(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम घर में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घर अप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

मंगलवार, 29 जून 2010

बंगाली बाबा

लेखक - मुकेश मिश्रा

बंगाली बाबा

हमर गामक बंगाली बाबा कऽ के नै जनैत यऽ
बंगाली बाबा अपन आधा ज्निगी पढ़ाइये
में बितौला , परबा -लिखबा के उपरान्तो,
हिनका में ओं स्वभाब नै छल जे बिचार
एगो बिद्वता में हैत यऽ ,सब कऽ हिन् भाबना
सऽ देखैत छलखिन ,और अपन बिद्वांक प्रसंसा
करैत रहै छला ,धोखो सऽ जऽ कियो पढ़ल-लिखल
सजनऽ हुनका आगा परि गेलैन ,तऽ फेर जामैत
दस बीसटा लोक नै आबी जय ता धरी वो अपन
ब्याकरण कऽ तानड्ब सऽ सब कऽ ह्कोचित कऽ के
छोरैत छला ,
एक दिन कोट कऽ किछ काज सऽ, झंझारपुर बिदा भेला ,
कमला बलान पर जा कऽ नाव में बैसला ,...
किछ देर आगा गेलात,की अपन अहंकार भरल
मुह सऽ नाव बला कऽ पुछला ....
बंगाली - हवऽ तोरा ब्याकरण अबै छऽ
नाव बला - नै मालिक हमरा नै आबै यऽ
बंगाली - धू -धू तोहर सब कऽ याह लीला छव
(नाव बला चुपचाप सबटा सुनैत छल , मेघ में
बादल से लागल जायत छल,)
बंगाली -हवऽ भूगोल -नागरिक अबै छऽ
नाव बला - नै मालिक
बंगाली - तहन तऽ तोहर पूरा ज्निगी बेकार छव
(नाव बला सबऽ किछ चुपचाप सुनैत छल, अचानक
हबा कऽ तेज सऽ नाव बिच भवर में फैस गेल ,)
नाव बला - मालिक हेलल अबै यऽ
बंगाली - हमरा हेलल नै अबै यऽ
नाव बला - तहन तऽ अपन ब्याकरण,भूगोल ,नागरिक
कऽ मदत के लेल बजा लिय , कियाकि नाव भवर में फैस
गेल , किछ देर में डूबी जायत ,
(एतेक कहि कऽ नाव बला नाव सऽ कुदी गेल ,बंगाली बाबा
मुह तकिते रही गेलएत,)
तहन बंगाली बाबा कऽ समझ में एलन जे आदमी कऽ एगो
बिद्या में निपुण रहला सऽ किछ नै हैय छै, बिद्या कऽ संग -
संग किछ औरो गियान रहनाय अति आबस्यक छैय,
गीतकार - मुकेश मिश्रा
9990379449


सोमवार, 28 जून 2010

मास्टर जी



लेखक - मुकेश मिश्रा




मास्टर जी


हमरा गाम में एगो मास्टर जी छला,
दूर-दूर गाम तकऽ प्रसिद्ध छला ,
गपऽ हकबा मऽ माहिर ,ककरो किछ कही
कऽ हुथी दैत छला ,

एक दिन टहलैत मदन जी कतौ जय छला ,
अचानक सामने मास्टर जी आबी गेलिखिन!
मदन जी - गोर लगै छि मास्टर जी
मास्टर- नीके रहू , कत रहै छि आय कायल
मदन जी- नोएडा में सेक्टर -44 सदरपुर छलेरा
में रहैत छि
मास्टर- की करैत छ
मदन जी- आग्रबाल अतुल लग ऽ सिये कऽ काज करै छि
मास्टर- हऽ .. अहि सऽ बेसी तू करबे की करबऽ

दोसर दिन अहिना गंगा खेत दिस जायत छला ,
सामने मास्टर जी के देखैत बजला ,
गंगा - गोर लगै छि मास्टर जी
मास्टर - नीके रहऽ ,कतऽ रहै छ
गंगा - दिल्ली में रहै छि
मास्टर - हवऽ कीछ कैरतो छ
गंगा - सेक्टर 62 a -16, में माली के काज करै छिऽ
मास्टर -हऽ .. तऽ अय सऽ बेसी तू करबे की करबऽ

अहिना एक दिन हमरो भेटला .......
मुकेश - गोर लगै छि मास्टर जी
मास्टर - नीके रहऽ की करै छ आय -कायल
मुकेश - गीत नाद लिखैत छि ,सब स्रोता कऽ
मनोरंजन करबैत छिऽ
मास्टर - ह.. त अय स बेसी तू करबे की करबऽ

अहिना समाय बितैत गेल ,किछ समाय उपरांत
बाद मास्टर जी क कनिया क देहांत भ गेलाइन
हम किछ काज बस उम्हर स गुजरैत छ्लव
मास्टर जी क देखलव ,किछ परेसान आगू बरी
पुछलव -मास्टर जी एतेक परेसान किया छि
मास्टर जी - की कहू मुकेश जी जहिया स असगर
भेलव तहिया स बर परेसान छि ,कतव जोगार देखियो
ने ,कतेक दिन असगर जीबन बितायब ,

(हमरा तऽ बुझु एगो मौका भेटल ,मास्टर जी कऽ बात मोन परलऽ )
हम झट सऽ ठार भलव ,मुस्कैत बजलव ,......
हऽ ....तऽ अय सऽ बैसी आहा कैये की सकैत छि
गीटाकार- मुकेश मिश्रा
9990379449
email – mukesh.mishra@rediffmail.com


परदेश में



लेखक - मुकेश मिश्रा

परदेश में

बर - सनम बेमन स छि हम परदेश में ,
की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में

कनिया- एतय आहाक बौआ पलैत अछी हमर पेट में
आगि लागल बज्र खसल धान बला खेत में

बर - की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में
सनम बेमन स छि हम परदेश में ,

कनिया - बीघा के बीघा में आयल दहार यौ
खेत रहितो भेल छै जीवन पहार यौ

बर - अबै छि फागुन में चेन लेने भेट में
की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में

कनिया- गहुम के हालत खराबे खराब छै
गामक किसान त करैत बाप बाप छै
खेती ग्रहस्थी में साधनक अभाब छै
बिजली के नाम पर बस पोल ठार छै
बोडिंग गराउ आऊ पाइन दियौ खेत में
नाही त चली जायत इ रौदिक चपेट में

बर - की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में
कनिया -एतय आहाक बौआ पलैत अछी हमर पेट में

बर - पत्र पढैत बात मोन केर छुबी गेल
करू की आखी स नोर बस चुबी गेल
सोचैत छि सुख दुःख गमायब हम साथ में
होली में मिली जायब गाम केर रंग में
जोरीक रहब हम आब साथ साथ में
की करु नोकरी धेने एकटा सेठ में
सनम बेमन स छि हम परदेश में ,


गीत -- मुकेश मिश्रा
9990379449
e mail - mukesh.mishra@rediffmail.com

लेखक - मुकेश मिश्रा





लेखक - मुकेश मिश्रा , 9990379449

गीत - मुकेश मिश्रा





गीत - मुकेश मिश्रा ,-9990379449

डांस - मुकेश मिश्रा

गीत व एक्टर- मुकेश मिश्रा , 9990379449

गीत - मुकेश मिश्रा

डांस - मुकेश मिश्रा

डांस - मुकेश मिश्रा

9990379449

गीत - मुकेश मिश्रा

डांस मुकेश मिश्रा

गुरुवार, 24 जून 2010

भारत भूमि महान



लेखक - मुकेश मिश्रा


मार्ग कठिन अछी आत्मबल सबल अछि
पाठकक स्नेहे स मनोबल बढल आछी !
हम तऽनिमित छि मिथिलाक पुत्र केर ,
दीन राति बाटैत छि मैथिलिक सूत्र केर !!
मिथिला राज्य चाही बस एक अछि अभिलाषा ,
अपन गामक सहयोग स जरुर पुरत इ आशा !!!

भारत भूमि महान

हमर हे भारत भूमि महान , आहा केर लाखक लाख प्रणाम
भाल मुकुट हिमगिरी बीराजय , बन उपवन तन -मन के साजय,
जलनिधि पायर पखारथी सदिखन ,कय कल -कल स्वर गान !
हमर हे भारत भूमि महान , आहा केर लाखक लाख प्रणाम !!

दिनकर प्रथम किरन दय उर पर ,गाबय कोकिल सातहु सुर पर ,
शीतल बिंदु इंदु झहराबथी , तारागन मुस्कान
हमर हे भारत भूमि महान , आहा केर लाखक लाख प्रणाम

ब्रम्हापुत्र ,गंडक आ गंगा , सरयुग ,कोशी ,यमुना ,तमसा ,
वक्षस्थल पर खेलथी सदिखन कमला और बलान !
हमर हे भारत भूमि महान , आहा केर लाखक लाख प्रणाम

शंकर ,व्यास ,मंडन आ दधिची,बिद्या बारीधी पुण्र बिभूति
देलनि रंग बीरंगक पोथी गीता ,वेद ,पुरान !
हमर हे भारत भूमि महान , आहा केर लाखक लाख प्रणाम

गाँधी ,बुद्ध ,सुभाष ,भगत केर ,जंथी के नही एही जगत केर
सीता ,साबित्री सन कर्मठ ,मनु सनक सन्तान !
हमर हे भारत भूमि महान , आहा केर लाखक लाख प्रणाम
गीतकार - मुकेश मिश्रा
9990379449

बुधवार, 23 जून 2010

झरोखा



लेखक - मुकेश मिश्रा




झरोखा

पलक झुका कर सलाम करते है,
अपने दिल की दुवा आपके नाम करते है
कबूल हो तो मुस्कुरा देना,हम मुकेश मिश्रा,
ये झरोखा आप के नाम करते है


दुनियाँ में रह के सपनों में खो जाव
किसी को अपना बना लो या किसी का हो जाव
अगर कुछ भी नही होता तो तकिया लो अऔर
सो जाव ,

बुझी हुयी समा फिर से जल सकती है
तूफान में गिरी कस्ती किनारे लग सकती है
मायूस ना होना कभी जिन्दगी में ..
ये किस्मत है कभी भी बदल सकती है

दिल ने कहा दोस्त को sms करो ,
फिर ख्याल आया की दिल तो पागल है ,
फिर सोचा दिल दिल अगर पागल है तो क्या हुवा ..
मेरा दोस्त कैन सा नौरमल है

वादियों से सूरज निकल आया है,
फ़िजावो ने नया रंग चाह है
खामोश हो अब तो मुस्कराव,आपकी
मुश्कान देखने हमारा sms आया है

गम वी जो आशु ला दे,ख़ुशी वो जो गम भुला दे
हमे तो चाहिए आपकी इतनी सी दोस्ती, जो
हमारे याद करने पर एक फोन कर दे

लिखे जो खत मैंने उसकी याद में,
पूरा पढ़ लिया पापा ने रात में
सुबह जब हुवा तो जुते इतने परे की
तेरे नाम वाला बाल गजनी में बदल गया

जब भी हम मैसेज करते है,लोग कहता है
इनको तो आदत है पैसा उराने की,मगर वो
नदान किया जाने, ये भी एक आदत है
रिश्ते निभाने की

बरे अरमानो से बनबाया है,
इसे रौशनी से सजाया है
जरा खिरकी खोल के देख लेना,आपको
good night कहने चाँद को भेजबाया है

