सिमित राखलाके कारण अखनो धरि महिला सभ पिछडल अवस्थामे रहल काईल वृहस्पति दिन आयोजित एक कार्यक्रमके वक्तासभ वतौने अछि । अन्तर्राष्ट्रिय नारी दिवसके अवसरमे क्रेस नेपालद्वारा सप्तरीके पातोमे आयोजित सभामे ओ सभ महिला अधिकारके वात ब्यवहारमे लागु नै भेल आ पुरुषसभ महिलाके आगा वढवैके लेल सहयोगी भुमिका नहि केलक कहैत असन्तुष्टी ब्यक्त केलैन ।
कार्यक्रममे अगुवा महिला ललिता राम–महिलाके काममे पुरुषके सहयोग नहि रहलासं ओ सभ घरेलु कामकाजे मे सिमित रहल  वतौलेन ।

      क्रेस नेपालके उपाध्यक्ष गंगाप्रसाद रामके अध्यक्षता आ मंजुला खातुनके प्रमुख आतिथ्यमे आयोजित सभामे शिक्षीका मञ्जु श्रेष्ठ प्रजनन् अधिकारके पहिल हकदार महिला रहल वतौलेन । कार्यक्रममे महिला अधिकारकर्मी जानकीदेवी सादा, दिना भद्री सामुदायिक संस्था पातोके चन्द्रीका सदा, लक्ष्मी महिला सामुदायिक संस्था भुतहीके यज्ञदेवी राम, ईन्सेक प्रतिनिधि मनोहर पोखरेल, पशुसेवा केन्द्र पातोके राजलाल पण्डित, सुखाई विश्वकर्मा लगायतके वक्तासभ मन्तब्य ब्यक्त केने छल ।

       अहिना १०३औं अन्तराष्ट्रिय नारी दिवके अवसरमे दहेज मुक्त मिथला नेपालद्धारा राजविराजमे सेहो एक कार्यक्रम भेल छल । आयोजक संस्थाक अध्यक्ष करुणा झाके अध्यक्षता आ सहायक सिडियो विश्वराज औझाके प्रमुख अतित्थ्यमे सम्पन्न कार्यक्रममे नेपाल पत्रकार महासंधके अध्यक्ष धिरेन्द्र प्रसाद साह ,सचिव राजेश झा , एकिकृत माओवादिके जिल्ला संयोजक उमेस यादव, तराई मधेस लोकन्त्रीक पार्टीके रामप्रित यादव , सदभाबना पार्टिके किशोर कुमार यादव, नागरिक समाजके थान सिंह भन्साली राजनिकि दलके भोगेन्द्र चौधरी, सहितके व्यक्तिसभ  मन्तव्य व्यक्त केने छल ।

कार्यक्रममे महिला हिंसा अन्त्य करैके लेल कैहनो काज करैल हमसभ तयार रहव कहैत उपस्थित राजनितिक दल, प्रसासनिक निकायके प्रतिनिधी नागरीक समाज, सञ्चारकर्मी सहितके उपस्थित सभ ६ वुदे प्रतिवद्धता पत्रमे हस्ताक्ष्ँर समेत केने अछि ।

 दोसर दिन -

१०३म. विश्व नारी दिवस मनाओल गेल

१०३म् अन्तर्राष्ट्रीय नारी दिवसके अवसरमे महिला तथा बालबालिका कार्यालय आ आबद्ध संस्थासभद्वारा आई राजविराजमे बृहद ¥याली आ सभाके आयोजना कएल गेल अछि । 
शिव मन्दिर प्राङ्गणसं निकलल ¥याली महिला हिंसा विरुद्धके नारा बाजी करैत नगरपरिक्रमा कएने छल । 
बलात्कारीके फांसि दियौं, सभहक इच्छा बेटीके शिक्षा, घरमे होमयबाला हिंसा अन्त करु लगायतके नारा सहितके ¥याली जिविस सभाकक्षमे पुगि सभामे परिणत भेल छल ।

    कार्यक्रममे महिला हिंसाके मुल कारण दहेज, डायन जोगिन प्रथा समेतके कुरिती भेल कहैत वक्तासभ ओकर अन्त हेबपलमे जोड देने छल । 