गीतकार - मुकेश मिश्रा
9990379449

मंगलवार, 22 जून 2010

बुधन पंडित जी


लेखक - मुकेश मिश्रा


बुधन पंडित जी

हमरा गाम में एगो बुधन पंडित जी छला,
बर तमशाह,कुनु धिया -पुता ज कखनो
कीछ कही देलखान,त फेर जुनी पुछु
मुदा तमशाह रहितो ..........
बर नामि छला, सत्यनारायन पूजा, बीभाह,
मुंडन,उपनयन,सब प्रयोजन में हिनका बजयल जात छ्ल, अहि प्रकारे दूर गाम से न्योता ऐलान, जे हमरा बचीयाक
बीभाह थीक से अपने एतिये,
पंडित जी तौयार भेला,और अपना गामक हजमा के सेहो संग ल लेला
दुनु गोटे से पहुचला ओही ठाम,........
धूम-धाम स बिबाहक तैयारी भ रहल छल,
दूर गाम से एला स पंडित जी थाकी गेल छला ,
आराम खातिर कीछ देर दलान पर चली गेला
गामक अगति छोरा जेना,मदन जी, चन्दन जी,
और अपन गाम घर स जुरल चारी पाच गो
अबिबाहित नबयुबक सब पंडित जी लग पहुचल
ओय में से एक जन अपन हाथ आगा बर्बैत,बजला
पंडित जी हमर बिबाह कहिया हेते
अगिला साल भ जेतो जो
ओ हाथ हटलैन की दोसर हाथ पहुचल
पंडित जी हमर बिबाह कहिया हेते
अगिला साल भ जेतो जो
ओ हाथ हटलैन की तेसर हाथ पहुचल
पंडित जी हमर बिबाह कहिया हेते
तोहर अहि साल भ जेतो जो
अहिना एगो हाथ हटें की दोसर,फेर तेसर ,
पंडित जी तबाह भ गेला
तामस आब लगलान,माथ घुरिया लगलेन,
मुदा तामस क बर्दास्त करेत बजलाह
आन गाम आयल छि ,एत कोना ऊट पतांग करब
अहि प्रकारे तामस क बर्दास्त करेत,छोरा सब क
अगिला साल पछिला साल कहैत बिभाहक समाय
दैत जाथिन,अहिना हैत हैत एगो लम्बा चोरा हाथ
पंडित जी के सामने एलैन, पंडित जी जाही ,हाथ पकरला
देखला एगो जनाना कम स कम एक कुंटल बीस किलो क
जनाना हाथ बर्बैत बजली ,पंडित जी हमर बीभाह
कहिया हेते.. पंडित जी क तामस बर्दास्त नै भेलैन ,
पंडित जी झट स उठला आ पट स जनाना क पटैक
छाती पर बैस गेला आर बजला ...............
अय छोरा सब के बिबाह अगिला पिछला साल त
भयै जेतै,मुदा हे मौगी तोहर बिबाह एखने हेतौ
एखने हेतौ तोहर बिबाह , एखने हेतौ तोहर बिबाह
गीतकार- मुकेश मिश्रा
9990379449

Shiv Ho Utrab...

सोमवार, 21 जून 2010

बेबफा प्यार


बेबफा प्यार
लेखक - मुकेश मिश्रा

मैंने प्यार किया तुझसे , दिल की गहरायी से
वो हरजाई ऐसी निकली, मार डाला तनहायी से
माय भूल से कर बैठा प्यार
समझ नही आया उस नागिन का प्यार
जिन्दगी रह गयी मझदार में
दिल के टुकरे हुये हजार
जब आखे खुला उनकी इंतजार में देखा ...
वह मग्न है दुसरो के प्यार में
भूल गया था मै की वह दौलतमंद की बेटी है
मै मरता रहा और वो महलो में लेटी रही
इसीलिए कहता हु यारो ........
मत करना प्यार दौलतमंद की बेटी से
मार डालेगी अँखीयो की गोली से
गीतकार - मुकेश मिश्रा
9990379449

कोजगरा


लेखक - मुकेश मिश्रा
अहि रायतो क लाख -लाख अभिन्दन
अहि दिनों क लाख -लाख अभिन्दन
अपन गाम घर और अपन गाम घर स जुरल सब भाय क
गीत कार व एक्टर मुकेश मिश्रा के तरफ स
सेहो लाख -लाख अभिन्दन

कोजगरा

गणु घर आंगन चमकाबौथ, सजबौथ अपन दलान
नहु - नहु बात फटैय छैन चिबा रहल छैथ पान
आयल मुकेश जी पुछलक काका .......

मदन जी के छि काइल कोजगरा, कुन नाच मंगबैय छि
मुह मोरी क कहला मुकेशबा,सेहो नय बुझल खुलासा
तहन पहिले से करारी केने छाथ एक पछहतर टाका ,
आ एगो मोटर गारी से ज नै लेता देता त हेबे कर्तान झगरा
हेबे कर्तान झगरा रौऊ मुकेशबा हेबे कर्तान झगरा
कतबो करता खोयचातानी, देबअ परतान टिभी जपानी
सोन सनक मदनजी हमर, नोकरी छैय सरकारी
तैय जमाय के नैय कोना देथिन एगो गारी
संगे संग टोकना लोटा अरिया थारी,
देब कुन भेलै इ भारी ....
नै कोना देथिन समैध बोरा भरल मखान
तहन ने रात भैर ओगेर क परसब अपन दलान
आंगन में बूङी अरिपन द सुभे गीत गाबी रहल छैथ
कोंटा दिश ताकि रहल छैथ, जे किया नै भार आयल ह
एतेक राइत बीत गेलै ह, किया नै भार आयल ह
धरफर धरफर लोक करै य परसू गणु मखान .....
गीतकार- मुकेश मिश्रा
9990379449

रविवार, 20 जून 2010

दफन


लेखक - मुकेश मिश्रा
दफन
ऐक बार मेरे मुल्क में एसा हुवा चलन
वो वापसी होने लगे जो हो चुके थे दफन
पहली थी बारी गाँधी की
गाँधी जी आ गये
जब सुट बूट देखे तो वो तिलमिला गये
जब कहि मिलती नही मुल्क में खादी
तो कहने लगे .....
चलता हु भूल आया हु लाठी
वो सो गये समाधि में फिर तानकर कफन
वो वापसी होने लगे जो हो चुके थे दफन

दूजी थी बारी चाचा नेहरू की .......
नेहरु जी आ गये

जब देखे बिगरे बच्चो तो वो भी तिलमिला गये
वो कह न सके सर्म के मारे पहले होश ढूंड लू
कहने लगे आता हु पहले रोज ढूंड लू
अब तक ना ढूंड पाए ,ऐसी लगी चुभन
वो वापसी होने लगे जो हो चुके थे दफन

तीजी थी बारी लाल की......
गये लाल जी भी आ
जब मुछ कटे देखे तो वो भी तिलमिला गये
कहने लगे ऐसा सितम सह नही सकता
संग मुछ कटो के माय रह नही सकता
ना लौटने की उन्होंने भी ली कसमे
और कहने लगे तीनो मिलकर ......

अरे मुल्क बालो कहो, सुधर जाते क्यों नही
जिस तरह गुजरा वो दिन उधर जाते क्यों नही
तुम्हे साफ साफ शब्दों में समझा चूका हु
सब भुला कर ना कहना की वो आते क्यों नही
जब देखा उन्होंने ये उजरा हुवा चमन
वो फिर से लगे मरने और हो गये दफन वो वापसी होने लगे जो हो चुके थे दफन
SONG WRITER-MUKESH MISHRA
CON..9990379449

एक नकपिची लरकी ....


लेखक - मुकेश मिश्रा एक नकपिची लरकी .... 9990379449


एक नकपिची लरकी थी ,एक लरके पे मरती थी
चोरी -चोरी छत पे आ कर,रोज मिला करती थी
मिलते -मिलते फस गई ,उसको वो लरका पट गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

किसी न किसी बहाने रोज हमसे लरती थी
छोटी सी नन्ही सी नादान सा वो दिखती थी
लरते- लरते, रोते -रोते बाहोंमे शमा गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

मुझे देखने रोज सबेरे ही उठ जाती थी
देख के नको पे अंगुली की इसारा करती थी
हेलो टाटा बाय-बाय कह के सासों में शमा गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

मेरे घर में एक दिन टीबी देखने आयी थी
मेरे बहो में बैठ कर मेरे गालो को चूमी थी
सादी करुगी तुझी से हसते-हसते कह गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

एक दिन छत पे खेलने वो आयी थी
मुझे देख वहा कोई जनत ही पायी थी
खेलना छोर पीछे से मेरे कन्धो पे लटक गई
एक नकपिची लरकी थी...............

मेरे मुबायल पे किसी अजनबी लरकी की फोन आयी थी
पीछे से आकर अपने कान को मेरे फोन में सटायी थी
गुसे से फोन छीन कर निचे फेक गई
एक नकपिची लरकी थी...............

एक सहेली शालू थी पर वो बहुत चालू थी
दोनों ने मिलकर एक दिन मुझे बनाया भालू थी
आय लब यु कह दो शालू ने बता गई
एक नकपिची लरकी थी...............

दुसरे ही दिन माय ने आय लब यु कह दिया
शर्म के मरे उनका बुरा हाल हो गया
हस्ते मुस्कुराते आख मर के वो वहा से चली गई
एक नकपिची लरकी थी...............

अचानक स्कूल में आ गई गर्मी की छुटी
वो चली गई दीदी के पास बांध के दो जुटी
जाते जाते फोन करुगी मुझे वो बता गई
एक नकपिची लरकी थी...............
सुबह-सुबह मिसकॉल आया माय समझा मेहमान आया
माय ने इधर से फोन लगाया रूह में मेरे जान आया
रखती हु दीदी आयी ,फोन को वो काट गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

दुसरे दिन फोन पे कहि एक लरका मुझे देखता है
माय ने कहा देखनेदो;कुछ करता तो नही
मार ही दंगी फोन पे गुनगुना गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

किसी बहाने माय ने उसे वहा से बुला लिया
देख कर माय उसे दिल में लगी आग बुझा लिया
बच के रहना हम से गुसे में बता गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

रूठ गयी वो हमसे कैसे उसे मनावू
भाभी से पुछा कैसे उसे पावू
भाभी ने हम दोनों को आपस में मिला गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

स्टेसन तक छोरने हम भी साथ गये थे
उसकी खामोसी देख सरमा हम गये थे
गारी में बैठ के हमे अकेला छोर गयी
एक नकपिची लरकी थी...............
गाव जाने से पहले अपनी सहेली संगीता को कुछ बता गयी
कह देना तुम उन्हें माय सदी उसी से करूंगी
दिल की अरमा जुवा पे ला गयी
एक नकपिची लरकी थी...............
गाव जा कर उसकी ममी ने एक चाल चल दी
फोन कर के बिटु माँ को हमे बदनाम कर दी
दिल में लगा चोट नींद भी भाग गयी
एक नकपिची लरकी थी...............
सबेरे ही फोन पे उसने हम से पुछा किया हुवा
मई ने कहा हम से अच्छा लरका तुम्हे मिलेगा
चार कैमरा तुम्हारे सदी में ले जवुगा
धूम -धाम से तुम्हारी सदी की लडू भी खाऊगा
उसने बोली और किया देखोगे ..
माय ने कहा ..तुम्हारी सादी देखूगा उसने बोली..मेरी मरी हुयी मुह देखोगे
यू कह के फोन को वो काट गयी
एक नकपिची लरकी थी...............
मुझे लगा मुझसे बहुत प्यार करती है वो
मेरे बगैर जिन्दा ना रह सकती है वो
माय भी बेसुमार प्यार उसे करने लगा
खुवाबो में रोज उसे देखने लगा
दिल में हलचल मचा गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

चोरी चोरी मै उसका तस्बीर खीचने लगा
पूरी तस्बीर खीच के तोफा में उसे दे आया
धन्यबाद कह के हस के वो चिली गयी
एक नकपिची लरकी थी...............
यु ही समाय बीतने लगा हम दोनों प्यार में डूबते गये
एक दुसरे को दखने में ही समाय बीतते गये
हवा की डोर ने हम दोनों को बांध गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

किसी लायला मजनू से कम नही मेरा ये मुहब्त
उसे देखने में ही समय बीत गया मिली नही फुर्सत
आखो में झिलमिल सी रोशनी वो दे गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

उसके प्यार में माय इस कदर डूब गया
उसे छोर कहि जाने का मन नही किया
प्यार की एक जोत दिल में जगा गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

उसके माँ पापा दादा दादी सब को माय भा गया
सादी होगा मेरा इससे माय सरमा गया
दिल में इंतजार का ललक छोर गयी
एक नकपिची लरकी थी...............
गाव से मेरे दादा जी मेरे पास आये थे
अपने प्यार की दस्ता उन्हें सुनाये थे
करलेना उसी से सादी ये बात कह गये
एक नकपिची लरकी थी...............

सब को अच्छा लगा पर उसे अच्छा ना लगा
मेरे सिबा एक और लरका उसे चाहने लगा
मुझे पसंद नही ये लरका मेरे बारे में बता गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

पता लगाया आखिर ये लरका है कौन
पता चला उसी के साथ पढ़ती है टीयुसन
मुझे छोर उस लरका में समा गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

घर के गेट लगा कर सामने वो बैठती थी
पढाय के बहाने उससे प्यार की बाते करती थी
मेरा हाथ छोर उसका हाथ पकर गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

मेरा प्यार भुलाकर उससे वो प्यार करने लगी
बचपन की इस डोर को पल में वो तोर गयी
कैसे जीयु उसके बिन कुछ ना बता गयी
एक नकपिची लरकी थी...............
वो तो मुझे भूल गयी पर माय कैसे भूल पौउगा
जब तक जिन्दा रहूँगा उसी को माय चाहुगा
मेरे दिए तोफा भी फेक गयी
एक नकपिची लरकी थी...............


खत्म कर दी सारी जज्बात की कहानी
कैसे कहू माय यारो थी वो मेरी सपना रानी
तीर मार के वो मुझे कब्र पे सुला गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

प्यार तो इस्वर का दिया बरदान होता है
जो ना इसे समझा वो नदान होता है
मेरे यादो को छोर उसकी यादो में समा गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

मेरे दिल को छोर उस के दिल में घर बसा गयी
दुवा करुगा उसे वो मिल जय जिसमे वो रमा गयी
एक नकपिची लरकी थी...............

गुल को गुलाब बना देता गुलाब को कमल बना देता
आपकी ऐक मुस्कान पे कितना गजल लिख देता
सपना जी आप मेरा साथ छोरती नही तो आपके
नाम से बिहार में भी ऐक ताजमहल बना देता,
(कुछ बाते)
१.प्यार इस्वर का बरदान होता है
२.तरप प्यार का पहचान होता है
३.पार्थना ,तपसिया,पूजा ,खोना को प्यार कहते है
४.दो दिलो का मीलन प्यार का रूप है
५.प्यार एक से होता है
६.कृष्ण ने राधा से सादी नही की ,पर दुनिया उनके प्यार को पूजता है
७.प्यार में रोवो मत हिमत रखो
८.अपने प्यार पे भरोसा रखो
mukesh.mishra@rediffmail.com
९९९०३७९४४९,






मंगलवार, 15 जून 2010

मक्ष्छर चलिसा



दोहा

अति आबस्यक जानी के होके अति लचार ,
बरनो मच्छर सक्‍ल गुणों दुख दायक ब्यबहार ।
बिना मसहरि दिन हूँ सुनहू सकल नर्रनार ,
मक्ष्छर चलिसा लिखक पढ़उ सोइच बिचैर ।।

चोपाई

जय मच्छर भगवान उजागर ।
जय अनगिनित हे रोग के सागर ।।

नदियाँ पोखैर गंगा सागर ।
सबठाम रहते छी अही उजा गर ।।

नीम हकिम के अही रखबारे ।
डाक्टर के भेलो अतिश्य प्यारे ।।

मलेरिया के छी अहा दाता ।
छी खटमल के प्यारे भ्राता ।।

जरी बुट्टी से काज नऽ बनल ।
अंग्रेजी दबाइर् जलदी फीट करल ।।

आउल आउट गुडनाइर्ट अपनेलो ।
फेर अपन अहा जान बचेलो ।।

दिन दुखि सब धुप में जरैत छैथ ।
रैतो में बेचैन रहैत छैथ ।।

संझ – भोर अहा राग सुनाबी ।
गूं गूं के नाम कमाबी ।।

राजा छैथ या रंक फकिरा ।
सब के केलो अपनेही मत धिरा ।।

रूप कुरूप न अहा मानलो ।
छोटका - बऱका नै अहा जनलो ।।

नर छैथ या स्वर्गाक नारी ।
सब के समक्ष बनलो अहा भारी।।

भिन्न भिन्न जे रोग सुनेला ।
डाकटर कुमार फेर शर्मेला ।।

सब दफ्‍तर में आदर पेलो ।
बिना इजाजत के अहा घुस गेलो ।।

चाट परल जिन्गी से गेलो ।
कनैत खिजैत परिवार गमलो ।।

जय - जय हे मक्ष्छर भगवाना ।
माफ करू सबटा जुर्माना ।।

छी अहा नाथ साथ हम चेरा ।
जल्दी उजारारू अहा अपनेही डेरा ।।

दोहा



निश बंसर शंकर करण मालिन महा अति कुर |
अपन दल बल सहित बशु कहि जा दुर ||


मदन कुमार ठाकुर

पट्टीटोल (कोठिया), भैरव स्थान ,
झंझारपुर , मधुबनी , बिहार ,८४७४०४




मंगलवार, 8 जून 2010

बहुत गलत बात अछि



दूध में पैन के , दुश्मनी में आईंन के , गाम में डैन के ,
बहुत गलत बात अछि --------
बर्बाद करै में मुस के , नोकरी मे घुस के , बनिया में मखीचूस के ,
बहुत गलत बात अछि --------
भाई में बैमान के , कर्म में अभिमान के , मनुष्य में सैतान के ,
बहुत गलत बात अछि --------
नशा में दारू के , आदमी में भारू के , मिया - बीबी संग झारू के ,
बहुत गलत बात अछि --------
मेला में जेवर के , डैविटिज में मिठाई घेवर के , बदमाशी में देवर के ,
बहुत गलत बात अछि --------
पूजा -पाट बिना पीपल के ,श्रधकर्म बिना पीतल के , बरी -भात बिना जूरी शीतल के ,
बहुत - गलत बात अछि ---------------
नारी गर्दन बिना अठन्नी के, समान बेचनाय बिना पन्नी के , पेंटिंग बिना मधुबनी के ,
बहुत - गलत बात अछि ---------------
डिगरी बिना ईग्न्नु के , खिसा -पिहानी बिना गन्नू के , लेन - देन में भीख मग्न्नु के
बहुत - गलत बात अछि ---------------
आदमी में दुराचारी के , फल में मह्कारी के , इंडिया में बेरोजगारी के ,
बहुत गलत बात अछि --------
समाज में काम चोर के , आदमी में सुईद खोर के , लराई में लातखोर के ,
बहुत गलत बात अछि --------
ब्यबसय में मन मर्जी के , सिग्नेचर में फर्जी के , फोज में बिना बर्दी के ,
बहुत गलत बात अछि --------
बस में जेब कत्तर के , हर बात में अक्तर के , गंदगी में बत्तर के ,
बहुत गलत बात अछि --------
सरक पर भीख माँगा के , सहर में लफंगा के , शरीर में बिना अंगा के
बहुत गलत बात अछि --------
चलें में मटकैत के , जंगली एरिया में डकैत के , गाम में लठैत ,
बहुत गलत बात अछि --------
नशा में सिकरेट के , हर बात में डारेकट के , आदत में क्रिकेट के ,
बहुत गलत बात अछि --------
इंडिया में बिना टेक्स के , दफ्तर में बिना फेक्स के , फॉरनर में सेक्स के ,
बहुत गलत बात अछि --------
विराद्धा अबस्था में बिना लाठी के , चिता पर बिना काठी के , सीरियल में बिना मराठी के ,
बहुत गलत बात अछि -----
शरक पर क्च्चरा के , बारादरी में झगरा के , कागज - पत्तर में लफरा के ,
बहुत गलत बात अछि -----
गाम में बिना भोज के , मजदूरी में बिना रोज के , साइंस में बिना खोज के ,
बहुत गलत बात अछि -----
यात्रा बिना मंगल के , प्रोग्राम बिना दंगल के , व्रत में अंजल के ,
बहुत गलत बात अछि -----
विदियार्थी बिना मास्टर के , हॉस्पिटल बिना डाक्टर के , फिल्म बिना डारेक्टर के ,
बहुत गलत बात अछि -----
उग्रवादी बिना तालिवान के , कुस्ती बिना पहलवान के , अतिथि के बिना जलपान के,
बहुत गलत बात अछि -----
मनोरंजन बिना खेल के , बिजनेस बिना सेल के , कैदी बिना जेल के ,
बहुत गलत बात अछि -----
रेड लाइट बिना अक्सिडेंट के , हॉस्पिटल बिना पेशेंट के , दाँत बिना पेप्सोडेंट के ,
बहुत गलत बात अछि -----
जनौऊ संस्कार बिना बरुवा के , मैथिल भोजन करेनाय बिना तरुवा के , आराम केनाय बिना गेरुवा के ,
बहुत गलत बात अछि ---------
अध्ययन बिना कम्पूटर के , पंखा बिना रेगुलेटर के , नियूज बिना प्रेशरिपोटर के ,
बहुत गलत बात अछि ---------
भगवन पूजा बिना माला के , घर छोरी बिना ताला के , सासुर जेनाय बिना साला के ,
बहुत गलत बात अछि ---------
शहर में बिना लाइट के , लराई में बिना फाइट के , जींस पेंट बिना टाईट के ,
बहुत गलत बात अछि -----
नागरिकता बिना मतदान के , जिनगी बिना कन्यादान के , परोपकर बिना रक्तदान के ,
बहुत गलत बात अछि -----------
महाभारत में शोक्न्नी के , शहर में बिना पत्त्नी के , आ रचना में बिना टिप्पणी के ,
बहुत गलत बात अछि -----

मदन कुमार ठाकुर
पट्टीटोल ,
भैरव स्थान ,
झंझारपुर ,मधुबनी ,
बिहार - ८४७४०४
mo- 9312460150

गुरुवार, 3 जून 2010

जून,2010 केर पाबनि-तिहार

4 जून-कालाष्टमी व्रत
5 जून-शीतलाष्टमी
6 जून-नवमी
8-अपरा/अचला एकादशी
9 जून-मधुसूदन द्वादशी
10 जून-वट सावित्री व्रत आरंभ। प्रदोष व्रत। शिवरात्रि व्रत।
11 जून-फलहारिनी कालिका पूजा
12 जून-शनिदेव अमावस्या,ज्येष्ट अमावस्या,वटसावित्री अमावस्या,पीपल पूजन,
13 जून-दस दिनक गंगा दशहरा-स्नान प्रारंभ
15-मिथुन संक्रांति तृतीया
16 जून-विनायक चतुर्थी,पंचमी
17 जून-विंध्यवासिनी पूजन,षष्टी
19 जून-दुर्गाष्टमी व्रत,श्रीअन्नपूर्णाष्टमी व्रत
21 जून-निर्जला एकादशी। आचार्य श्रीराम शर्मा के पुण्यतिथि,सौर वर्षाकाल प्रारंभ
23-प्रदोष
24-त्रयोदशी,आद्याशक्ति के महापूजा के विशेष योग
25 जून- पूर्णिमा व्रत। सत्यनारायण पूजा-कथा
26-ज्येष्ट/वटसावित्री/देवस्नान पूर्णिमा
30-गणेश चतुर्थी

सोमवार, 10 मई 2010

उठो भाई जागो

ओ भारत के वीर जवानों ,
माँ का क़र्ज़ चुका देना ,
कटे फटे इस मानचित्र को
अबकी ठीक बना देना !!
पटना साहीब से मीलने को
ननकाना बैचेन खड़ा ,
अबकी तिरंगा रावलपिंडी में
घुस कर तुम फहरा देना !!
अटक कटक से सिन्धु नदी तक
सब कुछ हमको प्यारा है ,
कश्मीर मत मांगो कह दो
पाकिस्तान हमारा है !!
जो उपवन से घात करे
वो शाख तोड़ दी जायेगी ,
जो पीछे से वार करे
वो बांह मोड़ दी जायेगी ,
जो कुटुंब का नाश करे
वो गर्दन तोड़ दी जायेगी,
मेरे देश पे उठती
हर एक आँख फोड़ दी जायेगी ,
जो देश द्रोह की बात करे
वो मनुष्य हत्यारा है ,
कश्मीर मत मांगों
कह दो पाकिस्तान हमारा है !!
बन्दे- मातरं
जय हिन्द - जय भारत
(आनंद कुमार )

गुरुवार, 6 मई 2010

हम कौन हैं ?