महिला तथा वालवालिका कार्यालयके प्रमुख देवकी न्यौपानेके अध्यक्षता आ सहायक सिडिओ विश्वनाथ ओझाके प्रमुख आतिथ्यमे सम्पन्न भेल कार्यक्रममे नेपाल पत्रकार महासंघ सप्तरीके अध्यक्ष धिरेन्द्र साह, दहेज मुक्ता मिथिलाकी अध्यक्ष करुणा झा, सचिव साधना झा, प.वि.उ.मा.विके प्राचार्य मिना ठाकुर, ऐट नेपालके अध्यक्ष किशोर कुमार यादव केसी आ पत्रकार चन्दन यादव समेत बाजल छल ।

ओहि कार्यक्रममे दहेज मुक्त मिथिलाके आयोजनामे दहेजके विरुद्धमे मैथिली नाटक “दहेजक परिणाम” समेत मञ्चन केने छल । बेटीके दहेज देबके बाध्यता सं कतेको गरिब बाप माई आपन बेटीके अभिश्रापके रुपमे देखैके संकेत करैत ओहिके समाप्तीके लेल बेटा सरह बेटीके भी शिक्षा आवश्यक रहल नाटकद्वारा संदेश देल गेल छल ।

नाटकमे साधना झा, भुपेन्द्र मण्डल, अनु मेहता, अन्जु यादव, प्रतिभा झा, आयूष झा, पंकज मण्डल, सन्जु यादवके व्यक्तिसभ रोचक अभिनय प्रस्तुत केने छल । 

करुना झा 
Rajbiraj-7, Saptari
Mobile No.k~ 977-9842822417
DPHO, saptari

मंगलवार, 5 मार्च 2013

दहेज मुक्त मिथिलाक सफलतम २ वर्ष पूरा

दहेज मुक्त मिथिलाक सफलतम २ वर्ष पूरा

दहेज मुक्त मिथिला: तेसर वर्षमें प्रवेश(विशेष प्रतिवेदन)
दहेज मुक्त मिथिला आइ ३ मार्च २०१३ तेसर वर्षमें प्रवेश पौलक - विगत दू वर्षमें उपलब्धि सामान्य सऽ सेहो निचां रहल जेना हमर अनुभूति कहि रहल अछि। असफलता-सफलताक द्वंद्वमें फँसबाक लेल नहि, लेकिन आत्मनिरिक्छण लेल ई जरुरी जे दुनू विन्दुपर समीक्छा जरुर कैल जाय।

सफलता आ असफलताक सूची:सफलता १. सौराठ सभागाछी पुन: उत्थान हो ताहि लेल सार्थक सहकार्य। २०११ व २०१२ दुनू वर्ष।  
असफलता १. बहुतो युवा द्वारा गछलाके बादो सभामें नहि आबि चोरा-नुका के विवाह करब घोर असफलता आ शायद आरोपके सिद्ध करयवाला जे कहयकाल मात्र दहेजके परित्याग लेल शपथ लेल गेल लेकिन विवाह घडी चोरा-नुका कार्य करब याने अवश्य किछु संदेहास्पद व्यवहार तरफ इशारा करैत अछि।
  सफलता २. दहेज मुक्त मिथिला लेल पूर्ण प्रजातांत्रिक चुनाव अनलाइन सभा द्वारा करैत एक कार्यकारिणीक गठन।
  असफलता २. मैथिलक आम स्वभाव जे आपसमें मेलके कमी, व्यक्तिवादी बनैत मुद्दाके दरकिनार करैत केवल आपसमें घमर्थनबाजी करब तेकर खुलेआम प्रदर्शन आ विभिन्न बहाने पलायनवादी मानसिकताक प्रदर्शन। एकजूटतामें कमी, अभियानक गतिमें शिथिलता।

सफलता ३. दहेज मुक्त मिथिला लेल वेबसाइटके निर्माण, फीचर व फेसिलिटी पर सुन्दर समझदारीक संग कार्य संचालन सँ एक कीर्तिमान स्थापित कैल गेल।
  