हम कौन हैं या हम क्या हैं यह जानने के लिए हमें कुछ त्याग करना पड़ेगा और वह त्याग कोई भौतिक त्याग नहीं है अपितु हमें हमारी सांसारिक बुद्धि को स्थिर रखते हुए जो कुछ भी अब तक हमने सीखा है या जाना है उसे भूल कर इस नवीन सन्देश के लिए थोडा सा स्थान बनने देना है. यद्यपि यह प्रश्न हम सब के दिलो दिमाग पर जीवन में अनेक बार उठता है कि हम कौन हैं, कहाँ से आये हैं, क्यों आयें हैं ( हम अपने आप तो आये नहीं हमें तो यहाँ भेजा गया है) लेकिन हम भौतिक जगत की आवस्यकताओं की पूर्ति करने में इतने व्यस्त रहते हैं कि हम अपने अंतर कि इस मौलिक एवं मूलभूत आवाज को अनसुना कर देते है. इसीलिए आपसे कुछ त्याग करने के लिए अनुरोध किया गया है ताकि जो गूढ़ बात अब यहाँ बताई जाने वाली है उस बात का प्रभाव यदि १००% नहीं तो कुछ अंश तक तो अवश्य आपके अन्दर प्रवेश कर सके.

एक शायर ने बहुत ही सटीक कहा है:

पहचान ले खुद को तो इन्सान खुदा है, जाहिर में गो खाक है मगर खाक नहीं है.
जलवों की खता क्या जो दिखाई नहीं देते, खुद देखने वालों की नजर पाक नहीं है.

जब हम इस संसार में सारी उम्र संघर्ष करने के बाद भी अपने आप को पूरी तरह से नहीं जान पाते तब खुदा को पाने या संसार का समस्त ज्ञान पाने का हमारा दावा खोखला ही माना जायगा. अपने आपको या दूसरों को जानने की इच्छा कभी-न-कभी हर इन्सान के मन में आती है; यह बात दूसरी है कि हममें से अधिकतर लोग इस जिज्ञासा का गला ही घोंट देते हैं. वास्तव में यह एक जटिल प्रश्न है और शायद इसीलिए हम इसको हल करना नहीं चाहते. या इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि वर्तमान आधुनिकीकरण एवं अर्थवाद की गला-काट-प्रतिस्पर्धा के चलते ऐसे प्रश्नों को हल करने का कोई लाभ प्रतीत नहीं होता.

हम बाहरी तौर पर जो दिखाई देते हैं या वर्तमान में जो हमारी वाह्य पहचान बन गई है इसे नाकारा नहीं जा सकता परन्तु यही सब कुछ है; ऐसा भी नहीं है. हमारे इस भौतिक शरीर का सम्बन्ध ईश्वर के विराट स्वरूप से है. इस भौतिक शरीर में एक सूक्ष्म शरीर भी है जिसके अन्दर बहुत कुछ छिपा है जैसे- मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, इच्छा, आशा, वासना, काम, क्रोध, लोभ, ईर्षा, द्वेष, घ्रणा, कल्पना, संतोष, सय्यम आदि. इस सूक्ष्म शरीर का सम्बन्ध ईश्वर के अव्याकृत रूप से है.

इसके अतिरिक्त इस शरीर का सम्बन्ध ईश्वर के हिरण्यगर्भ रूप से भी है जिसका प्रतिनिधि हमारी आत्मा है. यहाँ तक का ज्ञान तो आम आदमी पुस्तकों से पढ़ कर अथवा दूसरों से सुनकर प्राप्त कर सकता है यद्यपि ऐसा ज्ञान वाचक ज्ञान कहलाता है और यह हमें अधिक दूर तक नहीं ले जाता; तथापि इस ज्ञान से ही सत्य की खोज की चाह पैदा होती है-इसी में से सत्य जानने का अंकुर पैदा होता है.

इस हर-मंदिर में (गुरु नानक देव जी ने इस शरीर को हर-मंदिर कहा है क्योंकि इसमें हरी निवास करता है/ इस शरीर में ईश्वर रहता है) इन सबका साक्षी भी रहता है जिसे विशुद्ध आत्मा या सुरत कहते हैं जो ईश्वर का ही रूप होता है. इस रूप को ईश्वर का अंश कहना भी गलत होगा क्योंकि अंश का तात्पर्य सामान्य रूप से यह लगाया जाता है कि यह पूर्ण का टुकड़ा है जबकि वह ईश्वर या मालिक तो अविभाज्य है.

इस प्रकार एक अमूर्त भाव को मूर्तरूप में व्यक्त करने का प्रयास किया गया है जिसमे कहने और सुनने या लिखने और पढने वाले के अनुभवज्ञान के स्तर में भिन्नता होने पर अर्थ का अनर्थ होने कि सम्भावना बनी रहती है क्योंकि सामान्य लोग शब्दों का सामान्य अर्थ लगा कर बात को समझने का प्रयास करते हैं और इसी में गलती कर जाते हैं. इसका मूल कारण यह है कि:
यह करनी का भेद है नहीं बुद्धि विचार,
कथनी तज करनी करे तब पावे कुछ सार.

संक्षिप्त में कहने का तात्पर्य यह है कि हम कोई नश्वर शरीर मात्र ही नहीं हैं; न ही हम इस भौतिक संसार में केवल खाने-पीने और मौज उड़ाने आये हैं बल्कि हम तो ईश्वर के अंश हैं और पूर्ण हैं और इस संसार में ईश्वर को ढूंढने आये हैं क्योंकि इस सृष्ठी के आदि में उसने हमें अपने से दूर भेज दिया था और दूर भी इसलिए भेज दिया था ताकि हम उससे दूर होकर उसके विरह में व्यथित हों और उसे पाने का प्रयास करें. और यह प्रयास भी वही हमसे करवाता है; हम अपनी शक्ति के बल पर उसे ढूंढने का प्रयास भी नहीं कर सकते. अपने से दूर भेजने का एक कारण यह भी हो सकता है कि वह ईश्वर हमेशा लीला करता रहता है जैसे बच्चे लुका-छिपी का खेल खेलते हैं और उसी खेल-खेल में उसने हमें अपने से दूर भेज दिया ताकि हम उसे ढूंढे लेकिन हम उसे ढूंढ़ नहीं पाते. इसलिए वह अपने जीवों को निज धाम ले जाने के लिए संतो/सतगुरु के रूप में प्रगट होकर लेने आता है क्योंकि वह हर जीव से बेहद प्यार करता है. परन्तु फिर भी हम इस संसार के मेले में इतने मोहित हो जाते हैं कि हम उसकी बात को ही नहीं सुनते और वह जो शब्द कि नाव लेकर आता है उस पर बैठ नहीं पाते और वह निराश होकर चला जाता है.
मालिक सब का कल्याण करे

बुधवार, 5 मई 2010

शंकर - पार्वती जी के मूर्ति भेटल


लोग कहैत अछि अबक समय में धर्म - कर्म सब धीरे- धीर निप्टल जायत अछि , मुद्दा हम एखनो देखैत छिक गाम - घर में पूजा - पाठ एखनो धरी सर्बोपारित अछि , चाहे रौदिक अकाली होय या बढिक दाहर ओहिमे अपन कर्म पूजा पाठ के चलन जरी राखैत छैथि ,

देखू ने एखनो कलना (हरलाखी , मधुबनी ) नामक गांव गाम में , भिसन गरमी आ सुखार के कारने दामेस्वरी पोखैर के साफ - सुतरा आ खूनेय के कल में सोमदिन भगवान शंकर - पार्वती के आलिंगन मुद्रा में अति प्राचीन आकार्सक मूर्ति भेटल अहि मूर्ति के देखय आ पूजा करैक लेल हजारो के संख्यां में लोगक भीड़ उमैरी गेल ,
मूर्ति देखेक में अति सुन्दर लागैत अछि , प्रतिमा के निचला भाग में बसहा आ पार्वती मूर्ति के निचिका भाग में सिंह क मूर्ति सेहो सामिल अछि , ई पोखैर भिसन गरमी के कारने बिलकू सुखा गेल छल जहि के चलती गाम - घरक लोग सब अहि पोखैर में से मैट कैट के अपन घर अगना के भरैत छल ,
आखिर सत्य अछि ताहि दुवारे धर्म के सर्वब्याप्त रहै के लेल समय -समय पर धर्म के समाबेस होयत रहैत अछि --
अहि दुवारे कहल गेल अछि ---
सतेयन धारिते पृथ्वी सतेयें तपते रवि
सतेयं वती बयुस्यच सर्वम सत्यम परितिठितम

शनिवार, 1 मई 2010

मई,2010 केर पाबनि-तिहार

1 मई: संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत
6 मई: कालाष्टमी व्रत, शीतलाष्टमी
9 मई: पुरुषोत्तमी कमला एकादशी व्रत
11 मई: भौम-प्रदोष व्रत (ऋणमोचन हेतु)
12 मई: मासिक शिवरात्रि व्रत
13 मई: श्राद्ध केर अमावस्या
14 मई: स्नान-दान केर अमावस्या, मलमास समाप्त
15 मई: वृष-संक्रान्ति केर पुण्यकाल प्रात: 10.11 बजे तक,गोदावरी-स्नान, नवीन चन्द्र-दर्शन
16 मई: अक्षय तृतीया
17 मई: वरदविनायक चतुर्थी व्रत, बगलामुखी जयंती
19 मई: चंदनषष्ठी
20 मई: गंगा सप्तमी-गंगा जयंती, मध्याह्न मे गंगा-पूजा
21 मई: श्रीदुर्गाष्टमी व्रत, श्रीअन्नपूर्णाष्टमी व्रत, बगलामुखी महाविद्या जयंती,
22 मई: मैथिली दिवस, सीतानवमी व्रत, जानकी जयंती महोत्सव,
24 मई: विजया एकादशी व्रत, मोहिनी एकादशी व्रत, रुक्मिणी द्वादशी,
25 मई: भौम-प्रदोष व्रत (ऋणमोचन हेतु),
26 मई: नृसिंह चतुर्दशी व्रत, नृसिंहावतार जयंती, छिन्नमस्ता महाविद्या जयंती,
27 मई: स्नान-दान-व्रत के वैशाखी पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, गन्धेश्वरी पूजा (बंगाल), वैशाख स्नान-नियम पूर्ण
31 मई: संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत


एहि मासक राशिवार शुभ-अशुभ तिथि

मेष राशि
शुभ तिथि :- 2,4,5,7,9,10,11,23,25,29,30
अशुभ तिथि :- 6,13,15,16,18,19,20

वृषभ
शुभ तिथि :- 1,5,11,17,18,21,23,26,28,29
अशुभ तिथि :-3,12,22,24,27,30,31

मिथुन
शुभ तिथि:-1,6,11,16,19,25,27,31
अशुभ तिथि:-8,10,18,22,26,30

कर्क राशि
शुभ तिथि:- 13,21,22,25,26,29,31
अशुभ तिथि:- 6,8,10,11,14,17,18,19

सिंह राशि
शुभ तिथि:-4,5,7,9,26,27,29,30
अशुभ तिथि:-3,8,12,13,16,18,21,22

कन्या
शुभ तिथि:6,17,22,24,25,26,27
अशुभ तिथि:3,6,7,8,10,13,14,20,21

तुला
शुभ तिथि:-1,10,14,15,16,19,30
अशुभ तिथि:9,16,18,20,26,29

वृश्चिक
शुभ तिथि:-10,18,19,20,25,26,27
अशुभ तिथि:-2,3,4,11,12,16,30,31

धनु
शुभ तिथि:6,13,17,19,20,23,25,30,31
अशुभ तिथि:3,8,11,16,26,28

मकर
शुभ तिथि:-6,9,15,20,22,24,29
अशुभ तिथि:- 3,8,13,16,18,23

कुम्भ
शुभ तिथि:-1,2,5,14,15,16,27,30
अशुभ तिथि:- 6,7,8,18,21,22,23

मीन
शुभतिथि:2,8,18,24,27,28
अशुभ तिथि:-3,7,19,21,26,31 

रूचिगर सूचनाक मंच पर अपनेक स्वागत अछि।

मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

की हमहूँ रहबै कुमार ?