असफलता ३. उपरोक्त वेबसाइट के समय-समयपर स्थिति-परिस्थिति अनुरूप बदलैत आम जन लेल उपयोगी बनेबाक छल, लेकिन वेब एडमिनिस्ट्रेटर राजीव झा'क व्यक्तिगत व्यस्तता वा अन्य कारणे आवश्यक आश्वासनक बावजूद कोनो कार्य पूरा नहि होयब बहुत पैघ असफलताक द्योतक, एकर समाधान लेल समुचित सहकार्य के पूर्ववत् राखब जरुरी या नहि तऽ नव वेबसाइट निर्माण लेल कदम उठेबाक आवश्यकता।
  
सफलता ४. २०११ अगस्तमें विराटनगरमें संकल्प दिवस भव्यताक संग मनायल गेल - सैकडों जनसमूह दहेजक कूप्रथा विरुद्ध शपथ लेलाह। नेपालक विभिन्न एफ-एम पर अभियानक जोर-शोर सँ आवाज भेटब - हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण लगायत नेपालक विभिन्न पत्र-पत्रिकामें अभियान प्रमुखता सँ जगह पेलक जेकर सार्थक संवाद सँ लाखों जनसमूह लाभान्वित भेल। 
  असफलता ४. २०११ में दिल्लीमें राष्ट्रीय अधिवेशन करबैत सगर मिथिलामें दहेज विरुद्ध शंखघोषके महा-योजना विफल। कारण अनेक - दिल्लीमें संगठनके कोनो मजबूत रूप नहि, जे संग वैह द्रोही... आ कतेको अन्य कारण। फलस्वरूप कार्यकारिणीमें आपसी कलह आ टूट-फूट, एक नव संस्थामें एहि तरहक व्यवहार सँ कमजोरी आयब स्वाभाविक।
  
सफलता ५. २०११ के दुर्गा पूजामें गाम-गाम भ्रमण आ अभियानक प्रचार।

असफलता ५. अभियानमें अपेक्छा सभ सदस्य सँ रहितो बहुतो गाम पधारल सदस्य द्वारा कोनो व्यक्तिगत प्रयास नहि कयला सँ हतोत्साहके प्रसार।

सफलता ६. २०११ दिसम्बरमें विराटनगरक अन्तर्राष्ट्रीय मंच सँ जनसमूह द्वारा दहेज मुक्त मिथिलाक अभियान प्रति समर्थन हेतु सहयोग के आह्वान, नेपालमें दमुमि निर्माण लेल करुणाजी द्वारा प्रतिबद्धता आ सफलतापूर्वक संस्थाक पंजियन कार्य पूरा। 

 असफलता ६. आन्तरिक राजनीति आ आरोप-प्रत्यारोप सँ पुन: आपसी विश्वासमें ह्रास, पंजियन उपरान्त सोचल कार्य में देरी। 
  सफलता ७. सौराठ सभामें जानकी नवमी मनयबाक कार्य पूरा।
  असफलता ७. जाहि तरहक विचार गोष्ठी करेबाक नियार छल ताहिमें घोर कमी - पुन: आपसी विश्वासमें कमीके कारण तथा अनावश्यक शंका तथा गैर‍-जरुरी राजनीतिक हस्तक्छेप सँ अभियानकेँ हतोत्साहित कैल गेल। खर्चक बावजूद आवश्यक उपयोगितामें अकाल।
  सफलता ८. सौराठ सभा २०१२ में दू दिन सफलतापूर्वक सहभागिता।
  असफलता ८. सौराठ सभा २०१२ में राजनीति हस्तक्छेपके कारण शिथिलता।
  सफलता ९. दुर्गा पूजा २०१२ में पुन: गाम-भ्रमण आ सौराठ धरोहर के पुनरुत्थान संग माँगरूपी दहेजक प्रतिकार लेल प्रत्येक गाममें एक समिति निर्माण लेल अनुरोध। आगामी सौराठ सभा २०१३ तक एकर प्रतिवेदन प्रकाशन करबाक नियार।