यौ पाठक गण की कहू अपन मिथिला राज्य चौपट भ' गेल ( से कोना यौ ) एक त कमला कोशीक दहार आ दोसर दहेज़ प्रथाक व्यवहार ! कमला कोशी लेलक पेटक आहार त दहेज़ प्रथा केलक आर्थिक लाचार ! कन्यादान से कतेक पिता लोकनि सेहो भेला बीमार आ कतेको बर छथि ओही बाधा सँ सेहो कुमार आ बीमार ! ओही सभ बात के लs क' हम नब युबक संघक बाधा कs ल'क' पाठक गणक समक्ष अपन गाम घर पर हाजिर छी.......

की हमहूँ रहबै कुमार ?

जय गणेश मंगल गणेश, सदिखन रटलो मंत्र उचार !
सभ बाधाक हरय बाला, कते गेलो अहाँ छोड़ि संसार !!
अपना लेल अगल - बगल मे, हमरा लेल किए दूर व्यवहार !
आब कहू यो गणपति महाराज, की हमहूँ रहबै कुमार...? !!

बरख बीत गेल देखते देखते, जन्म कुंडली मे थर्टी ! (३०)
दहेजक आस मे हम नै बैसब, हमरो उम्र भो जेत सिक्सटी !! (६०)
गाम - गाम मे जे के बाजब, बाबू हमर छथि दुराचार !
आब कहू यो बाबू - काका, की हमहूँ रहबै कुमार... ?!!

ब्रह्म बाबा के सभ दिन गछ्लो, लगाबू अहि लगन मे बेरापार !
ओही खुशी मे अहाँ के देब, हम अपन गाय के दूधक धार !!
हे कुसेश्वर हे सिंघेश्वर, अहाँक महिमा अछि अपरम पार !
अहि लगन मे पार लगाबू, हम आनब दूध दही आ केराक भार !!
आब कहू यो भोले दानी, की हमहूँ रहबै कुमार ....?...

सौराठ सभा मे जे के बैसलों, सातों दिन आ सातो राति !
कियो नै पुछलक नाम आ गाम, की भेल अपनेक गोत्र मूल बिधान !!
घर मे आबी के खाट पकरलो, नै भेल आब हमर कुनू जोगार !
आब कहू यो बाबा - नाना, की हमहूँ रहबै कुमार --?!!

दौर - दौर जे पंडित पुर्हित, सभ दिन पूछी राय बिचार !
पंडित जी के मुहँ से फुटलैन ई बकार ..........
जेठ अषाढ़ त बितैते अछि, अघन से परैत अछि अतिचार !!
आब कहू यो पंडित पुर्हित, की हमहूँ रहबै कुमार ....?.

नै पढ़लो हम आइये - बीए, छी हमहूँ यो मिडिल पास !
डॉक्टर भइया - मास्टर भइया, ओहो काटलैथ एक दिन घास !!
ओही खान्दानक छी यो हमहूँ, जून करू आब हमर धिकार !
आब कहू यो बाबू - भैया, की हमहूँ रहबै कुमार ?!!

गोर - कारी सभ के सब दिन रखबै, लुल्ही - लंगरी से घर के सजेबई !
बौकी पगली के दरभंगा में देखेबाई, कन्ही कोतरी से करब जिन्दगी साकार !!
आब कहू यो संगी - साथी, की हमहूँ रहबै कुमार ..?........

अघन के लगन देख हम झूमी उठलो, जेना करैत अछि नाग फुफकार !
लगन बीत गेल माघ फागुन के, गुजैर रहल अछि जेठ अषाढ़ !!
अंतिम लगन ओहिना बितत, नैया डूबत हमरो बिच धार !
आब कहू यो मैथिल आर मिथिलाक पाठक गन,
की हमहू रहबै कुमार --?-!!

नब युवक के बातक रखलो मान, शादी.कॉम में लिखेलो अपन नाम !
नै कुनू भेटल कतो से मेल, लागैत अछि जे ईहो भेल फैल !!
कतेक दिन करब मेलक इंतजार........
आब कहू यो कम्पूटर महाराज, की हमहूँ रहबै कुमार --?!!

भोरे उठी गेलो खेत खलिहान, उम्हरे से केना एलो कमला स्नान
देखलो दुई चैर आदमी के, बात करैत छल कन्यादान !
पीड़ी छुई हम भगवती के, पहुँच गेलो हम अपन दालान !!
हाथ जोरी हम सबके, विनती केलो बारम् बार !
आब कहूँ यो घटक महाराज, की हमहूँ रहबै कुमार --?

मदन कुमार ठाकुर,
पट्टीटोला, कोठिया (भैरव स्थान )
झंझारपुर (मधुबनी)बिहार - ८४७४०४।
मो-९३१२४६०१५०

शनिवार, 17 अप्रैल 2010

गुरू की पहचान भाग-4

गुरु की पहचान

अब एक छोटा सा या मोटा सा प्रश्न कभी-कभी यह उठता है कि गुरु की पहचान कैसे की जाय? यह पता कैसे चले कि कोई व्यक्ति जिसे अन्य लोग गुरु समझते हैं वह गुरु है भी या नहीं इसकी पहचान कैसे हो? कहीं वह धोखेबाज तो नहीं जैसा कि आमतौर पर आजकल देखने-सुनने में आता है. यह संदेह बिलकुल सत्य है क्योंकि यदि किसी व्यक्ति के अन्दर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास नहीं है तो उसे न तो सच्चे संत महात्मा/ सच्चे सदगुरू से कुछ मिल सकता है और न ही ढोंगी बाबा से. इसके विपरीत जिसको जिस पर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास है उसे उससे मनोवांछित फल मिलने कि पूरी सम्भावना रहती है. अब इसके साथ ही एक प्रश्न यह भी पैदा होता है कि आप के पास ऐसा कौन सा औजार है, कौन सा बारोमीटर है, कौन सा स्केल या पैमाना है जिससे आप यह अंदाज लगा सकते हैं कि कोई व्यक्ति सच्चा सदगुरू है या पाखंडी है. अगर आप समझते हैं कि आप औरों कि नक़ल करके गुरु कि पहचान कर सकते हैं तो भी आप गलती खा सकते हैं क्योंकि उसने अपने अनुभव या अपनी मान्यता के आधार पर किसी को गुरु माना है जिसकी तुलना आप नहीं कर सकते और यदि आप अपनी बल बुद्धि के आधार पर कोई निर्णय लेते हैं तो इसका अर्थ यह हुआ कि आप गुरु कि परीक्षा लेने के काबिल हैं अर्थात आप गुरु से ज्यादा समझ रखते हैं . क्योंकि एक एम० ए० के विद्यार्थी कि कापी उससे उच्च ज्ञान रखने वाला ही जाँच सकता है कोई हाई स्कूल पास नहीं.

देखिये आदि संत कबीर साहिब गुरु के बारे में कहते हैं :

गुरु को मानुस जानते, ते नर कहिये अंध
दुखी होएँ संसार में आगे जम का फंद

गुरु किया है देह को सतगुरु चीन्हा नाहीं
कहें कबीर ता दास को तीन ताप भ्रमाहीं

गुरु नाम आदर्श का गुरु है मन का इष्ट
इष्ट आदर्श को ना लाखे समझो उसे कनिष्ट

इससे तो यह स्पष्ट होता है कि गुरु आम आदमी की तरह ही दीखता है, आम आदमी की तरह खाता-पीता है और आम आदमी की तरह ही सब जगत-व्यवहार करता है परन्तु उसमें एक खास बात होती है जो अन्य सामान्य व्यक्तियों में नहीं होती जिसके कारण गुरु अन्य व्यक्तियों से भिन्न होता है और वह खास बात यह है की गुरु के अन्दर परमतत्व पूर्ण रूप से अवतरित हुआ होता है. यूँ तो परमतत्व इस संसार/इस ब्रह्माण्ड और कोटि-कोटि ब्रह्माण्डों के एक-एक अणु और परमाणु में भी मौजूद रहता है क्योंकि सब कुछ उसी से निकला है, उसी में समाया हुआ है और उसी में विलीन हो जायगा फिर भी सभी संत- महात्मा और सभी प्राचीन धार्मिक ग्रन्थ यही कहते आये हैं कि वह परमतत्व जड़ पदार्थों में सुप्त अवस्था में रहता है, वनस्पतियों में वह अचेतन, पशु -पक्षियों में अर्धचेतन, मनुष्यों में चेतन अवस्था में और संत्सत्गुरु में वह पूर्ण चेतन अवस्था में रहता है और अपने निज स्वरुप में वह चेतनघन अवस्था में रहता है. चूंकि संत्सत्गुरु में वह पूर्ण चेतन अवस्था में रहता है इसलिए संत सत्गुरुवक्त ही उस पूर्ण चेतनता को दूसरे व्यक्तियों में प्रवाहित करने में सक्षम है. इस द्रष्टिकोण से भी यही प्रमाणित होता है कि गुरु मनुष्य रूप में स्वयं परमतत्व ही होता है.

सांसारिक आवश्यकताओं की पूर्ति, एश्वर्य और धन -धन्य की पूर्ति तो किसी भी देवी-देवता, या किसी भी वस्तु को इष्ट मान कर पूजा करने से हो सकती है, इससे लोक और परलोक भी सुधर सकते हैं परन्तु इनकी पूजा से आवागमन से छुटकारा नहीं मिल सकता. आवागमन से छुटकारा यदि कोई दिला सकता है तो वह हस्ती संत सत्गुरुवक्त ही है वह इस प्रकार की एक तो वह स्वयं निर्बंध होता है दूसरे वह आपकी शंकाओं का आपके संदेहों का निवारण मुंह-दर-मुंह फेस-टू - फेस कर सकता है जिससे आपकी प्रगति अबाधित रूप से होने लगती है जो अन्य प्रकार से संभव नहीं.

अब रही बात यह कि गुरु पर श्रद्धा और विश्वास कैसे लाया जाय? यह बिलकुल निजी मामला है और इसके लिए कोई सिद्धांत प्रतिपादित नहीं किये जा सकते क्योंकि जितना भी इस बारे में कहा जायगा वह विवादित बन जायगा. जैसे कोई किसी को रोना नहीं सिखा सकता, किसी को प्रेम करना नहीं सिखा सकता, इसी प्रकार कोई किसी को किसी पर श्रद्धा और विश्वास करना भी नहीं सिखा सकता. यह तो जब होता है तब होता है और नहीं होता तो नहीं होता. फिर भी अपनी तुच्छ बुद्धि के अनुसार और अपने अनुभव के आधार पर मैं यहाँ पर लिखना चाहता हूँ कि यदि किसी को किसी महापुरुष के पास बैठकर मानसिक शांति मिलती है, उसके काम-क्रोध में कमी आने लगती है, उसकी वासनाएँ बदलने लगती हैं, उसके विकारों में परिवर्तन आना शुरू हो जाता है, उसकी चंचलता घटने लगती है तो समझो कि वह आपका मार्गदर्शन करने में सक्षम है. यदि वह अपनी प्रशंसा नहीं करता/करवाता, अहंकारवश कोई बात नहीं कहता, वाह्य-आडम्बरों से दूर रहता है और किसी का खंडन-मंडन नहीं करता और अपने अनुभव के आधार पर आपकी समस्स्याओं का समाधान बताता है तो ऐसा महापुरुष गुरु स्वीकार करने के योग्य है. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह कि उसके पास बैठकर आपके मन में यह भावना जाग्रत हो जाय कि जिसकी मुझे तलाश थी बस वह यही है. यदि ऐसी चिंगारी आपके मन मंदिर में जाग उठती है तो आप का काम उससे बन जायगा और आपका कल्याण हो जायगा. अब एक बात यहाँ पर और स्पष्ट करने योग्य है कि क्या गुरु कि खोज हम करते हैं? मेरी धारणा है कि गुरु कि खोज तो स्वयं गुरु कि प्रेरणा से ही होती है. वही हमारे अन्दर यह भावना पैदा करता है कि हम-एक-दूजे के लिए हैं.