असफलता ९. हरेक कार्य करबाक लेल समूहगत प्रयासके सार्थकता बुझबा में अधिकांश सदस्य असमर्थ आ बस केवल आपसी कट्टी-फट्टी खेल में महत्त्वपूर्ण कार्य करबा तरफ किनको ध्यान नहि होयब।
सफलता १०. राष्ट्रीय स्तर केर पंजियन लेल समस्त कागजी कार्य पूरा - दिल्लीमें आवेदन जमा। पंजियनक प्रक्रिया निरंतरतामें।
सफलता ११. सौराठ सभा २०१२ सँ दू दूल्हाक दहेज मुक्त विवाह करबाक कारणे सम्मान कार्यक्रम विराटनगर के अन्तर्राष्ट्रीय मंच सँ नेपालक उप-प्रधान तथा गृहमंत्री विजय कुमार गच्छदार द्वारा प्रशस्ति पत्र तथा उपहार प्रदान करबाक कार्यक्रम दहेज मुक्त मिथिला (नेपाल) - अध्यक्छा श्रीमती करुणा झा आ सहकार्य मैथिली सेवा समिति - विराटनगर।
असफलता ११. मधुबनीमें औझके दिन तेसर वर्षगांठ मनयबाक लेल अन्तर्विद्यालय स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता सँ युवा-पीढीक मानसिकता ऊपर आवश्यक प्रेरणा-स्थापना पर परीक्छा आ संयोजकक अनावश्यक भय तदोपरान्त पलायनवादी मानसिकताक कारणे विफलता।

आगामी योजना:
१. अप्रील २०१३ में मधुबनीमें ‌प्लस २ स्तर के परीक्छा देल छात्र-छात्रा द्वारा दहेज विषय पर वृहत् वाद-विवाद प्रतियोगिताक आयोजन।
२. कम से कम एको गाम में ५ गरीब छात्राक पढाई करेबाक लेल संस्था द्वारा गोद लेबाक प्रक्रिया।
३. नेपालमें प्रत्येक महीना विद्यालय-महाविद्यालय स्तरीय युवा-युवती द्वारा वैचारिक आदान-प्रदान तथा सी-एफएम राजविराज द्वारा रेडियो प्रसारण।
४. जानकी नवमी मनेबाक लेल दरभंगा जिलामें कार्यक्रम। सौराठ सभा तर्ज पर वैवाहिक योग्य युवा-युवतीक लेल सभा आयोजन पर समूह-बहस कार्यक्रम।
५. हरेक जिलामें किछु न किछु कार्यक्रम करबाक नियार। संयोजन लेल स्थानीय कार्यकर्ता व संरक्छक के खोज निरंतरतामें।
एवं बहुतो अन्य! 
महत्त्वपूर्ण नोट:१. दहेज मुक्त मिथिला कोनो एनजीओ नहि छी - ई स्वस्फूर्त एवं स्वयं-सहयोगी युवा ताहू में अपन पैर पर ठाड्ह ओहेन युवा शक्ति जिनकामें किछु सार्थक कार्य करबाक लेल त्याग करबाक संग समर्पित रहबाक प्रतिबद्धता सेहो छन्हि। ताहि हेतु शुरुएमें पहाड ढाहय के सपना देखब अतिश्योक्तिपूर्ण अपेक्छा करब होयत। स्पष्ट करी जे आइ धरि लगभग लाख में खर्च कैल गेल अछि जे मात्र जनमानसमें ई चर्चा शुरु करा सकल अछि जे दहेज मुक्त मिथिला नामक अभियान जमीनपर उतरल अछि, आ जखन नामक चर्चा शुरु भेल तऽ अवश्य एकर शीघ्र सार्थक प्रभाव सेहो देखय में आयत। लेकिन दिल्ली एखनहु एहि लेल दूर अछि जे आन्दोलनमें जुडनिहार लोकके संख्या लगभग नगण्य अछि। २०१३ ई. एहि सपना के पूरा करत तेकर पूर्ण तैयारी अछि। 
२. दहेज प्रथा आ सम्बन्धित अनेको बात लेल समाजमें बहुतो तरहक भ्रम-भ्रांति पसरल अछि, ताहि सभके समाधान लेल हमरा लोकनिक शोध कार्य निरन्तरतामें अछि। एहि सभ के अध्ययन लेल निम्न लिंक सभ पर जरुर विजीट करी।
  
(उदाहरणार्थ: दहेज ओ नहि जे लडकीवालाक माँग विरुद्ध माँग कैल गेल हो, बल्कि समस्त माँग जे लैंगिक विभेद उत्पन्न करैत हो आ आपसी विश्वास व स्वेच्छाचारिताक विरुद्ध हो। आदर्श विवाह केहेन हो। दहेज पर भारतीय संविधान कि कहैत अछि। समूहमें कोन लडका वा लडकी अपन विवाह दहेज मुक्त करय लेल चाहैत छथि। एहेन बहुत तरहक तथ्यांक व सैद्धान्तिक निरूपण करबाक निरन्तर प्रयास करबाक लेल हम सभ दृढ-प्रतिग्य छी।)
दहेज मुक्त मिथिला कार्यालय (भारत): ई -७५, सोम बाजार, नन्हे पार्क,नयी दिल्ली ११० ०५९,भारत।
फोन: ०९९१०६०७७२० (संतोष नारायण चौधरी ) एवं ०९३१२४६०१५० (मदन कुमार ठाकुर )।

कार्यालय (नेपाल):राजविराज - ७, सप्तरी, नेपाल।फोन: ००९७७-३१-५२२८३०.

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

पहले अंडा या पहले मुर्गी?




  
     यह प्रश्न तो आपने पहले भी कई बार सुना होगा और इसका उत्तर देने का प्रयास भी किया होगा परन्तु इसका पूर्णरूप से समाधान शायद ही हो पाया होइसका समाधान इतना आसान नहीं है क्योंकि यह प्रश्न ही अपने आप में बहुत जटिल है.  इसलिए इस प्रश्न के उत्तर को समझ ने से पहले आपको बाह्य एवं सामान्य विचारों से ऊपर उठाना होगाइसका एक कारण तो यह है कि जब तक हम अपने वाह्य विचारों के जाल में उलझे  रहते हैं तब तक हमें  सत्य समझ में नहीं आ सकतासत्य कि समझ तो तभी आयगी जब हमारा मन और बुद्धि शांत होंगे क्योंकि मन और बुद्धि के चंचल रहते हमें वही दिखाई देता है जो ये हमें दिखाना चाहते हैंकमरे से या परदे से पीछे की चीज हमें तभी दिखाई देगी जब हम इन भौतिक चक्षुओं को बंद करके अंदर के चक्षुओं से देखने का प्रयत्न करेंगे.

कई बार किसी बात को समझने के लिए हमें उदाहरणों का या किसी पूर्व घटना का सहारा  लेना पड़ता है. उपरोक्त  प्रश्न  को समझने के लिए भी हमें एक ऐसी घटना का सहारा लेना पड़ रहा है जिसकी सत्यता के बारे में कोई वैज्ञानिक  ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है परन्तु चूंकि  पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है इसलिए इस पर विश्वास करना पड़ता है यदि कोई विश्वास नहीं करे तो उसकी इच्छा.  कहते हैं कि जब यह स्रसठी   नहीं थीसब  जगह  पानी ही  पानी थासब जगह अंधकार ही अंधकार थाकोई जीव-जंतु भी नहीं था तब  एक अद्भुत  शब्द की गुंजार हुई (इस शब्द को अनहद शब्द या आदि शब्द कहते हैं). इस शब्द के होने से उस जल में हलचल पैदा हुई और साथ ही साथ प्रकाश भी पैदा हुआ. इस प्रकाश ने जल की हलचल को विकासक्रम का रूप दिया जिससे चलते उस जल में जैसे  ढूध के मथने  पर मक्खन ऊपर आ जाता है वैसे ही उस जल के ऊपर भी एक बहुत बड़े  आकार का गोला जो सुनहरे रंग का था तैरने लगा. कालांतर में यह गोला जल के सतह  पर टिक गया और उस अदृश्य एवं सर्वशक्तिमान शक्ति द्वारा पोषित होने लगा. विकासक्रम  की प्रकिर्या  के सिद्धांत के अनुसार जब यह अंडा अपनी अवधि पूर्ण होने पर फूटा तो स्रश्ठी का सृजन हुआ.