गुरू की पहचान

गुरु की पहचान

संतमत में सबसे ज्यादा जोर, सबसे ज्यादा महिमा गुरु की गाई जाती है. संतमत में गुरु को भगवान से भी बढ़ कर माना जाता है. संतमत के आदि गुरु संत कबीर ने तो यहाँ तक कह दिया :
गुरु गोबिंद दोउ खड़े काके लांगू पॉंव
बलिहारी गुरु अपनों जिन गोबिंद दियो बताय

पता है ऐसा क्यों कहा गया है? इसके अनेक कारण हो सकते हैं. ज्ञानी और विद्वान तो अपने-अपने तर्कों के अनुसार अनेकोंअनेक कारण ढूंढ कर विषय को और भी अधिक जटिल बना सकतें हैं क्योंकिं शब्द जाल महा जाल होता है और उससे बच निकलना आसान नहीं होता और विद्वानों के पास तो शब्दों का अपार भंडार होता है. इसलिए मैं अपनी तुच्छ बुद्धि के आधार पर इसका साधरण सा कारण इस प्रकार व्यक्त करता हूँ:
सभी धर्म सभी संत महात्मा अनादी काल से कहते आये हैं कि ईश्वर ने मनुष्य को अपने ही रूप में बनाया है परन्तु किसी ने भी आज तक असली ईश्वर को बाहर में नहीं देखा है जिसने भी ईश्वर को पाया है उसने अंतर में ही दर्शन पाया है और अंतर में दर्शन पाकर गूंगा बन गया है क्योंकि असली ईश्वर का न तो वर्णन हो सकता है और न ही उसकी व्याख्या हो सकती है. वाणी तो उसे व्यक्त करने का एक कमजोर साधन है जिसके चलते अर्थ का अनर्थ हो जाता है अर्थात वाणी के चलते सत्य असत्य हो जाता है. ईश्वर अनुभव का विषय है और इस अनुभव को वही दूसरे को अनुभव करा सकता है जिसने स्वयं इसका अनुभव किया हुआ होता है. यद्यपि प्रत्येक मनुष्य के अन्दर ईश्वर मौजूद है तथापि हरेक उसका अनुभव स्वयं करने में असमर्थ है. इसके भी अनेक कारण हो सकते हैं- जैसे पूर्व जन्मो के प्रारब्ध कर्म और उनका संस्कार, इस जन्म के संचित कर्म और क्रियमाण कर्म और उनके संस्कार; इसके अतिरिक्त काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्षा, आशा, तृष्णा, वासना और कामना आदि ऐसी मानवी वृतियां हैं जिनके चलते घर में ही खजाना होते हुए भी हम जीवन भर कंगाल ही बने रहतें हैं. जो इन पर विजय प्राप्त कर लेता है या जिसे उस खजाने कि चाबी मिल जाती है वही उस धन का उपयोग कर सकता है.
जिसको इसका ज्ञान हो जाता है वही दूसरों को इसका ज्ञान दे सकता है और गुरु ही वह हस्ती है जिसे अंतर का ज्ञान हो चूका होता है और वही इस ज्ञान को दूसरों को बाँटने में सक्षम होता है. मेरी समझ के अनुसार गुरु की आवश्यकता इसीलिए जानी जाती है.

बुधवार, 7 अप्रैल 2010

रुपैया बीस (सुईद ब्याजक संग )

रुपैया बीस (सुईद ब्याजक संग )
ई चुटकुला मुसाय बाबाक सन्दर्भसँ लेल गेल अछि ! --

ओना तs बाबाक समाजक प्रति अनेको उपकार छन्हि ताहिमे एक - दोसराक प्रति परोपकार सेहो बही - खातामे लिखल गेल छनि ! मुसाय बाबाक १ अगस्त २००३ कs देहवासन भs गेलन्हि मुदा हुनकर कृति एखनो धरी समाजमे व्याप्त अछि ! बाबाकेँ धन - सम्पति अपार छलनि ताहिसँ समाजमे मान-मर्जादा बहुत निक भेटैत छलनि ! दस बीस कोससँ लोक सभ मुसाय बाबासँ सुईद (व्याज) पर पाई लैक लेल आबैत छल ! कतेको ठिकेदार कतेको महाजन सभ हुनक दालानपर बैसल रहैत छलनि !

एक बेर मुसहरबा भाइ सेहो अपन विवाहक लेल मुसाय बाबासँ बीस (२०)गो टका लेने छल ! मुसहरबा भाइ बाबाक खास नोकर छलाह तs ओकरा मुसाय बाबा कहलखिन हे मुसहरबा भाइ हम जे तोरा २०गो टका देलियो से हमरा कहिया देबह? मुसहरबा भाइ बाबासँ कहलकनि जे मालिक हम तँ बीस गो टका सुईद (व्याजक) साथ दऽ देने छी ! अहि बातपर दुनू आदमीकेँ आपसमे बहस चलय लगलनि, बहुत हद तक झगड़ा आगू बढ़ि गेल ! ताबे मे किम्हरोसँ कारी बाबु एलथि। कहलखिन- " यौ। अहाँ दुनू आदमीक आपसमे किएक झगड़ा भs रहल अछि "!मुसाय बाबा सभ बात कारी बाबुकेँ कहलखिन आर मुसहरबा भाइ सेहो सभ बात कारी बाबुकेँ सुनेलखिन्ह ! तखन कारी बाबु कहलखिन- " हे मुसहरबा भाइ । अहाँ हिनका कखन - कखन आर कोना पाइ देलियनि से हमरा कहू ........मुसहरबा भाइ बजलाह - "

सुनू कारी बाबु, आ मुसाय बाबू --- अहूँ ध्यान राखब हमर कतय गलती अछि ?
हमरा लग अपनेक टका छल बीस (२०)
आहाँ आँखी गुरारीकेँ तकलहुँ हमरा दिसएक टका तखने देलहुँ .........

टका बचल उनैस (१९)
अहाँ कहलहुँ अही ठाम बैसएक टका तखने देलहुँ ......

टका बचल अठारह (१८)
आहाँ लागलहुँ हमरा जोर सँ धखारहएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल सतरह (१७)
आहाँ लागलहुँ हमरा जखन तखन तंग करहएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल सोलह (१६)
आहाँ लागलहुँ हमर पोल खोलहएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल पंद्रह (१५)
आहाँ लागलहुँ हमरा टांग गरैरकऽ पकरहएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल चौदह (१४)
आहाँ लागलहुँ हमरा घर पर पहुँचहएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल तेरह (१३)
आहाँ लागलहुँ हमर रस्ता घेरहएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल बारह (१२)
आहाँ लागलहुँ हमरा लाठीसँ मारहएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल एगारह (११)
आहाँ लागलो हमर कुर्ता फारहएक टका तखने देलहुँ ......

टका बचल दस (१०)
अहाँ कहलहुँ हमरा जमीन पर बसएक टका तखने देलहुँ ......

टका बचल नौउह (९)
आहाँ कहलहुँ हमरा ओहिठाम नोकर बनिरहएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल आठ (८)
आहाँ घोरैत छलहुँ खाटएक टका तखने देलहुँ ....

टका बचल सात (७)
आहाँ खाइत छलहुँ नून भातएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल छः (६)
आहाँ उपारैत छलहुँ जौएक टका तखने देलहुँ ....

टका बचल पॉँच (५)
आहाँ देखैत छलहुँ चौकी तोर नाचएक टका तखने देलहुँ......

टका बचल चारि (४)
आहाँक सभ भाई मे बाझल मारिएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल तीन (३)
आहाँ सभ भाई भेलहुँ भीनएक टका तखने देलहुँ .....

टका बचल दू (२)
आहाँ कहलहुँ महादेवक पिड़ी छूएक टका तखने देलहुँ ......

टका बचल एक (१)
आहाँ के बाबूजीक बरखी मे दक्षिणा देलएक टका तखने देलहुँ ......

बाँकी के बचल सुईद आर व्याज
ओहिमे देलहुँ ढाई मोन प्याज ॥"


जय मैथिल , जय मिथिला धाम ,

याद राखु बस अप्पन गाम



मदन कुमार ठाकुर,
कोठिया पट्टीटोला,
झंझारपुर (मधुबनी)
बिहार - ८४७४०४,
मोबाईल +919312460150 ,

गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

अप्रैल,2010 केर पाबनि-तिहार

2 अप्रैल: संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत
5 अप्रैल: शर्करा सप्तमी
6 अप्रैल: कालाष्टमी व्रत
7 अप्रैल: चण्डिका नवमी
11 अप्रैल: प्रदोष व्रत
12 अप्रैल: मासिक शिवरात्रि व्रत
14 अप्रैल: खरमास समाप्त। सतुआइन संक्रान्ति। मेष-संक्रान्ति भोरे 6.57 बजे, पुण्यकाल सूर्योदय सं दुपहर 1.21 बजे तक। हरिद्वार में कल्पवास प्रारंभ। हरिद्वार के महाकुम्भ मे पूर्ण कुम्भयोगक मुख्य स्नान तथा तृतीय (अंतिम) शाही स्नान। चडक पूजा (बंगाल)। सौर नववर्ष प्रारंभ, वैशाखी पर्वोत्सव। स्नान-दान-श्राद्ध केर अमावस्या।
15 अप्रैल: जूडशीतल। मलमास प्रारंभ। बंगाली नववर्ष 1417 प्रारंभ।
18 अप्रैल: वरदविनायक चतुर्थी व्रत।
19 अप्रैल: स्कन्द (कुमार) षष्ठी व्रत। स्वामी कार्तिकेय केर दर्शन-पूजन ।
20 अप्रैल: सूर्य सायन वृष मे भोरे 10.01 बजे। सौर ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ।
22 अप्रैल: श्रीदुर्गाष्टमी व्रत। श्रीअन्नपूर्णाष्टमी व्रत। व्यतिपात महापात देर राति 3.14 सं।
23 अप्रैल: बाबू कुँवर सिंह जयंती। व्यतिपात महापात प्रात: 7.44 तक। कुमार योग अपराह्न 1.52 सं रात्रिपर्यन्त।
25 अप्रैल: षाण्मासिक रविव्रत पूर्ण। पुरुषोत्तमी कमला एकादशी व्रत।
26 अप्रैल: सोम-प्रदोष व्रत
27 अप्रैल: पुरुषोत्तमी पूर्णिमा व्रत, श्रीसत्यनारायण पूजा-कथा
28 अप्रैल: स्नान-दान केर पुरुषोत्तमी पूर्णिमा। तीर्थ अथवा पवित्र नदी सभ में स्नान विशेष पुण्यदायक। हरिद्वार महाकुंभ में स्नान

प्रस्तुतकर्ताक ब्लॉगः स्वास्थ्य-सबके लिए

समय-सालक नव अंक बजार मे

1. कार्टून बाला साहेबक-मन्त्रेश्वर झा
2. के अछि कृषकक मर्मांतक पीड़ा देखनिहार(संपादकीय)
3. किछु जानल किछु सोचल(विभिन्न खबरि पर रिपोर्ट)
4. शहरी सुख सं वंचित किसान-महाकान्त मंडल
5. कांग्रेसक विरूद्ध विपक्षक अभाव-मधुकान्त झा
6. मिथिलांचल राज्य चाही-
7. अम्बेदकर सत्य आ सपना-जयराम यादव
8. मिथिला आ मैथिली-राजनन्दन लाल दास
9. सराप(लघुकथा)-रानी झा
10. अबंड जकां बौआइत(कविता)-डॉ. वीरेन्द्र मल्लिक
11. ग़ज़ल-विजयनाथ झा
12. सवाल जागल अछि(कविता)-मधुकान्त झा
13. एहेन त भेल अछि(कविता)-अंशुमान सत्यकेतु
14. पराकाष्ठा(कथा)-भक्तीश्वर झा सारथी
15. सरकार दर्शन- राजशेखर
16. फगुआ में माछ?किन्नहु नहि !-शिवकुमार नीरव
17. स्वर्गक चुनावी दंगल-ज्योतीरीश्वर झा
18. श्रेष्ठतम मैथिली साहित्यकार-अरविन्द कुमार सिंह झा
19. मैथिली भाषाक विकासक बाधक तत्त्व-डॉ. वीरेन्द्र झा
20. जीवन प्रेमीक देह यात्रा थिक-लतिका

पत्रिका प्राप्ति सम्पर्कः 9899891808

प्रस्तुतकर्ताक ब्लॉगः सा विद्या या विमुक्तये


हम नै ई दुनियाँ कहैया - मदन कुमार ठाकुर


हम नै ई दुनियाँ कहैया

हमरा राज्य में ई सब भेल ,
फल्ला के राज्य में कि सब भेल
फूसी - फटक सब नेता बजैया ,
इलेक्शन बाद फेर के पुझैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