इस सुनहरे अंडे को हिरण्यगर्भ भी कहते हैं और इसी को इस स्रसठी का उपादान कारण माना गया हैअब आप स्वयं विचार कीजिये कि पहले अंडा आया या मुर्गी आई. 

 सोनू  झा 

मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

अपनेक समस्त भाई - बोहिन सदर आमंत्रित छी


अपनेक समस्त  भाई  - बोहिन   सदर  आमंत्रित  छी 






बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

कीर्ति स जीवते


 Pravin Narayan Choudhary


      कीर्ति जे सर्वहितकारी हो वैह प्रतिष्ठा पबैत छैक आ कीर्तिकार सदा-सदाके लेल अमर बनैत छैक। ईर्ष्यालू स्वभावके लोक ओहि कीर्तिकार सँ द्वेषभाव रखैत छैक, लेकिन आजुक फालतु राजनीतिके चलते ओहेन लोक के कीर्ति कम बल्कि जाइत बेसी देखल जाइत छैक। दुष्परिणाम - विपन्नता! उदासीनता! रचनाविहिनता! विनाशोन्मुख समाज! कहू कि फायदा? 

तदापि जन्मैत रहैत छैक गुदडी सँ लाल आ उपजैत रहैत छैक हीरा-मोती-जवाहरात! मिथिलाके भेटैत रहल छैक सुन्दर-सुन्दर रचनाक साहित्यिक सुधा सौगात। आउ देखी जे कतेक लोक कि-कि कयलन्हि।

१. रामेश्वर चरित मिथिला रामायण (१९१४/१९५४): लालदास (१८५६-१९२१)

२. अम्बचरित (१९५६): सिताराम झा (१८९१-१९७५)

३. रावण वद्ध (१९५५): जिवनाथ झा (१९१०-१९७७)

४. सितायणा (१९७४): वैद्यनाथ मल्लिक 'विधु' (१९१२-१९८७)

५. राम सुयश सागर: विश्वनाथ झा 'विषपयी' (प्रकाशन वर्ष आ कविक परिचय उल्लेख नहि भेटल)

६. श्री हनुमानचरित (१९९७): कालिकान्त झा

७. सुभद्राहरण (१९५९): मुन्शी रघुनन्दन दास (१८६०-१९४५)

८. राधाविरह (१९६९): काशीकान्त मिश्र 'मधुप' (१९०६-१९८७)

९. किचक वद्ध (१९६१): तंत्रनाथ झा (१९०९-१९९४)

१०. कृष्णचरित (१९७६): तंत्रनाथ झा

११. रुक्मिणिहरण (१९८०): बबुआजी झा 'अजन्ता' (१९०४-१९९६)

१२. प्रतिग्यापाण्डव (१९९५): बबुआजी झा 'अजन्ता'

१३. पराशर (१९८८): काञ्चीनाथ झा 'किरण' (१९०६-१९८९)

१४. चाणक्य (१९६५): दिनानाथ पाठक 'बन्धु' (१९२८-१९६२)

१५. गंगा (१९६६): लक्छ्मण झा

१६. अगस्त्यायनी (१९८०): मार्कण्डेय प्रवासी

१७. दत्तावती (१९८७): सुरेन्द्र झा 'सुमन' (१९१०-२००२)

१८. श्री चैतन्य चन्द्रायण (१९७२): रामचन्द्र मिश्र 'मधुकर'

१९. स्मृतिसहस्री (१९७८): बुद्धिधारी सिंह 'रामाकर'

२०. जय राजा सलहेश (१९७८): मतिनाथ मिश्र

२१. त्रिपुण्ड (१९८४): धिरेश्वर झा 'धिरेन्द्र' (१९३४-२००४)

२२. मुक्तिपथ (१९९२): महिनाथ झा

२३. परमशिव (१९९५): महिनाथ झा

२४. अनङ्गकुसुम (१९९९): ब्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म' (१९१८-१९८६)

(उपरोक्त रचना सभ ग्रंथ रूपमें प्रकाशित अछि।)

२५. कृषक (१९४७): माथुर (१९२९-१९९९)

२६. द्रोहाग्नि (१९६९): लोकपति सिंह

२७. संन्यासी (१९४८): उपेन्द्रनाथ झा 'व्यास' (१९१७-२००२)

२८. पतन (१९६९): उपेन्द्रनाथ झा 'व्यास' 

२९. लखिमा रानी: केदारनाथ लाभ (१९३२)

३०. भारती (१९६४): केदारनाथ लाभ (१९३२)

३१. शरशय्या (१९६२): बुद्धिधारी सिंह 'रामाकर'

३२. समाधि (१९८३): बुद्धिधारी सिंह 'रामाकर'

३३. साबरमती (१९९०): बुद्धिधारी सिंह 'रामाकर'

३४. सावित्री: कुशेश्वर कुमार (१८८१-१९४३)

३५. नमस्य (१९६८): तंत्रनाथ झा (१९०६-१९८४)

३६. मंगलपंचासिका (१९७३): तंत्रनाथ झा

३७. सीता (१९६७): रविन्द्रनाथ ठाकुर

३८. नरगंगा (१९६८): रविन्द्रनाथ ठाकुर

३९. पंचकन्या (१९७७): रविन्द्रनाथ ठाकुर

४०. शान्तिदूत (१९६९): लक्छ्मण झा

४१. उत्सर्ग (१९७५): लक्छ्मण झा

४२. धृतराष्ट्र विलाप (१९७६): रमापति चौधरी

४३. सप्त वर्णमाला (१९८१): रमापति चौधरी

४४. परदेशी (१९७८): काली कुमार दास

४५. सकुन्तला (१९७५): शारदा दत्त झा

४६. सकुन्तला (१९८१): दामोदर लाल दास (१९०४-१९८१)

४७. नोर (१९७९): यगेश्वर झा

४८. कर्ण (१९७९): अच्युतानन्द दत्त

४९. कंस-वद्ध (१९७९): अच्युतानन्द दत्त

५०. जानकी रामायण (१९८०): लाल दास

५१. उत्तरा (१९८०): सुरेन्द्र झा 'सुमन' (१९१०-२००२)

५२. कृष्णावतरण (१९९५): सुरेन्दर झा 'सुमन'

५३. सिताचरितामृत (१९८१): हिरालाल झा 'हेम'

५४. एकलव्य (१९८०): अमरेन्द्र मिश्र

५५. सत्यकेतु (१९७७): अमरेन्द्र मिश्र

हमर नोट: उपरोक्त पुस्तकमें समस्त संकलन के ऊपर संछिप्त परिचयक संग मिथिलाक साहित्यिक इतिहास देल गेल छैक। कुल ३५७ पृष्ठमें वर्णन! मिथिलाक जयकारा लेल एतेक कीर्तिरूपी संपत्ति पहिले जमा कय देल गेल छैक। ई २००२ ई. धरिक मोट संकलनक परिचय बुझा रहल अछि। एक सुन्दर शोध संग प्रस्तुत एहि पुस्तक द्वारा मैथिलकेँ अपन सम्पन्न इतिहास सँ परिचय भेटैत छन्हि आ आगू सेहो एहि सुन्दर सम्पन्नताकेँ बरकरार रखबाक जिम्मेवारी सेहो! :)

Source: A History of Modern Maithili Literature (Post Independence Period) - by Devkant Jha पेज: ६-५५

शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

राज्य निर्माणमे सेहो पछुआ गेल - अप्पन मिथिला



Mithila Mahan Slideshow: PRAKASH’s trip to Darbhanga (near Janakpur) was created with TripAdvisor TripWow!