गाम - गाम में मुखिया सरपंच ,
एक दोसरक सब खाइया अंस
ग्राम विकासक काज कहैया ,
अपन रोजी- रोटी के मार्ग बनबैया,
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

बढिक दाही रौदिक अकाली ,
घर- खसि ई सब लोग कहैया
एसडियो -बीडीओ सब के लेखा - जोखा ,
भगवती से सद्दा ईहा मनबैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

हॉस्पिटल चकर सब दिन लगैया ,
बिमारी सबहक खान भेटैया
डाक्टर सब नै नजैर परैया ,
अपन किल्निक सदीखन बैसैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

तिलक द्हेजक जखन बात चलैया ,
लाख डेढ़ लाख से कम नै कहैया
अपना पर जखन विपैत परैया ,
बापरे - बाप कहिय दूर भगैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

साधू – संत के जो बात चलैया ,
लोक -लाज से भीन्ने मरैया
आसन लगा सब भाषण करैया ,
अपन पेट लेल खुद्ये मरैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

चिठ्ठी - पत्री के आब पढ़ेया ,
हेंड सेट से फुर्सत नै भेटैया
खन दरिभंगा , खन मधुबनी ,
अपना में सब लोक बजैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

हाय - हेलो सब लोग बजैया ,
छोरी - छोरा संग नाच करैया
अपना के महान बुझैया ,
अपन मान- सम्मान गम्बैया
हम नै ---- ई दुनियाँ कहैया

शनिवार, 27 मार्च 2010

सत्यानास संग- लग्न



सत्यानास संग- लग्न

अमंगल गुटखा खाद्य्म धुम्रपान अमंगल सर्बब्य्संम
कराग्रे बसती बीडी करमध्य चुरतम,
करमूले श्थितो गुटखा प्रभाते कर दर्शनं


दुर्भाग्वती बीड़ी , कुमारी उर्फ़ सिकरेट देवी
कुपुत्री - श्री तम्बाकू लाल जी ,
एवं श्री मति चिलम देवी ,
निवासी =+++ यमलोक ,
होउस - दुखनगर ,अंतिम इक्छा


संग

मृत्य आत्मा कैंसर कुमार उर्फ़ लाईलाज बाबु ,
कुपुत्र - गुटखा लाल जी एवं श्री मति भंग देवी ,
निवासी - गलत रास्ता ब्यबसनपुर (नसा परदेश)


के अशुभ विवाह तय भेल अछि अन्तह अहि भयानक प्रसंग पर --
काका - गाजा सिंह , काकी- अफीम देवी , बाबा- हुकाराम ,मैया -सुल्फी देवी ,
मामा -चरस राम , मामी - सारवी देवी ,नाना - चाय सिंह , नानी कोफ्फी देवी ,
ताऊ -चुना राम ,फूफ्फा - जर्दा राम ,सन ईहन खास बुजुर्ग सबहक़ उपस्थित में ,
नब दम्पत्ती के अभिशाप करैक हेतु अहाँ सब
सादर आमंत्रित छि ,--------

विवाह समय - अनिशचितकाल
विवाह स्थल -समसान घाट मैरिज होम --
चिन्त्ता भवन ,कष्ट मोहल्ला ,दुर्गात्ति गल्ली ,
दुःख नगर , जिला - परलोक पुर
राज्य - अंतिम धाम पिन -००००००

गुरुवार, 25 मार्च 2010

खतरनाक विवाह



खतरनाक विवाह में अपनेक सब आमंत्रण जुनी होयब -----

हमर ई आशा और अभिलाषा अछि -----

अमंगल विवाह

रविवार, 21 मार्च 2010

स्टार प्लस पर आइ सं सुपरस्टार का जलवा

स्टार प्लस चैनल पर आइ सं "स्टार सिंटा सुपरस्टार का जलवा" नामक कार्यक्रम शुरु भ रहल अछि। ई कार्यक्रम प्रत्येक रविकए राति ९ बजे देख सकब । सिनेमा आ टीवी आर्सिस्ट एसोसिएशन (सिंटा)के स्वर्णजयंती पर बनल एहि कार्यक्रम द्वारा अनुदानस्वरुप सिंटा के सदस्य सभ कें चिकित्सा सेवा, रिहर्सल हॉल्स, प्रिव्यू थियेटर्स इत्यादि लोक-कल्याणकारी सुविधा उपलब्ध करा कए ओकर सभहक व्यक्तिगत आर पेशेवर जीवन कें बेहतर बनाएबाक प्रयास कएल जएतैक। ई शो छह सप्ताह तक चलत आ एहि मे भारतीय सिनेमा कें स्वर्णिम वर्षक झलक फ्लैशबैक में पेश कएल जाएत। कार्यक्रम मे वयोवृद्ध व्यक्तित्व सं ल कए नव खाढी धरिक कलाकारक अभूतपूर्व उपस्थिति देखबाक अवसर भेटत। बच्चन,खान आ कपूर बंधु तं रहबे करताह,आमिर खान सेहो अओताह जे पछिला दस बरख मे टीवी पर हुनक पहिल उपस्थिति हएत। कुल मिलाकए, ई शो हिंदी सिनेमा के बीचक संबंध कें अटूट बनाओत । शो शुरू होमए सं पूर्व,एक समारोह में सलमान खान, सोहैल खान आर मिथुन चक्रवर्ती उपस्थित भेल छलाह । ओहि अवसर पर सलमान खान कहलनि जे ई कार्यक्रम एक नेक काज कें प्रोत्साहित करबाक लेल छैकक जे प्रशंसनीय अछि। एहि शो में अमिताभ बच्चन, आमिर खान, शाहरुख ख़ान, अक्षय कुमार, सलमान खान आदि के शामिल हेबाक संभावना अछि। ठीक एही तरहक एकटा शो "लिफ्ट करा दे" फिलहाल सोनी चैनल पर चलि रहल अछि जे खूब लोकप्रिय भेल अछि।
फिल्म संबंधी आओरो रूचिगर सूचनाक लेल देखूः www.filmcrossword.blogspot.com

शनिवार, 20 मार्च 2010

लोकप्रिय मैथिली MP3 गीत डाउनलोड करू

गीतक लिंक निचा देल अछि!

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  • लोकप्रिय मैथिली होली गीत!डाउनलोड (ZipFile), (Folder)

  • मैथिली चहटगर गीत - Vol - Iडाउनलोड (ZipFile), (Folder)

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  • मैथिली चहटगर गीत - Vol - IIIडाउनलोड (ZipFile), (Folder)

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बुधवार, 10 मार्च 2010

सत्या नास केलक बीमारी - मदन कुमार ठाकुर

(हम आइ एक महिना सँ हॉस्पिटल मे बेड रेस्ट यानी बीमार आवस्था मे छी ! जाहि सँ कतेक फोन, कतेक ई-मेल, कतेको फरमाईस, कतेको मज़बूरी, कतेको तगेदा, कतेको उदासी, कतेको घबराहट, आ बहुतो आर्थिक स्थिति आय हमरा सामने आइब गेल अछि ! जकर उदाहरण हम अपन गाम घर (मैथिली ब्लॉग) पर लs के पाठक गनक समक्ष हाजिर छी !)

यमराजक याद आ संदेश .....
हमरा बीमार अवस्था मे यमराजक संदेश सेहो बुझै मे आबैत छल ! किएकी पुरा एक महिना बिमारी के भs गेल छल ! बिमारी छूटए के नाम नञि लैत छल लागैत छल जे कही अहि बिमारीक कारण हम हुनकर सिकार नञि भs जाय ! यदि एहेंन नौबत आयत तँ हमर घर संसार सभ चौपट भस जायत ! ई बात सोचि - सोचि के हम आर बेसी बिमार पड़ि जाइत छलहुँ !

कम्पनीक तरफ सँ फोन ....
हमरा बिमार अबस्था मे कम्पनीक तरफ से सबसे बेसी फोन आबैत छल जे ... आप को केवल १५ दिन का छुट्टी मिला था ! मगर अब पुरे एक महिना से भी ज्यादा हो गया हैं ! अगर आप इस सप्ताह ड्युटी ज्वाइन नहीं करेगे तो आपको कम्पनी के निष्कासित कर दिया जायेगा .... ई बात फोन से सुइन सुइन के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

बौवा आ बुच्चीक स्कुल सँ नोटिक .....
हमरा बिमार अबस्था मे बौवा आ बुच्चीक स्कुल सँ सेहो नोटिक आइब गेल छल, लिखल छल जे ... आपके लड़के और लड़की की स्कुल फिस और बस फिस पिछले महिने से जमा नहीं हुवा हैं ! जिसके चलते आप के दोनों बच्चो को स्कुल से निकाल दिया जायेगा ! अन्यथा फिस जमा करने का यथा शीघ्र कस्ट करे ... हमर बौवा आ बुच्ची आब कोना स्कुल में पढ़त लागैत अछि जे आब धिया - पुताक जीवन ख़राब भs जायत ई नोटिस पैढ़ - पैढ़ के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

दोकानदार लालाक तगेदा......
हम बिमार अबस्था में (हॉस्पिटल) में रही ताहि समय मे दोकानदार लालाक सेहो तगेदा आबिगेल छल, ओ हमर अर्धांग्नी के कही गेलैन जे ... आपका बहीखाता का हिसाब पिछले महिना से ही बांकी हैं ! आप जब दोनों महीने के रुपैया जमा करायेगे तभी हम आगे से रासन का सामान दे पायेगे अन्यथा दुसरे दूकान दार से संपर्क करे ! ई समाद हमरा कान मे पहुंचल, सोच्लो आब तs हमर घर के चूल्हा सेहो कोना कs जरत ! ई समाद सुनी सुनी के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

गाम - घरक चिठ्ठी आ फोन ....
हम बिमार अबस्था मे (हॉस्पिटल) में रही तान्ही समय मे गाम से सेहो चिठ्ठी आबी गेल छल जाही में लिखल अछि .... जे बोआ अहाँ त देखते आ सूनैते हेब टी।वी यही समाचार मे हे हर साल गाम घर में बैढ़ आबई छैक तहि से धान पान ही हेतै सगे घर सेहो खैस परल अछि यानी गाम मे सभ तरहे बेसाहे चलैत अछि ! बाबु आर माय भैया सभ अहि के आस लगेना बैसल छैथ ! जे दिल्ली सs बौआ कहिया पाई पठेता ! गाम घरक ई चिंता सुनी सुनी आ पैढ़ पैढ़ के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

बैंक से फोन आ ईमेल ....
एतबे नै हमर बीमारीक अबस्था में कतेक बैंक से सेहो फोन आ ईमेल स information के देल गेल छल ! जे अभी तक आप के किसी भी क्रेडिट कार्ड का पेमेंट पिछले दो महीने से नहीं हुवा हैं ! जिस के चलते आप के क्रेडिट कार्ड को स्थाई रूप से बंद कर दिया जायेगा अन्यथा पेमेंट जारी रखे ! बार बार हम ई सोचैत छलो जे आगूक पेमेंट हॉस्पिटलक हम कोना के करब ! ई information पैढ़ पैढ़ के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

LIC कम्पनिक तरफ से नोटिक .......
हमरा बिमारी अबस्था मे LIC के एजेंटक नोटिस सेहो आबिगेल छल कहैत छल जे ठाकुरजी आपके तीनो LIC का किस्त दो दो महिना से पिछे चल रहा हैं ! अगर आप को इस बिच (समय) में कुछ हो गया तो इस का जिम्मेवार LIC कम्पनी नहीं होगा ! अन्यथा तीनो पॉलिसी का पेमेंट जारी रखे ! आप का आभारी LIC एजेंट.... ई LIC के नोटिस देख देख आ सुनी सुनी के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो ! जे हमरा मरलाक बाद हमर परिवारक की गति हेत !

गाम से पाई आबैत छल से भेल चोरी ....
गाम मे जखन सभ के धीरे धीरे पता चललैन जे बौआ एक महिना से हॉस्पिटल मे भरती अछि ! ओकर आर्थिक स्थिति बड ख़राब छैक, त बाबु अपन दुई बिघा खेत कs भरना लगे देलैथ ई सोइच के जे बौआ जखन ठिक भs जेत ते भरना खेत छोरे लेब ! से पाई लs के बाबु आ भैया आबैत छलैथ ! रस्ते में कुनू चोर ट्रेन में हुनकर बेग चोरे लेल्कैन ! ओताही से ओ दुनु आदमी घर वापस चली गेला ! ई खबर जखन सुनलो हम आर बेसी बिमार पैर गेलो !