Krishnanand Choudhary _


॥राज्य निर्माणमे पछुआ गेल : अप्पन मिथिला॥

         भारतमे आब राज्य निर्माण दोसर चरणमे प्रवेश कए रहल अछि । पहिल चरणमे भाषा केँ आधार बनाए राज्यक निर्माण कएल गेल , जे पूर्णता केँ प्राप्ति नहि केलक , कारण जे मिथिला सन भाषा ओ संस्कृतिमे समृद्ध नहि बनि सकल अछि । मिथिला राज्य बनैयक सभ कसौटी पर खरा उतरैत अछि ।

तेलंगाना सन राज्य बनला सँ राज्य निर्माणक दोसर चरण कहल जाएत , कियाक तँ तेलंगाना आन्ध्रप्रदेश सँ अलग कए बनाएल जाएत आ दुनू कए भाषा तेलगू छी , अर्थात राज्य निर्माणमे भाषा आधार नहि भए क्षेत्रीय मुद्दा आधार बनि रहल अछि ।

जेना मिथिला विकासमे पिछरि गेल , तहिना राज्य निर्माणमे सेहो पछुआ गेल । पूर्वक लोक सभ एहि दिशामे सद्‌प्रयास केलनि , मुदा कतौ ने कतौ खोट रहल , जाहि कारणेँ भारतक मिथिला सन अतुल्य क्षेत्र केँ अपन पहचान बचेबा खातिर संघर्ष करए पड़ि रहल अछि । मिथिलाक युवा सभ आगू बढि रहल छथि.... युवामे जागृति भए रहल छथि.... अप्पन मिथिला लेल....अप्पन माटि ओ पानि लेल....अप्पन मिथिला राज्य निर्माण लेल ।

मैथिल युवक सभ सँ निवेदन :- जे जतए छी ओतैए अप्पन मिथिला राज्य निर्माण लेल आन्दोलन करैय जाउ ।

वन्दे...मिथिला
जय हिन्द


विषय: कवि एकान्त द्वारा चार-दिवसीय अनशन पर लोकक चुप्पी।

चारू कात मिथिला-मिथिला हल्ला मचल अछि लेकिन संगठित रूपमें कतहु किछु नहि! बड दु:खक बात जे दिल्लीमें एक युवा ४ दिनक अनशन करत मिथिला राज्य निर्माण वास्ते लेकिन एहनो घडी समर्थन देनिहार अनशनकारी लग तरह-तरहके सौदाबाजी कय रहल छथि। कियो ई कहैत जे अनशनकारी हमर संगठन - हमरहि छत्रछाया - हमरहि आदेश मानैथ तऽ कियो अन्य तरहक शर्त मुदा 'हम्मे-हम्मा गीत' गाबैत अनशनकारी के मानसिकता पर अत्याचार कय रहल छथि, ओतहि बिना कोनो पूर्व शर्त आ मिथिला राज्य लेल कैल जा रहल विरोधक कार्यक्रममें युवा द्वारा पहिले बेर एतेक पैघ जोशीला स्वरमें आगाज के स्वागत हेतु आगू आबयमें हिचकिचा रहल छथि। आखिर कियैक? 

एतेक रास मैथिली साहित्य के सेवार्थ दिन-राति एक केने सुरेबगर रचनाकार सभ छथि मुदा कवि एकान्त के आह्वान प्रति नजैर ईमानदार नहि छन्हि - कियैक?

मिथिला आवाज लग सेहो कवि एकान्तके आवाज नहि पहुँचल अछि, कियैक?

कतेको तरहक मिडियाके डिबिया जरौनिहार खाली 'हम्मा-हम्मा गीत' कखन तक गाबैत रहता?

किऐक नहि कवि एकान्त के अनशन के मिथिला राज्य लेल एक टर्निंग प्वाइन्ट मानैत समस्त मिथिला-मैथिलीसेवीकेँ गूटनिरपेक्छ मंच सँ जुडबाक चाही आ बिना कोनो शर्त आगू आबि आन्दोलन के समर्थन करबाक चाही?

मिथिला राज्य के जे घरहिमें विरोधी छथि तिनको सोचब जरुरी जे आखिर युवा पीढीमें एहेन तरहक सोच आबि गेल, परिस्थिति कतहु ने कतहु ई दरशा रहल अछि जे अवस्था ठीक नहि अछि.... तखन बहानामें मिथिला राज्य लेल संग नहि देब आ कूतर्की बहस सँ निज‍--- होशियारी मात्रके प्रदर्शन करैत बेकार समय के बितायब, आखिर कतेक दिन?

ई आवाज थीक - एहि मंच सँ एक सर्वमान्य नेतृत्व चुनाव के! अपन-अपन विचार जरुर राखी!