डॉक्टरक आदेश ....
डॉक्टरक आदेश सेहो भेट गेल छल जे इनका बिमारी का ईलाज हमारे हॉस्पिटल में नहीं हो सकता ! क्योकि हमारे समझ मे यह नहीं आता की इनको बिमारी कौन स हैं ! इसको किसी तांत्रिक जी के पास ले जाए वही इनका कुछ उपचार कर सकेगे ! अन्यथा इनका जान जा सकता हैं ! ई बात हम कान से सुनी सुनी के आर बेसी बिमार भs गेलो जे हमर परिवार, हमर खानदान, हमर समाजक लोक हमरा लेs केs कते कते दर दर भटकत !

गाम से भगतक आगमन .....
गामक लोक के जखन हमर बिमारीक कुन्नु चारा आस नै भेतलैन त तखने हमर बाबु भगत काका के कहलखिन जे दिल्ली मे हमर बौआ बहुत बिमार अछि से अहाँ ओतय चलू ! अहाँ भैरब बाबाक फूल आ बिभुत बौआ के देबैय तहि से हमर बौआ ठिक भs जायत ! भगत काका दिल्ली एलैथ हमरा फूल बिभुत देलैथ तखने से हमर सभ बिमारी धीरे धीरे दूर हुवे लागल ...

अहि दुवारे कहल गेल अछि जे ...
नै वैध डॉक्टरक, भेल भगता के काज !
शहरी रोगी के, भेल गामक इलाज !!
जय मैथिली, जय मिथिला,

लेखक -:

मदन कुमार ठाकुर,
कोठिया पट्टीटोल,
झंझारपुर (मधुबनी)
बिहार - ८४७४०४,
मोबाईल +919312460150 ,
ईमेल - madanjagdamba@rediffmail.com

मंगलवार, 9 मार्च 2010

ग़लती - मदन कुमार ठाकुर

ग़लती भेल आय हमरा से ,
तकर कुनो जबाब नही आय
जकर दुःख -दर्द हम बुझैत छि ,
लोक लाज से भीने मरैय छी
दूर देश के आय पराई त छी
क्याकी .............
ग़लती भेल आय हमरा से ....

छोटका न्नाह बचा संन छेलो ,
गुली डांटा मे समय बीटेलो
बाबू काका डटायत रहीगेल ,
मूर्खख संग मूर्खे भोगेल
मान मे अयल से हम केलो ,
अपन उमर के मोज उरेलो
क्याकी .......
ग़लती भेल आय हमरा से ......

पढ़ाई लेल जे कियो किछ बाजे ,
अपने ही सर पर थापर मारी
मूर्खे अच्छी ई सबटा दुनिया ,
सोचि -सोच्ची हम नही हिया हरी
बाबा -दादा के संपति नही कम ,
उही देख के उमर बितैत अच्छी
क्याकी ..........
ग़लती भेल आय हमरा से ......

टी वी भिसियार देखते देखते ,
गम घर मे घूमते घूमते
नेता सब के भाषण सुन-सुन ,
ग्न्नू झा के कहानि सुनी -सुनी
अपन कपार हम अपने पिटैय छि
क्याकी .........
ग़लती भेल आय हमरा से ........

माय -बाबू के बात नही मानलो ,
सर समाजाक मान नही रखलो
चॉक -चोरहा मे हसी उरबी ,
बारका भैया की सब केलायत
छोट्कि भोजी नहियर ग़मेलायत ,
ई बात सब हम सोचिते राहलो
अपन कपार मे आगी लगेलो
क्याकी............
ग़लती भेल आय हमरा से ........

पढ़ल लिखल छैथ लूटन बाबू ,
की अपन ओ नाम बानेलैथ
ओही से निक अक्वाली भैया ,
महीस चरबैत कोठा बनबेलैथ
फुलबा के अच्छी फुशिक खेती
मुसाए बाबा के फाटल धोती
देखलो गामक ई सब रीत ,
गबैत रहलो इहा हम गीत
क्याकी .............
ग़लती भेल आय हमरा से.........

अपन जीवन के हम की कहू ,
खापैर- बारहैंन से नयन जुरेलो
फIशी चढ़लो हम मरी जायब ,
ज़हरो ख़ाके स्वरगो से एलो
हारल थाकल मिथिला लैब मे बैस्लो ,
ओ -पी जी कहलायत ई की केलों
मिथिला के आहा नाक कटेलो
क्याकी .............
ग़लती भेल आय हमरा से..........

जय मैथिली, जय मिथिला



~: लेखक :~


मदन कुमार ठाकुर
कोठिया , पट्टीटोल ,
भैरव स्थान , झंझारपुर
(मधुबनी)बिहार - ८४७४०४
मो -9312460150

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~: धन्यवाद :~

शुक्रवार, 5 मार्च 2010

मिथिला दर्शन केर मार्च-अप्रील अंक बजार मे

मिथिला दर्शनक नव अंक बजार मे उपलब्ध अछि। एहि अंकक सामग्री पर एक दृष्टिः
1. मानवमुखी विज्ञान(संपादकीय)
2. आखर लेख(एकल नागरिकताक परिप्रेक्ष्य मे भूमिपुत्रवाद पर कार्यकारी संपादकक टिप्पणी)
3. हमरो चाही अप्पन राज्य(मिथिला राज्यक मांग पर जीवकांत,धनाकर ठाकुर,आशीष झा आ विभूति आनंदजी केर टिप्पणी)
4. वैश्विक मंदी,मूल्य वृद्धि आ हम सब-नरेंद्र झा
5. ब्रह्मांड-विमर्श(महाप्रयोगक संदर्भ मे): योगेंद्र पाठक वियोगी
6. जीन परिवर्द्धित भांटा कतेक उपयोगी-विद्यानाथ झा
7. नेपालक डायरी-रामभरोस कापड़ि भ्रमर
8. एकटा बड्ड पुरान गप्प-लिली रे केर उपन्यासक अगिला अंश
9. हमर धरोहर(डॉ. लक्ष्मण झाक 1956 केर व्याख्यान)
10. पैंतालीस मिनट(कथा)-नीता झा
11. जुट्टीवाली देवी(कथा)-ऋषि वशिष्ठ
12. खसैत देवाल(कथा)-कुमार मनोज कश्यप
13. निबंध-कथाःमिथिलेश कुमार झा
14. विवेकानंद ठाकुर, कुमार मनीष अरविन्द,रामपुनीत ठाकुर तरुण, उदय नाथ झा अशोक आ डॉ. ब्रज किशोर वर्मा केर कविता
15. भाषा-टीकाक बहन्ने(विभूति आनंदक पोथी केर समीक्षा)- परमानन्द प्रभाकर
16. बाल-अपराधःकारण आ निराकरण-पन्ना झा
17. रूप-चर्चा
18. भनसा-भातः वीणा झा
19. आधुनिक जीवनक उपसर्गःरीढक दर्द-डॉ. अरविन्द कुमार चौधरी
20. ठंढ आ सर्दी-डॉ. उमाशंकर चौधरी
21. गोनू झा बनाम बंगटा
22. वर्ग पहेली-3
23. नेपाल मे आधुनिक मैथिली नाटकःमोजर देबाक प्रतीक्षा मे-रामभरोस कापड़ि भ्रमर
24. प्रबोध साहित्य सम्मान आ मिथिला सं जुड़ल आन गतिविधि सभ पर संक्षिप्त रिपोर्ट

पत्रिका प्राप्ति सूचनाः09709716464 आ 09811406106


प्रस्तुतकर्ता द्वारा संचालित भाषा,शिक्षा आ रोज़गार विषयक ब्लॉग: www.maithilionline.blogspot.com

मंगलवार, 2 मार्च 2010

आयकर नियम ---



आम आदमी कें नव बजट में आयकर में राहत देल गेल अछि।

आउ,देखैत छी जे कोन तरहें एहि राहत सं हम-अहां प्रभावित हएबः

New IT Slabs / Rates for Individuals
पुरनका दर:

IT Slabs / Rates for Individuals (2009-10):

Up to Rs 1,60,000 ------------------>

No tax / exempt 1,60,001 to 3,00,000---------------> 10%

3,00,001 to 5,00,00----------------> 20%

Above 5,00,000---------------------> 30%

160000 तक केर आय पर --------------> कोनो टैक्स नहि
1,60,001 सं 3,00,000 ---------------> 10%
3,00,001 सं 5,00,00 ----------------> 20%

5,00,000 सं बेसी ---------------------> 30%
नव रेट (2010-11)

New IT Slabs / Rates for Individuals (2010-11):

Up to Rs 1,60,000 ------------------>

No tax / exempt 1,60,001 to 5,00,000---------------> 10%

5,00,001 to 8,00,00----------------> 20%

Above 8,00,000---------------------> 30%

नव रेट (2010-11)
1,60,000 तक --------------> कोनो टैक्स नहि
1,60,001 सं 5,00,000 तक--------------> 10 %
5,00,001 सं 8,00,000 तक--------------> 20 %
8,00,001 सं बेसी --------------> 30 %

मार्च,2010 केर पाबनि-तिहार

1 मार्चः सप्तडोरक बंधन। होली
2 मार्चः चित्रगुप्त पूजन। होली भाई दूज टीका
3 मार्चः गणेश चतुर्थी व्रत
4 मार्चः ईद-ए-मौलाद
5 मार्चः रंगपंचमी
7 मार्चः भानुसप्तमी पर्व(सूर्यग्रहणतुल्य),कालाष्टमी व्रत,अष्टका श्राद्ध
11 मार्चः पापमोचिनी एकादशी व्रत
13 मार्चः शनि प्रदोष व्रत(पुत्र प्राप्ति हेतु)
14 मार्चः खरमास शुरू। मासिक शिवरात्रि व्रत। मीन संक्रांति रात्रि 1030 बजे। पुण्यकाल सायं 4.06 सं सूर्यास्त तक
15 मार्चः स्नान-दान-श्राद्ध केर सोमवती अमावस्या। हरिद्वार मे द्वितीय शाही स्नान। चैत्र संक्रांति प्रारंभ
16 मार्चः चैत्र नवरात्र प्रारंभ। नवपंचांग फल-श्रवण। कलश स्थापना। आरोग्य व्रत। तिलक व्रत। विद्या व्रत । नवसंवत्सरोत्सव
17 मार्चः श्रीरेमन्त पूजन
18 मार्चः गणगौरी तीज व्रतोत्सव। गौरी तृतीया। सौभाग्यसुंदरी व्रत। मनोरथ तृतीया व्रत। सरहुल
19 मार्चः विनायक चतुर्थी व्रत
20 मार्चः नागपंचमी। लक्ष्मीपूजा। अनंतनाग पंचमी। चैती छठि केर खरना
21 मार्चः स्कंद षष्ठी व्रत। चैती छठि केर संझुका अर्घ्य। विल्वाभिमंत्रण षष्ठी। गज पूजा
22 मार्चः वासंतिक दुर्गापूजा प्रारंभ। महासप्तमी व्रत। कालरात्रि सप्तमी।चैती छठि केर प्रातः अर्घ्य
23 मार्चः श्रीदुर्गामहाष्टमी व्रत। हरिद्वार मे मनसा देवी मेला
24 मार्चः श्रीरामनवमी व्रत। अयोध्या परिक्रमा। श्रीदुर्गा महानवमी
25 मार्चः चैत्र विजयादशमी
26 मार्चः कामदा एकादशी व्रत
27 मार्चः शनि प्रदोष व्रत(पुत्र प्राप्ति हेतु)।अनंग त्रयोदशी
28 मार्चः मदनभंजिका चतुर्दशी
29 मार्चः चतुर्दशी। पूर्णिमा व्रत। सत्यनारायण पूजा-कथा
30 मार्चः श्रीहनुमान जयंती। स्नान-दान केर चैत्र पूर्णिमा। मथुरा मे श्रीद्वारकाधीश कें छप्पन भोग। वैशाख स्नान-नियम प्रारंभ
प्रस्तुतकर्ताक ब्लॉगः रूचिकर सूचनाक मंच